weight loss

Healthy low GI foods including whole grains, lentils, vegetables, fruits, nuts and seeds for blood sugar control
वजन घटाना है या ब्लड शुगर कंट्रोल करना, लो-GI डाइट हो सकती है मददगार; जानें क्या खाएं और कैसे करें शुरुआत

आज के समय में वजन प्रबंधन और ब्लड शुगर कंट्रोल के लिए लो-ग्लाइसेमिक डाइट तेजी से चर्चा में है। इस डाइट में ऐसे खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दी जाती है जो खाने के बाद रक्त में ग्लूकोज का स्तर अपेक्षाकृत धीरे बढ़ाते हैं। इसका उद्देश्य कार्बोहाइड्रेट को पूरी तरह छोड़ना नहीं, बल्कि बेहतर गुणवत्ता वाले कार्बोहाइड्रेट का चुनाव करना है। डायबिटीज, प्रीडायबिटीज और वजन नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए यह खानपान का एक उपयोगी तरीका हो सकता है। हालांकि, इसे किसी बीमारी का इलाज या अकेले वजन घटाने का तरीका नहीं माना जाना चाहिए। लो-ग्लाइसेमिक डाइट क्या है? ग्लाइसेमिक इंडेक्स यानी GI एक माप है, जो बताता है कि किसी कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन के बाद ब्लड ग्लूकोज कितनी तेजी से बढ़ सकता है। आमतौर पर: 55 या उससे कम: लो GI 56 से 69: मीडियम GI 70 या उससे अधिक: हाई GI लो-GI खाद्य पदार्थों में साबुत अनाज, दालें, फलियां, कई सब्जियां, मेवे और कुछ फल शामिल होते हैं। इसके विपरीत रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और अधिक शर्करा वाले खाद्य पदार्थ ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ा सकते हैं। GI और GL में क्या अंतर है? सिर्फ GI देखकर किसी भोजन का प्रभाव समझना हमेशा पर्याप्त नहीं होता। ग्लाइसेमिक लोड यानी GL भोजन के GI के साथ उसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट की मात्रा को भी ध्यान में रखता है। यही वजह है कि किसी भोजन का GI अपेक्षाकृत अधिक होने के बावजूद उसकी सामान्य मात्रा में कुल ग्लाइसेमिक प्रभाव कम हो सकता है। इसलिए भोजन की मात्रा और पूरी प्लेट की संरचना भी महत्वपूर्ण है। ब्लड शुगर पर कैसे पड़ता है असर? लो-GI खाद्य पदार्थ अपेक्षाकृत धीरे पचते हैं और उनमें मौजूद ग्लूकोज धीरे-धीरे रक्त में पहुंचता है। इससे खाने के बाद ब्लड शुगर में अचानक उछाल कम करने में मदद मिल सकती है। कुछ शोधों में लो-GI खानपान को बेहतर ग्लूकोज नियंत्रण और HbA1c में सुधार से जोड़ा गया है। इसका महत्व खासतौर पर टाइप-2 डायबिटीज और प्रीडायबिटीज के संदर्भ में देखा जाता है। क्या वजन घटाने में भी मदद कर सकती है? लो-GI डाइट का एक संभावित फायदा लंबे समय तक पेट भरा महसूस होना हो सकता है। इससे बार-बार स्नैकिंग और अत्यधिक खाने की इच्छा कम करने में मदद मिल सकती है। लेकिन एक बात समझना जरूरी है: लो-GI भोजन खाने मात्र से वजन अपने-आप कम नहीं होता। वजन घटाने के लिए कुल कैलोरी सेवन, पर्याप्त प्रोटीन और फाइबर, शारीरिक गतिविधि तथा नींद जैसी चीजों का भी ध्यान रखना जरूरी है। लो-GI डाइट में क्या खाएं? साबुत अनाज: ओट्स, जौ, क्विनोआ और ब्राउन राइस दालें और फलियां: मसूर, चना, राजमा और लोबिया सब्जियां: पालक, ब्रोकली, भिंडी, लौकी और तोरी फल: सेब, नाशपाती, संतरा और अमरूद मेवे और बीज: बादाम, अखरोट, अलसी और चिया सीड्स इसके साथ भोजन में पर्याप्त प्रोटीन और फाइबर शामिल करना भी महत्वपूर्ण है। सिर्फ GI देखकर भोजन चुनना सही नहीं किसी खाद्य पदार्थ का GI अकेला यह तय नहीं करता कि वह आपके लिए कितना स्वस्थ है। भोजन की मात्रा, उसमें मौजूद फाइबर, प्रोटीन और वसा तथा उसे किस तरह पकाया और खाया जा रहा है, ये सभी कारक महत्वपूर्ण हैं। इसलिए लो-GI डाइट को एक संतुलित खानपान पैटर्न के रूप में देखना बेहतर है, न कि किसी एक फूड लिस्ट के रूप में।  

surbhi अगस्त 17, 2026 0
Matcha green tea in a cup highlighting potential weight management benefits, antioxidants, caffeine and healthy lifestyle choices.
क्या सच में वजन घटाती है माचा चाय? विशेषज्ञ ने बताया कितना सही है यह दावा, जानिए फायदे और सावधानियां

पिछले कुछ वर्षों में माचा चाय को वजन घटाने और मेटाबॉलिज्म बढ़ाने वाली लोकप्रिय पेय के रूप में खूब प्रचार मिला है। सोशल मीडिया पर इसके बारे में कई तरह के दावे किए जाते हैं कि रोजाना माचा चाय पीने से तेजी से वसा कम होती है और वजन घटने लगता है। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार माचा में मौजूद कुछ प्राकृतिक तत्व वजन प्रबंधन में सीमित मदद जरूर कर सकते हैं, लेकिन इसे वजन घटाने का कोई चमत्कारी उपाय मानना सही नहीं होगा। माचा में कैटेचिन, विशेष रूप से ईजीसीजी, कैफीन और एंटीऑक्सीडेंट जैसे यौगिक पाए जाते हैं। ये शरीर की ऊर्जा खपत और वसा के ऑक्सीकरण को कुछ हद तक प्रभावित कर सकते हैं। लेकिन इसका प्रभाव इतना बड़ा नहीं होता कि केवल माचा चाय पीने से वजन में उल्लेखनीय कमी आ जाए। माचा और सामान्य ग्रीन टी में क्या अंतर है? माचा और सामान्य ग्रीन टी दोनों एक ही पौधे कैमेलिया साइनेंसिस से प्राप्त होते हैं, लेकिन इन्हें तैयार करने का तरीका अलग होता है। सामान्य ग्रीन टी में चाय की पत्तियों को गर्म पानी में भिगोया जाता है और बाद में पत्तियों को अलग कर दिया जाता है। वहीं माचा बनाने के लिए विशेष रूप से छाया में उगाई गई चाय की पत्तियों को बारीक पाउडर में पीसा जाता है और उसे सीधे पानी में मिलाकर पिया जाता है। इस वजह से माचा पीने पर पूरी पत्ती का सेवन होता है। इसमें कैटेचिन, ईजीसीजी, कैफीन और अन्य एंटीऑक्सीडेंट अपेक्षाकृत अधिक मात्रा में मिल सकते हैं। यही कारण है कि माचा को सामान्य ग्रीन टी से अलग माना जाता है। हालांकि, पोषक तत्वों की मौजूदगी का मतलब यह नहीं है कि माचा अपने आप तेजी से वजन कम कर सकती है। क्या माचा वास्तव में वजन घटाने में मदद करती है? विशेषज्ञों के मुताबिक माचा वजन प्रबंधन में थोड़ी मदद कर सकती है, लेकिन यह वजन घटाने का शॉर्टकट नहीं है। माचा में मौजूद कैटेचिन और कैफीन शारीरिक गतिविधि के दौरान ऊर्जा खर्च और वसा के ऑक्सीकरण को कुछ हद तक बढ़ा सकते हैं। कुछ अध्ययनों में यह भी संकेत मिला है कि इन तत्वों का सेवन थोड़े समय के लिए मेटाबॉलिज्म को प्रभावित कर सकता है। लेकिन इसका प्रभाव सीमित होता है। केवल माचा चाय पीने से बड़ी मात्रा में वजन कम होने की उम्मीद करना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं है। वजन कम करने के लिए लंबे समय तक संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और कैलोरी की संतुलित कमी जरूरी है। माचा इन स्वस्थ आदतों का हिस्सा हो सकती है, लेकिन उनकी जगह नहीं ले सकती। माचा मेटाबॉलिज्म को कैसे प्रभावित कर सकती है? माचा में मौजूद ईजीसीजी और कैफीन का संयोजन शरीर में ऊर्जा खर्च और व्यायाम के दौरान वसा के इस्तेमाल को कुछ हद तक प्रभावित कर सकता है। कैफीन सतर्कता बढ़ाने में भी मदद कर सकता है, जिससे कुछ लोगों को शारीरिक गतिविधि के दौरान अधिक सक्रिय महसूस हो सकता है। इसके अलावा माचा में एल-थियानाइन नामक अमीनो एसिड भी पाया जाता है। यह कैफीन के प्रभाव को संतुलित करने और अपेक्षाकृत शांत एवं सतर्क महसूस कराने में भूमिका निभा सकता है। हालांकि, शरीर का मेटाबॉलिज्म केवल किसी एक पेय पर निर्भर नहीं करता। उम्र, आनुवंशिकता, मांसपेशियों की मात्रा, हार्मोन, खान-पान और शारीरिक गतिविधि समेत कई कारक इसमें भूमिका निभाते हैं। इसलिए किसी एक पेय से शरीर की कैलोरी खर्च करने की क्षमता में बहुत बड़ा बदलाव आने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। रोजाना कितनी माचा चाय पीना ठीक है? स्वस्थ वयस्कों के लिए सामान्य तौर पर रोजाना एक से दो सर्विंग माचा सीमित मात्रा में लेने का विकल्प हो सकता है। हालांकि, इसमें मौजूद कैफीन की मात्रा को ध्यान में रखना जरूरी है। बहुत ज्यादा माचा लेने से कुछ लोगों को दिल की धड़कन तेज होना, बेचैनी, सिरदर्द, नींद में परेशानी या पाचन संबंधी दिक्कत जैसी समस्याएं हो सकती हैं। गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं, अनियंत्रित उच्च रक्तचाप या हृदय संबंधी समस्या वाले लोगों और कुछ विशेष दवाएं लेने वालों को नियमित रूप से माचा का सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। माचा खरीदते समय उत्पाद की गुणवत्ता और शुद्धता पर भी ध्यान देना चाहिए। अलग-अलग उत्पादों में गुणवत्ता और सामग्री की मात्रा अलग हो सकती है। सिर्फ माचा से नहीं घटेगा वजन माचा को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमियों में से एक यह है कि इसे पीने भर से शरीर की अतिरिक्त चर्बी कम होने लगेगी। ऐसा नहीं है। यदि खान-पान असंतुलित है और शारीरिक गतिविधि बहुत कम है, तो केवल माचा चाय उस कमी की भरपाई नहीं कर सकती। लंबे समय तक स्वस्थ वजन बनाए रखने के लिए संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि जरूरी है। आहार में पर्याप्त प्रोटीन, साबुत अनाज, फल, सब्जियां और स्वस्थ वसा को शामिल करना चाहिए। वहीं अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों और मीठे पेय पदार्थों का सेवन सीमित करना बेहतर है। नियमित एरोबिक गतिविधियों के साथ शक्ति प्रशिक्षण भी वजन प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। बिना चीनी वाली माचा बेहतर विकल्प हो सकती है यदि कोई व्यक्ति मीठे पेय या अधिक कैलोरी वाले पेय की जगह बिना चीनी वाली माचा चाय को अपनी दिनचर्या में शामिल करता है, तो यह स्वस्थ विकल्प हो सकता है। लेकिन माचा को सीधे 'फैट बर्नर' के रूप में देखना सही नहीं होगा। इसे संतुलित आहार और सक्रिय जीवनशैली का एक हिस्सा मानना ज्यादा उचित है।  

surbhi अगस्त 10, 2026 0
Slim person with hidden visceral fat around internal organs facing increased diabetes and blood pressure risks
बाहर से पतले, लेकिन अंदर से मोटे? शरीर में छिपा विसरल फैट बढ़ा सकता है BP और डायबिटीज का खतरा

