पटना, एजेंसियां। पटना के नौबतपुर में दो सगी बहनों के साथ गैंगरेप का मामला सामने आया है। लड़कियों ने बताया कि उन्हें एक तिलक समारोह में डांस कार्यक्रम के बहाने गांव बुलाया गया था, जहां दोनों बहनों के साथ कई लोगों ने रेप किया।
पीड़िता के मुताबिक, आरोपियों ने उनके साथ मारपीट की और जान से मारने की धमकी भी दी। मामले में नौबतपुर थाने में तीन नामजद सहित 10 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। पुलिस गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है।
दोनों झारखंड के लातेहार जिले की रहने वाली है। वर्तमान में पटना के मीठापुर इलाके में किराए के मकान में रहती थीं। दोनों बहनों को आरोपियों ने 8 हजार रुपए में बुक किया और स्कूटी से अपने साथ ले गए।
पुलिस को दिए गए आवेदन के मुताबिक, घटना 18 जून की है। पीड़िताओं को नौबतपुर के एक गांव में तिलक समारोह के दौरान डांस कार्यक्रम के लिए बुलाया गया था। कार्यक्रम की बुकिंग भेलुरा रामपुर निवासी मुन्ना कुमार ने की थी।
आरोप है कि मुन्ना कुमार दोनों बहनों को मीठापुर से स्कूटी पर बैठाकर अपने गांव ले गया। वहां कार्यक्रम स्थल पर ले जाने के बजाय वह अपने चचेरे भाई सूरज, भानु कुमार और अन्य युवकों के साथ उन्हें जबरन एक सुनसान जगह पर ले गया।
पीड़िताओं का आरोप है कि इसके बाद उन्हें बंधक बनाकर अलग-अलग स्थानों पर ले जाया गया, जहां आरोपियों ने बारी-बारी से पूरी रात उनके साथ दुष्कर्म किया। जब उन्होंने वहां से भागने की कोशिश की तो आरोपियों ने उनके साथ मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी।
पीड़िता ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि उन्हें अलग-अलग स्थानों पर ले जाकर आरोपियों ने बारी-बारी से पूरी रात दुष्कर्म किया।
अगली सुबह, 19 जून को आरोपी दोनों बहनों को एक गाड़ी से वापस छोड़ने ले जा रहे थे। जब वाहन फुलवारीशरीफ इलाके में पहुंचा, तो युवतियों ने शोर मचाना शुरू कर दिया। उनकी चीख-पुकार सुनकर स्थानीय लोग मौके पर जुट गए और डायल-112 पर पुलिस को सूचना दी।
सूचना मिलते ही डायल-112 की पुलिस टीम मौके पर पहुंची और दोनों युवतियों को सुरक्षित अपने संरक्षण में लेकर फुलवारीशरीफ थाने पहुंची।
घटना की गंभीरता को देखते हुए तत्काल नौबतपुर पुलिस को सूचना दी गई। इसके बाद नौबतपुर थाना की टीम फुलवारीशरीफ पहुंची और पीड़िताओं को अपने साथ लेकर नौबतपुर थाने चली गई।
घटना की गंभीरता को देखते हुए फुलवारीशरीफ के SDPO-2 दीपक कुमार ने घटनास्थल का मुआयना किया। इसके साथ ही एफएसएल की टीम ने मौके पर पहुंचकर जरूरी साक्ष्य भी जुटाए। पुलिस ने तीन नामजद समेत एक दर्जन लोगों पर केस दर्ज किया है।
नौबतपुर थानाध्यक्ष मंजीत कुमार ठाकुर ने बताया कि, 'पीड़िताओं के आवेदन के आधार पर मुन्ना कुमार, सूरज कुमार और भानु कुमार सहित कुल 13 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
नौबतपुर थानाध्यक्ष ने बताया, "पुलिस ने एक आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है, जबकि अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है।"
उन्होंने आगे कहा, "दोनों पीड़िताओं का मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है। मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद उनका बयान दर्ज कराने के लिए न्यायालय भेजा जाएगा।"
घटना में शामिल अन्य फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की विशेष टीमें गठित की गई हैं। टीमें उनके संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही हैं। फिलहाल दोनों पीड़िताओं को मेडिकल टेस्ट के लिए अस्पताल भेजा गया है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
