Vrat Katha

Devotees worship Lord Vishnu and Goddess Lakshmi on Padmini Ekadashi during Adhik Maas fasting rituals
पद्मिनी एकादशी 2026: कब रखा जाएगा व्रत? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व

Padmini Ekadashi हिंदू धर्म में भगवान Vishnu को समर्पित अत्यंत पुण्यदायी व्रत माना जाता है। यह एकादशी अधिक मास में आती है, इसलिए इसका महत्व सामान्य एकादशी से कई गुना अधिक माना गया है। इसे पुरुषोत्तमी एकादशी और कमला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत और पूजा करने पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है, पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। साल 2026 में अधिक मास के कारण कुल 26 एकादशी पड़ेंगी। लगभग तीन साल बाद आने वाले इस विशेष संयोग में अधिक ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष एकादशी को पद्मिनी एकादशी के रूप में मनाया जाएगा। पद्मिनी एकादशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त एकादशी तिथि प्रारंभ: 26 मई 2026, सुबह 05:10 बजे एकादशी तिथि समाप्त: 27 मई 2026, सुबह 06:21 बजे उदयातिथि के अनुसार व्रत: 27 मई 2026, बुधवार पारण का समय: 28 मई 2026, सुबह 05:25 बजे से 07:56 बजे तक पद्मिनी एकादशी का धार्मिक महत्व धार्मिक ग्रंथों के अनुसार अधिक मास के स्वामी स्वयं भगवान पुरुषोत्तम विष्णु माने जाते हैं। इसलिए इस माह में किए गए जप, तप, दान और पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। Skanda Purana में बताया गया है कि पद्मिनी एकादशी का व्रत करने से मनुष्य को बड़े यज्ञों और कठोर तपस्या के समान पुण्य प्राप्त होता है। यह व्रत संचित पापों का नाश कर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से भगवान विष्णु और माता Lakshmi की पूजा करने से घर में धन, वैभव और खुशहाली बनी रहती है। पद्मिनी एकादशी पूजा विधि ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ या पीले रंग के वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें। भगवान को पीले फूल, चंदन, अक्षत, फल और मिठाई अर्पित करें। भोग में तुलसी दल अवश्य शामिल करें, क्योंकि भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है। शुद्ध घी का दीपक और धूप जलाकर पूजा करें। विष्णु मंत्रों का जाप और पद्मिनी एकादशी व्रत कथा का पाठ करें। अंत में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी की रात जागरण करना भी बेहद शुभ माना जाता है। इस दौरान भजन-कीर्तन, विष्णु सहस्रनाम और भगवान विष्णु के नाम का स्मरण करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। व्रत पारण कैसे करें? द्वादशी तिथि पर शुभ मुहूर्त में ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन और दान-दक्षिणा देने के बाद स्वयं भोजन ग्रहण कर व्रत का पारण करना चाहिए। ऐसा करने से व्रत पूर्ण माना जाता है और शुभ फल की प्राप्ति होती है।  

surbhi मई 20, 2026 0
Jain devotees worshipping during Rohini Vrat with traditional rituals and lamps
मई 2026 में कब रखा जाएगा रोहिणी व्रत? जानें शुभ मुहूर्त, नियम और धार्मिक महत्व