नई दिल्ली: क्या कोई व्यक्ति बाहर से बिल्कुल पतला और सामान्य दिखने के बावजूद मोटापे से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम में हो सकता है? जवाब है—हां। शरीर का वजन या बाहर दिखाई देने वाली चर्बी हमेशा पूरी तस्वीर नहीं बताती। कुछ लोगों में पेट के अंदर महत्वपूर्ण अंगों के आसपास अतिरिक्त चर्बी जमा हो सकती है, जिसे विसरल फैट कहा जाता है। यह चर्बी त्वचा के ठीक नीचे जमा होने वाली सामान्य चर्बी से अलग होती है। अधिक मात्रा में विसरल फैट शरीर के मेटाबॉलिज्म, इंसुलिन संवेदनशीलता और सूजन से जुड़े बदलावों के साथ जुड़ा हुआ है। यही वजह है कि सामान्य BMI वाले व्यक्ति में भी कमर के आसपास अधिक फैट होने पर स्वास्थ्य जोखिमों का आकलन करना जरूरी हो सकता है। क्या होता है विसरल फैट? शरीर में मौजूद फैट को मोटे तौर पर सबक्यूटेनियस और विसरल फैट में समझा जा सकता है। सबक्यूटेनियस फैट त्वचा के नीचे होती है, इसलिए यह पेट, कमर, हाथ या जांघों पर दिखाई दे सकती है। इसके विपरीत, विसरल फैट पेट की गुहा के अंदर लिवर, आंत और अन्य महत्वपूर्ण अंगों के आसपास जमा होती है। यह बाहर से आसानी से नजर नहीं आती। इसी कारण किसी व्यक्ति का शरीर पतला दिखने के बावजूद उसके शरीर में अंदरूनी फैट अधिक हो सकता है। पतले लोगों में भी क्यों जमा हो सकता है अंदरूनी फैट? विसरल फैट बढ़ने का कारण केवल ज्यादा खाना या अधिक वजन होना नहीं है। इसकी मात्रा पर कई चीजों का प्रभाव पड़ सकता है, जिनमें शामिल हैं: लंबे समय तक शारीरिक गतिविधि की कमी कैलोरी और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन अधिक चीनी और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट लगातार तनाव खराब या अपर्याप्त नींद बढ़ती उम्र हार्मोनल बदलाव आनुवंशिक कारण इसलिए केवल वजन देखकर यह तय करना सही नहीं है कि कोई व्यक्ति मेटाबॉलिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ है। ज्यादा विसरल फैट से किन बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है? 1. टाइप-2 डायबिटीज अधिक विसरल फैट इंसुलिन रेजिस्टेंस से जुड़ा हो सकता है। जब शरीर इंसुलिन का प्रभाव ठीक से इस्तेमाल नहीं कर पाता, तो ब्लड शुगर बढ़ने लगता है। लंबे समय में इससे टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है। 2. हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग अधिक अंदरूनी फैट शरीर में मेटाबॉलिक बदलाव और सूजन से जुड़ा हो सकता है। इससे हाई ब्लड प्रेशर, खराब कोलेस्ट्रॉल और हृदय संबंधी बीमारियों के जोखिम पर असर पड़ सकता है। इसलिए पतला दिखने वाले व्यक्ति को भी अगर पेट के आसपास अतिरिक्त चर्बी है, तो ब्लड प्रेशर और अन्य मेटाबॉलिक स्वास्थ्य संकेतकों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। 3. फैटी लिवर अधिक विसरल फैट का संबंध मेटाबॉलिक डिसफंक्शन और फैटी लिवर से भी हो सकता है। कुछ लोगों में लिवर में अतिरिक्त फैट जमा होने से सूजन और आगे चलकर लिवर को नुकसान पहुंचने का जोखिम बढ़ सकता है। 4. स्लीप एपनिया पेट और शरीर के आसपास अधिक फैट, खासकर मोटापे की स्थिति में, ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया के जोखिम से जुड़ा हो सकता है। इसमें सोते समय सांस बार-बार रुक सकती है, जिससे दिन में थकान, नींद और ध्यान लगाने में परेशानी हो सकती है। 5. कुछ कैंसर का बढ़ा हुआ जोखिम मोटापा और अधिक शरीर में फैट कुछ प्रकार के कैंसर के जोखिम से जुड़े पाए गए हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि विसरल फैट वाले हर व्यक्ति को कैंसर होगा। यह केवल कई संभावित जोखिम कारकों में से एक हो सकता है। विसरल फैट कम कैसे करें? विसरल फैट को कम करने के लिए किसी एक खास डाइट या घरेलू नुस्खे पर निर्भर रहने के बजाय लंबे समय तक टिकने वाली स्वस्थ जीवनशैली अपनाना अधिक महत्वपूर्ण है। संतुलित डाइट अपनाएं सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें, बीन्स और पर्याप्त प्रोटीन को भोजन में शामिल करें। अत्यधिक कैलोरी, मीठे पेय और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम करें। वजन कम करने की जरूरत होने पर बहुत कम कैलोरी वाली क्रैश डाइट अपनाने के बजाय डॉक्टर या योग्य डाइटिशियन की सलाह लेना बेहतर है। नियमित एक्सरसाइज करें तेज चलना, साइकिल चलाना, तैरना, जॉगिंग या अन्य एरोबिक गतिविधियां शरीर की अतिरिक्त चर्बी कम करने में मदद कर सकती हैं। आमतौर पर वयस्कों के लिए सप्ताह में कम से कम 150 मिनट की मध्यम तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि की सलाह दी जाती है। अपनी उम्र और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार व्यायाम का स्तर तय करें। स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को भी जगह दें सिर्फ कार्डियो ही पर्याप्त नहीं है। सप्ताह में कम से कम दो दिन मांसपेशियों को मजबूत करने वाली एक्सरसाइज करना भी फायदेमंद हो सकता है। इसमें वेट ट्रेनिंग, रेजिस्टेंस बैंड या बॉडी-वेट एक्सरसाइज शामिल हो सकती हैं। प्रोटीन और फाइबर का सेवन बढ़ाएं दाल, चना, बीन्स, अंडा, मछली, चिकन, सोया और अन्य पौष्टिक प्रोटीन स्रोत भोजन का हिस्सा बनाए जा सकते हैं। वहीं, सब्जियां, फल, साबुत अनाज और दालों से मिलने वाला फाइबर पेट भरा रखने और संतुलित खानपान बनाए रखने में मदद कर सकता है। चीनी और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड कम करें मीठे पेय, अत्यधिक मिठाइयां, पैकेज्ड स्नैक्स, चिप्स, बिस्कुट और फास्ट फूड का नियमित सेवन कम करना वजन और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य के लिए बेहतर विकल्प है। नींद और तनाव पर ध्यान दें लगातार कम नींद और लंबे समय तक तनाव स्वस्थ वजन बनाए रखने में बाधा डाल सकते हैं। नियमित नींद का समय तय करें और तनाव कम करने के लिए योग, मेडिटेशन, गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज या अन्य स्वस्थ गतिविधियों को दिनचर्या में शामिल करें। सिर्फ पतला दिखना ही पर्याप्त नहीं स्वास्थ्य का आकलन केवल वजन या शरीर के आकार से नहीं किया जा सकता। कमर की परिधि, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल, शारीरिक सक्रियता और पारिवारिक इतिहास जैसे कारक भी महत्वपूर्ण हैं। अगर आपका वजन सामान्य है लेकिन पेट के आसपास चर्बी अधिक है, ब्लड प्रेशर या ब्लड शुगर बढ़ा हुआ है, या परिवार में डायबिटीज और हृदय रोग का इतिहास है, तो नियमित स्वास्थ्य जांच कराना समझदारी है।  

surbhi अगस्त 4, 2026 0
Woman drinking aloe vera juice daily while learning about potential health benefits and safety precautions
30 दिन रोज एलोवेरा जूस पीने से क्या होगा? फायदे से ज्यादा जरूरी है ये सावधानी

