नई दिल्ली: आधुनिक बाइक्स और स्कूटर्स में अब किक स्टार्ट तेजी से गायब होता जा रहा है और उसकी जगह इलेक्ट्रिक स्टार्ट यानी सेल्फ स्टार्ट ने ले ली है। बटन दबाते ही इंजन चालू होने की सुविधा ने राइडिंग को पहले से कहीं ज्यादा आसान बना दिया है, लेकिन इसके साथ कुछ ऐसी कमजोरियां भी जुड़ी हैं जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।
किक स्टार्ट पूरी तरह मैकेनिकल तकनीक पर आधारित होता है। इसमें किसी बैटरी या इलेक्ट्रिकल पावर की जरूरत नहीं पड़ती। जब राइडर किक लीवर पर पैर से दबाव डालता है, तो यह इंजन के क्रैंकशाफ्ट को घुमाता है और पिस्टन के जरिए फ्यूल में दहन की प्रक्रिया शुरू होती है। इसी से इंजन स्टार्ट हो जाता है।
यही वजह है कि बैटरी पूरी तरह खत्म होने के बावजूद किक स्टार्ट वाली बाइक आसानी से चालू की जा सकती है। इसी कारण इसे लंबे समय तक सबसे भरोसेमंद सिस्टम माना जाता रहा है।
इलेक्ट्रिक स्टार्ट या सेल्फ स्टार्ट पूरी तरह बैटरी पर निर्भर करता है। स्टार्ट बटन दबाने पर बैटरी से करंट स्टार्टर मोटर तक पहुंचता है, जो इंजन के गियर को घुमाकर उसे चालू कर देती है।
यह प्रक्रिया कुछ ही सेकंड में पूरी हो जाती है और इसमें किसी शारीरिक मेहनत की जरूरत नहीं होती। यही कारण है कि नई पीढ़ी की ज्यादातर बाइक्स और स्कूटर्स में केवल सेल्फ स्टार्ट सिस्टम ही दिया जा रहा है।
हालांकि दोनों सिस्टम की अपनी सीमाएं हैं।
अगर आपकी बाइक में किक स्टार्ट नहीं है और बैटरी डेड हो जाए, तो आपके पास दो विकल्प बचते हैं—
जंप स्टार्ट: किसी दूसरी गाड़ी की बैटरी की मदद से शुरुआती पावर देकर बाइक स्टार्ट की जा सकती है।
पुश स्टार्ट: मैनुअल गियरबॉक्स वाली बाइक्स में धक्का देकर दूसरे गियर में इंजन चालू किया जा सकता है। हालांकि यह तरीका ऑटोमैटिक स्कूटरों में काम नहीं करता।
विशेषज्ञों के अनुसार, रोजमर्रा की सुविधा के लिए इलेक्ट्रिक स्टार्ट सबसे बेहतर विकल्प है, लेकिन आपात स्थिति में किक स्टार्ट एक मजबूत बैकअप साबित होता है। यही कारण है कि कई राइडर्स आज भी किक स्टार्ट वाली बाइक्स को अधिक भरोसेमंद मानते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
Low Seat Height Electric Scooters: भारत में इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदते समय केवल रेंज, टॉप स्पीड और फीचर्स ही नहीं, बल्कि सीट हाइट भी एक महत्वपूर्ण फैक्टर बन चुकी है। खासकर कम हाइट वाले राइडर्स के लिए ऐसा स्कूटर चुनना जरूरी होता है, जिसमें दोनों पैर आसानी से जमीन तक पहुंच सकें। इससे ट्रैफिक में बार-बार रुकने, यू-टर्न लेने और तंग पार्किंग स्पेस में स्कूटर संभालना काफी आसान हो जाता है। अगर आप भी कम सीट हाइट वाला इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो ये मॉडल आपके लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं। Bajaj Chetak सीट हाइट: 760 mm बजाज चेतक भारत के सबसे कम सीट हाइट वाले मेनस्ट्रीम इलेक्ट्रिक स्कूटर्स में शामिल है। इसकी 760 मिमी सीट हाइट कम कद वाले राइडर्स के लिए बेहद सुविधाजनक साबित होती है। ट्रैफिक में बार-बार रुकने और चलने के दौरान दोनों पैर आसानी से जमीन पर टिक जाते हैं। इसके अलावा स्कूटर में TFT डिस्प्ले, कनेक्टेड फीचर्स और वेरिएंट के अनुसार 120 किलोमीटर से अधिक की दावा की गई रेंज मिलती है। खास बातें 760 mm सीट हाइट 120 km+ रेंज TFT डिस्प्ले कनेक्टेड टेक्नोलॉजी TVS iQube सीट हाइट: 770 mm TVS iQube अपनी आरामदायक सीट और आसान राइडिंग पोजिशन के लिए जाना जाता है। इसकी 770 मिमी सीट हाइट लंबी और रोजमर्रा की यात्रा को सुविधाजनक बनाती है। कंपनी इसे अलग-अलग बैटरी विकल्पों के साथ पेश करती है और टॉप वेरिएंट में 140 किलोमीटर से अधिक की रेंज का दावा किया गया है। खास बातें 770 mm सीट हाइट 140 km+ रेंज आरामदायक राइडिंग पोजिशन शहर के ट्रैफिक के लिए उपयुक्त Ather Rizta सीट हाइट: 780 mm एथर रिज्टा को फैमिली और कम्फर्ट को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। इसकी लंबी और चौड़ी सीट लंबी दूरी की यात्रा को आरामदायक बनाती है। 