हिमाचल प्रदेश

Shimla Consumer Court Order
जियोफाइबर की खराब सेवा पर उपभोक्ता आयोग सख्त, कंपनी को ₹10,000 मुआवजा देने का आदेश

शिमला, एजेंसियां। हिमाचल प्रदेश के शिमला जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने रिलायंस जियोफाइबर को खराब इंटरनेट सेवा और उपभोक्ता की शिकायतों का समय पर समाधान नहीं करने के मामले में दोषी ठहराया है। आयोग ने कंपनी को पीड़ित उपभोक्ता को ₹10,000 मुआवजा देने और बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के इंटरनेट सेवा बहाल करने का निर्देश दिया है।   बार-बार शिकायत के बावजूद नहीं मिली राहत   शिमला निवासी प्रतिमा चौहान ने मार्च 2025 में छह महीने का जियोफाइबर ब्रॉडबैंड प्लान लिया था। अप्रैल 2025 से उनका इंटरनेट बार-बार बंद रहने लगा। उन्होंने कई बार कंपनी से शिकायत की, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। लगातार खराब सेवा के कारण उनकी पढ़ाई और दैनिक कार्य प्रभावित हुए, जिसके बाद उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।   आयोग ने सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना   21 जुलाई 2026 को दिए गए अपने आदेश में आयोग ने कहा कि कंपनी उपभोक्ता को भुगतान के अनुरूप सेवा देने में विफल रही। आयोग ने इसे सेवा में कमी (Deficiency in Service) और अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice) माना। इसके साथ ही जियोफाइबर को निर्देश दिया गया कि वह उपभोक्ता का इंटरनेट कनेक्शन बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के दोबारा चालू करे और मानसिक पीड़ा व मुकदमे के खर्च के लिए ₹10,000 का एकमुश्त मुआवजा दे। आदेश का पालन 45 दिनों के भीतर करने को कहा गया है।

abhishek singh जुलाई 26, 2026 0
हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति के काडू नाला के पास भूस्खलन के बाद जारी राहत एवं बचाव अभियान
हिमाचल के लाहौल-स्पीति में दर्दनाक भूस्खलन, चट्टान गिरने से 13 लोगों की मौत; राहत एवं बचाव अभियान जारी

शिमला, एजेंसियां। हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले में शुक्रवार को बड़ा हादसा हो गया। उदयपुर–पांगी मार्ग पर काडू नाला (Kadu Nala) के पास अचानक पहाड़ी से विशाल चट्टानें गिरने से एक यात्री वाहन उनकी चपेट में आ गया। हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 6 महीने का एक मासूम बच्चा भी शामिल है। घटना के बाद प्रशासन, पुलिस और राहत एजेंसियों ने मौके पर बचाव अभियान शुरू कर दिया है।   चलती टैक्सी पर गिरी विशाल चट्टानें   पुलिस के अनुसार, टाटा सूमो वाहन कुल्लू से किलाड़ की ओर जा रहा था। इसी दौरान काडू नाला के पास अचानक पहाड़ी से भारी चट्टानें वाहन पर आ गिरीं। टक्कर इतनी भीषण थी कि वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसके पिछले हिस्से में आग भी लग गई। हादसे के समय वाहन में 15 लोग सवार थे।   13 लोगों की मौत, दो लोग बचाए गए   हादसे में 13 यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो लोग गंभीर रूप से घायल अवस्था में बचा लिए गए। घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। मृतकों की पहचान की प्रक्रिया भी प्रशासन द्वारा की जा रही है।   राहत और बचाव अभियान जारी   घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, स्थानीय प्रशासन, सीमा सड़क संगठन (BRO) और अन्य राहत दल मौके पर पहुंच गए। मलबा हटाने और प्रभावित क्षेत्र को सुरक्षित बनाने का काम जारी है। पहाड़ी क्षेत्र में लगातार भूस्खलन की आशंका के कारण बचाव कार्य सावधानीपूर्वक किया जा रहा है।   भारी बारिश के चलते बढ़ा भूस्खलन का खतरा   हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के कारण कई पर्वतीय इलाकों में भूस्खलन की घटनाएं बढ़ गई हैं। प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने और संवेदनशील मार्गों पर विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 25, 2026 0
IMD Heavy Rain
IMD का कई राज्यों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट, गुजरात, राजस्थान और कोंकण के लिए विशेष चेतावनी जारी

