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Maruti Cuts Victoris SUV Price by ₹38,900

Maruti Suzuki ने सस्ती की Victoris SUV, चुनिंदा वेरिएंट्स पर ₹38,900 तक की कटौती

surbhi जुलाई 7, 2026 0
Maruti Suzuki Victoris SUV showcased with updated pricing on premium petrol variants in India.
Maruti Suzuki Victoris Price Cut July 2026

प्रीमियम पेट्रोल वेरिएंट खरीदने वालों को बड़ा फायदा, नई कीमतें हुई लागू

नई SUV खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए अच्छी खबर है। Maruti Suzuki ने अपनी लोकप्रिय Victoris SUV के चुनिंदा पेट्रोल वेरिएंट्स की कीमतों में 38,900 रुपये तक की कटौती की है। हालांकि, कंपनी ने बेस मॉडल की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया है। Victoris की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 10.49 लाख रुपये ही बनी हुई है।

कंपनी की यह SUV पेट्रोल के अलावा CNG और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड पावरट्रेन विकल्पों में भी उपलब्ध है।

किन वेरिएंट्स की कीमत हुई कम?

मारुति सुजुकी ने Victoris के चार हाई-स्पेक पेट्रोल वेरिएंट्स की कीमत घटाई है। इनमें ZXi(O) और ZXi+(O) के मैनुअल और ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन मॉडल शामिल हैं।

नई एक्स-शोरूम कीमतें

वेरिएंट

पुरानी कीमत

नई कीमत

बचत

Victoris ZXi(O) MT

₹14.07 लाख

₹13.69 लाख

₹38,000

Victoris ZXi+(O) MT

₹15.81 लाख

₹15.43 लाख

₹38,000

Victoris ZXi(O) AT

₹15.63 लाख

₹15.25 लाख

₹38,000

Victoris ZXi+(O) AT

₹17.76 लाख

₹17.38 लाख

₹38,000

इन वेरिएंट्स की कीमत में कोई बदलाव नहीं

कंपनी ने LXi, VXi, ZXi और ZXi+ वेरिएंट्स की कीमतें पहले जैसी ही रखी हैं। इसके अलावा 4WD पेट्रोल, CNG और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड मॉडल भी पुराने दामों पर ही उपलब्ध रहेंगे। यानी कीमत में कटौती का लाभ केवल चुनिंदा प्रीमियम पेट्रोल वेरिएंट खरीदने वाले ग्राहकों को मिलेगा।

इंजन और पावरट्रेन विकल्प

Maruti Victoris में 1.5-लीटर पेट्रोल इंजन दिया गया है, जिसके साथ माइल्ड हाइब्रिड, स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड और CNG पावरट्रेन विकल्प उपलब्ध हैं। ट्रांसमिशन के तौर पर इसमें 5-स्पीड मैनुअल, ऑटोमैटिक और e-CVT गियरबॉक्स का विकल्प मिलता है। कुछ वेरिएंट्स में AWD (ऑल-व्हील ड्राइव) की सुविधा भी दी गई है।

माइलेज और फीचर्स

कंपनी के अनुसार, Victoris का स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड मॉडल 28.56 kmpl तक का माइलेज देता है, जबकि CNG वेरिएंट 27.02 km/kg तक की ईंधन दक्षता का दावा करता है।

फीचर्स की बात करें तो SUV में कई आधुनिक तकनीकें शामिल हैं, जैसे:

  • लेवल-2 ADAS
  • अंडरबॉडी CNG टैंक
  • प्रीमियम सेफ्टी फीचर्स
  • एडवांस ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम

सुरक्षा के लिहाज से Victoris को Bharat NCAP में 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग मिल चुकी है।

ग्राहकों को कितना होगा फायदा?

