धर्म

Sita Navami 2026 Puja Timings & Significance

सीता नवमी 2026 आज: जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और माता जानकी का महत्व

surbhi अप्रैल 25, 2026 0
Devotees performing puja of Goddess Sita and Lord Ram with flowers, lamps, and offerings
Sita Navami Puja Rituals 2026

आज मनाई जा रही है सीता नवमी

हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर सीता नवमी का पावन पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष यह शुभ अवसर आज, 25 अप्रैल 2026, शनिवार को मनाया जा रहा है। इसे जानकी नवमी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन माता सीता धरती से प्रकट हुई थीं। यह पर्व नारी शक्ति, धैर्य, त्याग और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है।

सीता नवमी 2026 शुभ मुहूर्त

इस वर्ष नवमी तिथि 24 अप्रैल की शाम 7:21 बजे शुरू होकर 25 अप्रैल की शाम 6:27 बजे तक रहेगी। माता सीता की पूजा के लिए मध्याह्न मुहूर्त सबसे श्रेष्ठ माना जाता है।

  • मध्याह्न पूजा मुहूर्त: सुबह 10:58 बजे से दोपहर 1:34 बजे तक

इस दौरान विधि-विधान से पूजा करने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है।

ऐसे करें माता सीता की पूजा

सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। घर के पूजा स्थल पर लाल या पीले वस्त्र से सजी चौकी पर माता सीता और भगवान श्रीराम की प्रतिमा स्थापित करें। जल से भरा कलश रखें।

माता सीता को सिंदूर, अक्षत, फूल, माला और श्रृंगार अर्पित करें। इसके बाद भगवान श्रीराम को चंदन, पुष्प और प्रसाद चढ़ाएं। घी का दीपक जलाकर धूप दिखाएं। सीता चालीसा, व्रत कथा और मंत्रों का पाठ करें। अंत में आरती कर पूजा संपन्न करें।

सीता नवमी का धार्मिक महत्व

माता सीता को देवी लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। इस दिन व्रत और पूजा करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम बढ़ता है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है। भक्त अपने घर की खुशहाली, संतान सुख और दांपत्य जीवन की मंगलकामना करते हैं।

नारी शक्ति की प्रेरणा हैं माता सीता

माता सीता का जीवन साहस, आत्मसम्मान और धैर्य की मिसाल है। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी मर्यादा और सिद्धांतों का साथ नहीं छोड़ा। वनवास, रावण द्वारा अपहरण और कठिन परीक्षाओं के बावजूद उन्होंने अद्भुत संयम दिखाया।

आत्मनिर्भरता का अद्भुत उदाहरण

लव-कुश के पालन-पोषण में माता सीता ने एकल माता के रूप में जो उदाहरण प्रस्तुत किया, वह आज भी महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका जीवन बताता है कि स्त्री हर चुनौती का सामना करने में सक्षम है।

सीता नवमी का संदेश

सीता नवमी हमें सिखाती है कि सच्ची शक्ति हमारे भीतर होती है। त्याग, धैर्य और आत्मविश्वास से जीवन की हर चुनौती को पार किया जा सकता है। यही माता जानकी का अमर संदेश है।