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के कई राज्यों में अगले 24 से 48 घंटों के दौरान भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। विशेष रूप से गुजरात, राजस्थान, कोंकण एवं गोवा में तेज बारिश, जलभराव और अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) की आशंका जताई गई है। मौसम विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों के लोगों से सतर्क रहने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।   कई राज्यों में ऑरेंज और रेड अलर्ट   IMD के अनुसार, गुजरात के कई जिलों, दक्षिणी राजस्थान और कोंकण क्षेत्र में अत्यधिक बारिश हो सकती है। कुछ इलाकों के लिए रेड अलर्ट जबकि अन्य क्षेत्रों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। तेज बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव, नदियों के जलस्तर में वृद्धि और यातायात प्रभावित होने की संभावना है।   पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन का खतरा   उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों में भी लगातार बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। मौसम विभाग ने इन राज्यों में भूस्खलन, चट्टानें गिरने और सड़क मार्ग बाधित होने की आशंका जताई है। स्थानीय प्रशासन को राहत एवं बचाव दलों को सतर्क रखने के निर्देश दिए गए हैं।   लोगों को सतर्क रहने की सलाह   IMD ने लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने, जलभराव वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतने और नदी-नालों के आसपास नहीं जाने की सलाह दी है। प्रशासन को भी संभावित आपदा से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां पूरी रखने को कहा गया है। अगले कुछ दिनों तक देश के कई हिस्सों में मानसून के सक्रिय रहने की संभावना है।

abhishek singh जुलाई 22, 2026 0
Himachal Pradesh Weather
हिमाचल प्रदेश के चार जिलों में भारी बारिश का रेड अलर्ट, आज सभी स्कूल बंद; प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी

शिमला, एजेंसियां। भारतीय मौसम विभाग (IMD) द्वारा भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किए जाने के बाद हिमाचल प्रदेश के मंडी, कांगड़ा, सिरमौर और शिमला जिलों में आज सभी सरकारी और निजी स्कूल बंद रखने के आदेश दिए गए हैं। लगातार बारिश और भूस्खलन की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन ने एहतियात के तौर पर यह फैसला लिया है।    भारी बारिश और भूस्खलन का खतरा   मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के दौरान कई इलाकों में अत्यधिक भारी बारिश की संभावना जताई है। इसके चलते नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ सकता है तथा पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन की घटनाएं होने का खतरा बना हुआ है।    प्रशासन ने लोगों से की सतर्क रहने की अपील   जिला प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम संबंधी आधिकारिक चेतावनियों का पालन करने की अपील की है। संवेदनशील इलाकों में आपदा प्रबंधन और राहत दलों को भी अलर्ट पर रखा गया है।    पर्यटकों के लिए भी जारी हुई सलाह   प्रशासन ने राज्य में मौजूद पर्यटकों से भी मौसम सामान्य होने तक पहाड़ी और नदी किनारे के इलाकों में जाने से बचने की सलाह दी है। कई मार्गों पर निगरानी बढ़ा दी गई है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।    मौसम विभाग की निगरानी जारी   IMD ने कहा है कि प्रदेश के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक बारिश का दौर जारी रह सकता है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है।

abhishek singh जुलाई 21, 2026 0
IG Sudarshan Mandal
झारखंड के जेल में आईजी सुदर्शन मंडल को हार्ट अटैक, रांची के निजी अस्पताल में भर्ती

