अमित शाह

Atal Bihari Vajpayee's Death Anniversary
पीएम मोदी ने अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि, ‘राष्ट्र प्रथम’ के योगदान को किया याद

नई दिल्ली, एजेंसियां। पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की आठवीं पुण्यतिथि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को दिल्ली स्थित ‘सदैव अटल’ स्मृति स्थल पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और कई केंद्रीय मंत्री एवं वरिष्ठ नेताओं ने भी वाजपेयी को श्रद्धासुमन अर्पित किए।   पीएम मोदी ने वाजपेयी के योगदान को किया याद   प्रधानमंत्री मोदी ने वाजपेयी को एक असाधारण राजनेता और अद्वितीय दूरदृष्टि वाला नेता बताते हुए कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्र की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। मोदी ने उनके नेतृत्व, विचारों और सुशासन की विरासत को याद करते हुए कहा कि उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।   ‘सदैव अटल’ पर हुई प्रार्थना सभा   वाजपेयी की पुण्यतिथि के अवसर पर ‘सदैव अटल’ पर विशेष प्रार्थना सभा आयोजित की गई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री मोदी के अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी श्रद्धांजलि दी।   गृह मंत्री अमित शाह ने वाजपेयी के नेतृत्व में पोखरण परमाणु परीक्षण और कारगिल युद्ध के दौरान भारत की मजबूती का उल्लेख किया। उन्होंने वाजपेयी की मूल्य आधारित राजनीति, अंत्योदय और सुशासन की सोच को भी याद किया।   ‘राष्ट्र प्रथम’ था वाजपेयी की राजनीति का आधार   रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि वाजपेयी ने अपने विचारों और कार्यों से भारतीय लोकतंत्र को समृद्ध किया। उनके मुताबिक, ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना वाजपेयी की राजनीति और जनसेवा के केंद्र में रही।   अटल बिहारी वाजपेयी का निधन 16 अगस्त 2018 को हुआ था। वह तीन बार भारत के प्रधानमंत्री रहे और 2015 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

abhishek singh अगस्त 16, 2026 0
केशव प्रसाद मौर्य की अमित शाह के साथ नई दिल्ली में मुलाकात
नई दिल्ली में केशव प्रसाद मौर्य ने अमित शाह से की मुलाकात, यूपी के विकास और राजनीतिक हालात पर चर्चा

नई दिल्ली, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच करीब आधे घंटे तक हुई बैठक में उत्तर प्रदेश से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई।   जनकल्याण और ग्रामीण विकास पर बातचीत     बैठक में उत्तर प्रदेश में चल रही जनकल्याणकारी योजनाओं, ग्रामीण विकास और बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्यों की प्रगति पर चर्चा की गई। राज्य के विकास से जुड़े अन्य मुद्दों को भी केंद्रीय स्तर पर उठाया गया।     यूपी की राजनीतिक स्थिति पर भी चर्चा     सूत्रों के मुताबिक, बैठक में उत्तर प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और बदलते सामाजिक समीकरणों पर भी विचार-विमर्श हुआ। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए प्रदेश की राजनीतिक रणनीति पर भी चर्चा होने की जानकारी सामने आई है।     मुलाकात को लेकर बढ़ी राजनीतिक हलचल     अमित शाह और केशव प्रसाद मौर्य की मुलाकात ऐसे समय हुई है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर गतिविधियां तेज हो रही हैं। हालांकि, दोनों नेताओं की ओर से बैठक के बाद किसी बड़े राजनीतिक फैसले या संगठनात्मक बदलाव की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 14, 2026 0
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा और अमित शाह की मुलाकात
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने अमित शाह से की मुलाकात, राज्य के विकास और केंद्रीय सहयोग पर हुई चर्चा

नई दिल्ली, एजेंसियां। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने 11 अगस्त 2026 को संसद भवन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने त्रिपुरा से जुड़े विकास और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को लेकर केंद्र से सहयोग बढ़ाने की मांग रखी।   विकास परियोजनाओं में तेजी पर जोर     मुलाकात के दौरान त्रिपुरा में चल रही विभिन्न विकास और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की प्रगति पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने परियोजनाओं में आ रही प्रशासनिक अड़चनों को दूर करने और लंबित कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।     केंद्र-राज्य समन्वय मजबूत करने पर चर्चा     बैठक में केंद्र और त्रिपुरा सरकार के बीच बेहतर समन्वय के जरिए राज्य में विकास कार्यों को गति देने पर भी विचार-विमर्श हुआ। हालांकि, मुलाकात के बाद तत्काल किसी नई केंद्रीय मंजूरी या वित्तीय पैकेज की घोषणा की जानकारी सामने नहीं आई है।     त्रिपुरा के लिए अहम समय में हुई मुलाकात     यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब त्रिपुरा में टिपरासा समझौते और जनजातीय क्षेत्रों से जुड़े मुद्दे भी राजनीतिक चर्चा के केंद्र में हैं। TIPRA Motha और भाजपा के बीच आगामी स्थानीय चुनावों को लेकर बातचीत की संभावनाएं भी बनी हुई हैं।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 12, 2026 0
NDA सांसदों का संसद की ओर मार्च और छात्र आंदोलन पर विरोध
NDA सांसदों ने विपक्ष के खिलाफ संसद की ओर किया मार्च, छात्र आंदोलन पर बहस को लेकर टकराव बढ़ा

नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध मंगलवार को और बढ़ गया। NDA सांसदों ने संसद के मकर द्वार की ओर मार्च कर विपक्ष के खिलाफ प्रदर्शन किया। NDA सांसदों ने आरोप लगाया कि विपक्ष झारखंड में छात्रों के आंदोलन और पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर संसद में चर्चा से बच रहा है, जबकि सरकार की ओर से गृह मंत्री अमित शाह के चर्चा में जवाब देने की तैयारी जताई गई है।   ‘मंगल मिलन’ बैठक के बाद निकला मार्च     NDA सांसदों का यह मार्च गठबंधन की साप्ताहिक ‘मंगल मिलन’ बैठक के बाद हुआ। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और NDA के अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए थे।   बैठक के बाद NDA सांसद हाथों में पोस्टर और तख्तियां लेकर संसद की ओर बढ़े। प्रदर्शन के दौरान विपक्ष पर छात्र आंदोलन के मुद्दे पर चर्चा से बचने का आरोप लगाया गया।   विपक्ष पर चर्चा से भागने का आरोप     NDA नेताओं का कहना है कि सरकार संसद में छात्रों के प्रदर्शन और उस दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर चर्चा के लिए तैयार है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी कहा है कि गृह मंत्री अमित शाह इस मुद्दे पर सदन में विस्तृत जवाब देने के लिए तैयार हैं।   NDA सांसदों ने इसी आधार पर विपक्ष से सदन की कार्यवाही चलने देने की मांग की। उनका आरोप है कि विपक्ष लगातार हंगामा करके चर्चा और संसदीय कामकाज को बाधित कर रहा है।   विपक्ष की मांग अलग, संसद में जारी गतिरोध     दूसरी ओर विपक्ष छात्र आंदोलन में पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार से स्पष्ट जवाब मांग रहा है। विपक्षी सांसदों की मांग है कि गृह मंत्री अमित शाह इस मामले पर संसद में बयान दें और पुलिस कार्रवाई से जुड़े सवालों का जवाब दें।   लोकसभा में विपक्षी सांसदों के विरोध के कारण कार्यवाही प्रभावित हुई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी विपक्षी दलों से प्रदर्शन समाप्त कर सदन को सुचारु रूप से चलने देने की अपील की। इसके बावजूद गतिरोध जारी रहा।   संसद के बाहर भी आमने-सामने सत्ता पक्ष और विपक्ष     छात्र आंदोलन का मुद्दा अब संसद के अंदर की राजनीति से निकलकर संसद परिसर के विरोध-प्रदर्शन तक पहुंच गया है। एक ओर NDA सांसद विपक्ष पर चर्चा से बचने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं विपक्ष पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहा है।   ऐसे में मानसून सत्र के दौरान आने वाले दिनों में भी छात्र आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और संसद में चर्चा को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव जारी रहने के आसार हैं।

ranjan kumar tiwari अगस्त 11, 2026 0
NDA की मंगल मिलन बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और NDA सांसद
NDA की ‘मंगल मिलन’ बैठक में PM मोदी समेत NDA सांसद जुटे, तिरंगा लहराकर लगाए ‘वंदे मातरम्’ के नारे

नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के मानसून सत्र के बीच मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की साप्ताहिक ‘मंगल मिलन’ बैठक आयोजित हुई। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और NDA के कई सांसद शामिल हुए। बैठक के दौरान सांसदों ने तिरंगा लहराया और ‘वंदे मातरम्’ के नारे लगाए।   संसद में जारी गतिरोध के बीच हुई बैठक     NDA की यह बैठक ऐसे समय हुई है जब संसद के मानसून सत्र में कई मुद्दों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव जारी है। ऐसे में ‘मंगल मिलन’ बैठक को NDA सांसदों के बीच समन्वय और आगामी संसदीय रणनीति पर चर्चा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।   बैठक में सांसदों के बीच संसद की कार्यवाही को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने और सरकार के विधायी एजेंडे को लेकर चर्चा होने की संभावना रही।   PM मोदी और वरिष्ठ नेता हुए शामिल     बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा गृह मंत्री अमित शाह समेत NDA के वरिष्ठ नेता और विभिन्न सहयोगी दलों के सांसद मौजूद रहे। NDA संसदीय दल की ऐसी बैठकें गठबंधन के सांसदों के बीच संवाद और रणनीतिक समन्वय के लिए आयोजित की जाती हैं।     तिरंगा लहराकर ‘वंदे मातरम्’ के नारे     ‘मंगल मिलन’ बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और NDA सांसदों ने हाथों में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा लेकर उसे लहराया। इस दौरान ‘वंदे मातरम्’ के नारे भी लगाए गए। बैठक की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद यह कार्यक्रम राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया।     मानसून सत्र के लिए रणनीति पर नजर     NDA की बैठक ऐसे वक्त हुई है जब संसद में सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है और विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेर रहा है। ऐसे में गठबंधन की एकजुटता और सदन में रणनीति आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण रहने वाली है।   ‘मंगल मिलन’ बैठक के जरिए NDA नेतृत्व ने अपने सांसदों के बीच समन्वय मजबूत करने के साथ-साथ संसद के बाकी सत्र के लिए राजनीतिक और संसदीय रणनीति पर भी फोकस किया।

ranjan kumar tiwari अगस्त 11, 2026 0
अमित शाह ने मुंबई में NUCFDC के नए कार्यालय का उद्घाटन किया
NUCFDC के नए कार्यालय का उद्घाटन, अमित शाह ने मुंबई में किया शुभारंभ

मुंबई, एजेंसियां। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शनिवार, 8 अगस्त को मुंबई के फोर्ट स्थित शारदा सदन में नेशनल अर्बन को-ऑपरेटिव फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (NUCFDC) के नए कार्यालय का उद्घाटन किया। यह पहल देश के शहरी सहकारी बैंकिंग क्षेत्र को आधुनिक, सुरक्षित और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।   शहरी सहकारी बैंकों के लिए नई सुविधाएं     नए कार्यालय के उद्घाटन के साथ ही शहरी सहकारी बैंकों के लिए कई डिजिटल और तकनीकी सुविधाओं की शुरुआत की गई। इनमें सिक्योरिटी ऑपरेशंस सेंटर (SOC) और देशभर के शहरी सहकारी बैंकों के लिए साझा कोर बैंकिंग सेवा (Sahakar CBS) प्रमुख हैं।   सिक्योरिटी ऑपरेशंस सेंटर का उद्देश्य शहरी सहकारी बैंकों को साइबर खतरों से बेहतर सुरक्षा प्रदान करना है, जबकि साझा कोर बैंकिंग प्लेटफॉर्म के जरिए बैंकों को आधुनिक डिजिटल बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है।   NFSU के साथ होगा तकनीकी सहयोग     कार्यक्रम के दौरान NUCFDC और नेशनल फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU) के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) का आदान-प्रदान भी किया गया। इसका उद्देश्य सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में साइबर सुरक्षा, तकनीकी क्षमता और संस्थागत दक्षता को मजबूत करना है। कार्यक्रम में Sahakar CBS से सफलतापूर्वक जुड़ने वाले शुरुआती छह शहरी सहकारी बैंकों के प्रतिनिधियों को भी सम्मानित किया गया।     शहरी सहकारी बैंकिंग को आधुनिक बनाने पर जोर     सरकार के अनुसार, NUCFDC को शहरी सहकारी बैंकों के लिए एक अम्ब्रेला संगठन के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य खासकर छोटे और मध्यम आकार के सहकारी बैंकों को साझा तकनीकी प्लेटफॉर्म, साइबर सुरक्षा, प्रशिक्षण और अन्य परिचालन सहायता उपलब्ध कराना है।   यह पूरी पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के दृष्टिकोण के तहत शहरी सहकारी बैंकिंग क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी, सुरक्षित और डिजिटल बनाने की दिशा में आगे बढ़ाई जा रही है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 8, 2026 0
CISF Illegal Coal
CISF की बड़ी कार्रवाई, 5,800 मीट्रिक टन अवैध कोयला जब्त; कीमत करीब 3.5 करोड़ रुपये