एलोवेरा को आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा में लंबे समय से इस्तेमाल किया जाता रहा है। आजकल इसे लेकर सोशल मीडिया और हेल्थ कंटेंट में कई तरह के दावे किए जाते हैं। वजन घटाने से लेकर पाचन सुधारने, त्वचा में निखार लाने और इम्यूनिटी मजबूत करने तक, एलोवेरा जूस को कई फायदे से जोड़ा जाता है। लेकिन सवाल है कि अगर कोई व्यक्ति लगातार 30 दिनों तक रोज एलोवेरा जूस पीता है, तो वास्तव में शरीर पर क्या असर पड़ सकता है? इसका जवाब इतना सीधा नहीं है। एलोवेरा के कुछ मौखिक उपयोगों पर सीमित वैज्ञानिक शोध उपलब्ध है, लेकिन त्वचा चमकाने, शरीर से 'टॉक्सिन' निकालने या तेजी से फैट कम करने जैसे लोकप्रिय दावों के लिए पर्याप्त मजबूत प्रमाण नहीं हैं। इसलिए एलोवेरा जूस को किसी बीमारी का इलाज या वजन घटाने का शॉर्टकट मानना सही नहीं होगा। एलोवेरा जूस में क्या पाया जाता है? एलोवेरा के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग यौगिक पाए जाते हैं। इसके अंदरूनी जेल और पत्ते की बाहरी परत से मिलने वाला लेटेक्स एक जैसे नहीं होते। यही वजह है कि किसी एलोवेरा ड्रिंक की सुरक्षा इस बात पर भी निर्भर करती है कि उसे किस हिस्से से तैयार किया गया है और उसमें एलोइन जैसे एंथ्राक्विनोन यौगिक कितनी मात्रा में मौजूद हैं। NCCIH के अनुसार बाजार में मिलने वाले एलो उत्पादों में जेल, लेटेक्स या पूरे पत्ते के अर्क का इस्तेमाल हो सकता है। इसलिए सिर्फ 'एलोवेरा जूस' लिखा होना उसकी गुणवत्ता और सुरक्षा की गारंटी नहीं है। 30 दिन पीने पर पाचन में क्या असर हो सकता है? कुछ लोगों को एलोवेरा जूस लेने के बाद पाचन बेहतर महसूस हो सकता है। लेकिन इसे कब्ज, गैस या IBS का पक्का इलाज मानने के लिए पर्याप्त विश्वसनीय वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसके उलट, अगर किसी उत्पाद में एलो लेटेक्स मौजूद है, तो पेट में दर्द, ऐंठन और दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए पेट साफ करने के लिए एलोवेरा जूस का ज्यादा सेवन करना उल्टा नुकसान पहुंचा सकता है। क्या एलोवेरा जूस से त्वचा चमक सकती है? एलोवेरा में मौजूद कुछ यौगिकों में एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि देखी गई है। लेकिन रोज एलोवेरा जूस पीने से एक महीने में त्वचा चमकने लगेगी या मुंहासे खत्म हो जाएंगे, ऐसा दावा करने के लिए पर्याप्त मजबूत मानव-आधारित प्रमाण नहीं हैं। एलोवेरा के त्वचा संबंधी संभावित फायदे पर शोध मुख्य रूप से इसके बाहरी इस्तेमाल को लेकर भी हुआ है। इसलिए जूस को 'स्किन ग्लो' का निश्चित उपाय बताना सही नहीं होगा। क्या इम्यूनिटी मजबूत करता है? एलोवेरा में मौजूद कुछ जैव सक्रिय यौगिकों को लेकर रिसर्च जरूर हुई है, लेकिन रोज एलोवेरा जूस पीने से इम्यूनिटी में निश्चित और बड़ा सुधार होगा, यह साबित नहीं हुआ है। इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने के लिए पर्याप्त नींद, संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और आवश्यक टीकाकरण जैसी चीजों की भूमिका कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। क्या वजन तेजी से कम होगा? एलोवेरा जूस को वजन घटाने वाले पेय के तौर पर काफी प्रचारित किया जाता है, लेकिन इसे फैट बर्नर या 'डिटॉक्स ड्रिंक' मानना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं है। कुछ सीमित शोध में खास एलो उत्पादों के सेवन के बाद वजन या फैट मास में मामूली बदलाव देखे गए हैं, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सामान्य एलोवेरा जूस 30 दिनों में वजन तेजी से कम कर देगा। वजन घटाने के लिए कैलोरी संतुलन, पौष्टिक भोजन और नियमित व्यायाम ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। सबसे जरूरी बात: हर एलोवेरा जूस सुरक्षित नहीं एलोवेरा का सेवन करते समय सबसे महत्वपूर्ण बात उत्पाद की गुणवत्ता और उसकी संरचना है। एलो लेटेक्स मुंह से लेने पर दस्त और पेट में ऐंठन पैदा कर सकता है। इसके अलावा, लंबे समय तक कुछ एलो लीफ एक्सट्रैक्ट के सेवन को लिवर की चोट के मामलों से भी जोड़ा गया है। Mayo Clinic भी एलोवेरा को उन हर्बल सप्लीमेंट्स में शामिल करता है जो कुछ परिस्थितियों में लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। गर्भावस्था और दवाइयां लेने वालों को विशेष सावधानी गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान मुंह से एलोवेरा लेना सुरक्षित नहीं माना जाता है और ऐसे समय में डॉक्टर से सलाह जरूरी है। इसी तरह यदि आप नियमित रूप से कोई दवा लेते हैं, तो एलोवेरा जूस या किसी हर्बल सप्लीमेंट को शुरू करने से पहले डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सलाह लेना बेहतर है, क्योंकि हर्बल उत्पाद कुछ दवाओं के साथ इंटरैक्ट कर सकते हैं। तो क्या 30 दिन रोज एलोवेरा जूस पीना चाहिए? सिर्फ 30 दिन लगातार पीने से शरीर 'डिटॉक्स' हो जाएगा, खून साफ हो जाएगा या तेजी से वजन कम हो जाएगा, ऐसा मानना सही नहीं है। कुछ लोगों को सीमित लाभ महसूस हो सकते हैं, लेकिन इसके फायदे व्यक्ति, उत्पाद और उसकी मात्रा पर निर्भर करते हैं। अगर आप एलोवेरा जूस लेना चाहते हैं, तो लेबल पर सामग्री और एलोइन की जानकारी जरूर देखें और बिना सलाह के ज्यादा मात्रा में सेवन न करें। किसी बीमारी का इलाज चल रहा है, गर्भावस्था या स्तनपान की स्थिति है, या नियमित दवाएं चल रही हैं तो पहले डॉक्टर से सलाह लें।  

surbhi अगस्त 3, 2026 0
Person eating dinner late at night with a clock, highlighting the health risks of late-night meals on metabolism and kidney health.
Late Night Dinner Side Effects: देर रात डिनर करने की आदत पड़ सकती है भारी, मेटाबॉलिज्म से लेकर किडनी की सेहत तक पर पड़ सकता है असर

आज की व्यस्त जीवनशैली में देर रात तक काम करना, मोबाइल पर समय बिताना या ओटीटी देखते हुए खाना खाना आम बात हो गई है। ऐसे में कई लोग रात 10–11 बजे या उससे भी देर से डिनर करते हैं। कभी-कभार देर से खाना खाने से आमतौर पर कोई बड़ी समस्या नहीं होती, लेकिन यदि यह रोज़ की आदत बन जाए तो इसका असर शरीर के मेटाबॉलिज्म, ब्लड शुगर नियंत्रण, नींद और लंबे समय में किडनी की सेहत पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर की सर्केडियन रिदम (जैविक घड़ी) दिन और रात के हिसाब से काम करती है। यही कारण है कि रात के समय भोजन को पचाने और ऊर्जा में बदलने की क्षमता दिन की तुलना में कम हो जाती है। देर रात खाना खाने पर शरीर में क्या होता है? स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, दिन के समय शरीर भोजन को बेहतर तरीके से पचाता है और ग्लूकोज का प्रभावी उपयोग करता है। लेकिन रात होते-होते इंसुलिन की संवेदनशीलता (Insulin Sensitivity) कम होने लगती है और मेटाबॉलिज्म भी धीमा पड़ जाता है। ऐसे में यदि देर रात भारी या अधिक कैलोरी वाला भोजन किया जाए, तो शरीर उसे उतनी कुशलता से प्रोसेस नहीं कर पाता। इसका परिणाम यह हो सकता है कि ब्लड शुगर अधिक समय तक बढ़ा रहे और अतिरिक्त कैलोरी शरीर में वसा (Fat) के रूप में जमा होने लगे। मेटाबॉलिज्म पर पड़ सकता है असर 1. ब्लड शुगर नियंत्रण प्रभावित हो सकता है रात के समय शरीर ग्लूकोज को नियंत्रित करने में अपेक्षाकृत कम सक्षम होता है। यदि लगातार देर रात भोजन किया जाए, खासकर रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और अधिक कैलोरी वाला भोजन, तो समय के साथ इंसुलिन रेजिस्टेंस और टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ सकता है। 2. इंसुलिन की कार्यक्षमता कम हो सकती है रात में शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन का स्तर बढ़ता है, जो नींद की तैयारी करता है। इसी दौरान इंसुलिन की प्रभावशीलता कम हो सकती है। ऐसे समय भारी भोजन करने से शरीर को ब्लड शुगर नियंत्रित करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। क्या किडनी पर भी पड़ सकता है प्रभाव? देर रात खाना खाना सीधे तौर पर किडनी की बीमारी का कारण नहीं माना जाता, लेकिन यदि इस आदत की वजह से मोटापा, डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं विकसित होती हैं, तो ये स्थितियां आगे चलकर किडनी पर भी नकारात्मक असर डाल सकती हैं। 1. बढ़ता वजन रात में अतिरिक्त कैलोरी लेने से शरीर अधिक वसा जमा कर सकता है। समय के साथ मोटापा बढ़ने पर किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। 2. डायबिटीज का खतरा यदि लंबे समय तक ब्लड शुगर नियंत्रित न रहे और टाइप-2 डायबिटीज विकसित हो जाए, तो यह किडनी की महीन रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती है। 3. हाई ब्लड प्रेशर अनियमित खानपान और बढ़ता वजन उच्च रक्तचाप का जोखिम भी बढ़ा सकते हैं, जो किडनी रोग के प्रमुख जोखिम कारकों में से एक है। स्वस्थ रहने के लिए क्या करें? रात का भोजन सोने से कम से कम 2–3 घंटे पहले करें। रात में हल्का और संतुलित भोजन चुनें। अधिक तला-भुना और अत्यधिक मीठा भोजन सीमित करें। नियमित समय पर भोजन करने की आदत बनाएं। पर्याप्त नींद लें और रोज़ाना शारीरिक गतिविधि करें।

surbhi जुलाई 27, 2026 0
Healthy weight loss sandwich made with chickpeas, avocado, beetroot, spinach, and multigrain bread.
वजन घटाना हुआ आसान! सैंडविच में जोड़ें ये 4 सुपरफूड्स, घंटों तक नहीं लगेगी भूख

Weight Loss Healthy Sandwich Recipe: अगर आप वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं और बार-बार लगने वाली भूख से परेशान हैं, तो अपनी डाइट में हाई-फाइबर और हाई-प्रोटीन सैंडविच शामिल कर सकते हैं। सही सामग्री से तैयार किया गया सैंडविच लंबे समय तक पेट भरा रखने, अनहेल्दी स्नैकिंग से बचाने और शरीर को जरूरी पोषण देने में मदद कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, फाइबर, प्रोटीन और हेल्दी फैट से भरपूर खाद्य पदार्थ धीरे-धीरे पचते हैं, जिससे लंबे समय तक तृप्ति (Satiety) बनी रहती है। हालांकि, केवल किसी एक रेसिपी से वजन कम नहीं होता। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और कैलोरी नियंत्रण भी उतना ही जरूरी है। वजन घटाने के लिए 4 हेल्दी सैंडविच रेसिपी 1. चना और पालक सैंडविच सामग्री 1 कप उबले हुए चने 1 कप उबला हुआ पालक 1 छोटा चम्मच नींबू का रस काली मिर्च स्वादानुसार नमक 2 स्लाइस मल्टीग्रेन ब्रेड कैसे बनाएं उबले हुए चनों को हल्का मैश करें। इसमें बारीक कटा या उबला हुआ पालक, नींबू का रस, काली मिर्च और थोड़ा नमक मिलाएं। इस मिश्रण को मल्टीग्रेन ब्रेड पर फैलाकर ग्रिल करें। अनुमानित कैलोरी: 260–300 kcal 2. एवोकाडो और चुकंदर सैंडविच सामग्री आधा एवोकाडो ½ कप कद्दूकस किया हुआ चुकंदर काली मिर्च नींबू का रस मल्टीग्रेन ब्रेड कैसे बनाएं एवोकाडो को मैश करें और उसमें चुकंदर, नींबू का रस तथा काली मिर्च मिलाकर ब्रेड पर लगाएं। चाहें तो हल्का टोस्ट कर सकते हैं। अनुमानित कैलोरी: 240–280 kcal   3. चना-एवोकाडो प्रोटीन सैंडविच सामग्री ½ कप मैश किए हुए चने ½ एवोकाडो टमाटर के स्लाइस लेट्यूस या पालक काली मिर्च मल्टीग्रेन ब्रेड कैसे बनाएं चने और एवोकाडो को मिलाकर स्प्रेड तैयार करें। इसमें टमाटर और पालक की लेयर लगाकर सैंडविच तैयार करें। अनुमानित कैलोरी: 290–330 kcal 4. पालक-चुकंदर हेल्दी सैंडविच सामग्री उबला हुआ पालक कद्दूकस किया हुआ चुकंदर दही (लो-फैट) काली मिर्च मल्टीग्रेन ब्रेड कैसे बनाएं लो-फैट दही में पालक और चुकंदर मिलाकर स्टफिंग तैयार करें और ब्रेड में भरकर हल्का टोस्ट करें। अनुमानित कैलोरी: 220–260 kcal इन चीजों से क्या मिलेगा फायदा? चना: प्रोटीन और फाइबर से भरपूर, लंबे समय तक भूख कम महसूस होती है। एवोकाडो: हेल्दी फैट और फाइबर का अच्छा स्रोत। चुकंदर: फाइबर, फोलेट और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर। पालक: आयरन, फाइबर और विटामिन A, C और K का अच्छा स्रोत। वजन घटाने के लिए एक्सपर्ट टिप्स सफेद ब्रेड की जगह मल्टीग्रेन या होल व्हीट ब्रेड चुनें। मेयोनीज की जगह हंग कर्ड या ग्रीक योगर्ट का इस्तेमाल करें। सैंडविच के साथ शुगर युक्त ड्रिंक्स की बजाय छाछ, ग्रीन टी या सादा पानी लें। रोजाना 30–45 मिनट वॉक या एक्सरसाइज करें। कुल कैलोरी सेवन का ध्यान रखें। ध्यान रखें :- यह सैंडविच वजन घटाने वाली संतुलित डाइट का हिस्सा हो सकता है, लेकिन अकेले इसे खाने से वजन कम होने की गारंटी नहीं है। यदि आपको डायबिटीज, किडनी रोग या किसी विशेष स्वास्थ्य समस्या है, तो अपनी डाइट में बदलाव करने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह जरूर लें।

anmol जुलाई 24, 2026 0
Healthy PCOS-friendly breakfast with oats chilla, eggs, chia pudding and moong dal dosa for hormone balance.
PCOS से हैं परेशान? सुबह खाएं ये 4 सुपरफूड ब्रेकफास्ट, हार्मोन और वजन रहेगा कंट्रोल

