तेज प्रताप यादव

Tejashwi Yadav Ultimatum
तेजस्वी यादव ने सम्राट सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम, बोले- तेज प्रताप समेत सभी गिरफ्तार नेताओं और छात्रों को रिहा करें

पटना, एजेंसियां। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि तेज प्रताप यादव, गिरफ्तार विपक्षी नेताओं और छात्र आंदोलन के दौरान हिरासत में लिए गए सभी छात्रों को तत्काल रिहा किया जाए। साथ ही उनके खिलाफ दर्ज सभी मुकदमे भी वापस लिए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सोमवार तक सरकार ने यह कदम नहीं उठाया तो राष्ट्रीय जनता दल (RJD) पूरे बिहार में बड़ा जनआंदोलन शुरू करेगा।   तेज प्रताप की गिरफ्तारी को बताया राजनीतिक कार्रवाई   तेजस्वी यादव ने कहा कि उनके बड़े भाई तेज प्रताप यादव को छात्र आंदोलन का समर्थन करने के कारण गिरफ्तार किया गया और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लोकतांत्रिक विरोध को दबाने के लिए विपक्षी नेताओं और छात्रों पर कार्रवाई कर रही है।   छात्रों पर दर्ज केस वापस लेने की मांग   तेजस्वी यादव ने कहा कि NEET आंदोलन के दौरान जिन छात्रों पर एफआईआर दर्ज की गई है, उन्हें तत्काल वापस लिया जाए। उनका कहना है कि छात्र अपने भविष्य और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग कर रहे थे, लेकिन सरकार ने उनकी आवाज सुनने के बजाय पुलिस कार्रवाई की।   चेतावनी: मांगें नहीं मानी गईं तो होगा राज्यव्यापी आंदोलन   आरजेडी नेता ने स्पष्ट कहा कि यदि तेज प्रताप यादव, अन्य गिरफ्तार नेताओं और छात्रों की रिहाई तथा मुकदमे वापस लेने की मांग 24 घंटे के भीतर पूरी नहीं हुई, तो पार्टी पूरे बिहार में व्यापक आंदोलन करेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से भी आंदोलन के लिए तैयार रहने का आह्वान किया।

abhishek singh जुलाई 26, 2026 0
बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर को समर्थन देने का ऐलान करते जनशक्ति जनता दल प्रमुख तेज प्रताप यादव
तेज प्रताप यादव ने प्रशांत किशोर को दिया समर्थन, बांकीपुर उपचुनाव को लेकर बिहार की राजनीति में हलचल

पटना, एजेंसियां। बिहार की राजनीति में बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। जनशक्ति जनता दल (JJD) के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर को समर्थन देने का ऐलान किया है। इस फैसले के बाद बिहार की सियासत में नई चर्चा शुरू हो गई है।   तेज प्रताप ने कहा- बदलाव के लिए प्रशांत किशोर का साथ   तेज प्रताप यादव ने कहा कि बांकीपुर सीट लंबे समय से एक ही राजनीतिक दल के प्रभाव में रही है और अब बदलाव की जरूरत है। उन्होंने प्रशांत किशोर को समर्थन देने की बात कही और जनता से उनके पक्ष में मतदान करने की अपील की।   JJD उम्मीदवार का नामांकन रद्द होने के बाद लिया फैसला   तेज प्रताप यादव की पार्टी के उम्मीदवार का नामांकन रद्द होने के बाद पार्टी ने बांकीपुर उपचुनाव में अपना प्रत्याशी नहीं उतारा। इसके बाद तेज प्रताप यादव ने प्रशांत किशोर को समर्थन देने का फैसला किया।   प्रशांत किशोर पहली बार चुनाव मैदान में   जन सुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के जरिए पहली बार सीधे चुनावी मैदान में उतर रहे हैं। उन्होंने बिहार की राजनीति में बदलाव और नई राजनीतिक व्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए चुनाव लड़ने का फैसला किया है।   बिहार की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा   तेज प्रताप यादव और प्रशांत किशोर का साथ आना बिहार की राजनीति में नए समीकरणों के रूप में देखा जा रहा है। तेज प्रताप यादव पहले राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से जुड़े रहे हैं और बाद में उन्होंने अपनी अलग राजनीतिक पार्टी बनाई।   राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, बांकीपुर उपचुनाव में यह समर्थन प्रशांत किशोर के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि तेज प्रताप यादव की अपनी राजनीतिक पहचान और समर्थक वर्ग है।   आगे की रणनीति पर नजर   अब सभी की नजर इस बात पर है कि तेज प्रताप यादव का समर्थन चुनावी परिणामों को कितना प्रभावित करता है और क्या यह बिहार की राजनीति में भविष्य के नए गठजोड़ की शुरुआत है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 25, 2026 0
पटना में NEET पेपर लीक और परीक्षा सुधारों को लेकर प्रदर्शन के दौरान पुलिस हिरासत में लिए गए तेज प्रताप यादव
तेज प्रताप यादव पुलिस हिरासत में लिए गए, बिहार बंद के दौरान प्रदर्शन में हुए शामिल