रांची। झारखंड में अवैध कोयला खनन और तस्करी के खिलाफ केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने बड़ी कार्रवाई की है। कार्रवाई के दौरान अब तक करीब 5,800 मीट्रिक टन अवैध कोयला जब्त किया गया है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 3.50 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इसके साथ ही 100 से अधिक अवैध कोयला खनन स्थलों को बंद या सील किया गया है।   221 मामले दर्ज, 323 वाहन जब्त   अवैध कोयला कारोबार के खिलाफ चलाए गए अभियान में अब तक 221 मामले दर्ज किए गए हैं। कार्रवाई के दौरान CISF ने 323 वाहन भी जब्त किए हैं। इनमें ट्रक, हाइवा, टिपर, ट्रैक्टर, वैन और ट्रॉली के अलावा 150 मोटरसाइकिल, 140 साइकिल और 10 स्कूटी समेत अन्य वाहन शामिल हैं। CISF की कार्रवाई का मुख्य फोकस अवैध खनन, कोयले की चोरी और उसकी अनधिकृत ढुलाई पर रोक लगाना है।   ड्रोन से निगरानी, बढ़ाई जाएंगी क्विक रिस्पॉन्स टीमें   अवैध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए CISF अब कोयला क्षेत्रों में ड्रोन निगरानी को और मजबूत करने की तैयारी में है। BCCL धनबाद, CCL करगली, CMP हजारीबाग और ECL सीतलपुर में क्विक रिस्पॉन्स टीमों (QRT) की संख्या बढ़ाने की योजना है।   इसके अलावा वाहनों की सघन जांच, संयुक्त निरीक्षण और खुफिया सूचनाओं के आधार पर छापेमारी भी तेज की जाएगी। स्थानीय सूचनाओं और तीन-स्तरीय खुफिया नेटवर्क को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है।   अमित शाह के निर्देश के बाद कार्रवाई तेज   रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश के बाद झारखंड में अवैध कोयला खनन और तस्करी के खिलाफ निगरानी बढ़ाई गई है। CISF को MMDR Act के तहत मिले अधिकारों के बाद अवैध खनन, चोरी, अनधिकृत भंडारण और परिवहन के खिलाफ कार्रवाई का दायरा बढ़ा है। CISF की ओर से पुलिस, जिला प्रशासन, खान विभाग और रेलवे के साथ मिलकर संयुक्त कार्रवाई की भी तैयारी की जा रही है।   रांची में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक   CISF के पूर्वी क्षेत्र के अतिरिक्त महानिदेशक सुधीर कुमार ने रांची पहुंचकर अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में झारखंड और बिहार में तैनात CISF इकाइयों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।   अधिकारियों को कोयला क्षेत्रों में निगरानी मजबूत करने, आधुनिक तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल करने और अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई में बेहतर समन्वय बनाने के निर्देश दिए गए। आने वाले दिनों में अभियान को और तेज करने की तैयारी है।

abhishek singh अगस्त 6, 2026 0
लोकसभा में मणिकम टैगोर का स्थगन प्रस्ताव
अमित शाह के बयान की मांग पर मणिकम टैगोर का स्थगन प्रस्ताव, संसद में विपक्ष का हंगामा जारी

अमित शाह के बयान की मांग को लेकर मणिकम टैगोर का स्थगन प्रस्ताव नोटिस, संसद में विपक्ष का हंगामा नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के मानसून सत्र में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग को लेकर विपक्ष का विरोध तेज हो गया है। कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस देकर सरकार से छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई पर गृह मंत्री अमित शाह से जवाब देने की मांग की है।   छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल     विपक्षी सांसदों का आरोप है कि छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर कई गंभीर सवाल उठे हैं। विपक्ष चाहता है कि गृह मंत्री सदन में इस पूरे मामले पर सरकार का पक्ष स्पष्ट करें और कार्रवाई से जुड़े तथ्यों की जानकारी दें। इस मुद्दे को लेकर संसद की कार्यवाही के दौरान विपक्षी सांसदों ने सरकार के खिलाफ विरोध भी जताया है। विपक्ष लगातार मांग कर रहा है कि सरकार इस मामले पर सदन में जवाब दे।     मणिकम टैगोर ने सरकार से जवाब मांगा     कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर की ओर से दिए गए स्थगन प्रस्ताव के जरिए इस मुद्दे पर सामान्य संसदीय कामकाज को रोककर तत्काल चर्चा कराने की मांग की गई है। विपक्ष का कहना है कि छात्रों से जुड़े इस संवेदनशील मामले में सरकार को चुप रहने के बजाय संसद के भीतर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। दूसरी ओर, सरकार की ओर से विपक्ष के आरोपों पर जवाब दिया जा रहा है और सदन की कार्यवाही चलाने पर जोर दिया जा रहा है।     संसद में लगातार बढ़ रहा टकराव     अमित शाह के बयान की मांग को लेकर विपक्ष पहले भी संसद में विरोध दर्ज करा चुका है। रिपोर्टों के मुताबिक इस मुद्दे के कारण लोकसभा की कार्यवाही में व्यवधान भी आया है। संसद में इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव आने वाले दिनों में भी जारी रहने के आसार हैं। विपक्ष जहां गृह मंत्री के बयान पर अड़ा है, वहीं सरकार की प्राथमिकता सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने की है।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 5, 2026 0
लोकसभा में राहुल गांधी के बयान पर हंगामा और गृह मंत्री पर आरोप
लोकसभा में राहुल गांधी के बयान पर हंगामा, गृह मंत्री पर आरोपों को लेकर सत्ता पक्ष का विरोध