जैन धर्म में रोहिणी व्रत को बेहद पवित्र और फलदायी माना जाता है। यह व्रत भगवान वासुपूज्य की आराधना को समर्पित होता है और मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा तथा आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है। साल 2026 में रोहिणी व्रत 18 मई, सोमवार को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत को करने से जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और मानसिक संतुलन बना रहता है। रोहिणी व्रत 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त रोहिणी व्रत किसी निश्चित तिथि पर नहीं बल्कि रोहिणी नक्षत्र के प्रभाव के अनुसार रखा जाता है। जब सूर्योदय के बाद रोहिणी नक्षत्र विद्यमान रहता है, तब यह व्रत किया जाता है। मुख्य व्रत तिथि: 18 मई 2026, सोमवार रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ: 17 मई 2026, रात 9:43 बजे रोहिणी नक्षत्र समाप्त: 18 मई 2026, शाम 5:55 बजे विशेष पूजा मुहूर्त: सुबह 08:00 बजे से 10:00 बजे तक व्रत पारण का समय: 18 मई को सुबह 11:32 बजे के बाद क्या है रोहिणी व्रत का महत्व? रोहिणी व्रत मुख्य रूप से जैन समुदाय द्वारा रखा जाता है। इस दिन श्रद्धालु उपवास रखते हैं और भगवान वासुपूज्य की पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि यह व्रत आत्मिक शुद्धि, संयम और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देता है। रोहिणी व्रत के प्रमुख नियम यह व्रत लगातार 3, 5 या 7 वर्षों तक किया जाता है। हर महीने रोहिणी नक्षत्र के दिन उपवास रखा जाता है। व्रत के दौरान सात्विक जीवनशैली और धार्मिक नियमों का पालन जरूरी माना जाता है। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद विधि-विधान से ‘उद्यापन’ किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, बिना उद्यापन के लंबे समय तक किए गए व्रत को पूर्ण नहीं माना जाता।  

surbhi मई 16, 2026 0
Lord Shiva during Bhaum Pradosh
आज है भौम प्रदोष व्रत 2026: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

भगवान Shiva को समर्पित भौम प्रदोष व्रत आज, 28 अप्रैल 2026, मंगलवार को रखा जा रहा है। यह व्रत विशेष रूप से मंगल दोष शांति, बाधाओं की समाप्ति और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। भौम प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त काशी पंचांग के अनुसार, प्रदोष काल शाम 6:54 बजे से रात 9:04 बजे तक रहेगा। इस अवधि में की गई पूजा का विशेष महत्व होता है। भौम प्रदोष क्यों है खास? जब प्रदोष व्रत मंगलवार को पड़ता है, तो उसे भौम प्रदोष कहा जाता है। यह दिन विशेष रूप से: मंगल दोष शांति कर्ज मुक्ति विवादों से राहत आत्मविश्वास में वृद्धि नकारात्मक ऊर्जा के नाश के लिए शुभ माना जाता है। पूजा विधि प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थल को स्वच्छ कर शिवलिंग स्थापित करें। जल, दूध और पंचामृत से अभिषेक करें। चंदन, बेलपत्र, फूल और धतूरा अर्पित करें। घी-शक्कर या मिठाई का भोग लगाएं। "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें। Shiv Chalisa का पाठ करें। प्रदोष व्रत कथा सुनें। घी का दीपक जलाकर आरती करें। शाम को प्रदोष काल में पुनः विधिपूर्वक पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। भौम प्रदोष व्रत के लाभ मान्यता है कि इस व्रत से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों को सुख, समृद्धि, मानसिक शांति तथा जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति प्रदान करते हैं।  

surbhi अप्रैल 28, 2026 0
Devotees performing puja of Goddess Sita and Lord Ram with flowers, lamps, and offerings
सीता नवमी 2026 आज: जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और माता जानकी का महत्व