780 मिमी सीट हाइट लगभग हर प्रकार के राइडर्स के लिए उपयुक्त मानी जाती है। इसमें बड़ा अंडर-सीट स्टोरेज, ट्रैक्शन कंट्रोल और स्मार्ट कनेक्टेड फीचर्स भी मिलते हैं। टॉप वेरिएंट में 159 किलोमीटर तक की IDC रेंज का दावा किया गया है। खास बातें 780 mm सीट हाइट 159 km तक की रेंज बड़ा स्टोरेज स्पेस ट्रैक्शन कंट्रोल और स्मार्ट फीचर्स Hero Vida V1 सीट हाइट: 780 mm हीरो Vida V1 भी 780 मिमी सीट हाइट के साथ आता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत रिमूवेबल बैटरी है, जिसे घर या ऑफिस में आसानी से चार्ज किया जा सकता है। यह उन लोगों के लिए बेहद उपयोगी है जिनके पास पार्किंग में चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध नहीं होती। स्कूटर में टचस्क्रीन डिस्प्ले, कई राइड मोड्स और बेहतर रेंज जैसे फीचर्स भी दिए गए हैं। खास बातें 780 mm सीट हाइट रिमूवेबल बैटरी टचस्क्रीन डिस्प्ले मल्टीपल राइड मोड्स कौन सा स्कूटर है सबसे बेहतर? अगर आपकी प्राथमिकता सबसे कम सीट हाइट है, तो Bajaj Chetak सबसे अच्छा विकल्प हो सकता है। वहीं, अधिक रेंज और फैमिली कम्फर्ट चाहने वाले ग्राहकों के लिए Ather Rizta और TVS iQube बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं। जिन लोगों के पास फिक्स्ड चार्जिंग की सुविधा नहीं है, उनके लिए Hero Vida V1 काफी उपयोगी रहेगा।
अगर आप कम बजट में ऐसी बाइक खरीदना चाहते हैं जो शानदार माइलेज दे, मेंटेनेंस कम हो और रोजमर्रा के सफर के लिए भरोसेमंद साबित हो, तो बाजार में कई बेहतरीन विकल्प मौजूद हैं। 1 लाख रुपये से कम की कीमत में आपको कम्यूटर से लेकर स्पोर्टी डिजाइन वाली बाइक्स तक कई विकल्प मिल जाते हैं। यहां हम आपको ऐसी 5 लोकप्रिय बाइक्स के बारे में बता रहे हैं, जो प्रदर्शन, माइलेज और फीचर्स के मामले में ग्राहकों की पसंद बनी हुई हैं। 1. Bajaj Platina 110 कम बजट में बेहतर माइलेज और आरामदायक राइडिंग के लिए Bajaj Platina 110 एक शानदार विकल्प मानी जाती है। इंजन: 115.45cc पावर: 8.60 hp टॉर्क: 9.81 Nm गियरबॉक्स: 5-स्पीड माइलेज: लगभग 70 kmpl शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत (रांची): ₹73,142 इस बाइक का सस्पेंशन खराब सड़कों पर भी आरामदायक अनुभव देता है और इसका मेंटेनेंस खर्च भी कम है। 2. TVS Star City Plus TVS Star City Plus भारतीय बाजार की सबसे लोकप्रिय कम्यूटर बाइक्स में से एक है। इंजन: 109.7cc पावर: 8.1 hp टॉर्क: 8.7 Nm माइलेज: 67 से 83 kmpl फीचर्स: LED हेडलाइट, USB चार्जिंग पोर्ट, इको इंडिकेटर, फ्रंट डिस्क ब्रेक शुरुआती कीमत (रांची): ₹74,900 से ₹77,800 यह बाइक Drum और Disc दोनों वेरिएंट में उपलब्ध है। 3. Honda Shine 125 Honda Shine 125 अपनी विश्वसनीयता और कम मेंटेनेंस के लिए जानी जाती है। इंजन: 123.9cc पावर: 10.5 hp टॉर्क: 11 Nm माइलेज: 55 से 65 kmpl फीचर्स: डिजिटल डिस्प्ले, USB Type-C चार्जिंग पोर्ट, ट्यूबलेस टायर शुरुआती कीमत (रांची): ₹82,142 से ₹86,502 यह बाइक रोजाना लंबी दूरी तय करने वालों के लिए भी अच्छा विकल्प मानी जाती है। 