सरायकेला-खरसावां

Kharsawan Road
खरसावां-रड़गांव सड़क बनी हादसों का कारण, गड्ढों में जलभराव से राहगीरों की बढ़ी मुश्किलें

खरसावां। सरायकेला-खरसावां जिले को टाटा-रांची राष्ट्रीय राजमार्ग-33 से जोड़ने वाली खरसावां-रड़गांव सड़क बारिश के मौसम में लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गई है। करीब 30 किलोमीटर लंबी इस महत्वपूर्ण सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे और जलजमाव होने से दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है। रायजामा-कांडेरकुटी और रायजामा घाटी के आसपास स्थिति सबसे अधिक गंभीर है, जहां पानी से भरे गड्ढों में छोटे-बड़े वाहन फंस रहे हैं और वाहन चालकों को सड़क की वास्तविक स्थिति का अंदाजा नहीं लग पा रहा है।   बारिश के कारण बारिश के कारण सड़क की पिच कई स्थानों से उखड़ चुकी है और गिट्टियां बाहर निकल आई हैं। वहीं, पहाड़ी इलाकों से मिट्टी और पत्थर सड़क पर आने से दोपहिया वाहन चालकों के लिए सफर और भी जोखिमभरा हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हल्का ब्रेक लगाने पर भी बाइक फिसलने का खतरा बना रहता है और आए दिन छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं हो रही हैं। इस मार्ग का उपयोग प्रतिदिन खरसावां, रांची, बुंडू, तमाड़ और आसपास के क्षेत्रों के हजारों लोग करते हैं।   सड़क की खराब स्थिति को देखते हुए पथ निर्माण विभाग ने इसकी राइडिंग क्वालिटी सुधारने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग के अनुसार करीब 26 करोड़ रुपये की लागत से विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा आवश्यक स्थानों पर गार्डवाल निर्माण का प्रस्ताव भी शामिल किया गया है।   जानकारी के मुताबिक जानकारी के मुताबिक, इस सड़क के चौड़ीकरण और जीर्णोद्धार पर लगभग 54 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। वर्ष 2021-22 में निर्माण कार्य पूरा होने के कुछ ही वर्षों बाद सड़क जर्जर हो गई। स्थानीय लोगों ने निर्माण गुणवत्ता और ओवरलोड वाहनों को इसकी मुख्य वजह बताया है। सड़क की खराब हालत के कारण कई लोग अब सरायकेला, कांड्रा और चौका होकर वैकल्पिक मार्ग से यात्रा कर रहे हैं, जिससे उन्हें 50 से 55 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। लोगों ने प्रशासन से जल्द मरम्मत और गड्ढों की भराई कराने की मांग की है।

abhishek singh जुलाई 9, 2026 0
Adityapur Protest
हिमांशु सिंह हत्याकांड: आदित्यपुर में बंद का आह्वान, भाजपा कार्यकर्ताओं का सड़क पर जोरदार प्रदर्शन

आदित्यपुर। सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर क्षेत्र में हिमांशु सिंह हत्याकांड को लेकर तनाव और आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। घटना के विरोध में आज भाजपा कार्यकर्ता और समर्थक सड़क पर उतर आए और शहर में बंद का आह्वान करते हुए जमकर प्रदर्शन किया।   सुबह से ही बाजारों में दिखा बंद का असर   प्रदर्शन की शुरुआत सुबह से ही हो गई, जब कार्यकर्ताओं ने अलग-अलग इलाकों में घूमकर दुकानों और प्रतिष्ठानों को बंद कराने की अपील की। कई जगहों पर व्यापारियों ने स्वेच्छा से दुकानें बंद रखीं, जबकि कुछ स्थानों पर हल्की नोकझोंक की स्थिति भी देखने को मिली। बंद के कारण शहर के प्रमुख बाजारों में सामान्य गतिविधियां प्रभावित रहीं।   आरोपियों की गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की मांग   प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं ने हत्या मामले में शामिल आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और कड़ी सजा की मांग की। उनका कहना है कि जब तक पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन पर लापरवाही का भी आरोप लगाया।   मुख्य चौक-चौराहों पर जुटी भीड़   आदित्यपुर के प्रमुख चौक-चौराहों पर बड़ी संख्या में लोग जमा हुए और सरकार व प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान कई जगहों पर यातायात भी प्रभावित हुआ और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।   पुलिस प्रशासन अलर्ट, अतिरिक्त बल तैनात   स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल की तैनाती की है। अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है और कहा है कि कानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।   राजनीतिक हलचल तेज, विपक्ष ने भी उठाए सवाल   इस घटना के बाद क्षेत्र में राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है। विपक्षी दलों ने कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं सत्ताधारी दल ने भी कहा है कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।

abhishek singh जुलाई 3, 2026 0
East Singhbhum SSP Saraikela SP
अपराध पर जीरो टॉलरेंस! हेमंत सोरेन ने पूर्वी सिंहभूम के SSP और सरायकेला SP को हटाया