पटना, एजेंसियां। बिहार में NEET पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर बुलाए गए प्रदर्शन के दौरान जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। तेज प्रताप युवाओं के समर्थन में प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे थे, जहां पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया।   युवाओं के समर्थन में सड़क पर उतरे तेज प्रताप   तेज प्रताप यादव ने NEET पेपर लीक मामले और छात्रों की समस्याओं को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान कहा कि युवाओं के अधिकारों और भविष्य के लिए वह संघर्ष जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि छात्रों के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए।   पटना में प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई   बिहार बंद के दौरान पटना समेत कई जगहों पर प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति भी बनी। पुलिस ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई लोगों को हिरासत में लिया। तेज प्रताप यादव को भी प्रदर्शन स्थल से पुलिस अपने साथ ले गई। हालांकि, उन्हें बाद में छोड़ा गया या नहीं, इसकी जानकारी अधिकारियों की ओर से स्पष्ट नहीं की गई है।   धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई   तेज प्रताप यादव इससे पहले भी NEET पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर सरकार को जवाब देना चाहिए।   बिहार की राजनीति में बढ़ी हलचल   तेज प्रताप यादव के सड़क पर उतरने के बाद बिहार की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। वह लगातार युवाओं और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार पर हमला कर रहे हैं।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 25, 2026 0
JJD Tej Pratap Yadav
वृंदावन से तेज प्रताप की भविष्यवाणी: 'बिहार में बहुत जल्द बदल जाएगी सरकार

पटना, एजेंसियां। बिहार की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) के सुप्रीमो तेज प्रताप यादव ने मौजूदा राज्य सरकार के जल्द गिरने की भविष्यवाणी कर दी। वृंदावन प्रवास के दौरान उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि बिहार में बहुत जल्द सरकार बदलने वाली है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।   तेज प्रताप यादव ने अपनी पोस्ट में लिखा, "बिहार में बहुत जल्दी सरकार गिरने वाली है। यह मैंने पहले भी कहा था। मैं वृंदावन में हूं और भविष्यवाणी कर रहा हूं कि बहुत जल्द बिहार की सरकार बदल जाएगी।" उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं और एनडीए नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक भी हाल ही में संपन्न हुई है।   एनडीए में मतभेद का किया दावा तेज प्रताप यादव ने अपने बयान के जरिए यह संकेत देने की कोशिश की कि एनडीए के घटक दलों के बीच सबकुछ सामान्य नहीं है और गठबंधन के भीतर मतभेद बढ़ रहे हैं। हालांकि, उनके इस दावे पर एनडीए के किसी भी प्रमुख नेता की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में इसे राजनीतिक बयानबाजी के तौर पर भी देखा जा रहा है।   एनडीए ने विकास और समन्वय पर दिया जोर उधर, पटना में आयोजित एनडीए की बैठक में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार के सर्वांगीण विकास और जनकल्याण के लिए संगठन और सरकार के बीच समन्वय को और मजबूत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नियमित संवाद और बैठकों की परंपरा स्थापित कर गठबंधन को मजबूती दी है। सम्राट चौधरी ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और नीतीश कुमार के समृद्ध बिहार के लक्ष्य को पूरा करने के लिए एनडीए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। तेज प्रताप के बयान के बीच अब राज्य की राजनीति में सियासी अटकलें और तेज हो गई हैं।

abhishek singh जुलाई 11, 2026 0
Lalu Yadav Rabari Devi
लालू-राबड़ी को फिर मिली Z सिक्योरिटी और बुलेटप्रूफ गाड़ियां