नई दिल्ली, एजेंसियां। लोकसभा में एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयान पर जोरदार हंगामा हुआ। राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह पर छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग की अनुमति देने का आरोप लगाया, जिसके बाद सत्ता पक्ष के सांसदों ने कड़ा विरोध जताया और बयान पर आपत्ति दर्ज कराई।   राहुल गांधी ने लगाए गंभीर आरोप   चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों के खिलाफ की गई कार्रवाई के आदेश गृह मंत्री स्तर से दिए गए थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ऐसे फैसले या तो गृह मंत्री या प्रधानमंत्री स्तर पर लिए जाते हैं। साथ ही उन्होंने शिक्षा व्यवस्था और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की भूमिका को लेकर भी सरकार की आलोचना की।   सत्ता पक्ष ने किया विरोध   राहुल गांधी के आरोपों पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने तत्काल विरोध जताया। संसदीय कार्य मंत्री ने बिना तथ्यों के गंभीर आरोप लगाने पर आपत्ति दर्ज कराते हुए राहुल गांधी से माफी की मांग की।   स्पीकर ओम बिरला ने दी नसीहत   लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सदन में दिए जाने वाले बयानों के पीछे तथ्य होने चाहिए, क्योंकि संसदीय रिकॉर्ड लंबे समय तक सुरक्षित रहता है। उन्होंने विपक्ष के नेता से विधेयक और तथ्यों के आधार पर चर्चा करने की सलाह दी। स्पीकर ने यह भी कहा कि यदि वे चर्चा जारी नहीं रखना चाहते, तो अगले वक्ता को अवसर दिया जाएगा।   चर्चा के दौरान बढ़ा राजनीतिक तनाव   हालांकि स्पीकर की टिप्पणी के बाद भी राहुल गांधी ने अपने आरोप दोहराए और सरकार की शिक्षा नीति तथा आरएसएस की भूमिका पर सवाल उठाए। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जिससे सदन का माहौल कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गया।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 29, 2026 0
असम में भारी बारिश और बाढ़ से मची तबाही एवं प्रभावित इलाकों का दृश्य
असम में बाढ़ से भारी तबाही, 25 जिलों के नौ लाख से अधिक लोग प्रभावित

गुवाहाटी, एजेंसियां। असम में लगातार हो रही भारी बारिश और ऊपरी इलाकों में बादल फटने की घटनाओं के कारण आई बाढ़ ने व्यापक तबाही मचाई है। राज्य के 25 जिलों के 1,800 से अधिक गांव जलमग्न हो गए हैं और नौ लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। बाढ़ और इससे जुड़ी घटनाओं में अब तक 41 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों मवेशियों के बह जाने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बड़ा नुकसान पहुंचा है। बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा से फोन पर बातचीत कर हालात की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने बताया कि गृह मंत्री ने जल्द ही एक अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम को असम भेजने का आश्वासन दिया है, जो बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करेगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार राहत और पुनर्वास के लिए आवश्यक सहायता पर निर्णय लेगी। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के अनुसार, इस बार राज्य में सामान्य से 436 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है, जिसके कारण कई ऐसे इलाके भी बाढ़ की चपेट में आ गए हैं, जहां वर्षों से इतनी गंभीर स्थिति नहीं बनी थी। उन्होंने इसे 'अभूतपूर्व' और 'अकल्पनीय' आपदा बताया है। राज्य सरकार ने प्रभावित लोगों के लिए 148 से अधिक राहत शिविर स्थापित किए हैं, जहां करीब 30 हजार विस्थापित लोगों को आश्रय दिया गया है। राहत शिविरों में भोजन, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। प्रभावित जिलों में अब तक तीन लाख किलोग्राम से अधिक चावल और अन्य राहत सामग्री पहुंचाई जा चुकी है। बचाव अभियान में भारतीय वायुसेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, जिला प्रशासन और अन्य एजेंसियां संयुक्त रूप से कार्य कर रही हैं। हेलीकॉप्टर और नावों की मदद से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है तथा दुर्गम इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाने का अभियान लगातार जारी है। राज्य सरकार ने बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए दीर्घकालिक योजना तैयार करने की भी बात कही है।

ranjan kumar tiwari जुलाई 23, 2026 0
West Bengal SIA
बंगाल में NIA जैसी जांच एजेंसी बनाने की तैयारी, अमित शाह की बैठक में SIA गठन का प्रस्ताव सामने आया

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में आतंकवाद, संगठित अपराध और देश विरोधी गतिविधियों से निपटने के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) के गठन का प्रस्ताव सामने आया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई कानून-व्यवस्था की समीक्षा बैठक में राज्य में NIA की तर्ज पर एक विशेष जांच एजेंसी बनाने की जरूरत पर चर्चा की गई।   कानून-व्यवस्था और सुरक्षा मुद्दों पर हुई चर्चा   बैठक में पश्चिम बंगाल में आतंकवाद, कट्टरपंथ, अवैध हथियारों, नशा तस्करी और संगठित अपराध से जुड़े मामलों की समीक्षा की गई। अधिकारियों के साथ हुई चर्चा में ऐसी विशेष एजेंसी की आवश्यकता पर जोर दिया गया, जो गंभीर मामलों की जांच तेजी से कर सके।   SIA को मिल सकती है विशेष जांच की जिम्मेदारी   प्रस्तावित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) को आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों की जांच के लिए विशेष अधिकार दिए जाने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, इसके गठन और अधिकारों को लेकर अंतिम फैसला राज्य सरकार और संबंधित विभागों की प्रक्रिया के बाद ही होगा।   केंद्र ने सुरक्षा तंत्र मजबूत करने पर दिया जोर   अमित शाह की बैठक में राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने तथा संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने पर चर्चा हुई।   राजनीतिक बहस भी तेज   SIA गठन के प्रस्ताव को लेकर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक प्रतिक्रिया भी शुरू हो गई है। जहां बीजेपी इसे सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में जरूरी कदम बता रही है, वहीं विपक्षी दल केंद्र के इस कदम को लेकर सवाल उठा सकते हैं।   अभी प्रस्ताव, अंतिम निर्णय बाकी   फिलहाल पश्चिम बंगाल में SIA के गठन को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। यह अभी प्रस्ताव और चर्चा के स्तर पर है। आगे राज्य और केंद्र के बीच समन्वय के बाद ही इसकी रूपरेखा तय होगी।

abhishek singh जुलाई 20, 2026 0
Amit Shah
अमित शाह का पश्चिम बंगाल दौरा आज से, सीमा सुरक्षा और कानून व्यवस्था की करेंगे समीक्षा