PCOS Breakfast Ideas: PCOS से जूझ रही महिलाओं के लिए सही नाश्ता दिनभर की ऊर्जा, ब्लड शुगर कंट्रोल और हार्मोनल संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभा सकता है। जानिए 4 आसान, हाई-प्रोटीन और फाइबर से भरपूर ब्रेकफास्ट ऑप्शंस। आज के समय में पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) महिलाओं में तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। इस स्थिति में हार्मोनल असंतुलन, इंसुलिन रेजिस्टेंस, वजन बढ़ना, अनियमित पीरियड्स और बार-बार भूख लगने जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं। हालांकि, संतुलित खानपान और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इन लक्षणों को काफी हद तक मैनेज किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, दिन की शुरुआत ऐसे नाश्ते से करनी चाहिए जिसमें प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैट्स पर्याप्त मात्रा में हों। इससे ब्लड शुगर को स्थिर रखने, लंबे समय तक पेट भरा महसूस कराने और अनहेल्दी क्रेविंग्स को कम करने में मदद मिल सकती है। 1. ओट्स-बेसन चीला अगर आप रोजाना पोहा या सूजी का उपमा खाते हैं, तो उसकी जगह ओट्स और बेसन से बना चीला ट्राई करें। क्यों है फायदेमंद? प्रोटीन और फाइबर से भरपूर लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद ब्लड शुगर तेजी से बढ़ने से बचाने में सहायक कैसे बनाएं? ओट्स का पाउडर, बेसन, प्याज, टमाटर, शिमला मिर्च और हरी मिर्च मिलाकर बैटर तैयार करें। हल्के घी या ऑलिव ऑयल में दोनों तरफ से सेंक लें। अनुमानित पोषण (1 सर्विंग) कैलोरी: 240–270 kcal प्रोटीन: 11–13 ग्राम 2. अंडा भुर्जी और मल्टीग्रेन टोस्ट यदि आप अंडा खाते हैं, तो यह हाई-प्रोटीन नाश्ता बेहतरीन विकल्प हो सकता है। क्यों है फायदेमंद? प्रोटीन और हेल्दी फैट्स का अच्छा स्रोत मांसपेशियों और हार्मोन हेल्थ को सपोर्ट करने में मदद लंबे समय तक एनर्जी बनाए रखने में सहायक कैसे बनाएं? दो अंडों की भुर्जी में प्याज, टमाटर, शिमला मिर्च और हरी सब्जियां मिलाएं। इसे एक स्लाइस मल्टीग्रेन या होल व्हीट टोस्ट के साथ खाएं। अनुमानित पोषण कैलोरी: 300–330 kcal प्रोटीन: 20–22 ग्राम 3. मूंग दाल इडली या डोसा चावल की जगह मूंग दाल से बनी इडली या डोसा बेहतर विकल्प हो सकता है। क्यों है फायदेमंद? कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन से भरपूर इंसुलिन स्पाइक कम करने में मदद पाचन के लिए हल्का कैसे बनाएं? रातभर भिगोई हुई मूंग दाल पीसकर बैटर तैयार करें। इसमें अदरक और हरी मिर्च मिलाकर इडली या डोसा बनाएं। नारियल की चटनी के साथ परोसें। अनुमानित पोषण कैलोरी: 230–260 kcal प्रोटीन: 12–15 ग्राम 4. चिया सीड्स पुडिंग अगर आपको सुबह मीठा खाने की इच्छा होती है, तो यह हेल्दी विकल्प हो सकता है। क्यों है फायदेमंद? ओमेगा-3 और फाइबर से भरपूर सूजन कम करने में सहायक लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद कैसे बनाएं? बादाम या नारियल के दूध में 2–3 चम्मच चिया सीड्स रातभर भिगो दें। सुबह ऊपर से बेरीज, कद्दू के बीज और थोड़ी दालचीनी डालकर खाएं। अनुमानित पोषण कैलोरी: 220–250 kcal प्रोटीन: 8–10 ग्राम PCOS में नाश्ता बनाते समय रखें इन बातों का ध्यान हर नाश्ते में प्रोटीन जरूर शामिल करें। रिफाइंड कार्ब्स और पैकेटबंद फूड्स से दूरी बनाएं। हेल्दी फैट्स जैसे बादाम, अखरोट, अलसी और कद्दू के बीज शामिल करें। पर्याप्त पानी पिएं और नियमित शारीरिक गतिविधि करें। मीठे पेय और अतिरिक्त चीनी का सेवन सीमित रखें। ध्यान दें :- सिर्फ हेल्दी नाश्ता करने से PCOS पूरी तरह ठीक नहीं होता। बेहतर परिणाम के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार भी जरूरी है।

anmol जुलाई 21, 2026 0
Beetroot juice, black coffee, and green tea placed together as healthy drink options for fatty liver support.
Fatty Liver Diet: फैटी लिवर में फायदेमंद हो सकती हैं ये 3 हेल्दी ड्रिंक्स, जानें कब पिएं, हफ्ते में कितनी बार लें और घर पर कैसे करें तैयार

आजकल खराब खानपान, लंबे समय तक बैठे रहने की आदत और बढ़ता मोटापा फैटी लिवर की समस्या को तेजी से बढ़ा रहे हैं। शुरुआती चरण में अक्सर इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन समय रहते खानपान और जीवनशैली में सुधार करके लिवर की सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है। पोषण विशेषज्ञों और वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार कुछ प्राकृतिक पेय पदार्थ ऐसे हैं, जिनमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और पौधों से मिलने वाले पोषक तत्व लिवर में जमा अतिरिक्त फैट, सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में सहायक हो सकते हैं। हालांकि, ये ड्रिंक्स चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं हैं। 1. चुकंदर का जूस घर पर तैयार करने का समय 5–7 मिनट कैसे बनाएं? 1 मध्यम आकार का चुकंदर ½ गाजर (वैकल्पिक) थोड़ा अदरक थोड़ा पानी चाहें तो कुछ बूंदें नींबू की सभी सामग्री को ब्लेंड करके बिना अतिरिक्त चीनी मिलाए ताजा जूस तैयार करें। कब पिएं? सुबह नाश्ते के 30–60 मिनट बाद या मिड-मॉर्निंग। हफ्ते में कितनी बार? 3–4 दिन संभावित फायदे एंटीऑक्सीडेंट्स और नाइट्रेट्स का अच्छा स्रोत ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम करने में मदद लिवर की सामान्य कार्यक्षमता को सपोर्ट कर सकता है सूजन कम करने में सहायक हो सकता है 2. ब्लैक कॉफी (बिना चीनी) तैयार करने का समय 3–5 मिनट कैसे बनाएं? गर्म पानी में कॉफी मिलाएं। अतिरिक्त चीनी, क्रीम या फ्लेवर्ड सिरप से बचें। कब पिएं? सुबह नाश्ते के बाद या दोपहर के भोजन से पहले। हफ्ते में कितनी बार? 5–7 दिन (1–2 कप प्रतिदिन तक) संभावित फायदे लिवर एंजाइम्स को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है। फैटी लिवर के जोखिम को कम करने से जुड़े कई अध्ययन उपलब्ध हैं। लिवर में सूजन कम करने में सहायक हो सकती है। लिवर की सामान्य कार्यक्षमता को सपोर्ट कर सकती है। नोट: उच्च रक्तचाप, गर्भावस्था या कैफीन संवेदनशीलता वाले लोग डॉक्टर से सलाह लें। 3. ग्रीन टी तैयार करने का समय 3–4 मिनट कैसे बनाएं? गर्म (उबलता नहीं) पानी में 2–3 मिनट तक ग्रीन टी बैग या पत्तियां डालें। कब पिएं? दोपहर या शाम के समय भोजन के 1–2 घंटे बाद। हफ्ते में कितनी बार? 5–6 दिन (1–2 कप प्रतिदिन) संभावित फायदे कैटेचिन्स जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स का अच्छा स्रोत लिवर में फैट जमा होने को कम करने में मदद मिल सकती है। सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम करने में सहायक हो सकती है। लिवर की सामान्य कार्यक्षमता को सपोर्ट कर सकती है। केवल ड्रिंक्स से नहीं होगा फायदा अगर फैटी लिवर को बेहतर तरीके से मैनेज करना चाहते हैं, तो इन आदतों को भी अपनाना जरूरी है– ट्रांस फैट और प्रोसेस्ड फूड कम खाएं। मीठे पेय और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट सीमित करें। साबुत अनाज, दालें, फल और हरी सब्जियां बढ़ाएं। रोज 30–45 मिनट शारीरिक गतिविधि करें। पर्याप्त पानी पिएं। वजन नियंत्रित रखें। पर्याप्त नींद लें। ध्यान दें ये ड्रिंक्स फैटी लिवर को मैनेज करने वाली स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा हो सकती हैं, लेकिन ये इलाज का विकल्प नहीं हैं। यदि आपको फैटी लिवर, डायबिटीज, किडनी रोग, लिवर की गंभीर बीमारी या अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो किसी भी नई डाइट या पेय को नियमित रूप से शुरू करने से पहले डॉक्टर या रजिस्टर्ड डाइटिशियन की सलाह अवश्य लें।  

anmol जुलाई 20, 2026 0
Maheep Kapoor shares her Type 1 diabetes journey after sudden 15 kg weight loss and delayed diagnosis.
टाइप 1 डायबिटीज ने घटाया 15 किलो वजन, महीप कपूर ने सुनाई अपनी दर्दभरी कहानी; जानिए क्यों तेजी से कम होने लगता है वेट

