Narendra Modi और Giorgia Meloni के बीच बढ़ती दोस्ती एक बार फिर चर्चा में है। इटली दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने मेलोनी को भारत की लोकप्रिय ‘मेलोडी’ टॉफी गिफ्ट की, जिसके बाद दोनों नेताओं की मुलाकात सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हो गई।
मेलोनी ने इस खास गिफ्ट के लिए पीएम मोदी को धन्यवाद देते हुए एक वीडियो साझा किया, जिसमें वह मुस्कुराते हुए कहती नजर आईं कि प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें “बहुत बढ़िया टॉफी” गिफ्ट की है।
प्रधानमंत्री मोदी अपने पांच देशों के दौरे के अंतिम चरण में Italy पहुंचे हैं। यह यात्रा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के निमंत्रण पर हो रही है।
भारत और इटली इस समय “जॉइंट स्ट्रेटेजिक एक्शन प्लान 2025-2029” के तहत अपने संबंधों को नई मजबूती देने पर काम कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, विज्ञान, तकनीक और सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
रोम पहुंचने के बाद पीएम मोदी ने जॉर्जिया मेलोनी के साथ मशहूर Colosseum का दौरा भी किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि रोम पहुंचने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री मेलोनी के साथ डिनर किया और फिर ऐतिहासिक कोलोसियम घूमने गए। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने कई वैश्विक और द्विपक्षीय मुद्दों पर विचार साझा किए।
बुधवार को पीएम मोदी और मेलोनी के बीच औपचारिक वार्ता होने वाली है। इसमें:
जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। हाल के वर्षों में भारत और इटली के रिश्तों में तेजी से मजबूती आई है और दोनों देश रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए गंभीरता से काम कर रहे हैं।
पीएम मोदी ने अपने दौरे के दौरान यह भी बताया कि इटालियन कलाकार Giampaolo Tomassetti ने उन्हें वाराणसी की एक खूबसूरत पेंटिंग भेंट की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति के प्रति टोमासेटी का लगाव चार दशक से भी ज्यादा पुराना है। उन्होंने वैदिक संस्कृति और Mahabharata से जुड़ी कई कलाकृतियों पर काम किया है।
पीएम मोदी द्वारा मेलोनी को ‘मेलोडी’ टॉफी गिफ्ट किए जाने को सोशल media पर लोग “मेलोडी डिप्लोमेसी” कहकर भी चर्चा कर रहे हैं। दोनों नेताओं की दोस्ताना केमिस्ट्री पहले भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सुर्खियां बटोर चुकी है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
सिंगापुर के पूर्व वरिष्ठ राजनयिक और भू-राजनीतिक विशेषज्ञ Kishore Mahbubani ने भारत की आर्थिक प्रगति की सराहना करते हुए कहा कि आज भारत की अर्थव्यवस्था ब्रिटेन से बड़ी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि आज़ादी के बाद भारत ने उल्लेखनीय विकास किया है और आने वाले दशकों में उसकी अर्थव्यवस्था और तेज़ी से बढ़ेगी। भारत की विकास यात्रा को बताया 'असली कमाल' एक कार्यक्रम के दौरान किशोर महबूबानी ने कहा कि दुनिया का ध्यान अक्सर चीन की आर्थिक सफलता पर केंद्रित रहता है, जबकि भारत की विकास गाथा भी उतनी ही प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि लगभग 100 साल पहले भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था, लेकिन आज वही भारत आर्थिक आकार के मामले में ब्रिटेन से आगे निकल चुका है। 2050 तक ब्रिटेन से चार गुना बड़ी हो सकती है भारतीय अर्थव्यवस्था महबूबानी ने दावा किया कि मौजूदा रुझान जारी रहे तो वर्ष 2050 तक भारत की अर्थव्यवस्था ब्रिटेन की तुलना में लगभग चार गुना बड़ी हो सकती है। उनके अनुसार यह बदलाव भारत की आर्थिक क्षमता और दीर्घकालिक विकास का संकेत है। 'भारत और चीन का दबदबा कोई नई बात नहीं' उन्होंने कहा कि पिछले लगभग 2,000 वर्षों में से करीब 1,800 वर्षों तक भारत और चीन दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहे हैं। इसलिए दोनों देशों का दोबारा वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में उभरना कोई असामान्य घटना नहीं है। भारत ने बदली वैश्विक धारणा महबूबानी ने कहा कि लंबे समय तक दुनिया भारत को गरीबी के नजरिए से देखती रही, लेकिन अब यह धारणा तेजी से बदल रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2000 में ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था भारत से लगभग साढ़े तीन गुना बड़ी थी, जबकि आज भारत उसे पीछे छोड़ चुका है। भारत-चीन को लेकर बढ़ रही वैश्विक चर्चा हाल के वर्षों में भारत और चीन की बढ़ती आर्थिक और रणनीतिक ताकत को लेकर वैश्विक स्तर पर चर्चा तेज हुई है। इसी संदर्भ में महबूबानी ने कहा कि एशियाई देशों का उभार वैश्विक आर्थिक संतुलन में ऐतिहासिक बदलाव का संकेत है।