आज मनाई जा रही है सीता नवमी हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर सीता नवमी का पावन पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष यह शुभ अवसर आज, 25 अप्रैल 2026, शनिवार को मनाया जा रहा है। इसे जानकी नवमी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन माता सीता धरती से प्रकट हुई थीं। यह पर्व नारी शक्ति, धैर्य, त्याग और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। सीता नवमी 2026 शुभ मुहूर्त इस वर्ष नवमी तिथि 24 अप्रैल की शाम 7:21 बजे शुरू होकर 25 अप्रैल की शाम 6:27 बजे तक रहेगी। माता सीता की पूजा के लिए मध्याह्न मुहूर्त सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। मध्याह्न पूजा मुहूर्त: सुबह 10:58 बजे से दोपहर 1:34 बजे तक इस दौरान विधि-विधान से पूजा करने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है। ऐसे करें माता सीता की पूजा सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। घर के पूजा स्थल पर लाल या पीले वस्त्र से सजी चौकी पर माता सीता और भगवान श्रीराम की प्रतिमा स्थापित करें। जल से भरा कलश रखें। माता सीता को सिंदूर, अक्षत, फूल, माला और श्रृंगार अर्पित करें। इसके बाद भगवान श्रीराम को चंदन, पुष्प और प्रसाद चढ़ाएं। घी का दीपक जलाकर धूप दिखाएं। सीता चालीसा, व्रत कथा और मंत्रों का पाठ करें। अंत में आरती कर पूजा संपन्न करें। सीता नवमी का धार्मिक महत्व माता सीता को देवी लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। इस दिन व्रत और पूजा करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम बढ़ता है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है। भक्त अपने घर की खुशहाली, संतान सुख और दांपत्य जीवन की मंगलकामना करते हैं। नारी शक्ति की प्रेरणा हैं माता सीता माता सीता का जीवन साहस, आत्मसम्मान और धैर्य की मिसाल है। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी मर्यादा और सिद्धांतों का साथ नहीं छोड़ा। वनवास, रावण द्वारा अपहरण और कठिन परीक्षाओं के बावजूद उन्होंने अद्भुत संयम दिखाया। आत्मनिर्भरता का अद्भुत उदाहरण लव-कुश के पालन-पोषण में माता सीता ने एकल माता के रूप में जो उदाहरण प्रस्तुत किया, वह आज भी महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका जीवन बताता है कि स्त्री हर चुनौती का सामना करने में सक्षम है। सीता नवमी का संदेश सीता नवमी हमें सिखाती है कि सच्ची शक्ति हमारे भीतर होती है। त्याग, धैर्य और आत्मविश्वास से जीवन की हर चुनौती को पार किया जा सकता है। यही माता जानकी का अमर संदेश है।  

surbhi अप्रैल 25, 2026 0
Devotees worshipping Lord Vishnu during Varuthini Ekadashi with lamps and offerings.
Varuthni Ekadashi 2026: सही तिथि, महत्व और राशि अनुसार दान-पुण्य के विशेष उपाय

वैशाख मास को हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है और इसी माह में आने वाली वरुथिनी एकादशी का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पंडित आनंद भारद्वाज के अनुसार, यदि इस दिन राशि अनुसार दान-पुण्य और उपाय किए जाएं तो पूरे वर्ष लक्ष्मी-नारायण की कृपा बनी रहती है। कब है वरुथिनी एकादशी 2026? वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 13 अप्रैल 2026 को रात 1:17 बजे से प्रारंभ होकर 14 अप्रैल 2026 को रात 1:08 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर 13 अप्रैल 2026 (सोमवार) को व्रत रखा जाएगा और पारण 14 अप्रैल को द्वादशी तिथि में किया जाएगा। क्या है इस एकादशी का महत्व? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वरुथिनी एकादशी का व्रत व्यक्ति को पापों से मुक्ति दिलाता है और जीवन में आ रही बाधाओं को दूर करता है। इस दिन किए गए दान-पुण्य का फल कई गुना बढ़कर मिलता है। राशि अनुसार करें ये खास उपाय मेष: भगवान विष्णु को लाल फूल अर्पित करें, जीवन में सुख-शांति बनी रहेगी। वृषभ: सफेद वस्तुओं का भोग लगाएं, भगवान शीघ्र प्रसन्न होंगे। मिथुन: हरे वस्त्र अर्पित करें, हर कार्य में सफलता मिलेगी। कर्क: खीर का भोग लगाएं, रुके हुए कार्य पूरे होंगे। सिंह: पीले वस्त्र अर्पित करें और स्वयं भी धारण करें, विशेष फल मिलेगा। कन्या: सफेद मिठाई और केसर चढ़ाएं, आर्थिक समस्याएं दूर होंगी। तुला: सफेद वस्तुओं का दान करें, वैवाहिक जीवन में मधुरता आएगी। वृश्चिक: गुड़ का दान करें, नौकरी और व्यापार में तरक्की होगी। धनु: पीले वस्त्र, चंदन और फल अर्पित करें, शुभ परिणाम मिलेंगे। मकर: दही और इलायची का भोग लगाएं, मनोकामनाएं पूर्ण होंगी। कुंभ: पीपल के नीचे तिल के तेल का दीपक जलाएं, लक्ष्मी-नारायण की कृपा बनी रहेगी। मीन: गरीबों की सेवा करें और मिश्री का भोग लगाएं, पारिवारिक कलह दूर होगी। वरुथिनी एकादशी केवल व्रत रखने का दिन नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, दान-पुण्य और आध्यात्मिक उन्नति का अवसर है। यदि इस दिन श्रद्धा और राशि अनुसार उपाय किए जाएं, तो जीवन में सकारात्मक परिवर्तन संभव है।  