नई दिल्ली: अभिनेता अनिल कपूर की भाभी और बिजनेसमैन संजय कपूर की पत्नी महीप कपूर ने पहली बार खुलकर बताया कि कैसे टाइप 1 डायबिटीज की वजह से उनका वजन अचानक 15 किलोग्राम तक कम हो गया और शुरुआत में उन्होंने इसे कोविड-19 का असर समझ लिया। अभिनेत्री सोहा अली खान के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान महीप ने अपनी बीमारी, गलतफहमी और समय पर इलाज न मिलने से जुड़ी पूरी कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि बीमारी का पता चलने से पहले उनका शरीर लगातार संकेत दे रहा था, लेकिन कोविड महामारी के दौरान डॉक्टर के पास जाने से बचने और लक्षणों को वायरस का प्रभाव मान लेने के कारण सही समय पर बीमारी की पहचान नहीं हो सकी। हालात इतने गंभीर हो गए कि एक यात्रा के दौरान दिल्ली पहुंचते ही वह अचानक गिर पड़ीं और उन्हें तुरंत अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा। कोविड का असर समझती रहीं, लेकिन वजह थी डायबिटीज महीप कपूर ने बताया कि डायबिटीज का पता चलने से पहले उन्हें टाइफाइड भी हुआ था। इसके साथ ही उनके पीरियड्स अनियमित होने लगे, वजन तेजी से घटने लगा और उन्हें महसूस हो रहा था कि शरीर पहले जैसा नहीं रहा। उस समय वह पेरीमेनोपॉज के दौर से भी गुजर रही थीं, इसलिए कई बदलाव सामान्य हार्मोनल परिवर्तन जैसे लगे। कोविड-19 संक्रमण के बाद उनका वजन लगभग 15 किलोग्राम कम हो गया। उन्होंने इसे कोविड का साइड इफेक्ट समझ लिया और करीब तीन महीने तक लगातार काम और यात्रा करती रहीं। इस दौरान उनकी वास्तविक बीमारी लगातार बढ़ती रही। दिल्ली पहुंचते ही बिगड़ी तबीयत महीप ने बताया कि लगातार यात्रा के बाद जैसे ही वह दिल्ली पहुंचीं, उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और वह गिर पड़ीं। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाकर आईसीयू में भर्ती किया गया। जांच के बाद डॉक्टरों ने टाइप 1 डायबिटीज की पुष्टि की और इंसुलिन थेरेपी शुरू की। उन्होंने कहा कि अब वह अपनी सेहत को लेकर बेहद सतर्क रहती हैं और नियमित रूप से ब्लड शुगर की जांच करती हैं ताकि किसी भी तरह की जटिलता से बचा जा सके। उन्हें वर्ष 2022 में टाइप 1 डायबिटीज का निदान हुआ था। टाइप 1 डायबिटीज में वजन तेजी से क्यों घटता है? टाइप 1 डायबिटीज में शरीर पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बना पाता। इंसुलिन का काम रक्त में मौजूद ग्लूकोज को कोशिकाओं तक पहुंचाकर उसे ऊर्जा में बदलना होता है। जब इंसुलिन की कमी होती है, तो शरीर ग्लूकोज का उपयोग नहीं कर पाता। ऐसे में शरीर ऊर्जा की जरूरत पूरी करने के लिए फैट और मांसपेशियों को तोड़ना शुरू कर देता है। यही वजह है कि मरीज का वजन तेजी से कम होने लगता है। इसके अलावा, रक्त में बढ़ी हुई शुगर को बाहर निकालने के लिए किडनी अधिक मेहनत करती है, जिससे शरीर की ऊर्जा और तेजी से खर्च होती है। परिणामस्वरूप व्यक्ति में कमजोरी, थकान और तेजी से वजन घटने जैसी समस्याएं दिखाई देने लगती हैं। क्या है टाइप 1 डायबिटीज? टाइप 1 डायबिटीज एक ऑटोइम्यून बीमारी है। इसमें शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से अग्न्याशय (Pancreas) की उन बीटा कोशिकाओं पर हमला कर देता है जो इंसुलिन बनाती हैं। जब ये कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं, तो शरीर में इंसुलिन का उत्पादन लगभग बंद हो जाता है और मरीज को जीवनभर इंसुलिन पर निर्भर रहना पड़ सकता है। क्या केवल बच्चों को होती है टाइप 1 डायबिटीज? आम धारणा है कि टाइप 1 डायबिटीज केवल बच्चों या किशोरों में होती है, लेकिन ऐसा पूरी तरह सही नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस बीमारी के कई मामले वयस्कों में भी सामने आते हैं। कई बार डॉक्टर भी शुरुआती लक्षणों को टाइप 2 डायबिटीज समझ लेते हैं, जिससे सही इलाज में देरी हो सकती है। कुछ मामलों में 70–80 वर्ष की उम्र में भी टाइप 1 डायबिटीज का पता चलता है। किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें? बिना किसी स्पष्ट कारण के तेजी से वजन कम होना बार-बार प्यास लगना बार-बार पेशाब आना अत्यधिक थकान और कमजोरी धुंधला दिखाई देना लगातार भूख लगना यदि ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो तुरंत डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।  

surbhi जुलाई 3, 2026 0
Person performing Navasana yoga pose to strengthen core muscles and improve balance
100 सिट-अप्स से भी ज्यादा असरदार है यह योगासन, पेट की चर्बी घटाने के साथ Cortisol भी करता है कम

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में फिटनेस और मानसिक स्वास्थ्य दोनों ही लोगों की प्राथमिकता बन चुके हैं। ऐसे में योग का एक खास आसन तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, जिसे विशेषज्ञ 100 पारंपरिक सिट-अप्स के बराबर प्रभावी मानते हैं। यह आसन है नौकासन (Navasana) या Boat Pose, जो न केवल पेट और कोर मसल्स को मजबूत बनाता है बल्कि तनाव कम करने और शरीर को संतुलित रखने में भी मदद करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, नौकासन शरीर की गहरी मांसपेशियों पर काम करता है और नियमित अभ्यास से शरीर की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार लाता है। यही कारण है कि इसे योग की सबसे प्रभावशाली कोर-स्ट्रेंथ एक्सरसाइज में गिना जाता है। 100 सिट-अप्स जितना असरदार क्यों माना जाता है नौकासन? अमेरिका की Auburn University at Montgomery द्वारा किए गए एक अध्ययन में नौकासन को योग और पिलेट्स की सबसे प्रभावी कोर एक्सरसाइज में शामिल किया गया। प्रसिद्ध योग शिक्षक Sharath Jois का मानना था कि यदि कोई व्यक्ति इस आसन को 25 गहरी सांसों तक सही तरीके से होल्ड करता है, तो इसका प्रभाव 100 पारंपरिक सिट-अप्स के बराबर हो सकता है। पेट, पीठ और कूल्हों को बनाता है मजबूत योग प्रशिक्षकों के अनुसार, नौकासन केवल एब्स तक सीमित नहीं है। यह पेट की मांसपेशियों, हिप फ्लेक्सर्स, ग्लूट्स, पेल्विक मसल्स और पीठ को भी मजबूत करता है। इस आसन के दौरान कोर को सक्रिय रखने से पेट के अंदरूनी अंगों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे पाचन तंत्र बेहतर काम करता है और मेटाबॉलिज्म को भी समर्थन मिलता है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित अभ्यास पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी कम करने में भी सहायक हो सकता है। तनाव कम करने में भी मददगार नौकासन का फायदा केवल शारीरिक फिटनेस तक सीमित नहीं है। यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है। साल 2023 में जर्नल Biomedicine में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि नियमित योग और ध्यान का अभ्यास करने वाले छात्रों में छह सप्ताह के भीतर कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) का स्तर कम हुआ। नौकासन करते समय संतुलन बनाए रखना, सांसों को नियंत्रित करना और मन को केंद्रित रखना पड़ता है। यही प्रक्रिया तंत्रिका तंत्र को शांत करने और तनाव को नियंत्रित करने में मदद करती है। दिमाग की क्षमता भी बढ़ाता है नौकासन एक ऐसा आसन है जिसमें शरीर को संतुलन और स्थिरता दोनों बनाए रखनी होती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह के बैलेंसिंग अभ्यास मस्तिष्क और शरीर के बीच समन्वय को मजबूत करते हैं। नियमित अभ्यास से एकाग्रता, फोकस और न्यूरोमस्कुलर कनेक्शन बेहतर होता है। यही वजह है कि इसे शरीर और मन दोनों के लिए फायदेमंद माना जाता है। नौकासन करने का सही तरीका जमीन पर सीधे बैठ जाएं और पैरों को सामने फैलाएं। घुटनों को मोड़ें और पैरों को जमीन से ऊपर उठाएं। धीरे-धीरे पैरों को सीधा करके शरीर को V आकार में लाने का प्रयास करें। रीढ़ को सीधा रखें और छाती को खुला रखें। दोनों हाथों को सामने की ओर फैलाएं। नजर हल्की ऊपर रखें और कोर को सक्रिय रखें। 5 से 10 गहरी सांसों तक इस स्थिति में बने रहें। आराम करें और 3 से 5 बार दोहराएं। शुरुआती लोग घुटनों को मोड़कर आसान रूप में भी इसका अभ्यास कर सकते हैं। इन गलतियों से बचें पीठ को गोल कर लेना सांस रोककर रखना कंधों में अनावश्यक तनाव पैदा करना क्षमता से अधिक पैरों को ऊपर उठाने की कोशिश करना विशेषज्ञों का कहना है कि इस आसन में ऊंचाई से ज्यादा स्थिरता महत्वपूर्ण होती है। किन लोगों को नहीं करना चाहिए नौकासन? निम्न समस्याओं से जूझ रहे लोगों को विशेषज्ञ की सलाह के बिना नौकासन नहीं करना चाहिए: कमर की गंभीर चोट हिप फ्लेक्सर स्ट्रेन हर्निया हाल ही में हुई पेट की सर्जरी गर्भावस्था के कुछ चरण

surbhi जून 8, 2026 0
Chia seeds and sabja seeds in bowls highlighting their health benefits for digestion and weight loss
चिया सीड्स या सब्जा के बीज: एसिडिटी, कब्ज और वजन घटाने के लिए कौन है बेहतर?

आजकल हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने वाले लोगों के बीच चिया सीड्स और सब्जा के बीज (तुलसी के बीज) काफी लोकप्रिय हो चुके हैं। दोनों ही फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, लेकिन इनके फायदे और उपयोग अलग-अलग हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि एसिडिटी, कब्ज, वजन घटाने या फिटनेस के लिए आखिर कौन-सा विकल्प ज्यादा बेहतर है? चिया और सब्जा में क्या है अंतर? चिया सीड्स चिया सीड्स Salvia Hispanica पौधे से प्राप्त होते हैं और इनमें भरपूर मात्रा में: ओमेगा-3 फैटी एसिड प्रोटीन कैल्शियम मैग्नीशियम फाइबर पाया जाता है। ये शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा देने और मांसपेशियों व हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। सब्जा सीड्स सब्जा या तुलसी के बीज पारंपरिक भारतीय आहार का हिस्सा रहे हैं। इनमें: भरपूर फाइबर एंटीऑक्सीडेंट कम कैलोरी पाई जाती है। इन्हें विशेष रूप से शरीर को ठंडक पहुंचाने और पाचन तंत्र को बेहतर बनाने के लिए जाना जाता है। एसिडिटी और कब्ज में कौन ज्यादा फायदेमंद? दोनों बीज पानी में भिगोने पर जेल जैसी परत बना लेते हैं, जो पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद करती है। सब्जा सीड्स एसिडिटी, पेट की जलन, गैस और कब्ज से राहत दिलाने के लिए अधिक प्रभावी माने जाते हैं। चिया सीड्स गट हेल्थ सुधारने और पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। अगर आपकी मुख्य समस्या एसिडिटी या कब्ज है, तो सब्जा के बीज बेहतर विकल्प हो सकते हैं। वजन घटाने में कौन मददगार? दोनों ही बीज फाइबर से भरपूर होते हैं, जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है और बार-बार भूख नहीं लगती। चिया सीड्स में प्रोटीन और हेल्दी फैट अधिक होते हैं, जो लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखते हैं। सब्जा सीड्स कम कैलोरी वाले होते हैं, इसलिए कैलोरी कंट्रोल करने वालों के लिए उपयोगी हैं। वजन घटाने के लिए दोनों अच्छे हैं, लेकिन कम कैलोरी डाइट में सब्जा और हाई-प्रोटीन डाइट में चिया अधिक फायदेमंद हो सकता है। शरीर को ठंडक पहुंचाने में कौन आगे? गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने के लिए सब्जा के बीज लंबे समय से इस्तेमाल किए जाते रहे हैं। शरबत, नींबू पानी और फालूदा में सब्जा का उपयोग आम है। शरीर की गर्मी कम करने और हाइड्रेशन बनाए रखने में सब्जा अधिक प्रभावी माना जाता है। फिटनेस और जिम करने वालों के लिए क्या बेहतर? अगर आपका लक्ष्य फिटनेस, मसल रिकवरी और लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखना है, तो: चिया सीड्स में मौजूद प्रोटीन और ओमेगा-3 फैटी एसिड अधिक लाभदायक हैं। नियमित एक्सरसाइज करने वालों के लिए चिया बेहतर विकल्प माना जाता है। सेवन का सही तरीका सब्जा सीड्स 5 से 10 मिनट पानी में भिगोएं। शरबत, दूध, फालूदा या नींबू पानी में मिलाकर सेवन करें। चिया सीड्स कम से कम 30 मिनट पानी में भिगोएं। स्मूदी, दही, ओट्स, सलाद या हेल्दी ड्रिंक्स में मिलाएं।