नई कीमतों के बाद ZXi(O) और ZXi+(O) पेट्रोल वेरिएंट पहले के मुकाबले करीब 39 हजार रुपये तक सस्ते हो गए हैं। ऐसे ग्राहक जो ज्यादा फीचर्स वाली SUV चाहते हैं लेकिन स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड मॉडल पर अतिरिक्त खर्च नहीं करना चाहते, उनके लिए यह कटौती काफी फायदेमंद साबित हो सकती है।

कीमत में कमी के साथ Victoris अब अपने सेगमेंट में और भी प्रतिस्पर्धी विकल्प बनकर उभर सकती है।

 

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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E20 के बाद अब E21 और E25 पेट्रोल की तैयारी, 2029 तक चरणबद्ध लागू करने पर विचार कर रही सरकार

E20 पेट्रोल पर जारी बहस के बीच सरकार बना रही अगला रोडमैप देशभर में E20 पेट्रोल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के बाद केंद्र सरकार अब ईंधन में एथेनॉल मिश्रण को अगले स्तर तक ले जाने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के अनुसार, सरकार 2027 तक E21 पेट्रोल और 2029 तक E25 पेट्रोल लागू करने की संभावनाओं का मूल्यांकन कर रही है। हालांकि, यह बदलाव एक साथ नहीं बल्कि चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा ताकि ऑटोमोबाइल उद्योग और उपभोक्ताओं को पर्याप्त समय मिल सके। चरणबद्ध तरीके से बढ़ेगा एथेनॉल मिश्रण सरकारी सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल सरकार सीधे अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन पर जाने के बजाय धीरे-धीरे बदलाव की रणनीति पर काम कर रही है। प्रस्ताव के अनुसार, 2027 में E21 पेट्रोल और उसके दो साल बाद 2029 में E25 पेट्रोल पेश किया जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि सरकार E25 को मौजूदा नीति के तहत पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की अधिकतम सीमा बनाने पर भी विचार कर रही है। ऑटो उद्योग को मिलेगा तैयारी का समय सरकार का मानना है कि उच्च एथेनॉल मिश्रण लागू करने से पहले वाहन निर्माता कंपनियों, ऑटो पार्ट्स उद्योग, ईंधन आपूर्ति नेटवर्क और इंफ्रास्ट्रक्चर को तैयार होने का पर्याप्त समय मिलना चाहिए। एक अधिकारी के अनुसार, यह बदलाव इस तरह किया जाएगा कि इंजन तकनीक, सप्लाई चेन और फ्यूल वितरण व्यवस्था बिना किसी बड़े व्यवधान के नए मानकों के अनुरूप ढल सके। E20 को लेकर उपभोक्ताओं की चिंताओं पर भी नजर देशभर में E20 पेट्रोल उपलब्ध होने के बावजूद कई वाहन मालिकों ने माइलेज, इंजन प्रदर्शन और पुराने वाहनों की अनुकूलता को लेकर सवाल उठाए हैं। सरकार इन चिंताओं से भी अवगत है और इसी वजह से अगले चरण की योजना को धीरे-धीरे लागू करने पर जोर दिया जा रहा है। विशेष रूप से पुराने वाहनों के मालिकों के बीच यह चिंता बनी हुई है कि अधिक एथेनॉल मिश्रण उनके वाहन के प्रदर्शन और रखरखाव लागत को प्रभावित कर सकता है। कच्चे तेल पर निर्भरता घटाने की बड़ी रणनीति भारत का एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम देश की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा है। इसका उद्देश्य आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना और घरेलू स्तर पर उत्पादित एथेनॉल की मांग बढ़ाना है। सरकार ने E20 पेट्रोल की देशव्यापी उपलब्धता अपने मूल 2030 के लक्ष्य से लगभग पांच वर्ष पहले हासिल कर ली है, जिसे इस कार्यक्रम की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। विदेशी मुद्रा की बड़ी बचत का दावा सरकारी अनुमान के अनुसार, 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण से भारत हर वर्ष लगभग 4.5 करोड़ बैरल कच्चे तेल की बचत कर रहा है। इसके साथ ही विदेशी मुद्रा पर करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये का बोझ भी कम हुआ है। हालांकि, भविष्य में E21 और E25 जैसे उच्च एथेनॉल मिश्रण लागू करने से पहले सरकार उद्योग की तैयारी, तकनीकी क्षमता और उपभोक्ताओं की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए अंतिम निर्णय लेगी।  

