नालंदा, एजेंसियां। बिहार के नालंदा जिले के नूरसराय थाना क्षेत्र के परासी स्थित मध्य विद्यालय में मिड-डे मील खाने के बाद दो दर्जन से अधिक बच्चे बीमार पड़ गए। बच्चों को उल्टी, पेट दर्द और चक्कर आने की शिकायत के बाद बिहारशरीफ सदर अस्पताल ले जाया गया। शुरुआती जानकारी में भोजन में नमक की जगह गलती से डिटर्जेंट पाउडर (सर्फ) मिलाए जाने की आशंका सामने आई है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
घटना मंगलवार, 18 अगस्त की बताई जा रही है। स्कूल में बच्चों को मिड-डे मील में चावल और सोयाबीन की सब्जी परोसी गई थी। कुछ बच्चों ने भोजन में नमक कम होने की शिकायत की। इसी दौरान कथित तौर पर नमक की जगह डिटर्जेंट पाउडर भोजन में मिला दिया गया। इसके बाद खाना खाने वाले कई बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी।
तबीयत खराब होने पर बच्चों को तत्काल इलाज के लिए बिहारशरीफ सदर अस्पताल पहुंचाया गया। अलग-अलग रिपोर्टों में बीमार बच्चों की संख्या 24 से 40 के बीच बताई गई है, जबकि एक स्थानीय रिपोर्ट ने 34 बच्चों के अस्पताल पहुंचने की जानकारी दी है। डॉक्टरों के अनुसार बच्चों की हालत फिलहाल खतरे से बाहर है।
सिविल सर्जन डॉ. जय प्रकाश सिंह ने अस्पताल पहुंचकर बच्चों के स्वास्थ्य की जानकारी ली। प्रशासन की ओर से भी पूरे मामले की निगरानी की जा रही है।
घटना की जानकारी मिलने के बाद शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारी सक्रिय हुए हैं। भोजन के नमूने और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि भोजन में वास्तव में डिटर्जेंट कैसे पहुंचा और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
बिहार के मंत्री श्रवण कुमार भी अस्पताल पहुंचे और बीमार बच्चों तथा उनके परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने चिकित्सकों से बच्चों के इलाज की जानकारी ली और मामले में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही। सरकार ने घटना को गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए हैं।
इस घटना ने सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता, खाद्य सामग्री के सुरक्षित भंडारण और भोजन परोसने की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नालंदा, एजेंसियां। बिहार के नालंदा जिले के नूरसराय थाना क्षेत्र के परासी स्थित मध्य विद्यालय में मिड-डे मील खाने के बाद दो दर्जन से अधिक बच्चे बीमार पड़ गए। बच्चों को उल्टी, पेट दर्द और चक्कर आने की शिकायत के बाद बिहारशरीफ सदर अस्पताल ले जाया गया। शुरुआती जानकारी में भोजन में नमक की जगह गलती से डिटर्जेंट पाउडर (सर्फ) मिलाए जाने की आशंका सामने आई है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही होगी। नमक की जगह सर्फ परोसने का आरोप घटना मंगलवार, 18 अगस्त की बताई जा रही है। स्कूल में बच्चों को मिड-डे मील में चावल और सोयाबीन की सब्जी परोसी गई थी। कुछ बच्चों ने भोजन में नमक कम होने की शिकायत की। इसी दौरान कथित तौर पर नमक की जगह डिटर्जेंट पाउडर भोजन में मिला दिया गया। इसके बाद खाना खाने वाले कई बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी। बच्चों को अस्पताल में कराया गया भर्ती तबीयत खराब होने पर बच्चों को तत्काल इलाज के लिए बिहारशरीफ सदर अस्पताल पहुंचाया गया। अलग-अलग रिपोर्टों में बीमार बच्चों की संख्या 24 से 40 के बीच बताई गई है, जबकि एक स्थानीय रिपोर्ट ने 34 बच्चों के अस्पताल पहुंचने की जानकारी दी है। डॉक्टरों के अनुसार बच्चों की हालत फिलहाल खतरे से बाहर है। सिविल सर्जन डॉ. जय प्रकाश सिंह ने अस्पताल पहुंचकर बच्चों के स्वास्थ्य की जानकारी ली। प्रशासन की ओर से भी पूरे मामले की निगरानी की जा रही है। प्रशासन ने शुरू की जांच घटना की जानकारी मिलने के बाद शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारी सक्रिय हुए हैं। भोजन के नमूने