कोलकाता, एजेंसियां। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज से पश्चिम बंगाल के तीन दिवसीय दौरे पर रहेंगे। इस दौरे के दौरान उनका मुख्य फोकस सीमा सुरक्षा, कानून व्यवस्था, प्रशासनिक स्थिति और विकास योजनाओं की समीक्षा पर रहेगा।   BSF जवानों से करेंगे मुलाकात   अमित शाह अपने दौरे के दौरान पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा करेंगे। वह सीमा सुरक्षा बल (BSF) के अधिकारियों और जवानों से मुलाकात कर सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करेंगे। खासतौर पर बांग्लादेश सीमा से जुड़े सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।   कानून व्यवस्था और नए आपराधिक कानूनों पर समीक्षा   गृह मंत्री राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति और केंद्र द्वारा लागू किए गए नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन की भी समीक्षा करेंगे। इसके अलावा राज्य प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों के साथ बैठक कर जरूरी दिशा-निर्देश दे सकते हैं।   विकास परियोजनाओं का भी लेंगे जायजा   अमित शाह के कार्यक्रम में कई विकास परियोजनाओं से जुड़े कार्यक्रम भी शामिल हैं। वह BSF से संबंधित परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी कर सकते हैं।   राजनीतिक नजरिए से भी अहम दौरा   अमित शाह का यह बंगाल दौरा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य में संगठनात्मक गतिविधियों, आगामी राजनीतिक रणनीति और पार्टी कार्यकर्ताओं से संवाद को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं।

abhishek singh जुलाई 17, 2026 0
Narendra Modi Amit Shah
पीएम मोदी और अमित शाह ने BJP संगठन में बड़े बदलाव पर की अहम बैठक, नए संगठन विस्तार पर मंथन

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में संभावित बदलावों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीच बुधवार को अहम बैठक हुई। बैठक में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने संगठन के पुनर्गठन, नए पदाधिकारियों की नियुक्ति और आगामी राजनीतिक रणनीति पर विस्तार से चर्चा की।   संगठन विस्तार पर हुआ मंथन   सूत्रों के अनुसार, बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय संगठन को और मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विचार किया गया। इसमें नए पदाधिकारियों की नियुक्ति और विभिन्न राज्यों में संगठन को सशक्त बनाने की रणनीति पर चर्चा हुई।   चुनावी राज्यों पर विशेष फोकस   बैठक में आगामी विधानसभा चुनावों वाले राज्यों की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। पार्टी नेतृत्व ने चुनावी रणनीति, संगठन की मजबूती और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया।   जल्द हो सकता है बड़ा ऐलान   बताया जा रहा है कि बैठक में हुई चर्चाओं के आधार पर भाजपा संगठन में जल्द ही नए पदाधिकारियों और जिम्मेदारियों को लेकर आधिकारिक घोषणा की जा सकती है। हालांकि, पार्टी की ओर से अभी तक कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है।   राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा   प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह की इस बैठक के बाद राजनीतिक गलियारों में संगठनात्मक फेरबदल को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि पार्टी आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन को नई दिशा देने की तैयारी में है।

abhishek singh जुलाई 16, 2026 0
Rajnath Singh
राजनाथ सिंह के आवास पर आज शाम होगी अहम बैठक, मॉनसून सत्र की रणनीति पर होगा मंथन

नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के आगामी मॉनसून सत्र से पहले केंद्र सरकार अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुट गई है। इसी कड़ी में आज शाम रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नई दिल्ली स्थित आवास पर वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। बैठक में सरकार के विधायी एजेंडे, विपक्ष की रणनीति और संसद में पेश किए जाने वाले प्रमुख विधेयकों पर चर्चा होगी।    मॉनसून सत्र की रणनीति पर होगा मंथन   सूत्रों के अनुसार, बैठक में 20 जुलाई से शुरू होने वाले मॉनसून सत्र के लिए सरकार की रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा। विपक्ष द्वारा उठाए जाने वाले संभावित मुद्दों और सरकार की जवाबी तैयारी पर भी विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। सरकार चाहती है कि संसद का सत्र सुचारु रूप से चले और महत्वपूर्ण विधेयकों को समय पर पारित कराया जा सके।   कई वरिष्ठ मंत्री हो सकते हैं शामिल   बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण समेत कई वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों के शामिल होने की संभावना है। विभिन्न मंत्रालयों से जुड़े विधेयकों और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।    सर्वदलीय बैठक से पहले सरकार की तैयारी   यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब केंद्र सरकार 19 जुलाई को प्रस्तावित सर्वदलीय बैठक की तैयारी भी कर रही है। माना जा रहा है कि आज की बैठक में लिए गए फैसलों के आधार पर सरकार विपक्ष के साथ होने वाली चर्चा में अपना रुख स्पष्ट करेगी। मॉनसून सत्र में कई अहम विधेयक और राष्ट्रीय मुद्दे सदन में आने की संभावना है, इसलिए सरकार कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहती है।

abhishek singh जुलाई 15, 2026 0
Bharat Taxi
रांची और पटना में जल्द शुरू होगी 'भारत टैक्सी' सेवा