रांची। झारखंड के जेल महानिरीक्षक (आईजी) और 2006 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सुदर्शन मंडल की सोमवार को अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें रांची के कोकर स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्रारंभिक चिकित्सीय जांच में उन्हें हार्ट अटैक आने की पुष्टि हुई, जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें तत्काल आईसीयू में भर्ती कर उपचार शुरू कर दिया। फिलहाल उनकी स्थिति पर विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम लगातार नजर बनाए हुए है।   परिजनों के अनुसार परिजनों के अनुसार, सोमवार को अचानक सीने में तकलीफ और स्वास्थ्य बिगड़ने की शिकायत के बाद सुदर्शन मंडल को तुरंत अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने आवश्यक जांच की, जिसमें हृदयाघात की पुष्टि हुई। इसके बाद उन्हें गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में शिफ्ट कर विशेष उपचार शुरू किया गया। अस्पताल सूत्रों का कहना है कि उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर रखने की कोशिश की जा रही है और आगे की चिकित्सा प्रक्रिया जारी है।   सुदर्शन मंडल झारखंड कैडर के 2006 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हैं और वर्तमान में राज्य के जेल महानिरीक्षक (आईजी) के रूप में कार्यरत हैं। अपने लंबे प्रशासनिक और पुलिस सेवा के दौरान उन्होंने राज्य के कई महत्वपूर्ण जिलों और पुलिस मुख्यालय में अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं। उनकी पहचान एक कुशल, अनुशासित और अनुभवी पुलिस अधिकारी के रूप में रही है।   अस्पताल प्रबंधन के अनुसार उनके अस्पताल में भर्ती होने की खबर मिलते ही प्रशासनिक और पुलिस महकमे में चिंता का माहौल है। कई वरिष्ठ अधिकारी और शुभचिंतक उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी स्वास्थ्य स्थिति की निगरानी कर रही है और आवश्यक जांच व उपचार किए जा रहे हैं। फिलहाल सुदर्शन मंडल की हालत पर चिकित्सकों की कड़ी निगरानी है। डॉक्टरों का कहना है कि अगले कुछ घंटे उनके स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। प्रशासन और उनके परिवार को उम्मीद है कि उपचार के बाद उनकी स्थिति में जल्द सुधार होगा। 

anjali kumari जुलाई 13, 2026 0
Traditional wooden houses in Malana Village surrounded by Himalayan mountains in Himachal Pradesh, showcasing its unique heritage.
हिमाचल का रहस्यमयी मलाणा गांव: यहां छूने, मंदिर में प्रवेश और रात रुकने पर हैं सख्त नियम, जानिए क्यों है इतना खास

Malana Village Himachal Pradesh: हिमाचल प्रदेश की पार्वती घाटी में बसा मलाणा गांव अपनी अनोखी परंपराओं, प्राचीन स्वशासन व्यवस्था और सख्त सामाजिक नियमों के लिए जाना जाता है। यहां आने वाले पर्यटकों को स्थानीय रीति-रिवाजों का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। क्यों चर्चा में रहता है मलाणा गांव? हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले की पार्वती घाटी में लगभग 8,700 फीट की ऊंचाई पर स्थित मलाणा भारत के सबसे अनोखे गांवों में गिना जाता है। प्राकृतिक सुंदरता से घिरा यह गांव अपनी अलग संस्कृति, पारंपरिक स्वशासन प्रणाली और सदियों पुरानी मान्यताओं के कारण दुनियाभर के पर्यटकों को आकर्षित करता है। मलाणा को अक्सर "लिटिल ग्रीस ऑफ द हिमालय" भी कहा जाता है। स्थानीय लोककथाओं में गांव के लोगों का संबंध सिकंदर महान की सेना से भी जोड़ा जाता है, हालांकि इसका कोई ठोस ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। यहां क्यों हैं सख्त नियम? मलाणा में आने वाले पर्यटकों को स्थानीय परंपराओं का पालन करना जरूरी माना जाता है। गांव में कई जगहों पर बाहरी लोगों को मंदिर परिसर या धार्मिक स्थलों को छूने की अनुमति नहीं होती। श्रद्धालुओं और पर्यटकों से इन नियमों का सम्मान करने की अपेक्षा की जाती है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, गांव के आराध्य देवता जमलू देवता यहां के सामाजिक और धार्मिक जीवन के केंद्र हैं। गांव की पारंपरिक व्यवस्था आज भी इन्हीं मान्यताओं के आधार पर संचालित होती है। मलाणा की प्राचीन स्वशासन व्यवस्था मलाणा अपनी पारंपरिक ग्राम परिषद के लिए भी प्रसिद्ध है। माना जाता है कि यहां सदियों से स्थानीय परिषद गांव के प्रशासन और विवादों का निपटारा करती आ रही है। यह व्यवस्था भारत की सबसे पुरानी स्थानीय स्वशासन प्रणालियों में से एक मानी जाती है। मलाणा में क्या देखें? पारंपरिक लकड़ी के खूबसूरत घर और प्राचीन वास्तुकला दूर से जमलू देवता मंदिर और रेनुका देवी मंदिर के दर्शन पार्वती घाटी और हिमालय की शानदार प्राकृतिक वादियां स्थानीय संस्कृति और सदियों पुरानी जीवनशैली यात्रा के दौरान रखें इन बातों का ध्यान स्थानीय नियमों और परंपराओं का सम्मान करें। मंदिरों और धार्मिक स्थलों को बिना अनुमति स्पर्श न करें। फोटोग्राफी से पहले स्थानीय लोगों की अनुमति लें। स्वच्छता बनाए रखें और पर्यावरण संरक्षण का ध्यान रखें। ध्यान दें: मलाणा से जुड़ी कई बातें स्थानीय लोककथाओं, धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक विश्वासों पर आधारित हैं। इन्हें ऐतिहासिक या वैज्ञानिक तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।  