और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि भोजन में वास्तव में डिटर्जेंट कैसे पहुंचा और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। मंत्री ने अस्पताल पहुंचकर जाना हाल बिहार के मंत्री श्रवण कुमार भी अस्पताल पहुंचे और बीमार बच्चों तथा उनके परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने चिकित्सकों से बच्चों के इलाज की जानकारी ली और मामले में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही। सरकार ने घटना को गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए हैं। इस घटना ने सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता, खाद्य सामग्री के सुरक्षित भंडारण और भोजन परोसने की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बिहार में मानसून एक बार फिर सक्रिय नजर आ रहा है। राज्य के कई हिस्सों में रुक-रुककर बारिश का दौर जारी है, जबकि कई जिलों में दिनभर बादल छाए हुए हैं। इसी बीच मौसम विभाग ने बुधवार को 11 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन इलाकों में भारी बारिश के साथ गरज-चमक, बिजली गिरने और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतने की अपील की है। किसानों को विशेष रूप से सलाह दी गई है कि गरज-चमक और बिजली गिरने की आशंका के दौरान खेतों में काम करने से बचें। इन 11 जिलों में ऑरेंज अलर्ट बुधवार को पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सारण, बक्सर, भोजपुर, अरवल, औरंगाबाद, रोहतास और कैमूर में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इनमें औरंगाबाद, रोहतास और कैमूर में बारिश की गतिविधियां अपेक्षाकृत अधिक रहने का अनुमान है। मौसम खराब होने के दौरान तेज हवाओं और आकाशीय बिजली को लेकर भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। बिहार में अब भी 41 फीसदी कम बारिश बारिश का दौर जारी रहने के बावजूद बिहार में इस मानसून अब तक सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार राज्य में अब तक 387.7 मिलीमीटर बारिश हुई है, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश का आंकड़ा 687.7 मिलीमीटर होना चाहिए था। इस लिहाज से राज्य में अब तक करीब 41 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि, आने वाले दिनों में मानसूनी गतिविधियां बढ़ने की संभावना से बारिश की कमी कुछ हद तक कम हो सकती है। 20 अगस्त को इन जिलों में भी ऑरेंज अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार 20 अगस्त को भी कई जिलों में भारी बारिश का खतरा रहेगा। इस दिन पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सारण, बक्सर, भोजपुर, अरवल, औरंगाबाद, रोहतास, कैमूर, सुपौल, अररिया, किशनगंज, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया और कटिहार में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान कुछ इलाकों में तेज बारिश के साथ बिजली गिरने और तेज हवाओं की स्थिति बन सकती है। 21 अगस्त को ज्यादातर जिलों में येलो अलर्ट 21 अगस्त को मौसम विभाग ने खगड़िया, मुंगेर, भागलपुर, बांका और जमुई को छोड़कर राज्य के बाकी अधिकांश जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। वहीं पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, अररिया और किशनगंज में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इन क्षेत्रों में तेज हवा और आकाशीय बिजली को लेकर भी चेतावनी जारी की गई है। बंगाल की खाड़ी का सिस्टम बढ़ा रहा बारिश मौसम में बदलाव के पीछे बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना निम्न दबाव क्षेत्र एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। इसके प्रभाव से पूर्वी भारत में मानसूनी गतिविधियां सक्रिय हैं। बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी वाली हवाएं बिहार की ओर पहुंच रही हैं। मानसून ट्रफ और इन नम हवाओं के प्रभाव से राज्य में आने वाले दिनों में भी रुक-रुककर बारिश जारी रहने की संभावना है। लोगों के लिए जरूरी सावधानी भारी बारिश, तेज हवाओं और आकाशीय बिजली के दौरान खुले मैदान, पेड़, बिजली के खंभों और ऊंची संरचनाओं के नीचे खड़े होने से बचें। किसान खराब मौसम में खेतों में काम करने से बचें और स्थानीय प्रशासन व मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें।
