बिहार

Anant Singh Casts Vote from Custody in Bihar RS Election

Anant Singh को कोर्ट से राहत, कस्टडी में आकर राज्यसभा चुनाव में डालेंगे वोट

surbhi मार्च 16, 2026 0
Anant Singh leaving custody to cast his vote in Bihar Rajya Sabha elections under police escort.
Anant Singh Casts Vote in Custody

 

बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए आज मतदान हो रहा है। इसी बीच मोकामा से जदयू विधायक Anant Singh को बड़ी राहत मिली है। कोर्ट के आदेश के बाद वे जेल से पुलिस कस्टडी में बाहर आकर राज्यसभा चुनाव में अपना वोट डाल सकेंगे।

 

सुबह 9 बजे से शुरू हुई वोटिंग

बिहार विधानसभा में राज्यसभा चुनाव के लिए सुबह 9 बजे से मतदान प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जो शाम 4 बजे तक चलेगी। इसके बाद शाम में ही नतीजों की घोषणा भी की जाएगी।

 

कस्टडी में लाकर डलवाया जाएगा वोट

मोकामा विधायक अनंत सिंह इस समय दुलारचंद यादव हत्याकांड मामले में जेल में बंद हैं। हालांकि MP-MLA कोर्ट ने उन्हें राज्यसभा चुनाव में वोट डालने की अनुमति दे दी है।

कोर्ट के आदेश के अनुसार उन्हें पुलिस कस्टडी में बिहार विधानसभा लाया जाएगा, जहां वे मतदान करेंगे और उसके बाद फिर से उन्हें जेल भेज दिया जाएगा।

 

एक सीट जीतने के लिए 41 वोट जरूरी

राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कुल 41 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होती है। बिहार विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों के अनुसार National Democratic Alliance (NDA) के पास लगभग 202 विधायकों का समर्थन है, जिससे चार सीटों पर उसकी जीत लगभग तय मानी जा रही है।

 

पांचवीं सीट पर दिलचस्प मुकाबला

पांचवीं सीट को लेकर राजनीतिक समीकरण काफी दिलचस्प हो गए हैं। ऐसे में अनंत सिंह का वोट NDA के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कोर्ट से मिली अनुमति के बाद उनके वोट डालने से NDA खेमे को राहत मिली है और राज्यसभा चुनाव की यह लड़ाई और भी रोचक हो गई है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में ब्लड कलेक्शन सेंटर
बिहार के 276 प्रखंडों में खुलेंगे ब्लड कलेक्शन सेंटर, ग्रामीण मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत

बिहार के 276 प्रखंडों में खुलेंगे ब्लड कलेक्शन सेंटर, ग्रामीण मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत पटना, एजेंसियां। बिहार के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना के तहत राज्य के 276 प्रखंडों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) में ब्लड कलेक्शन सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को रक्त की जरूरत पड़ने पर जिला अस्पताल या बड़े शहरों का चक्कर लगाने की परेशानी कम होगी।   प्रखंड स्तर पर मिलेगी रक्त संग्रह की सुविधा     नई व्यवस्था के तहत इन केंद्रों पर मरीजों और जरूरतमंदों के लिए रक्त संबंधी सुविधाएं प्रखंड स्तर पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। इससे ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बेहतर होने की उम्मीद है.   अभी कई ग्रामीण क्षेत्रों में रक्त की जरूरत पड़ने पर मरीजों के परिजनों को जिला मुख्यालय या बड़े अस्पतालों तक जाना पड़ता है। नई व्यवस्था से इस दूरी और समय को कम करने में मदद मिलेगी।   ब्लड बैंक से जोड़ा जाएगा कलेक्शन सेंटर     ब्लड कलेक्शन सेंटर पर रक्त के नमूने और संग्रह से जुड़ी सुविधा उपलब्ध होगी। जरूरत पड़ने पर संबंधित ब्लड बैंक से रक्त उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।   इससे आपात स्थिति में मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को तेज किया जा सकेगा। खासकर प्रसव, दुर्घटना और गंभीर बीमारी के मामलों में यह सुविधा ग्रामीण मरीजों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।   मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना के तहत पहल     राज्य सरकार की यह पहल मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना के तहत स्वास्थ्य सेवाओं को प्रखंड स्तर तक मजबूत करने की दिशा में की जा रही है। 276 प्रखंडों में केंद्र खुलने से बड़ी आबादी को स्थानीय स्तर पर रक्त संबंधी सुविधा मिलने की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने के साथ-साथ मरीजों को बेहतर और समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है।     ग्रामीण मरीजों को सबसे ज्यादा फायदा     ब्लड कलेक्शन सेंटर शुरू होने के बाद ग्रामीण मरीजों और उनके परिजनों को रक्त की व्यवस्था के लिए लंबी दूरी तय करने की जरूरत कम होगी। इससे समय और आने-जाने की परेशानी दोनों बच सकती हैं।   खासकर दूरदराज के प्रखंडों में रहने वाले लोगों के लिए यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। केंद्रों के संचालन और संबंधित ब्लड बैंकों से समन्वय की व्यवस्था प्रभावी होने पर बिहार के ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे को इससे बड़ा लाभ मिल सकता है।

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मुस्लिम दूसरी पत्नी की फैमिली पेंशन पर पटना हाईकोर्ट का फैसला
पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, मुस्लिम सरकारी कर्मचारी की दूसरी पत्नी को मिल सकेगी फैमिली पेंशन