anmol जुलाई 13, 2026 0
Mid-Day-Meal Workers Strike
हिमाचल में मिड-डे मील वर्कर्स की प्रदेशव्यापी हड़ताल, स्कूलों में नहीं बना भोजन

शिमला। हिमाचल प्रदेश में मिड-डे मील वर्कर्स ने सोमवार को अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदेशव्यापी हड़ताल की, जिसके चलते सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए मिड-डे मील तैयार नहीं हो सका। सीटू (CITU) से संबद्ध मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन के बैनर तले हजारों कर्मचारियों ने शिमला में टालैंड से सचिवालय तक रोष रैली निकालकर केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। कई स्कूलों में शिक्षकों ने अपने स्तर पर बच्चों के भोजन की व्यवस्था की।   12 महीने वेतन और हरियाणा मॉडल लागू करने की मांग हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें पूरे वर्ष काम करने के बावजूद केवल सीमित अवधि का भुगतान मिलता है। उन्होंने हाईकोर्ट के फैसले के अनुरूप 12 महीने का वेतन देने, हरियाणा की तर्ज पर 7,000 रुपये मासिक मानदेय, ग्रेच्युटी, पेंशन और नियमित सेवा नीति लागू करने की मांग उठाई। साथ ही आंगनबाड़ी कर्मचारियों की तरह अवकाश सुविधा देने की भी मांग की गई।   वेतन में बढ़ोतरी नहीं, महीनों तक भुगतान का इंतजार यूनियन का आरोप है कि पिछले 17 वर्षों में केंद्र सरकार ने उनके मानदेय में कोई वृद्धि नहीं की। वहीं राज्य सरकार भी कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान को लेकर गंभीर नहीं है। उनका कहना है कि कई बार तीन-तीन महीने तक वेतन नहीं मिलता और भुगतान भी किस्तों में किया जाता है। इसके अलावा साल में तीन बार अनिवार्य मेडिकल जांच का खर्च भी कर्मचारियों को स्वयं वहन करना पड़ता है।   25 बच्चों की शर्त हटाने की मांग मिड-डे मील वर्कर्स ने 25 विद्यार्थियों की न्यूनतम संख्या की शर्त समाप्त करने की भी मांग की है। उनका कहना है कि छात्र संख्या कम होने पर कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी जाती हैं, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित होती है।   यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक एवं उग्र किया जाएगा।

abhishek singh जून 22, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Security personnel conduct a search operation after a terror attack in Jammu and Kashmir's Kulgam district.
राष्ट्रीय

जम्मू-कश्मीर में 10 दिन में दूसरा आतंकी हमला, तीन की मौत; सुरक्षा व्यवस्था और सख्त

kalpana अगस्त 1, 2026 0