 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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  बगलामुखी जयंती 2026: क्या है खास Baglamukhi Jayanti इस वर्ष 24 अप्रैल को मनाई जाएगी। यह पर्व वैशाख शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को आता है। मां बगलामुखी, दस महाविद्याओं में आठवीं शक्ति मानी जाती हैं और उन्हें ‘पीतांबरा’ के नाम से भी जाना जाता है। उनका स्वरूप बेहद अनोखा है–एक हाथ से वे शत्रु की जीभ पकड़ती हैं और दूसरे हाथ में गदा धारण करती हैं। पौराणिक कथा: जब दुनिया पर आया संकट पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सतयुग में एक भयंकर तूफान ने पूरे ब्रह्मांड को विनाश के कगार पर ला खड़ा किया। देवता भी इस संकट को रोकने में असमर्थ थे। तब Vishnu ने समाधान के लिए तपस्या की। इसी दौरान मदन नाम का एक असुर था, जिसे ‘वाक्-सिद्धि’ का वरदान मिला हुआ था। उसकी वाणी इतनी प्रभावशाली थी कि जो भी वह बोलता, वह सच हो जाता। धीरे-धीरे उसने इस शक्ति का दुरुपयोग करना शुरू कर दिया और अपने शब्दों से विनाश फैलाने लगा। मां बगलामुखी का प्राकट्य भगवान विष्णु की तपस्या से प्रसन्न होकर हरिद्रा सरोवर से दिव्य शक्ति प्रकट हुई–वह थीं Baglamukhi। उनका स्वरूप पीले रंग से आभामय था, इसलिए उन्हें ‘पीतांबरा’ कहा जाता है। जीभ खींचने के पीछे का रहस्य जब मां बगलामुखी का सामना मदन असुर से हुआ, तो वह अपने अहंकार में अपशब्द और विनाशकारी मंत्र बोलने लगा। तभी मां ने अपनी ‘स्तंभन शक्ति’ का उपयोग किया और उसकी जीभ पकड़कर बाहर खींच ली। जैसे ही उसकी जीभ थमी, उसकी वाणी की शक्ति समाप्त हो गई। इस तरह उसकी सबसे बड़ी ताकत निष्क्रिय हो गई और उसका अंत संभव हो सका। क्या है इसका आध्यात्मिक संदेश? मां बगलामुखी द्वारा जीभ खींचने का अर्थ केवल शत्रु को हराना नहीं है, बल्कि यह एक गहरा आध्यात्मिक संकेत भी देता है– वाणी पर नियंत्रण: जीभ हमारे शब्दों और विचारों का प्रतीक है। झूठ और छल का अंत: मां शत्रु की नकारात्मक वाणी को रोकती हैं। आंतरिक शुद्धि: यह अहंकार, क्रोध और नकारात्मक भावनाओं पर नियंत्रण का संदेश देता है। स्तंभन शक्ति: जीवन में बुरी शक्तियों को रोकने और संतुलन बनाए रखने का प्रतीक।   मां बगलामुखी का यह स्वरूप केवल भयावह नहीं, बल्कि अत्यंत गूढ़ और अर्थपूर्ण है। यह हमें सिखाता है कि सही समय पर वाणी और विचारों को नियंत्रित करना ही सबसे बड़ी शक्ति है। उनकी पूजा से न सिर्फ बाहरी शत्रुओं पर विजय मिलती है, बल्कि व्यक्ति अपने अंदर के नकारात्मक भावों पर भी काबू पा सकता है।  

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नई दिल्ली: हिंदू धर्म में भगवान कार्तिकेय (स्कंद) को समर्पित स्कंद षष्ठी का विशेष महत्व है। यह पर्व हर महीने शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है, लेकिन वैशाख मास की स्कंद षष्ठी का महत्व अधिक माना जाता है। साल 2026 में यह पर्व 22 अप्रैल, बुधवार को मनाया जाएगा। तिथि और शुभ मुहूर्त पंचांग के अनुसार: षष्ठी तिथि प्रारंभ: 22 अप्रैल 2026, सुबह 01:21 बजे षष्ठी तिथि समाप्त: 22 अप्रैल 2026, रात 10:47 बजे उदयातिथि के आधार पर व्रत और पूजा: 22 अप्रैल को ही पूजा विधि स्कंद षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा इस प्रकार करें: सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें पूजा स्थान पर भगवान कार्तिकेय की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें साथ में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करना भी शुभ माना जाता है जल, दूध और पंचामृत से अभिषेक करें चंदन, अक्षत, लाल फूल और धूप-दीप अर्पित करें मोर पंख चढ़ाना विशेष फलदायी माना जाता है ‘स्कंद षष्ठी कवच’ का पाठ करें और मंत्र जाप करें अंत में आरती कर प्रसाद वितरित करें स्कंद षष्ठी का महत्व पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान कार्तिकेय ने तारकासुर नामक असुर का वध किया था। इसलिए यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को रखने से: जीवन के कष्ट दूर होते हैं शत्रुओं पर विजय मिलती है आत्मविश्वास और साहस बढ़ता है संतान प्राप्ति की इच्छा पूरी होती है ज्योतिष के अनुसार, जिन लोगों की कुंडली में मंगल दोष होता है, उनके लिए यह व्रत विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।  

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मातंगी जयंती आज: जानें क्या करें और किन गलतियों से बचें, तभी मिलेगी माता की कृपा

Badrinath Temple decorated with flowers during opening of doors for Char Dham Yatra in Uttarakhand

बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल से खुलेंगे, नवंबर तक कर सकेंगे भगवान बद्रीविशाल के दर्शन

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surbhi अप्रैल 18, 2026 0

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