रांची। केंद्र सरकार की सहकारी मॉडल पर आधारित 'भारत टैक्सी' सेवा का विस्तार जल्द ही झारखंड की राजधानी रांची और बिहार की राजधानी पटना सहित कई नए शहरों तक किया जाएगा। केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय राजधानी में सहकारिता मंत्रालय के पांचवें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में इसकी घोषणा की। उन्होंने बताया कि सरकार अगले दो वर्षों में इस सेवा को देश के 500 शहरों तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर काम कर रही है।   इन शहरों में शुरू होगी नई सेवा वर्तमान में 'भारत टैक्सी' सेवा दिल्ली-एनसीआर, गुजरात, लखनऊ, चंडीगढ़, मुंबई, जयपुर और कानपुर में संचालित हो रही है। आने वाले महीनों में रांची, पटना, गुवाहाटी, भोपाल, कोलकाता, इंदौर और नागपुर जैसे प्रमुख शहर भी इस नेटवर्क से जुड़ जाएंगे। सरकार का उद्देश्य सहकारी मॉडल के माध्यम से यात्रियों को विश्वसनीय और किफायती परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है, साथ ही टैक्सी चालकों को बेहतर आय के अवसर देना है।   सहकारी जीवन बीमा कंपनी की भी घोषणा अमित शाह ने कार्यक्रम के दौरान यह भी घोषणा की कि सरकार 'भारत टैक्सी' की तर्ज पर एक सहकारी जीवन बीमा कंपनी स्थापित करने की योजना बना रही है। उनका कहना था कि इससे सहकारी क्षेत्र को और अधिक मजबूती मिलेगी तथा करोड़ों सदस्यों को बेहतर बीमा सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।   30 करोड़ से अधिक सदस्य होंगे लाभान्वित देश में वर्तमान में लगभग 8.5 लाख सहकारी संस्थाएं कार्यरत हैं, जिनसे 30 करोड़ से अधिक सदस्य जुड़े हुए हैं। वहीं, भारत में इस समय 26 जीवन बीमा कंपनियां संचालित हैं। सरकार का मानना है कि नई सहकारी जीवन बीमा कंपनी बनने से सहकारी संस्थाओं की आर्थिक क्षमता बढ़ेगी और आम लोगों को प्रतिस्पर्धी एवं सुलभ बीमा सेवाओं का लाभ मिलेगा। 'भारत टैक्सी' सेवा का विस्तार भी इसी दिशा में सहकारिता आधारित आर्थिक मॉडल को मजबूत करने की एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

abhishek singh जुलाई 7, 2026 0
Amit Shah
गृह मंत्रालय की बड़ी कार्रवाई: पाकिस्तान के 17 और भारत के 6 नागरिक 'व्यक्तिगत आतंकवादी' घोषित

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत बड़ा कदम उठाते हुए 17 पाकिस्तान/पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सक्रिय व्यक्तियों और 6 भारतीय नागरिकों को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की चौथी अनुसूची के तहत 'व्यक्तिगत आतंकवादी' घोषित कर दिया है। इस कार्रवाई के साथ केंद्र ने कुल 23 नए नाम आतंकियों की सूची में शामिल किए हैं।   लश्कर, जैश समेत कई आतंकी संगठनों से जुड़े हैं आरोपी   गृह मंत्रालय के अनुसार, घोषित किए गए सभी 23 व्यक्ति लश्कर-ए-तैयबा , जैश-ए-मोहम्मद और अन्य प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से जुड़े हैं। इन पर भारत में आतंकी हमलों की साजिश, घुसपैठ, हथियारों की तस्करी, आतंकियों की भर्ती, फंडिंग और आतंकवादी नेटवर्क को संचालित करने जैसे गंभीर आरोप हैं। छह भारतीय नागरिक भी लंबे समय से पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में रहकर आतंकी गतिविधियों में शामिल बताए गए हैं।   UAPA के तहत मिलेगी सख्त कानूनी कार्रवाई की शक्ति   सरकार द्वारा किसी व्यक्ति को UAPA के तहत "व्यक्तिगत आतंकवादी" घोषित किए जाने के बाद उसकी संपत्ति जब्त करने, वित्तीय लेन-देन पर रोक लगाने और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई तेज करने का रास्ता खुल जाता है। गृह मंत्रालय का कहना है कि यह कदम सीमा पार से संचालित आतंकी नेटवर्क पर शिकंजा कसने और भारत की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है।   आतंकवाद के खिलाफ सख्त संदेश   केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सरकार देश की सुरक्षा से समझौता नहीं करेगी और आतंकवाद से जुड़े हर नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्रालय के अनुसार, इस कार्रवाई का उद्देश्य आतंकी संगठनों को कानूनी, आर्थिक और रणनीतिक स्तर पर कमजोर करना है।

abhishek singh जुलाई 5, 2026 0
Amit Shah Sukhjinder Singh
पंजाब कांग्रेस की अंदरूनी कलह के बीच अमित शाह से मिले सांसद रंधावा, बोले- मुलाकात पूरी तरह गैर-राजनीतिक थी

नई दिल्ली, एजेंसियां। पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव को लेकर जारी असंतोष के बीच कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। हालांकि रंधावा ने इस मुलाकात को पूरी तरह गैर-राजनीतिक बताते हुए स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य केवल पंजाब की सुरक्षा और सीमावर्ती जिलों में बिगड़ती कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना था। उन्होंने कहा कि इस बैठक को किसी भी तरह से राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।   सीमावर्ती जिलों की सुरक्षा को लेकर उठाए गंभीर मुद्दे रंधावा ने बताया कि उन्होंने 4 जून 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा था, जिसकी प्रति गृह मंत्री अमित शाह को भी भेजी गई थी। पत्र में गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन और पठानकोट जैसे सीमावर्ती जिलों में बिगड़ती कानून-व्यवस्था, पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद, नार्को-टेररिज्म, गैंगस्टरों की गतिविधियों और पंजाब पुलिस के कथित राजनीतिक इस्तेमाल जैसे गंभीर मुद्दे उठाए गए थे। इसके बाद 23 जून को भेजे गए दूसरे पत्र में उन्होंने गैंगस्टरों की बढ़ती गतिविधियों पर चिंता जताई थी। इन्हीं पत्रों के आधार पर उन्हें गृह मंत्री से मिलने का समय दिया गया।   जबरन वसूली और जेलों से चल रहे नेटवर्क पर जताई चिंता बैठक के दौरान रंधावा ने इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI), रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) जैसी एजेंसियों की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि पंजाब में जबरन वसूली, धमकियां और जेलों के भीतर से मोबाइल फोन के जरिए अपराध संचालित होना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार मानती है कि पाकिस्तान इन गतिविधियों में प्रत्यक्ष रूप से शामिल है और यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है, तो आवश्यक कदम उठाना उसकी जिम्मेदारी है।   कांग्रेस के प्रति निष्ठा दोहराई, विवादों पर चुप्पी रंधावा ने कांग्रेस के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि वह पार्टी द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारियों का पूरी ईमानदारी से निर्वहन कर रहे हैं। वहीं, पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक फेरबदल और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की नाराजगी से जुड़े सवालों पर उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। ऐसे में उनकी अमित शाह से मुलाकात ने भले ही राजनीतिक अटकलों को हवा दी हो, लेकिन रंधावा ने इसे पूरी तरह सुरक्षा और जनहित से जुड़ा मुद्दा बताया है।

abhishek singh जुलाई 3, 2026 0
Saryu Roy Hemant Soren
झारखंडः हेमंत को सरयू राय के ऑफर पर भड़की कांग्रेस