बिहार कैबिनेट का बड़ा फैसला, 19 विशेष अदालतों के गठन को मंजूरी; 171 नए पद भी सृजित होंगे पटना, एजेंसियां। बिहार सरकार ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में राज्य के 19 न्याय मंडलों में विशेष न्यायालयों के गठन को मंजूरी दी गई। इन अदालतों में एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम से जुड़े लंबित मामलों की सुनवाई की जाएगी। 19 न्याय मंडलों में बनेंगी विशेष अदालतें कैबिनेट के फैसले के अनुसार, राज्य के 19 न्याय मंडलों में विशेष अदालतें स्थापित की जाएंगी। इसका उद्देश्य एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई को तेज करना और पीड़ितों को जल्द न्याय दिलाना है। सरकार का मानना है कि अलग विशेष अदालतें होने से ऐसे मामलों की सुनवाई अधिक प्रभावी तरीके से की जा सकेगी और लंबित मामलों का निपटारा तेजी से संभव होगा। 171 नए पदों को मिली मंजूरी विशेष अदालतों के गठन के साथ ही सरकार ने 171 नए पदों के सृजन को भी मंजूरी दी है। इन पदों के जरिए नई अदालतों के संचालन के लिए आवश्यक न्यायिक एवं अन्य मानव संसाधन उपलब्ध कराया जाएगा। इससे अदालतों में मामलों की सुनवाई के लिए जरूरी प्रशासनिक ढांचा मजबूत होने की उम्मीद है। लंबित मामलों के निपटारे पर जोर बिहार में अदालतों में बड़ी संख्या में आपराधिक मामले लंबित हैं। ऐसे में विशेष अदालतों के गठन का उद्देश्य संबंधित कानून के तहत दर्ज मामलों को प्राथमिकता के साथ निपटाना है। सरकार के इस फैसले से एससी-एसटी समुदाय से जुड़े मामलों में न्यायिक प्रक्रिया को गति मिलने और पीड़ितों को समय पर न्याय मिलने की उम्मीद है। कैबिनेट ने 17 प्रस्तावों को दी मंजूरी बिहार कैबिनेट की बैठक में केवल विशेष अदालतों से संबंधित फैसला ही नहीं हुआ। सरकार ने कुल 17 प्रस्तावों को मंजूरी दी, जिनमें स्वास्थ्य क्षेत्र में PPP मॉडल और अन्य प्रशासनिक एवं विकास संबंधी फैसले भी शामिल हैं। विशेष अदालतों का गठन इन फैसलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसका सीधा संबंध गंभीर सामाजिक अपराधों से जुड़े मामलों के त्वरित न्याय से है।
राजगीर, एजेंसियां। नालंदा के प्रसिद्ध राजगीर रोपवे में मौसम खराब होने और आकाशीय बिजली गिरने के बाद तकनीकी खराबी आ गई। इसके चलते रोपवे के कई केबिन बीच हवा में रुक गए और उनमें सवार पर्यटक व श्रद्धालु काफी देर तक फंसे रहे। घटना के बाद मौके पर अफरातफरी का माहौल बन गया। हालांकि, राहत की बात रही कि सभी यात्रियों को सुरक्षित नीचे उतार लिया गया। आकाशीय बिजली से रोपवे का संचालन रुका जानकारी के मुताबिक, मंगलवार शाम अचानक मौसम बिगड़ने के दौरान आकाशीय बिजली गिरने से रोपवे के इंजन या इलेक्ट्रॉनिक हिस्से में तकनीकी खराबी आ गई। सुरक्षा के लिहाज से रोपवे का संचालन रोक दिया गया। उस समय विश्व शांति स्तूप से लौट रहे यात्रियों को लेकर जा रहे कई केबिन रास्ते में ही रुक गए। अलग-अलग रिपोर्टों में फंसे यात्रियों की संख्या लगभग 16 से 25 बताई गई है। करीब एक घंटे तक हवा में फंसे रहे यात्री रोपवे के अचानक रुकने से केबिन में मौजूद पर्यटक और श्रद्धालु घबरा गए। उमस और गर्मी के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। स्टेशन के नजदीक मौजूद कुछ यात्रियों को सीढ़ियों की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला गया, जबकि दूर फंसे यात्रियों को तकनीकी खराबी दूर होने तक केबिन में इंतजार करना पड़ा। वैकल्पिक इंजन से सभी को सुरक्षित उतारा रोपवे प्रबंधन की तकनीकी टीम ने तत्काल काम शुरू किया। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद तकनीकी खराबी को दूर किया गया और वैकल्पिक इंजन की मदद से रोपवे का संचालन बहाल किया गया। इसके बाद हवा में फंसे यात्रियों को सुरक्षित नीचे उतार लिया गया। जांच के बाद दोबारा शुरू हुआ रोपवे यात्रियों को सुरक्षित निकालने के बाद पूरे रोपवे सिस्टम की तकनीकी जांच और परीक्षण किया गया। व्यवस्था सामान्य पाए जाने के बाद परिचालन दोबारा शुरू कर दिया गया। घटना में किसी पर्यटक के घायल होने या जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है। प्रबंधन ने बताया कि खराब मौसम और आकाशीय बिजली के दौरान सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए रोपवे का संचालन रोकना जरूरी था। यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बाद ही सेवा बहाल की गई।
पटना: बिहार में मॉनसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। राज्य के कई हिस्सों में रुक-रुककर बारिश का दौर जारी है और मौसम विभाग (IMD) ने 34 जिलों के लिए आंधी, तेज बारिश और वज्रपात की चेतावनी जारी की है। कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट, जबकि अन्य जिलों में येलो अलर्ट घोषित किया गया है। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से खुले स्थानों पर जाने से बचने की अपील की है। इन जिलों में ऑरेंज अलर्ट मौसम विभाग ने किशनगंज, बक्सर, भोजपुर, पटना, बेगूसराय, अरवल, जहानाबाद, नालंदा, शेखपुरा, लखीसराय, कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद, गया और नवादा में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में तेज बारिश, आंधी और बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। इन जिलों में येलो अलर्ट पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, सीवान, सारण, वैशाली, समस्तीपुर, अररिया, खगड़िया, भागलपुर, कटिहार, मुंगेर, बांका और जमुई जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। यहां हल्की से मध्यम बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है। इन जिलों में भारी बारिश का खतरा मौसम विभाग के अनुसार अररिया, किशनगंज, कटिहार और बक्सर में भारी बारिश की संभावना है। इन इलाकों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं और वज्रपात का भी खतरा बना हुआ है। 10 अगस्त तक ऐसा ही रहेगा मौसम IMD के पूर्वानुमान के अनुसार अगले तीन से चार दिनों तक पूरे बिहार में मौसम का यही रुख बना रहेगा। 7 अगस्त: उत्तर बिहार, कोसी-सीमांचल और दक्षिण बिहार के कई जिलों में तेज बारिश की संभावना। 8 अगस्त: खगड़िया, भागलपुर और मुंगेर को छोड़कर लगभग पूरे बिहार में बारिश का अनुमान। 9 अगस्त: उत्तर और मध्य बिहार के जिलों में खराब मौसम बना रहेगा। 10 अगस्त: उत्तर-पश्चिम और दक्षिण बिहार के कई हिस्सों में बारिश और आंधी की संभावना बनी रहेगी। क्यों सक्रिय हुआ मॉनसून? मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार बिहार के आसपास मॉनसूनी ट्रफ सक्रिय है और बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी वाली पूर्वी हवाएं राज्य में पहुंच रही हैं। इसी कारण बादल तेजी से बन रहे हैं और कई जिलों में रुक-रुककर बारिश हो रही है। आने वाले दिनों में भी मॉनसून की गतिविधियां तेज रहने की संभावना है।