surbhi जून 5, 2026 0
Woman over 50 performing light exercise and stretching as part of a beginner fitness routine
50 की उम्र के बाद पहली बार एक्सरसाइज़ शुरू करनी है? जानिए महिलाओं के लिए सुरक्षित और असरदार फिटनेस प्लान

अक्सर महिलाएं घर के कामकाज को ही पर्याप्त शारीरिक गतिविधि मान लेती हैं और अपने लिए नियमित व्यायाम का समय नहीं निकाल पातीं। लेकिन 45 से 50 वर्ष की उम्र के बाद शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव, बढ़ता वजन, मांसपेशियों की कमजोरी और मेनोपॉज से जुड़ी समस्याएं यह एहसास दिलाती हैं कि फिट रहने के लिए सिर्फ घरेलू कामकाज पर्याप्त नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर किसी महिला ने कभी नियमित एक्सरसाइज़ नहीं की है, तो 50 की उम्र के आसपास भी इसकी शुरुआत की जा सकती है। हालांकि शुरुआत धीरे-धीरे और सही मार्गदर्शन में करनी चाहिए। इस उम्र में लक्ष्य तेजी से वजन घटाना नहीं, बल्कि शरीर को मजबूत, सक्रिय और लचीला बनाना होना चाहिए। 50 के बाद क्यों जरूरी हो जाती है एक्सरसाइज़? उम्र बढ़ने के साथ शरीर की मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं। नई मसल्स बनने की क्षमता भी कम हो जाती है। वहीं मेनोपॉज के दौरान हार्मोनल बदलावों के कारण वजन बढ़ना, थकान, नींद की समस्या, मूड स्विंग्स और हड्डियों की कमजोरी जैसी परेशानियां बढ़ सकती हैं। नियमित एक्सरसाइज़ से: मांसपेशियां मजबूत होती हैं हड्डियों का स्वास्थ्य बेहतर रहता है वजन नियंत्रित करने में मदद मिलती है ऊर्जा का स्तर बढ़ता है बैलेंस और फ्लेक्सिबिलिटी बेहतर होती है तनाव और चिंता कम हो सकती है नींद की गुणवत्ता में सुधार आता है पहले 2 हफ्ते: धीरे-धीरे शुरुआत करें यदि आपने कभी एक्सरसाइज़ नहीं की है, तो शुरुआत हल्की गतिविधियों से करें। रोजाना 15-20 मिनट वॉक आरामदायक गति से चलें। सांस बहुत ज्यादा नहीं फूलनी चाहिए। धीरे-धीरे चलने की स्पीड बढ़ाएं। पर्याप्त पानी पीते रहें। बैलेंस एक्सरसाइज़ एक पैर पर खड़े होकर संतुलन बनाने की कोशिश करें। शुरुआत 10 सेकंड से करें। धीरे-धीरे इसे 30 सेकंड तक बढ़ाएं। दोनों पैरों से अभ्यास करें। तीसरे से आठवें हफ्ते तक अब वॉक का समय बढ़ाकर कम से कम 30 मिनट कर दें। इसके साथ ये आसान एक्सरसाइज़ शुरू करें: 1. चेयर लेग रेज कुर्सी पर बैठकर एक-एक पैर उठाएं और नीचे रखें। 2. डबल लेग रेज दोनों पैरों को साथ उठाकर नीचे लाएं। 3. आर्म स्ट्रेच और शोल्डर सर्कल हाथ ऊपर उठाकर स्ट्रेच करें और गोल-गोल घुमाएं। 4. वॉल पुश-अप्स दीवार के सहारे पुश-अप्स करें। 5. मार्चिंग एक ही जगह पर खड़े होकर 5 मिनट मार्च करें। 6. बैलेंस ट्रेनिंग एक पैर पर 30 सेकंड तक खड़े रहने का अभ्यास जारी रखें। 8 हफ्तों बाद: फ्लेक्सिबिलिटी और मोबिलिटी पर फोकस जब शरीर एक्टिव महसूस होने लगे तो थोड़ी उन्नत एक्सरसाइज़ जोड़ सकते हैं। लेग लिफ्ट्स साइड लेग मूवमेंट्स दोनों पैरों की कंट्रोल्ड रेज शुरुआती प्लैंक प्लैंक की शुरुआत कुछ सेकंड से करें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएं। 12 हफ्तों बाद: स्ट्रेंथ ट्रेनिंग शामिल करें अब हल्के वजन के डंबल्स का इस्तेमाल शुरू किया जा सकता है। क्या करें? बाइसेप कर्ल ट्राइसेप एक्सटेंशन शोल्डर एक्सरसाइज़ साइड रेज 1 से 3 किलो वजन पर्याप्त होता है। इसके अलावा: 30-45 मिनट डांस वर्कआउट नियमित वॉक बैलेंस ट्रेनिंग जारी रखें डाइट का भी रखें विशेष ध्यान फिटनेस केवल एक्सरसाइज़ से नहीं आती, सही पोषण भी उतना ही जरूरी है। हर मील में प्रोटीन शामिल करें पनीर दाल राजमा छोले दही सोया अंडे मछली या चिकन (यदि नॉनवेज खाती हैं) सुबह की अच्छी शुरुआत भीगे हुए बादाम अखरोट किशमिश टोंड दूध फल और सलाद बढ़ाएं दिन में 1-2 मौसमी फल भरपूर सलाद हरी सब्जियां इन बातों का ध्यान रखें नाश्ते के साथ चाय न पिएं आयरन और कैल्शियम की जांच कराएं विटामिन-D का स्तर जांचें जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लें 50 की उम्र में कितना प्रोटीन जरूरी? विशेषज्ञों के अनुसार: 55 किलो वजन वाली महिला को प्रतिदिन लगभग 55-65 ग्राम प्रोटीन लेना चाहिए। उम्र बढ़ने के साथ प्रोटीन की जरूरत भी बढ़ती है क्योंकि यह मांसपेशियों और हड्डियों की मजबूती बनाए रखने में मदद करता है। कब डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है? यदि आपको इनमें से कोई समस्या है: हाई ब्लड प्रेशर डायबिटीज हार्ट डिजीज घुटनों का गंभीर दर्द कमर दर्द बार-बार चक्कर आना तो एक्सरसाइज़ शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह अवश्य लें। विशेषज्ञों का मानना है कि फिटनेस की शुरुआत करने के लिए कभी देर नहीं होती। 45-50 की उम्र में भी नियमित वॉक, हल्की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और संतुलित आहार अपनाकर महिलाएं अपनी ऊर्जा, ताकत और जीवन की गुणवत्ता में बड़ा सुधार ला सकती हैं।  

surbhi जून 3, 2026 0
Summer fruits like mangoes, watermelon and litchis displayed with healthy eating concept
आम, तरबूज और लीची खाने वालों के लिए जरूरी खबर! डॉक्टर ने बताया कितना फल खाना हो सकता है नुकसानदायक

गर्मियों में ज्यादा फल खाना भी बन सकता है परेशानी गर्मी का मौसम आते ही बाजार आम, तरबूज, लीची और पपीते जैसे फलों से भर जाते हैं। लोग इन्हें हेल्दी मानकर बिना सोचे-समझे खूब खाते हैं। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि जरूरत से ज्यादा फल खाना शरीर के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है, खासकर डायबिटीज, मोटापा और फैटी लिवर से जूझ रहे लोगों के लिए। विशेषज्ञों के मुताबिक फलों में प्राकृतिक शुगर यानी फ्रक्टोज होता है। सीमित मात्रा में यह फायदेमंद है, लेकिन ज्यादा सेवन करने पर यह लिवर पर दबाव बढ़ा सकता है और ब्लड शुगर भी बढ़ा सकता है। आम खाते समय रखें मात्रा का ध्यान आम गर्मियों का सबसे पसंदीदा फल माना जाता है, लेकिन इसमें कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट काफी ज्यादा होते हैं। डॉक्टरों के अनुसार: डायबिटीज वाले लोग एक दिन में आधा मध्यम आकार का आम ही खाएं। सामान्य लोग एक छोटा या मध्यम आकार का आम खा सकते हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि आम को भोजन के तुरंत बाद खाने के बजाय स्नैक की तरह खाएं। इसके साथ दही, पनीर, भुना चना या ड्राई फ्रूट्स लेने से शुगर तेजी से नहीं बढ़ती। मैंगो शेक, आमरस और पैकेज्ड जूस से बचने की सलाह दी गई है। तरबूज ज्यादा खाने से भी बढ़ सकती है शुगर तरबूज में पानी की मात्रा अधिक होती है, इसलिए लोग इसे बड़ी मात्रा में खा लेते हैं। हालांकि यह हल्का फल माना जाता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा सेवन ब्लड शुगर बढ़ा सकता है। डायबिटीज मरीजों के लिए 100-150 ग्राम तरबूज पर्याप्त माना गया है। अन्य लोग करीब 200 ग्राम तक खा सकते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि तरबूज का जूस पीने से बचना चाहिए, क्योंकि उसमें फाइबर कम हो जाता है और शुगर तेजी से शरीर में पहुंचती है। लीची खाते समय बरतें सावधानी लीची स्वादिष्ट जरूर होती है, लेकिन इसमें फ्रक्टोज की मात्रा काफी ज्यादा होती है। विशेषज्ञों के अनुसार: डायबिटीज वाले लोग 3-4 लीची तक सीमित रहें। सामान्य लोग 7-8 लीची खा सकते हैं। डॉक्टरों ने यह भी बताया कि कच्ची लीची खाली पेट खाना बच्चों के लिए खतरनाक हो सकता है। बिहार में पहले भी इससे जुड़ी गंभीर बीमारियों के मामले सामने आ चुके हैं। पपीता और आड़ू बेहतर विकल्प पपीता अपेक्षाकृत हल्का और सुरक्षित फल माना जाता है। डायबिटीज मरीज 100 ग्राम तक पपीता खा सकते हैं। अन्य लोग 150-200 ग्राम तक सेवन कर सकते हैं। वहीं आड़ू और आलूबुखारा जैसे फल भी सीमित मात्रा में अच्छे विकल्प माने जाते हैं। फ्रूट प्लेटर भी बन सकता है खतरा डॉक्टरों का कहना है कि कई लोग एक साथ आम, तरबूज, लीची, खरबूजा और पपीता मिलाकर बड़ा फ्रूट बाउल खा लेते हैं। देखने में यह हेल्दी लगता है, लेकिन इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा काफी ज्यादा हो सकती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि: अलग-अलग फल खाने पर भी कुल मात्रा नियंत्रित रखें। डायबिटीज वाले लोग कुल मिलाकर करीब 100 ग्राम फल ही लें। सामान्य लोग 200 ग्राम तक फल खा सकते हैं। कब खाना चाहिए फल? डॉक्टरों के मुताबिक फल खाने का सही समय भी बेहद महत्वपूर्ण है। फलों को भोजन के बीच में खाना ज्यादा बेहतर माना जाता है। रात में भारी मात्रा में फल खाने से बचना चाहिए। सुबह या दिन में फल खाना शरीर के लिए ज्यादा फायदेमंद रहता है। जूस नहीं, साबुत फल खाएं विशेषज्ञों का कहना है कि ताजे और साबुत फल हमेशा जूस से बेहतर होते हैं। जूस में फाइबर कम हो जाता है और शुगर तेजी से शरीर में पहुंचती है, जिससे ब्लड शुगर अचानक बढ़ सकती है।  

surbhi मई 11, 2026 0
Glass of protein coffee with milk and protein powder blended in fitness lifestyle setting
प्रोटीन कॉफी का बढ़ता ट्रेंड: क्या सच में हेल्दी है ‘प्रोफी’?