4. Hero Super Splendor Xtec अगर आप कम कीमत में ज्यादा फीचर्स चाहते हैं, तो Hero Super Splendor Xtec आपके लिए अच्छा विकल्प हो सकती है। इंजन: 124.7cc गियरबॉक्स: 5-स्पीड माइलेज: 60 से 65 kmpl फीचर्स: ब्लूटूथ कनेक्टिविटी, डिजिटल डिस्प्ले, LED हेडलाइट एक्स-शोरूम कीमत (रांची): लगभग ₹85,275 से ₹88,916 यह बाइक प्रदर्शन और आधुनिक फीचर्स का अच्छा संतुलन प्रदान करती है। 5. Bajaj Pulsar 125 स्पोर्टी डिजाइन पसंद करने वाले ग्राहकों के लिए Bajaj Pulsar 125 एक बेहतरीन विकल्प है। इंजन: 124.4cc माइलेज: 50 से 55 kmpl स्पोर्टी लुक और दमदार परफॉर्मेंस इसकी खासियत है। शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत (रांची): ₹91,757 यह बाइक युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय है और रोजाना इस्तेमाल के साथ बेहतर राइडिंग अनुभव भी देती है। किसके लिए कौन-सी बाइक बेहतर? सबसे ज्यादा माइलेज: TVS Star City Plus आरामदायक राइड: Bajaj Platina 110 भरोसेमंद इंजन: Honda Shine 125 सबसे ज्यादा फीचर्स: Hero Super Splendor Xtec स्पोर्टी लुक: Bajaj Pulsar 125 कम बजट में नई बाइक खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए ये पांचों मॉडल शानदार विकल्प साबित हो सकते हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय टू-व्हीलर बाजार में प्रीमियम मैक्सी स्कूटर सेगमेंट तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। ऐसे ग्राहकों की संख्या बढ़ रही है जो स्कूटर में बाइक जैसी परफॉर्मेंस, लंबी दूरी की आरामदायक राइड और आधुनिक तकनीक चाहते हैं। इसी मांग को देखते हुए होंडा, यामाहा और टीवीएस आने वाले समय में अपने नए मैक्सी स्कूटर लॉन्च करने की तैयारी में हैं। इन मॉडलों के आने से प्रीमियम स्कूटर बाजार में प्रतिस्पर्धा और भी दिलचस्प हो जाएगी। क्या होते हैं मैक्सी स्कूटर? मैक्सी स्कूटर सामान्य स्कूटरों की तुलना में आकार में बड़े, अधिक पावरफुल और लंबी दूरी की यात्रा के लिए बेहतर माने जाते हैं। इनमें बड़ी सीट, विशाल अंडर-सीट स्टोरेज, बेहतर विंड प्रोटेक्शन, ज्यादा फ्यूल क्षमता और हाईवे पर बेहतर प्रदर्शन मिलता है। यही कारण है कि ये शहर के साथ-साथ टूरिंग के लिए भी पसंद किए जाते हैं। Honda ADV160 सबसे पहले देगा दस्तक होंडा का ADV160 सबसे पहले लॉन्च होने वाला मॉडल माना जा रहा है। इसमें 155cc का लिक्विड-कूल्ड इंजन मिलेगा, जो 15.78 हॉर्सपावर और 14.7 Nm टॉर्क पैदा करेगा। स्कूटर में 5-इंच TFT टचस्क्रीन, नेविगेशन, कॉल और मैसेज अलर्ट, म्यूजिक कंट्रोल, USB Type-C पोर्ट और 30 लीटर का अंडर-सीट स्टोरेज मिलेगा। इसकी संभावित कीमत 1.55 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) हो सकती है। Yamaha NMax 155 टूरिंग प्रेमियों के लिए खास यामाहा NMax 155 को लंबी दूरी की यात्रा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें 155cc लिक्विड-कूल्ड इंजन, LCD इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, कीलेस इग्निशन और ऑटो स्टार्ट-स्टॉप सिस्टम जैसे फीचर्स मिल सकते हैं। इसकी संभावित कीमत 1.50 लाख रुपये के आसपास रहने की उम्मीद है। TVS का 160cc मैक्सी स्कूटर भी तैयार टीवीएस भी इस सेगमेंट में नया 160cc मैक्सी स्कूटर लाने की तैयारी कर रही है। इसमें लिक्विड-कूल्ड इंजन, बड़ी विंडस्क्रीन, फुल LED लाइटिंग, ट्रैक्शन कंट्रोल, ABS और बड़ा कनेक्टेड डिस्प्ले मिलने की संभावना है। इसकी संभावित कीमत करीब 1.40 लाख रुपये हो सकती है। ग्राहकों को मिलेगा फायदा इन नए मॉडलों के आने से ग्राहकों को अधिक विकल्प, आधुनिक तकनीक, बेहतर स्टोरेज और आरामदायक लंबी दूरी की राइडिंग का अनुभव मिलेगा। साथ ही बढ़ती प्रतिस्पर्धा कीमतों को भी संतुलित रखने में मदद कर सकती है।