रांची। झारखंड में राज्यसभा चुनाव के बाद से ही सियासी हलचल जारी है। जदयू विधायक सरयू राय की ओर से पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के ये सुझाव दिया गया कि वो कांग्रेस से नाता तोड़ लें। सरयू राय का कहना है कि कांग्रेस और भाजपा के बिना भी राज्य में गठबंधन की सरकार आराम से चल सकती है। जेएमएम के 34, राजद के 4, भाकपा-माले के 2 विधायकों को मिलाकर संख्या 40 तक पहुंच जाएगी। इसके अलावा जदयू और जेएलकेएम के एक विधायक के समर्थन से ये आंकड़ा 42 तक पहुंच जाएगा, जो बहुमत से लिए पर्याप्त है।   सरयू राय ने क्या अमित शाह से अनुमति ली है? जदयू विधायक और पूर्व मंत्री सरयू राय के इस सुझाव के बाद जेएमएम की ओर से तो कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन कांग्रेस भड़क गई है। कांग्रेस की ओर से सरयू राय के सुझाव के बयान पर कड़ा पलटवार किया है। झारखंड प्रदेश कांग्रेस के महासचिव और मीडिया विभाग के संयोजक लाल किशोर नाथ शाहदेव ने तीखा सवाल दागते हुए कहा कि झारखंड में सरकार बनाने का जो फॉर्मूला सरयू राय दे रहे हैं, क्या उसके लिए उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अनुमति ले ली है? झारखंड में बीजेपी का मंसूबा सफल नहीं होगा-कांग्रेस... कांग्रेस महासचिव ने कहा कि राज्यसभा चुनाव के बाद भाजपा और एनडीए नेताओं की सत्तालोलुपता भी साफ देखी जा सकती है, लेकिन वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में झारखंड की जनता ने भाजपा को सत्ता से दूर रखने का जनादेश दिया था और आने वाले समय में भी बीजेपी का नापाक मंसूबा झारखंड में सफल नहीं होगा। सरयू राय को क्या पूरे एनडीए का समर्थन है? लाल किशोर नाथ शाहदेव ने कहा कि सरयू राय को सबसे पहले जनता को यह बताना चाहिए कि वे किस गठबंधन और किस पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर आए हैं। उन्होंने कहा कि वे जिस समर्थन की बात कर रहे हैं, क्या उनके साथ पूरा एनडीए गठबंधन भी इस ओर कदम बढ़ा रहा है, या फिर यह सिर्फ उनकी व्यक्तिगत कल्पना मात्र है? लाल किशोर नाथ शाहदेव ने कहा कि विपक्ष चाहे जितने हथकंडे अपना ले, चुनी हुई सरकार को गिराने की उनकी मंशा कभी कामयाब नहीं होगी। सरयू राय के फॉर्मूला की कोई विश्वसनीयता नहीं... कांग्रेस महासचिव ने कहा कि राजनीति में नए साथियों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन क्या इंडी गठबंधन के अन्य घटक दल राजद और भाकपा-माले भी इस बात से सहमत हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष लगातार लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को अस्थिर करने की साजिश रच रहा है। लाल किशोर नाथ शाहदेव ने साफ तौर पर कहा कि सरयू राय जो फॉर्मूला पेश कर रहे हैं, उसकी कोई विश्वसनीयता नहीं है।

abhishek singh जून 22, 2026 0
K Annamalai
भाजपा अध्यक्ष ने स्वीकार किया के. अन्नामलाई का इस्तीफा

चेन्नई, एजेंसियां। तमिलनाडु भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई  ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और अन्नामलाई के अगले कदम को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। राजनीतिक भविष्य पर बढ़ीं अटकलें अन्नामलाई के इस्तीफे ने उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले कुछ दिनों से यह चर्चा चल रही थी कि वह भाजपा से अलग राह चुन सकते हैं। उनके समर्थकों के बीच नई राजनीतिक पार्टी या आंदोलन शुरू करने की अटकलें भी तेज हैं। हालांकि अब तक उन्होंने अपने भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की है। ‘सिंघम’ के नाम से मशहूर हैं अन्नामलाई पूर्व आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई ने वर्ष 2020 में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी। उनकी आक्रामक शैली और जनसंपर्क के कारण समर्थक उन्हें ‘सिंघम’ के नाम से जानते हैं। भाजपा में शामिल होने के एक साल बाद ही उन्हें तमिलनाडु भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया था। उनके नेतृत्व में पार्टी ने राज्य में अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश की। अमित शाह से मुलाकात के बाद बढ़ी चर्चा इस्तीफे से पहले अन्नामलाई ने 2 जून को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। इस बैठक के बाद उनके भविष्य को लेकर अटकलें और तेज हो गई थीं। चेन्नई और कोयंबटूर में उनके समर्थकों ने पोस्टर लगाकर उन्हें मजबूत और निडर नेता बताया तथा नए राजनीतिक नेतृत्व की मांग उठाई। आज दोपहर करेंगे बड़ा खुलासा अन्नामलाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर घोषणा की है कि वह शुक्रवार दोपहर 12 बजे जनता और समर्थकों से संवाद करेंगे। माना जा रहा है कि इस दौरान वह भाजपा नेतृत्व के साथ हुई चर्चाओं, अपने इस्तीफे के कारणों और भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर विस्तार से बात कर सकते हैं। उनकी घोषणा पर पूरे तमिलनाडु और राष्ट्रीय राजनीति की नजरें टिकी हुई हैं।

Unknown जून 5, 2026 0
Amit Shah addressing BJP leaders in Kolkata after Suvendu Adhikari’s victory over Mamata Banerjee in Bhabanipur
अमित शाह का ममता बनर्जी पर बड़ा हमला, बोले- शुभेंदु दा ने घर में घुसकर हराया