पटना। बिहार में छात्रों और युवाओं के मुद्दों को लेकर सियासत तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव आज, 19 अगस्त को राजधानी पटना में राजभवन मार्च करेंगे। मार्च में परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, नियमित भर्ती, बेरोजगारी और छात्रों की अन्य मांगों को प्रमुखता से उठाया जाएगा। तेजस्वी यादव और RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ-साथ छात्र संगठनों और युवाओं से मार्च में शामिल होने की अपील की है। प्रशासन की ओर से भी सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर तैयारियां की गई हैं। गांधी मैदान से राजभवन तक मार्च राजभवन मार्च की शुरुआत सुबह करीब 10 बजे गांधी मैदान से होने की जानकारी दी गई है। प्रदर्शनकारी विभिन्न प्रमुख मार्गों से होते हुए राजभवन की ओर बढ़ेंगे। मार्च के मद्देनजर पटना में ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव किया गया है और प्रशासन की ओर से एडवाइजरी जारी की गई है। इन रास्तों से गुजरेगा मार्च प्रस्तावित रूट के अनुसार मार्च जेपी गोलंबर, डाकबंगला चौराहा, तारामंडल, इनकम टैक्स गोलंबर, पटना वीमेंस कॉलेज, बिहार म्यूजियम, विश्वसरैया भवन, पंचमुखी हनुमान मंदिर और बेली रोड होते हुए लोकभवन की ओर जाएगा। प्रदर्शन को देखते हुए इन इलाकों में यातायात प्रभावित होने की संभावना है। गर्दनीबाग में अभ्यर्थियों से मिले थे तेजस्वी राजभवन मार्च से एक दिन पहले मंगलवार को तेजस्वी यादव ने गर्दनीबाग धरना स्थल पर पहुंचकर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों से मुलाकात की थी। उन्होंने छात्रों की मांगों का समर्थन किया और सरकार से उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करने की अपील की। तेजस्वी ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है और सरकार को छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुनना चाहिए। लालू यादव बोले- 'यूथ का फ्यूचर मत खाओ' मार्च को लेकर लालू प्रसाद यादव ने भी सोशल मीडिया के जरिए सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि 'दाल-भात खाओ, बट यूथ का फ्यूचर मत खाओ।' उन्होंने छात्रों और युवाओं से 19 अगस्त को पटना में एकजुट होने की अपील भी की। लालू ने पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था, भर्ती प्रक्रिया और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा। सीवान में फायरिंग के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा तेजस्वी यादव ने सीवान में छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर AK-47 से फायरिंग के मामले को लेकर भी सरकार से कई सवाल पूछे हैं। उन्होंने हथियार जारी करने, पुलिसकर्मी की तैनाती, फायरिंग के आदेश, इस्तेमाल हुए कारतूस, बैलिस्टिक जांच और कमांड-चेन की जवाबदेही से जुड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने मांग की है कि जांच सिर्फ फायरिंग करने वाले जवान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि हथियार किसके आदेश पर जारी किया गया और पूरी प्रक्रिया में किस-किस अधिकारी की जिम्मेदारी थी। छात्रों और युवाओं के मुद्दे होंगे केंद्र में राजभवन मार्च के जरिए RJD परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, भर्ती प्रक्रिया में नियमितता, पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को उठाने की तैयारी में है। मार्च को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ यातायात प्रबंधन के भी इंतजाम किए हैं।