पटना, एजेंसियां। बिहार सरकार ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव तथा पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की सुरक्षा को लेकर अपना पहले का फैसला बदलते हुए दोनों की Z श्रेणी की सुरक्षा बहाल कर दी है। इसके साथ ही उन्हें बुलेटप्रूफ वाहन की सुविधा भी दोबारा उपलब्ध करा दी गई है। सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब कुछ समय पहले बंगला विवाद के दौरान दोनों की सुरक्षा घटा दी गई थी, जिसके बाद लालू प्रसाद और राबड़ी देवी ने सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई सुरक्षा वापस लौटा दी थी।   जानकारी के अनुसार जानकारी के अनुसार, अब दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों को पहले की तरह Z कैटेगरी सुरक्षा मिलेगी। इस श्रेणी में लगभग 22 प्रशिक्षित सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं। इनमें घर की सुरक्षा के लिए हथियारबंद गार्ड, 24 घंटे तैनात रहने वाले पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (PSO), सुरक्षा वाहनों का काफिला और एक बुलेटप्रूफ कार शामिल होती है। सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य संभावित खतरों से वीआईपी व्यक्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है।   क्या है मामला ? दरअसल, राबड़ी देवी को सरकारी आवास खाली करने का नोटिस मिलने के बाद राज्य सरकार ने लालू परिवार की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की थी। इसके बाद लालू प्रसाद, राबड़ी देवी और तेज प्रताप यादव की सुरक्षा में कटौती कर दी गई थी। हालांकि, उस समय नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और सांसद मीसा भारती की सुरक्षा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया था।   सुरक्षा में कटौती के फैसले के विरोध में लालू प्रसाद और राबड़ी देवी ने सरLकार द्वारा उपलब्ध कराई गई सुरक्षा लौटा दी थी। बाद में तेजस्वी यादव और मीसा भारती ने भी अपनी सुरक्षा वापस कर दी थी। इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक गलियारों में काफी बयानबाजी और विवाद देखने को मिला था।   अब बिहार सरकार द्वारा सुरक्षा बहाल किए जाने के बाद लालू प्रसाद और राबड़ी देवी को फिर से Z श्रेणी सुरक्षा और बुलेटप्रूफ वाहन की सुविधा मिल गई है। इसे राज्य सरकार के बदले हुए रुख के रूप में देखा जा रहा है, जबकि राजनीतिक हलकों में इस फैसले को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

abhishek singh जुलाई 4, 2026 0
Tej Pratap Yadav Anushka Yadav
तेज प्रताप यादव ने अनुष्का यादव के भाई समेत आठ लोगों पर दर्ज कराई शिकायत

पटना, एजेंसियां। बिहार के पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव शुक्रवार देर रात सचिवालय थाना पहुंचे और अनुष्का यादव के भाई आकाश यादव समेत आठ लोगों के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। तीन पन्नों के आवेदन में तेज प्रताप यादव ने आरोप लगाया है कि संबंधित लोग उन्हें ब्लैकमेल कर रहे थे, पैसे की मांग कर रहे थे और उनकी सार्वजनिक छवि खराब करने की साजिश रच रहे थे। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।   सचिवालय थानाध्यक्ष गौतम कुमार ने बताया कि तेज प्रताप यादव का आवेदन प्राप्त हो गया है और उसमें लगाए गए सभी आरोपों की जांच की जा रही है। पुलिस तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की पड़ताल कर रही है। जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।   पहले आकाश यादव ने दर्ज कराया था मामला यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब छात्र नेता Akash Yadav ने कुछ दिन पहले ही तेज प्रताप यादव और उनके सहयोगी मोतीलाल यादव के खिलाफ पाटलिपुत्र थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आकाश यादव का आरोप था कि 6 जून को जब वह खाटूश्याम की यात्रा पर गए हुए थे, तब तेज प्रताप यादव अपने सहयोगी के साथ उनके पाटलिपुत्र स्थित घर पहुंचे और जबरन घर में प्रवेश करने की कोशिश की।   धमकी देने का भी लगाया गया था आरोप आकाश यादव ने अपनी शिकायत में यह भी दावा किया था कि उन्हें फोन पर जान से मारने की धमकी दी गई। उनके अनुसार, कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को लॉरेंस बिश्नोई गैंग का सदस्य बताते हुए गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी थी। इस मामले की भी पुलिस जांच कर रही है। अब तेज प्रताप यादव की ओर से दर्ज कराई गई नई शिकायत के बाद मामला और उलझ गया है। दोनों पक्षों की शिकायतों को ध्यान में रखते हुए पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