रांची। झारखंड में कानून-व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। देर रात जारी आदेश में पूर्वी सिंहभूम के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) और सरायकेला-खरसावां के पुलिस अधीक्षक (SP) को तत्काल प्रभाव से उनके पदों से हटाकर पुलिस मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया। मुख्यमंत्री ने दोनों अधिकारियों पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।   वरिष्ठ अधिकारियों को दिए विशेष निर्देश मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए इस कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया कि क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर लगातार नजर रखने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने चाईबासा आयुक्त और रांची के एडीजी को संबंधित क्षेत्र में कैंप कर प्रतिदिन हालात की समीक्षा करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा जमशेदपुर के डीआईजी को भी शहर में रहकर सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई की लगातार निगरानी करने के आदेश दिए गए हैं।   जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता हेमंत सोरेन ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार के लिए जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि अपराधियों के खिलाफ किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी और कानून तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। साथ ही उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही या जवाबदेही से बचने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।   कानून-व्यवस्था मजबूत करने पर सरकार का जोर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में अपराध नियंत्रण और बेहतर पुलिसिंग सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक प्रशासनिक कदम लगातार उठाए जा रहे हैं। अधिकारियों को जवाबदेह बनाते हुए सरकार यह संदेश देना चाहती है कि कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। इस कार्रवाई को राज्य में पुलिस प्रशासन को अधिक जवाबदेह बनाने और अपराध पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार ने संकेत दिया है कि भविष्य में भी यदि किसी जिले में कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ इसी तरह की सख्त कार्रवाई की जाएगी।

abhishek singh जुलाई 1, 2026 0
Saraikela-Kharsawan Muharram
खरसावां में मुहर्रम जुलूस को लेकर प्रशासन अलर्ट, 27 जून को निकलेगा जुलूस

सरायकेला-खरसावां। सरायकेला-खरसावां जिले के खरसावां में मुहर्रम पर्व को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी सिलसिले में खरसावां थाना परिसर में शांति समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) प्रधान माझी ने की। बैठक में विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और शांति समिति के सदस्यों ने हिस्सा लिया।   बैठक में निर्णय लिया गया कि 26 जून को मुहर्रम पर्व मनाया जाएगा, जबकि 27 जून को पारंपरिक जुलूस निकाला जाएगा। प्रशासन ने जुलूस मार्ग पर साफ-सफाई, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।   सुरक्षा व्यवस्था के विशेष इंतजाम प्रशासन ने मुहर्रम जुलूस के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। थाना प्रभारी राहुल सिंह ने बताया कि जुलूस मार्ग पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहेगा और संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। बीडीओ प्रधान माझी और अंचल अधिकारी (सीओ) कप्तान माझी ने स्पष्ट किया कि अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी प्रशासन की विशेष नजर रहेगी ताकि किसी तरह की भ्रामक सूचना से माहौल खराब न हो।   शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक बिजली रहेगी बाधित प्रशासन ने जानकारी दी कि जुलूस के दौरान सुरक्षा कारणों से 27 जून को शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से बंद रहेगी। वहीं, स्थानीय अस्पतालों में आवश्यक दवाओं और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।   यह रहेगा जुलूस का मार्ग बैठक के बाद अधिकारियों और शांति समिति के सदस्यों ने जुलूस मार्ग का निरीक्षण भी किया। मुहर्रम जुलूस बेहरासाही स्थित इमामवाड़े से शुरू होकर तांतीसाही, भट्टी चौक, चांदनी चौक, बाजारसाही, राजवाड़ी और कुम्हारसाही होते हुए टुनियाबाड़ी स्थित करबला में समाप्त होगा। प्रशासन ने सभी नागरिकों से आपसी भाईचारे और सहयोग के साथ पर्व मनाने की अपील की है।

abhishek singh जून 23, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi अगस्त 7, 2026 0