Iran US Conflict: मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ईरान ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) से जुड़े केंद्रों पर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागने का दावा किया है। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, इस हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने ली है। ईरानी सरकारी मीडिया का कहना है कि यह कार्रवाई हालिया अमेरिकी सैन्य अभियानों के जवाब में की गई। जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमला ईरान की सरकारी मीडिया के मुताबिक, IRGC ने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और CENTCOM से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया। हालांकि, हमले से हुए नुकसान और हताहतों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि अधिकांश मिसाइलों को एयर डिफेंस सिस्टम ने रास्ते में ही निष्क्रिय कर दिया। ट्रंप का कड़ा संदेश हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका इस कार्रवाई का करारा जवाब देगा। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने अधिकांश मिसाइलों को सफलतापूर्वक रोक दिया और जवाबी कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है। ट्रंप ने संकेत दिया कि यदि अमेरिकी ठिकानों पर हमले जारी रहे तो अमेरिका बड़े सैन्य अभियान से पीछे नहीं हटेगा। IRGC का दावा- जवाबी कार्रवाई जारी रहेगी IRGC ने अपने बयान में कहा कि जब तक अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और धमकियां बंद नहीं करता, तब तक उसका प्रतिरोध जारी रहेगा। ईरान ने अमेरिका पर क्षेत्र में अवैध हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए कहा कि वह अपने हितों और सुरक्षा की रक्षा के लिए हर हमले का जवाब देगा। इराक में अमेरिका-सऊदी की संयुक्त कार्रवाई इस बीच अमेरिकी CENTCOM ने जानकारी दी कि अमेरिका और सऊदी अरब की वायुसेनाओं ने इराक में ईरान समर्थित ठिकानों पर संयुक्त सटीक हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इन ठिकानों का इस्तेमाल हथियारों के भंडारण और ड्रोन हमलों की तैयारी के लिए किया जा रहा था। अमेरिका का दावा है कि पिछले 72 घंटों में उसके सैन्य ठिकानों और सहयोगी देशों के प्रतिष्ठानों पर 30 से अधिक ड्रोन हमले किए गए, जिन्हें सुरक्षा बलों ने नाकाम कर दिया। मध्य पूर्व में बढ़ा युद्ध का खतरा लगातार मिसाइल हमलों, जवाबी हवाई अभियानों और दोनों पक्षों की आक्रामक चेतावनियों के बाद पूरे मध्य पूर्व में बड़े सैन्य संघर्ष की आशंका और गहरा गई है। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि यदि ईरान समर्थित समूहों की ओर से हमले जारी रहे तो और अधिक कठोर सैन्य कार्रवाई की जाएगी। वहीं, ईरान ने भी अपने रुख में किसी नरमी के संकेत नहीं दिए हैं। ऐसे में क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है और विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास नहीं हुए तो यह टकराव व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले सकता है।
रिकॉर्ड कम बारिश और भीषण गर्मी से जल संकट गहराया लंदन, एजेंसियां। ब्रिटेन में सूखे का संकट लगातार गहराता जा रहा है। सरकार की पर्यावरण एजेंसी ने आधे इंग्लैंड को आधिकारिक तौर पर सूखाग्रस्त (Drought) घोषित कर दिया है। लगातार रिकॉर्ड कम बारिश और कई दौर की भीषण गर्मी के कारण नदियों, जलाशयों और भूजल स्तर में तेज गिरावट दर्ज की गई है। लाखों लोगों पर जल संकट का असर सूखे की स्थिति के चलते इंग्लैंड के कई हिस्सों में पाइप से पानी के उपयोग (Hosepipe Ban) पर प्रतिबंध लागू कर दिया गया है। इससे लाखों लोगों को पानी के इस्तेमाल में कटौती करनी पड़ रही है। सरकार ने नागरिकों से पानी की बचत करने और अनावश्यक उपयोग से बचने की अपील की है। खेती और पर्यावरण पर बढ़ा खतरा सूखे का असर कृषि, पशुपालन और वन्यजीवों पर भी दिखाई देने लगा है। कई नदियों का जलस्तर सामान्य से काफी नीचे पहुंच गया है, जबकि फसलों और वन क्षेत्रों पर भी इसका असर पड़ रहा है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो खाद्य उत्पादन और पर्यावरणीय संतुलन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। सरकार ने जल संरक्षण पर दिया जोर ब्रिटिश सरकार और पर्यावरण एजेंसी ने जल संकट से निपटने के लिए दीर्घकालिक जल अवसंरचना, नए जलाशयों के निर्माण और जल रिसाव कम करने की योजनाओं पर काम तेज करने की बात कही है। अधिकारियों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण भविष्य में ऐसी चरम मौसम घटनाएं और अधिक देखने को मिल सकती हैं।