आजकल सोशल मीडिया पर “प्रोफी” यानी प्रोटीन कॉफी का ट्रेंड तेजी से वायरल हो रहा है। फिटनेस और हेल्थ को लेकर सजग लोग इसे अपने मॉर्निंग रूटीन में शामिल कर रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि यह आसान ड्रिंक आपके रोजाना के प्रोटीन लक्ष्य को पूरा करने में मदद कर सकती है। लेकिन सवाल यह है–क्या यह सच में फायदेमंद है या सिर्फ एक ट्रेंड? क्या है प्रोटीन कॉफी? प्रोटीन कॉफी यानी “प्रोफी” दरअसल आपकी सामान्य कॉफी में प्रोटीन पाउडर मिलाकर बनाई जाती है। इसे तैयार करने के लिए दूध या प्लांट-बेस्ड मिल्क में प्रोटीन पाउडर मिलाकर कॉफी के साथ ब्लेंड किया जाता है। कई लोग इसे गर्म कॉफी के रूप में पीते हैं, तो कुछ इसे आइस्ड कॉफी के रूप में पसंद करते हैं। क्यों बढ़ रही है इसकी लोकप्रियता? पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, एक वयस्क व्यक्ति को रोजाना अपने वजन के अनुसार 0.8 से 1.5 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती है। लेकिन अधिकतर लोग अपनी जरूरत से कम प्रोटीन लेते हैं। ऐसे में प्रोटीन कॉफी एक आसान विकल्प बनकर उभर रही है, जो बिना ज्यादा मेहनत के सुबह-सुबह अच्छी मात्रा में प्रोटीन दे सकती है। उदाहरण के तौर पर, सामान्य नाश्ते में 2 अंडों से लगभग 14 ग्राम प्रोटीन मिलता है, जबकि प्रोटीन कॉफी के जरिए यह मात्रा 30 ग्राम से अधिक तक पहुंच सकती है। इससे दिन की शुरुआत में ही शरीर को जरूरी पोषण मिल जाता है। क्या हैं इसके फायदे? प्रोटीन कॉफी के कई संभावित फायदे बताए जा रहे हैं– मेटाबॉलिज्म बेहतर करने में मदद मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखने में सहायक लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद वर्कआउट के बाद रिकवरी बेहतर क्रेविंग्स को कम करने में सहायक क्या हैं सावधानियां? हालांकि विशेषज्ञ इस ट्रेंड को पूरी तरह से सही नहीं मानते। उनका कहना है कि प्रोटीन पाउडर एक प्रोसेस्ड फूड है, इसलिए इसे नियमित भोजन का विकल्प नहीं बनाना चाहिए। डायटिशियन सलाह देते हैं कि प्रोटीन का मुख्य स्रोत अंडे, दालें, मांस, मछली और टोफू जैसे प्राकृतिक खाद्य पदार्थ ही होने चाहिए। प्रोटीन कॉफी को केवल सप्लीमेंट या सहायक विकल्प के रूप में ही लेना बेहतर माना जाता है।  

surbhi अप्रैल 24, 2026 0
Doctor consulting patient via telemedicine app discussing diet plan for fatty liver and diabetes management
नई स्टडी में खुलासा: टेलीमेडिसिन से कम हो सकता है फैटी लिवर का खतरा, डायबिटीज मरीजों के लिए उम्मीद की किरण

एक नई स्टडी में सामने आया है कि न्यूट्रिशन आधारित टेलीमेडिसिन मॉडल, टाइप 2 डायबिटीज और मोटापे से जूझ रहे लोगों में लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारी Metabolic dysfunction-associated steatotic liver disease (MASLD) के खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है। MASLD एक ऐसी स्थिति है, जिसमें लिवर में फैट जमा होने लगता है और यह आगे चलकर गंभीर बीमारी Metabolic dysfunction-associated steatohepatitis में बदल सकती है, जिससे मृत्यु और अन्य जटिलताओं का जोखिम बढ़ जाता है। क्यों खतरनाक है MASLD? Type 2 Diabetes और मोटापे से पीड़ित लोगों में MASLD तेजी से बढ़ती समस्या बनती जा रही है। दुनियाभर में इसके मामलों में बढ़ोतरी के कारण डॉक्टर अब ऐसे उपायों की तलाश में हैं, जो आसान, सुलभ और लंबे समय तक असरदार हों। टेलीमेडिसिन से मिला बड़ा फायदा इस स्टडी में 2015 से 2024 के बीच 5,000 से ज्यादा मरीजों पर एक खास टेलीमेडिसिन प्रोग्राम कार्बोहाइड्रेट कम करने पर आधारित न्यूट्रिशन थेरेपी का असर देखा गया। रिसर्च में सामने आया कि: टेलीमेडिसिन अपनाने वाले मरीजों में लिवर रोग का खतरा 36% कम था गंभीर स्थिति (MASH) में जाने का खतरा 62% कम हुआ एडवांस्ड लिवर डिजीज का रिस्क 67% तक घटा लिवर से जुड़ी जटिलताएं 75% तक कम देखी गईं वजन घटाना बना सबसे बड़ा हथियार स्टडी में यह भी पाया गया कि जिन मरीजों ने 15% या उससे ज्यादा वजन कम किया, उनमें लिवर बीमारी का खतरा और भी कम हो गया। यानी डाइट कंट्रोल और वजन घटाना, दोनों मिलकर इस बीमारी के खिलाफ मजबूत सुरक्षा दे सकते हैं। ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के लिए बड़ा समाधान टेलीमेडिसिन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह उन लोगों तक भी पहुंच सकता है, जहां हेल्थकेयर सुविधाएं सीमित हैं। ऐसे में यह मॉडल भविष्य में बड़े स्तर पर लागू किया जा सकता है।  

surbhi अप्रैल 4, 2026 0
Healthy Indian Breakfast Poha vs Paratha comparison
पोहा या परांठा, जानें कौन-सा नाश्ता ज्यादा हेल्दी?

नई दिल्ली,एजेंसियां। सुबह का नाश्ता पूरे दिन की ऊर्जा और सेहत की बुनियाद माना जाता है। भारतीय घरों में पोहा और परांठा दो ऐसे नाश्ते हैं जो सबसे ज्यादा पसंद किए जाते हैं। दोनों ही स्वादिष्ट, जल्दी बनने वाले और अलग-अलग स्वाद के अनुसार तैयार किए जा सकते हैं। लेकिन जब बात हेल्थ की आती है, तो सवाल उठता है पोहा ज्यादा हेल्दी है या परांठा? जवाब पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी जरूरत क्या है और आप उसे किस तरीके से बना रहे हैं।   परांठा: पेट भरने वाला और एनर्जी देने वाला नाश्ता परांठा आमतौर पर गेहूं के आटे से बनता है, जो कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट का अच्छा स्रोत है। इसका मतलब है कि यह शरीर को धीरे-धीरे ऊर्जा देता है और लंबे समय तक भूख नहीं लगने देता। अगर परांठा साबुत आटे से बनाया गया हो, तो इसमें फाइबर भी अच्छी मात्रा में होता है, जो पाचन को बेहतर बनाने और ब्लड शुगर को संतुलित रखने में मदद करता है।   अगर इसमें पनीर, दाल, आलू, गोभी, पालक या मेथी जैसी स्टफिंग डाली जाए, तो यह और ज्यादा पौष्टिक बन सकता है। खासकर पनीर या दाल वाला परांठा प्रोटीन का अच्छा स्रोत माना जाता है। हालांकि, परांठा तभी हेल्दी माना जाएगा जब इसे कम तेल या कम घी में बनाया जाए। मक्खन, अचार या ज्यादा तेल के साथ खाने पर इसकी कैलोरी काफी बढ़ सकती है।   पोहा: हल्का, कम फैट और पचने में आसान दूसरी ओर, पोहा हल्का और आसानी से पचने वाला नाश्ता है। यह चपटे चावल से बनता है और कम समय में तैयार हो जाता है। पोहा खासतौर पर उन लोगों के लिए अच्छा माना जाता है जो सुबह हल्का खाना पसंद करते हैं या वजन कंट्रोल करना चाहते हैं। इसमें कैलोरी और फैट अपेक्षाकृत कम होते हैं, इसलिए यह पेट पर भारी नहीं पड़ता। अगर पोहा में मटर, गाजर, प्याज, टमाटर, मूंगफली, करी पत्ता और नींबू डाला जाए, तो इसकी न्यूट्रिशन वैल्यू और बढ़ जाती है। इसे लोहे की कढ़ाही में बनाने पर इसमें आयरन की मात्रा भी बढ़ सकती है। पोहा शरीर को जरूरी कार्बोहाइड्रेट देता है, लेकिन परांठे की तुलना में यह हल्का महसूस होता है।   आखिर कौन है ज्यादा हेल्दी? अगर आप हल्का, लो-फैट और जल्दी पचने वाला नाश्ता चाहते हैं, तो पोहा बेहतर विकल्प है। वहीं अगर आपको ज्यादा देर तक पेट भरा रखना है, ज्यादा ऊर्जा चाहिए या शारीरिक मेहनत ज्यादा होती है, तो परांठा बेहतर हो सकता है। कुल मिलाकर, दोनों ही हेल्दी हो सकते हैं—बस फर्क इस बात का है कि आप उन्हें किस सामग्री और किस मात्रा में खा रहे हैं।

Unknown अप्रैल 2, 2026 0
Ram Kapoor smiling and showing fitness transformation after losing 55 kg naturally
50 की उम्र में कमाल! Ram Kapoor ने घटाया 55 किलो वजन, बिना सर्जरी बदली जिंदगी