मुस्लिम सरकारी कर्मचारी की दूसरी पत्नी को मिलेगी फैमिली पेंशन, पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला पटना, एजेंसियां। पटना हाईकोर्ट ने मुस्लिम सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसकी दूसरी पत्नी के पारिवारिक पेंशन के अधिकार को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि जब तक बहुविवाह पर रोक लगाने वाला कोई कानून लागू नहीं है, तब तक वैध मुस्लिम विवाह से हुई दूसरी पत्नी को केवल इस आधार पर पारिवारिक पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता कि वह मृत कर्मचारी की दूसरी पत्नी थी।   दूसरी पत्नी ने पेंशन के लिए किया था दावा     मामला एक दिवंगत मुस्लिम सरकारी कर्मचारी की दूसरी पत्नी से जुड़ा था। पति की मृत्यु के बाद महिला ने पारिवारिक पेंशन का दावा किया, लेकिन सरकारी अधिकारियों ने उसे दूसरी पत्नी होने के आधार पर पेंशन देने से इनकार कर दिया।   इसके बाद महिला ने अपने अधिकार के लिए पटना हाईकोर्ट का रुख किया। अदालत के सामने मुख्य सवाल यह था कि क्या मुस्लिम व्यक्तिगत कानून के तहत वैध दूसरी शादी से हुई पत्नी को सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद पारिवारिक पेंशन का अधिकार मिल सकता है।   बहुविवाह पर रोक लगाने वाला कानून नहीं     हाईकोर्ट ने कहा कि मुस्लिम व्यक्तिगत कानून के तहत बहुविवाह पर वर्तमान में कोई सामान्य वैधानिक प्रतिबंध नहीं है। ऐसे में वैध मुस्लिम विवाह से हुई दूसरी पत्नी को केवल इस आधार पर पारिवारिक पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता कि वह मृत कर्मचारी की दूसरी पत्नी है।   अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में समान नागरिक संहिता (UCC) या बहुविवाह को प्रतिबंधित करने वाला कोई कानून लागू होता है, तो कानूनी स्थिति अलग हो सकती है।   मुस्लिम पर्सनल लॉ को माना महत्वपूर्ण     पटना हाईकोर्ट ने अपने फैसले में मुस्लिम व्यक्तिगत कानून की मौजूदा कानूनी स्थिति को महत्वपूर्ण माना। अदालत के अनुसार, जब तक संसद या सक्षम विधायिका इस संबंध में कोई अलग कानून नहीं बनाती, तब तक वैध मुस्लिम विवाह को केवल इस आधार पर अमान्य नहीं माना जा सकता कि वह दूसरी शादी है।   इस फैसले का असर उन मामलों पर पड़ सकता है, जहां मुस्लिम सरकारी कर्मचारियों की मृत्यु के बाद उनकी एक से अधिक पत्नियों के बीच पारिवारिक पेंशन को लेकर विवाद सामने आते हैं।   फैसला पेंशन के अधिकार पर, सभी मामलों पर स्वतः लागू नहीं     अदालत का फैसला पारिवारिक पेंशन के अधिकार से संबंधित है। इसका अर्थ यह नहीं है कि हर मामले में दूसरी पत्नी को स्वतः पेंशन मिल जाएगी। संबंधित विवाह की वैधता और सरकारी पेंशन नियमों के तहत पात्रता जैसे पहलुओं को भी देखा जाएगा।   फिलहाल पटना हाईकोर्ट का यह फैसला मुस्लिम महिलाओं के पारिवारिक पेंशन अधिकार को लेकर महत्वपूर्ण न्यायिक टिप्पणी माना जा रहा है।

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बिहार: कृषि सलाहकार की सड़क हादसे में मौत, आक्रोशित भीड़ ने हाइवा ट्रक में लगाई आग जहानाबाद। बिहार के जहानाबाद जिले में मंगलवार देर शाम एक दर्दनाक सड़क हादसे में कृषि सलाहकार ज्ञानचंद शर्मा (50) की मौत हो गई। काको थाना क्षेत्र के सरस्वती मोड़ के पास तेज रफ्तार हाइवा ट्रक ने साइकिल सवार ज्ञानचंद शर्मा को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। हादसा इतना भयावह था कि उनकी मौके पर ही मौत हो गई।   ड्यूटी से लौटते समय हुआ हादसा     जानकारी के अनुसार, सफेपुर निवासी ज्ञानचंद शर्मा अमथुआ पंचायत में कृषि सलाहकार के पद पर कार्यरत थे। मंगलवार शाम वह काको बाजार से अपनी ड्यूटी पूरी कर साइकिल से घर लौट रहे थे। इसी दौरान सरस्वती मोड़ के पास पीछे से आ रहे हाइवा ट्रक ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। हादसे के बाद ट्रक उन्हें काफी दूर तक घसीटता चला गया।     ग्रामीणों ने सड़क जाम कर जताया आक्रोश     घटना के बाद मौके पर पहुंचे ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में लोगों ने जहानाबाद-बिहारशरीफ एनएच-33 को जाम कर दिया और दुर्घटनाग्रस्त हाइवा ट्रक में आग लगा दी। ट्रक में आग लगने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई और हाईवे पर वाहनों की लंबी कतार लग गई।     पुलिस ने चालक को हिरासत में लिया     सूचना मिलने के बाद काको थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। अग्निशमन विभाग की टीम ने पहुंचकर ट्रक में लगी आग पर काबू पाया। पुलिस ने हाइवा चालक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। वहीं, मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए जहानाबाद सदर अस्पताल भेज दिया गया है।     परिवार में पसरा मातम, जांच में जुटी पुलिस     परिजनों के अनुसार, ज्ञानचंद शर्मा हर दिन की तरह काम खत्म कर घर लौट रहे थे। अचानक हुए इस हादसे ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। काको थानाध्यक्ष राहुल कुमार ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और दोषी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।  

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kalpana जुलाई 30, 2026 0

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अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?