abhishek singh जून 20, 2026 0
Shiv Chandra Ram
एमएलसी टिकट विवाद पर आरजेडी में बढ़ी तकरार, शिवचंद्र राम के समर्थन में उतरे तेज प्रताप यादव

पटना, एजेंसियां। बिहार विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव से पहले राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) में टिकट वितरण को लेकर असंतोष खुलकर सामने आ गया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री शिवचंद्र राम ने एमएलसी टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर संगठन के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। इस बीच तेज प्रताप यादव भी उनके समर्थन में सामने आए हैं और पार्टी के रवैये पर सवाल उठाए हैं। तेज प्रताप ने जताई नाराजगी तेज प्रताप यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर शिवचंद्र राम का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि शिवचंद्र राम वर्षों से पार्टी और समाज के लिए समर्पित भाव से काम करते रहे हैं। संत रविदास के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने और समाज को जोड़ने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। तेज प्रताप ने कहा कि उनके साथ जिस प्रकार का व्यवहार किया गया, वह निराशाजनक और निंदनीय है। सामाजिक न्याय की राजनीति में सभी वर्गों को सम्मान और उचित भागीदारी मिलनी चाहिए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में भावुक हुए शिवचंद्र राम एमएलसी चुनाव के लिए आरजेडी उम्मीदवार के नामांकन के बाद शिवचंद्र राम की नाराजगी सार्वजनिक हो गई। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वे भावुक होकर रो पड़े। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने उन्हें विधान परिषद भेजने का आश्वासन दिया था, लेकिन अंतिम समय में उनका नाम सूची से बाहर कर दिया गया। उन्होंने बताया कि इस घटनाक्रम से वे मानसिक रूप से बेहद आहत हैं। दलित प्रतिनिधित्व का मुद्दा बना चर्चा का केंद्र शिवचंद्र राम ने अपने इस्तीफे में दलित और रविदास समाज की उपेक्षा का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि समाज के लोगों को उनसे बड़ी उम्मीदें थीं और टिकट नहीं मिलने से उनमें निराशा फैल गई है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने केवल संगठनात्मक पद छोड़ा है, पार्टी नहीं। उन्होंने आरजेडी नेतृत्व से दलित, आदिवासी, पिछड़ा, अतिपिछड़ा और अल्पसंख्यक समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट नीति बनाने की मांग की। वहीं उन्होंने लालू प्रसाद, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के प्रति आभार भी व्यक्त किया।

Unknown जून 9, 2026 0
Rabari Devi Tej Pratap
राबड़ी देवी की तबीयत बिगड़ी, हालचाल जानने पहुंचे तेज प्रताप