50 की उम्र बनी टर्निंग पॉइंट टीवी और फिल्म इंडस्ट्री के चर्चित अभिनेता Ram Kapoor इन दिनों अपनी जबरदस्त फिटनेस ट्रांसफॉर्मेशन को लेकर सुर्खियों में हैं। उन्होंने महज 18 महीनों में 55 किलो वजन घटाकर सभी को हैरान कर दिया। खास बात यह है कि उन्होंने यह बदलाव बिना किसी सर्जरी या सप्लीमेंट के हासिल किया। अभिनेता के अनुसार, 50 साल की उम्र उनके लिए एक चेतावनी साबित हुई। उस समय उनका वजन करीब 140 किलो था और वे स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याओं से जूझ रहे थे। शूटिंग के दौरान बढ़ा वजन, बिगड़ी सेहत Ram Kapoor ने बताया कि वे अपने करियर के दौरान फिल्मों Neeyat और Jubilee की शूटिंग के वक्त सबसे ज्यादा वजन में थे। उस दौरान उन्हें सांस लेने में दिक्कत होती थी और सामान्य चलना भी मुश्किल हो गया था। उन्होंने खुलासा किया कि उन्हें डायबिटीज थी, पैर में चोट थी और शारीरिक गतिविधियां करना बेहद कठिन हो गया था। यही वह समय था जब उन्होंने अपने जीवन को बदलने का फैसला लिया। परिवार के लिए लिया बड़ा फैसला अभिनेता ने कहा कि उनके दो बच्चे हैं और वे उनके लिए एक बेहतर उदाहरण बनना चाहते थे। यही सोच उनके बदलाव की सबसे बड़ी प्रेरणा बनी। उन्होंने अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी और धीरे-धीरे अपने लाइफस्टाइल को पूरी तरह बदल दिया। बिना सर्जरी अपनाया ‘ओल्ड-स्कूल’ तरीका जहां कई लोग वजन घटाने के लिए सर्जरी या सप्लीमेंट का सहारा लेते हैं, वहीं Ram Kapoor ने पारंपरिक तरीके को चुना। उन्होंने बताया कि यह पूरी तरह से मानसिक और शारीरिक बदलाव का नतीजा है। उनका फोकस इन चीजों पर रहा: संतुलित डाइट नियमित एक्सरसाइज पर्याप्त नींद शरीर को हाइड्रेट रखना फास्टिंग इंटरवल्स का पालन पहले भी घटाया वजन, लेकिन इस बार सोच बदली अभिनेता ने स्वीकार किया कि वे पहले भी दो बार 30 किलो तक वजन घटा चुके थे, लेकिन बाद में फिर बढ़ गया। इस बार उन्होंने जल्दी परिणाम पाने के बजाय स्थायी बदलाव पर ध्यान दिया। उनका मानना है कि फिटनेस सिर्फ वजन कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक जीवनशैली है, जिसमें निरंतर सुधार जरूरी है। मानसिक बदलाव ने दिलाई असली जीत Ram Kapoor ने अपनी मानसिक स्थिति पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि वे खुद से निराश और असंतुष्ट हो गए थे, और यही स्थिति उनके लिए बदलाव की शुरुआत बनी। उन्होंने यह भी कहा कि जब इंसान अपने जीवन के सबसे निचले स्तर पर होता है, तभी असली बदलाव की संभावना पैदा होती है। अब 25 साल जैसा महसूस करते हैं आज अभिनेता खुद को पहले से ज्यादा फिट, ऊर्जावान और खुश महसूस करते हैं। उन्होंने बताया कि अब वे बिना रुके 12 घंटे तक चल सकते हैं, जो पहले उनके लिए असंभव था।  

surbhi मार्च 23, 2026 0
वजन के अनुसार रोज कितना प्रोटीन लेना चाहिए, हेल्थ और फिटनेस गाइड
जाने आपके वजन के हिसाब से कितना प्रोटीन हैं  जरूरी?

नई दिल्ली,एजेंसियां। प्रोटीन हमारे शरीर के लिए सबसे जरूरी पोषक तत्वों में से एक है। यह मांसपेशियों के निर्माण, हार्मोन और एंजाइम के निर्माण के साथ-साथ बाल और त्वचा के स्वास्थ्य के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि उन्हें रोजाना कितनी मात्रा में प्रोटीन लेना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार यह मात्रा व्यक्ति के शरीर के वजन, उम्र और शारीरिक गतिविधियों पर निर्भर करती है।   वजन के अनुसार कितनी होनी चाहिए प्रोटीन की मात्रा पोषण विशेषज्ञों और कई शोधों के अनुसार एक सामान्य वयस्क व्यक्ति को प्रतिदिन अपने शरीर के प्रति किलोग्राम वजन के हिसाब से लगभग 0.8 से 1 ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होती है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी व्यक्ति का वजन 60 किलोग्राम है, तो उसे रोजाना लगभग 48 से 60 ग्राम प्रोटीन का सेवन करना चाहिए। हालांकि यह मात्रा सभी लोगों के लिए एक समान नहीं होती। यदि कोई व्यक्ति शारीरिक रूप से अधिक सक्रिय है या नियमित रूप से व्यायाम करता है, तो उसे सामान्य लोगों की तुलना में ज्यादा प्रोटीन की जरूरत हो सकती है।   एक्सरसाइज करने वालों को ज्यादा प्रोटीन की जरूरत पोषण संबंधी कई अध्ययनों के अनुसार जो लोग नियमित रूप से जिम या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करते हैं, उन्हें मांसपेशियों की मरम्मत और विकास के लिए अधिक प्रोटीन की आवश्यकता होती है। ऐसे लोगों के लिए प्रति किलोग्राम वजन के हिसाब से लगभग 1.2 से 1.7 ग्राम प्रोटीन की जरूरत बताई जाती है।वहीं एथलीट या अत्यधिक शारीरिक गतिविधियों में शामिल लोगों के लिए यह मात्रा 2 ग्राम प्रति किलोग्राम तक हो सकती है, जिससे शरीर के ऊतकों की मरम्मत तेजी से हो सके।   उम्र और विशेष परिस्थितियों में बढ़ जाती है जरूरत बढ़ती उम्र के बच्चों और किशोरों को शरीर के विकास के लिए अधिक प्रोटीन की आवश्यकता होती है। इसके अलावा 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में मांसपेशियों की कमी होने लगती है, इसलिए उन्हें भी पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन लेने की सलाह दी जाती है।गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को सामान्य लोगों की तुलना में प्रतिदिन लगभग 20 से 25 ग्राम अतिरिक्त प्रोटीन की आवश्यकता हो सकती है।   प्रोटीन की कमी और ज्यादा सेवन दोनों नुकसानदायक विशेषज्ञों के अनुसार प्रोटीन की कमी होने पर बाल झड़ना, नाखून कमजोर होना, थकान और बार-बार बीमार पड़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। वहीं जरूरत से ज्यादा प्रोटीन, खासकर सप्लीमेंट्स के रूप में लेने से किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है और शरीर में डिहाइड्रेशन की समस्या भी हो सकती है।   संतुलित आहार है सबसे बेहतर उपाय स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि प्रोटीन के लिए प्राकृतिक खाद्य पदार्थों का सेवन करना सबसे सुरक्षित तरीका है। दालें, पनीर, अंडे, दूध, सोयाबीन और नट्स जैसे खाद्य पदार्थ प्रोटीन के अच्छे स्रोत माने जाते हैं।

Unknown मार्च 14, 2026 0
Woman checking weight on a scale, highlighting fitness and body composition awareness.
क्या वजन मशीन सच बताती है? फिटनेस की असली सच्चाई जानिए

  आज के समय में फिटनेस को अक्सर एक ही चीज़ से मापा जाता है-वजन मशीन पर दिखने वाला नंबर। कई बार एक सप्ताह की छुट्टी, एक भारी भोजन या दिनचर्या में थोड़ा बदलाव भी उस नंबर को बदल देता है और लोगों को लगता है कि उनकी सारी मेहनत बेकार हो गई। यही कारण है कि वजन मशीन का आंकड़ा कई लोगों के आत्मविश्वास और मानसिक स्थिति को प्रभावित करने लगता है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि फिटनेस और स्वास्थ्य को केवल वजन से नहीं आंका जा सकता। असल में शरीर की सेहत कई अन्य कारकों पर निर्भर करती है, जिन्हें समझना अधिक जरूरी है।   वजन ही फिटनेस का सही पैमाना नहीं हमारे शरीर का कुल वजन कई चीजों से मिलकर बना होता है। इसमें हड्डियों का वजन, मांसपेशियां, शरीर में मौजूद वसा, अंग, कोशिकाएं और अन्य ऊतक शामिल होते हैं। इसी वजह से दो अलग-अलग व्यक्ति का वजन समान हो सकता है, लेकिन उनका शरीर पूरी तरह अलग दिख सकता है। उदाहरण के तौर पर एक व्यक्ति के शरीर में मांसपेशियों की मात्रा ज्यादा और वसा कम हो सकती है, जबकि दूसरे व्यक्ति में वसा अधिक और मांसपेशियां कम हो सकती हैं। ऐसे में दोनों का वजन भले ही एक जैसा हो, लेकिन स्वास्थ्य के लिहाज से पहला व्यक्ति ज्यादा फिट माना जाएगा।   मसल्स और बॉडी कंपोजिशन का महत्व जो लोग नियमित व्यायाम करते हैं, उनके शरीर में मांसपेशियां मजबूत होती हैं और हड्डियों की घनत्व भी बेहतर होता है। इससे शरीर कई बीमारियों से बेहतर तरीके से लड़ पाता है। विशेषज्ञों के अनुसार अच्छी बॉडी कंपोजिशन-यानी कम फैट और ज्यादा मसल्स-डायबिटीज, थायरॉयड और हाई ब्लड प्रेशर जैसी पुरानी बीमारियों के खतरे को कम कर सकती है। साथ ही इससे शरीर की फुर्ती, संतुलन और चलने-फिरने की क्षमता भी बेहतर रहती है।   डॉक्टर जब वजन कम करने को कहते हैं, तो उसका मतलब क्या होता है? अक्सर डॉक्टर जब वजन कम करने की सलाह देते हैं, तो उनका मतलब केवल शरीर का कुल वजन कम करना नहीं होता। असल में उनका उद्देश्य शरीर में मौजूद अतिरिक्त वसा को कम करना होता है। इसे फैट लॉस कहा जाता है, जिसे केवल साधारण वजन मशीन से सही तरीके से मापा नहीं जा सकता।   बॉडी कंपोजिशन जांच के विकल्प शरीर की सही संरचना जानने के लिए DEXA (Dual-Energy X-Ray Absorptiometry) स्कैन जैसे टेस्ट किए जाते हैं, जिनसे हड्डियों की घनत्व और शरीर में फैट व मसल्स की मात्रा का सही अनुमान लगाया जा सकता है। हालांकि यह जांच काफी महंगी होती है। इसके अलावा कई फिटनेस सेंटर भी बॉडी कंपोजिशन रिपोर्ट देते हैं, लेकिन ये कई बार बाहरी कारकों पर निर्भर होने के कारण पूरी तरह सटीक नहीं होती।   फिटनेस की असली पहचान क्या है? विशेषज्ञों के अनुसार असली फिटनेस केवल वजन से नहीं बल्कि शरीर की कार्यक्षमता से पहचानी जाती है। यदि आपका शरीर आसानी से सांस लेता है, आप बिना थकान के चल-फिर सकते हैं, व्यायाम के बाद जल्दी रिकवरी हो जाती है और दिल की धड़कन सामान्य रहती है-तो यह स्वस्थ शरीर की निशानी है। इसलिए फिटनेस जर्नी में सबसे महत्वपूर्ण चीज़ है निरंतरता, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम।  

surbhi मार्च 11, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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