Amit Shah on Mamata Banerjee Bhabanipur Loss: पश्चिम बंगाल की राजनीति में भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी की हार के बाद बयानबाजी तेज हो गई है. भाजपा विधायक दल की बैठक के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि इस बार शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को उनके ही घर में घुसकर हराया है. “नंदीग्राम में गई थीं चुनौती देने, अब भवानीपुर में मिली हार” कोलकाता में भाजपा नेताओं और विधायकों को संबोधित करते हुए अमित शाह ने ममता बनर्जी के पुराने बयान का जिक्र किया. शाह ने कहा कि 2021 में ममता बनर्जी खुद शुभेंदु अधिकारी के गढ़ नंदीग्राम में चुनाव लड़ने गई थीं और इसे अपनी राजनीतिक ताकत बताया था. उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “दीदी कहती थीं कि वह शुभेंदु के गढ़ में जाकर लड़ रही हैं. लेकिन इस बार शुभेंदु दा ने उनके अपने घर भवानीपुर में जाकर उन्हें हरा दिया.” सोशल मीडिया पर वायरल हुआ बयान अमित शाह का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. भाजपा समर्थक इसे बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत बता रहे हैं, जबकि टीएमसी समर्थकों ने शाह के बयान को राजनीतिक उकसावे वाला करार दिया है. भवानीपुर में कैसे बदला चुनावी समीकरण? भवानीपुर सीट को लंबे समय से ममता बनर्जी का सबसे सुरक्षित गढ़ माना जाता रहा है. लेकिन 2026 विधानसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी ने यहां बड़ा उलटफेर करते हुए ममता बनर्जी को 15 हजार से ज्यादा वोटों से हराया. मतगणना के शुरुआती राउंड में ममता बढ़त बनाए हुए थीं, लेकिन बाद के चरणों में शुभेंदु अधिकारी लगातार आगे निकलते गए और अंत में निर्णायक जीत दर्ज की. “भ्रष्टाचार और परिवारवाद से तंग आ चुकी है जनता” अमित शाह ने दावा किया कि भवानीपुर की जनता ने भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और तुष्टिकरण की राजनीति के खिलाफ वोट दिया है. उन्होंने कहा कि बंगाल में भाजपा की जीत सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि राजनीतिक संस्कृति में बदलाव का संकेत है. “शेरनी से भीगी बिल्ली” वाले बयान पर बढ़ा विवाद अपने भाषण में शाह ने ममता बनर्जी पर व्यक्तिगत तंज कसते हुए कहा कि जो नेता खुद को बंगाल की “शेरनी” बताती थीं, अब हार के बाद “भीगी बिल्ली” बन गई हैं. इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद और गहरा गया है. टीएमसी नेताओं ने शाह की भाषा पर सवाल उठाए हैं, जबकि भाजपा इसे चुनावी जवाब बता रही है.  

surbhi मई 9, 2026 0
Election strategy of BJP for Assam Kerala and West Bengal polls
तीन राज्यों में BJP का बड़ा चुनावी ब्लूप्रिंट: असम में गठबंधन, केरल में विस्तार और बंगाल में ‘क्लीन स्वीप’ का लक्ष्य

आगामी विधानसभा चुनावों से पहले Bharatiya Janata Party ने असम, केरल और पश्चिम बंगाल को लेकर अपनी व्यापक रणनीति तैयार कर ली है। राजधानी दिल्ली में हुई केंद्रीय चुनाव समिति की अहम बैठक में प्रधानमंत्री Narendra Modi, गृह मंत्री Amit Shah और रक्षा मंत्री Rajnath Singh समेत शीर्ष नेतृत्व ने इन राज्यों में चुनावी गणित और संभावनाओं पर विस्तार से मंथन किया। असम: गठबंधन के साथ चुनावी मैदान Assam में पार्टी ने सहयोगी दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। Asom Gana Parishad   Bodoland People's Front   इन दलों के साथ सीट शेयरिंग के जरिए चुनावी मजबूती बढ़ाने की रणनीति बनाई गई है। बताया जा रहा है कि 89 सीटों पर गहन चर्चा हुई है और जल्द ही उम्मीदवारों की सूची जारी की जा सकती है। इस रणनीति में मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma की अहम भूमिका रही है। केरल: 100 सीटों पर बड़ा दांव Kerala में पार्टी ने इस बार आक्रामक रणनीति अपनाई है। 140 सदस्यीय विधानसभा में से 100 सीटों पर उम्मीदवार उतारने का लक्ष्य रखा गया है। पहली सूची में ही कई बड़े नामों को टिकट दिया गया है: Rajeev Chandrasekhar – नेमोम सीट   George Kurian – कांजिराप्पिली सीट   गौरतलब है कि 2021 के चुनाव में पार्टी को यहां एक भी सीट नहीं मिली थी। ऐसे में यह रणनीति राज्य में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने और तीसरे विकल्प के रूप में उभरने की कोशिश मानी जा रही है। बंगाल: पहली बार सत्ता में आने का लक्ष्य West Bengal में पार्टी ने इस बार ‘क्लीन स्वीप’ का लक्ष्य रखा है। बीजेपी 150 से अधिक सीटों पर मजबूत लड़ाई की तैयारी में है। पहले ही 144 सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की जा चुकी है, जिसमें प्रमुख चेहरे शामिल हैं: Suvendu Adhikari   Dilip Ghosh   राज्य की कुल 294 सीटों में मुकाबला बेहद दिलचस्प होने वाला है, क्योंकि सत्तारूढ़ दल All India Trinamool Congress भी 291 सीटों पर उम्मीदवार उतार चुका है। चुनावी टाइमलाइन और सियासी समीकरण Kerala में 9 अप्रैल को एक चरण में मतदान होना है। वहीं कांग्रेस और वाम दल भी अपनी-अपनी रणनीतियों के साथ मैदान में उतर चुके हैं। बीजेपी का यह पूरा प्लान दर्शाता है कि पार्टी उन राज्यों में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है, जहां अब तक उसे अपेक्षित सफलता नहीं मिली है। आने वाले चुनाव यह तय करेंगे कि यह रणनीति जमीन पर कितनी कारगर साबित होती है।  

surbhi मार्च 19, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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