surbhi अप्रैल 9, 2026 0
Devotee offering water to Moon during Chaitra Purnima under night sky
चैत्र पूर्णिमा 2026: आज चंद्रमा को अर्घ्य, जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र पूर्णिमा का विशेष महत्व है। यह हिंदू नववर्ष की पहली पूर्णिमा मानी जाती है, जिसमें पूजा, व्रत, दान और स्नान का अत्यंत पुण्य फल बताया गया है। इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, चंद्रदेव और हनुमान जी की उपासना की जाती है। इस वर्ष 1 अप्रैल 2026 को व्रत और चंद्र पूजन किया जाएगा, जबकि 2 अप्रैल को स्नान-दान और हनुमान जयंती मनाई जाएगी। तिथि और शुभ मुहूर्त पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 1 अप्रैल 2026, सुबह 07:06 बजे पूर्णिमा तिथि समाप्त: 2 अप्रैल 2026, सुबह 07:41 बजे व्रत और चंद्र अर्घ्य: 1 अप्रैल (संध्या समय) स्नान-दान और हनुमान जयंती: 2 अप्रैल (उदयातिथि के अनुसार) शास्त्रों के अनुसार, जिस दिन पूर्णिमा की तिथि शाम और रात में रहती है, उसी दिन व्रत और चंद्रमा की पूजा करना श्रेष्ठ माना जाता है। चंद्रमा को अर्घ्य देने की विधि चैत्र पूर्णिमा की शाम चंद्रोदय के समय अर्घ्य देना विशेष फलदायी माना जाता है। चांदी या तांबे के पात्र में जल लें उसमें कच्चा दूध, अक्षत (चावल), सफेद फूल और थोड़ी चीनी मिलाएं चंद्रमा को देखते हुए धीरे-धीरे जल अर्पित करें “ॐ सोमाय नमः” मंत्र का जाप करें अंत में हाथ जोड़कर सुख-समृद्धि और मानसिक शांति की कामना करें प्रमुख मंत्र ॐ सोमाय नमः ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः ॐ क्लीं सोम मंत्राय नमः ॐ नमः शशांकशेखराय नियम और सावधानियां तामसिक भोजन से बचें (लहसुन, प्याज, मांस-मदिरा) क्रोध और विवाद से दूर रहें अर्घ्य के बाद सफेद वस्तुओं (चावल, चीनी, दूध, वस्त्र) का दान करें सत्यनारायण कथा का पाठ या श्रवण करें धार्मिक महत्व मान्यता है कि पूर्णिमा की रात चंद्रदेव अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होते हैं। इस दिन अर्घ्य देने से मानसिक शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि प्राप्त होती है। साथ ही, यह दिन आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता को बढ़ाने वाला माना जाता है।  

surbhi अप्रैल 1, 2026 0
Devotees performing Sheetala Ashtami puja with neem leaves and offerings to Goddess Sheetala
Sheetala Ashtami 2026: आज शीतला अष्टमी का पावन व्रत, आरोग्य की देवी माता शीतला की पूजा से मिलता है स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद

  हिंदू धर्म में चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाने वाली शीतला अष्टमी का विशेष धार्मिक महत्व है। इसे कई स्थानों पर बसोड़ा पूजा के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन आरोग्य, सुख-समृद्धि और परिवार की रक्षा की कामना के साथ माता शीतला की पूजा और व्रत के लिए समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से रोग-दोष दूर होते हैं और परिवार को स्वास्थ्य एवं सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार शीतला माता को देवी दुर्गा का ही एक पावन रूप माना जाता है। वे रोगों से रक्षा करने वाली और स्वास्थ्य प्रदान करने वाली देवी के रूप में पूजी जाती हैं। विशेष रूप से चेचक और अन्य संक्रामक रोगों से बचाव के लिए प्राचीन समय से ही शीतला माता की पूजा की जाती रही है।   शीतला अष्टमी व्रत और पूजा विधि शीतला अष्टमी के दिन श्रद्धालुओं को प्रातःकाल जल्दी उठकर ठंडे जल से स्नान करना चाहिए और स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में एक चौकी स्थापित कर उस पर माता शीतला की मूर्ति या चित्र स्थापित किया जाता है। पूजा के दौरान माता को पुष्प, नीम की पत्तियां, हल्दी, चंदन और धूप-दीप अर्पित किए जाते हैं। इसके साथ ही गंगाजल छिड़ककर पूजा स्थल को शुद्ध किया जाता है। शीतला माता को ठंडा और एक दिन पूर्व बनाया गया भोजन विशेष रूप से प्रिय माना जाता है, इसलिए पूजा में मालपुआ, मिठाई, दही, और बासी भोजन (बसोड़ा) का भोग लगाया जाता है। पूजा के बाद भक्तों को शीतला माता की व्रत कथा और स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। इसके साथ ही देवी का ध्यान करते हुए उनके मंत्रों का जप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। अंत में माता की आरती कर पूजा संपन्न की जाती है। पूजा के समापन पर एक लोटे में गंगाजल या शुद्ध जल लेकर उसमें नीम की पत्तियां डालकर घर के सभी कमरों और परिवार के सदस्यों पर छिड़कना चाहिए। ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में स्वास्थ्य तथा सुख-समृद्धि का वातावरण बना रहता है।   शीतला माता के प्रमुख मंत्र पूजा के दौरान माता शीतला के इन मंत्रों का जप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है- ॐ शीतलायै नमः।   ॐ ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः।   शीतले त्वं जगन्माता शीतले त्वं जगत्पिता। शीतले त्वं जगद्धात्री शीतलायै नमो नमः॥   वन्देऽहं शीतलां देवीं रासभस्थां दिगम्बराम्। मार्जनी-कलशोपेतां सूर्पालंकृतमस्तकाम्॥ इन मंत्रों के जप से देवी की कृपा प्राप्त होती है और भक्तों को रोगों से मुक्ति तथा मानसिक शांति का आशीर्वाद मिलता है।   शीतला अष्टमी पर करें ये विशेष उपाय शास्त्रों के अनुसार शीतला माता को शीतल वस्तुएं अत्यंत प्रिय हैं। इसलिए इस दिन ठंडे जल से स्नान करना शुभ माना जाता है। यह परंपरा केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि मौसम के बदलाव के दौरान शरीर के तापमान को संतुलित रखने में यह सहायक होती है। इसके अलावा शीतला अष्टमी की पूजा में हल्दी अर्पित करना भी अत्यंत शुभ माना गया है। पूजा के बाद हल्दी का तिलक स्वयं लगाकर परिवार के अन्य सदस्यों को भी लगाना चाहिए। हिंदू मान्यताओं के अनुसार हल्दी शुद्धता, स्वास्थ्य और रोगों से रक्षा का प्रतीक मानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि जो श्रद्धालु शीतला अष्टमी के दिन सच्चे मन से माता शीतला की पूजा-अर्चना और व्रत करते हैं, उन्हें स्वास्थ्य, समृद्धि और परिवार की सुरक्षा का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यही कारण है कि देश के कई हिस्सों में यह पर्व अत्यंत श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है।

surbhi मार्च 11, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Indian delegation at international cyber security meeting after India assumed CCDB chairmanship role
राष्ट्रीय

भारत को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी, संभाला CCDB के अध्यक्ष का पद

surbhi मई 15, 2026 0