पटना, एजेंसियां। बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की तबीयत खराब होने की खबर के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। शनिवार को उनके बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल (JJD) के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव पटना स्थित राबड़ी आवास पहुंचे और अपनी मां का हालचाल जाना। मुलाकात के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए राबड़ी देवी की सेहत और परिवार की सुरक्षा को लेकर चल रही चर्चाओं पर प्रतिक्रिया दी। मां की तबीयत जानने पहुंचे तेज प्रताप राबड़ी आवास से बाहर निकलने के बाद तेज प्रताप यादव ने बताया कि उनकी मां अस्वस्थ हैं, इसलिए वह उनसे मिलने पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि परिवार के लिए मां की सेहत सबसे महत्वपूर्ण है और इसी कारण वह उनका हाल जानने आए थे। हालांकि, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की ओर से अब तक राबड़ी देवी की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सुरक्षा हटाने के दावे को बताया गलत तेज प्रताप यादव ने उन खबरों का खंडन किया जिनमें कहा जा रहा था कि लालू परिवार ने अपनी सरकारी सुरक्षा वापस कर दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि परिवार ने सुरक्षा हटाने का कोई निर्णय नहीं लिया है। उनके अनुसार, सुरक्षा कर्मियों ने दबाव में होने और अपना कमांड हटाए जाने की जानकारी दी थी, लेकिन परिवार की ओर से सुरक्षा लौटाने जैसी कोई कार्रवाई नहीं हुई। तेज प्रताप ने कहा कि बिहार में महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए और सरकार को इस दिशा में गंभीरता से काम करना चाहिए। आरजेडी ने लगाया सरकार पर आरोप दूसरी ओर, आरजेडी प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने दावा किया कि लालू परिवार ने सरकार द्वारा किए जा रहे कथित अपमान के विरोध में सुरक्षा वापस करने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि अब पार्टी कार्यकर्ता और नेता ही लालू परिवार की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेंगे। इस बयान के बाद राबड़ी आवास के बाहर बड़ी संख्या में आरजेडी समर्थकों की मौजूदगी भी देखी गई। सुरक्षा व्यवस्था में हाल ही में हुआ बदलाव गौरतलब है कि दो दिन पहले बिहार सरकार ने लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को दी गई जेड प्लस सुरक्षा में बदलाव करते हुए उन्हें बिहार पुलिस की विशेष सुरक्षा उपलब्ध कराई थी। वहीं तेज प्रताप यादव की वाई श्रेणी सुरक्षा भी समाप्त कर दी गई थी और उनकी सुरक्षा में केवल एक बॉडीगार्ड तैनात किया गया था। सरकार के इस फैसले के बाद से बिहार की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। अब राबड़ी देवी की तबीयत और सुरक्षा को लेकर उठे सवालों ने इस विवाद को और अधिक राजनीतिक रंग दे दिया है।

Unknown जून 6, 2026 0
Lalu Rabari Tejashwi Security
लालू-राबड़ी की Z+ सुरक्षा हटी, तेज प्रताप को सिर्फ एक बॉडीगार्ड; तेजस्वी का Y+ कवर बरकरार

पटना, एजेंसियां। बिहार सरकार ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव तथा पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। राज्य सुरक्षा समिति की बैठक के बाद जारी आदेश के अनुसार दोनों नेताओं की Z+ श्रेणी की सुरक्षा वापस ले ली गई है। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते उन्हें विशेष सुरक्षा व्यवस्था मिलती रहेगी। नई सुरक्षा व्यवस्था में क्या मिलेगा? सरकार के नए आदेश के मुताबिक लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को अब बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस के 2 से 8 जवान हाउस गार्ड के रूप में उपलब्ध रहेंगे। इसके अलावा पटना जिला बल के दो बॉडीगार्ड, बुलेटप्रूफ वाहन, एचक्यूआरटी पायलट और पुलिस एस्कॉर्ट की सुविधा भी जारी रहेगी। राबड़ी देवी की सुरक्षा में महिला अंगरक्षक की तैनाती भी बनी रहेगी। तेजस्वी यादव की सुरक्षा में कोई बदलाव नहीं बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की सुरक्षा व्यवस्था पहले की तरह बरकरार रखी गई है। उन्हें Y+ श्रेणी की सुरक्षा मिलती रहेगी। इस सुरक्षा व्यवस्था के तहत बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस के चार जवान, पटना जिला बल के छह बॉडीगार्ड, वाहन और एस्कॉर्ट सुविधा पहले की तरह उपलब्ध रहेंगे। तेज प्रताप यादव की सुरक्षा में कटौती लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव की सुरक्षा में कटौती की गई है। अब तक उन्हें A श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त थी, लेकिन नए आदेश के बाद उनकी श्रेणी समाप्त कर दी गई है। अब उनकी सुरक्षा के लिए केवल एक व्यक्तिगत अंगरक्षक तैनात रहेगा। परिवार के अन्य सदस्यों की सुरक्षा यथावत राज्य सुरक्षा समिति के आदेश के अनुसार लालू परिवार के अन्य सदस्यों की सुरक्षा में कोई बदलाव नहीं किया गया है। राज्यसभा सांसद मीसा भारती को तीन अंगरक्षक और राजश्री यादव को एक अंगरक्षक की सुविधा पहले की तरह मिलती रहेगी। सरकार के इस फैसले को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

Unknown जून 6, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana अगस्त 1, 2026 0