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नई दिल्ली: भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की मांग लगातार बढ़ रही है। पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच अब बड़ी संख्या में लोग इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने का विकल्प चुन रहे हैं। बाजार में 80 हजार रुपये से लेकर 1.5 लाख रुपये से अधिक कीमत वाले कई इलेक्ट्रिक स्कूटर उपलब्ध हैं, जिनमें लंबी रेंज, स्मार्ट फीचर्स और आकर्षक डिजाइन का दावा किया जाता है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कंपनी द्वारा बताई गई रेंज, कीमत या फीचर्स के आधार पर इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदना सही फैसला नहीं है। कई खरीदार बाद में बैटरी, चार्जिंग, सर्विस और ऐप सपोर्ट जैसी समस्याओं का सामना करते हैं, जिससे अतिरिक्त खर्च और असुविधा बढ़ सकती है। अगर आप नया इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो इन पांच महत्वपूर्ण बातों पर जरूर ध्यान दें। 1. कंपनी की बताई रेंज पर पूरी तरह भरोसा न करें अधिकांश कंपनियां इलेक्ट्रिक स्कूटर की रेंज नियंत्रित परीक्षण (Test Conditions) के आधार पर बताती हैं। वास्तविक परिस्थितियों में ट्रैफिक, सड़क की स्थिति, मौसम, वाहन पर लोड और ड्राइविंग स्टाइल के कारण यह रेंज काफी कम हो सकती है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी स्कूटर की आधिकारिक रेंज 120 किलोमीटर बताई गई है, तो सामान्य उपयोग में वह लगभग 75 से 90 किलोमीटर तक ही चल सकता है। इसलिए स्कूटर खरीदने से पहले वास्तविक उपयोगकर्ताओं के अनुभव पढ़ें, वीडियो रिव्यू देखें और संभव हो तो मौजूदा मालिकों से बात करें। 2. बैटरी वारंटी की शर्तें ध्यान से पढ़ें बैटरी किसी भी इलेक्ट्रिक स्कूटर का सबसे महंगा हिस्सा होती है। कई कंपनियां 3 से 5 वर्ष तक की वारंटी देती हैं, लेकिन हर वारंटी की अपनी अलग शर्तें होती हैं। खरीदने से पहले यह जरूर जान लें कि किन परिस्थितियों में बैटरी मुफ्त बदली जाएगी और किन मामलों में वारंटी लागू नहीं होगी। इससे भविष्य में होने वाले बड़े खर्च से बचा जा सकता है। 3. घर पर चार्जिंग की सुविधा पहले जांच लें इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने से पहले यह सुनिश्चित करें कि आपके घर या अपार्टमेंट में सुरक्षित चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध है। पुराने मकानों या कुछ सोसायटी में बिजली की वायरिंग, लोड क्षमता या चार्जिंग की अनुमति से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। यदि सही चार्जिंग पॉइंट उपलब्ध नहीं होगा, तो रोजाना स्कूटर चार्ज करना मुश्किल हो सकता है। फ्लैट में रहने वाले लोगों को सोसायटी के नियम भी पहले से जान लेने चाहिए। 4. नजदीकी सर्विस सेंटर की उपलब्धता जरूर देखें इलेक्ट्रिक स्कूटर की मरम्मत हर सामान्य मैकेनिक नहीं कर सकता। इसके लिए कंपनी के अधिकृत सर्विस सेंटर की जरूरत होती है। यदि सर्विस सेंटर आपके घर से काफी दूर है, तो छोटी-सी तकनीकी खराबी में भी समय और अतिरिक्त खर्च दोनों बढ़ सकते हैं। खरीदारी से पहले कंपनी की वेबसाइट या डीलर से अपने शहर के सर्विस नेटवर्क की पूरी जानकारी जरूर लें। 5. कंपनी और उसके मोबाइल ऐप की विश्वसनीयता जांचें आज के अधिकांश इलेक्ट्रिक स्कूटर मोबाइल ऐप से जुड़े होते हैं। इन ऐप्स के जरिए वाहन की लोकेशन, बैटरी स्टेटस, लॉक- अनलॉक, डायग्नोस्टिक्स और कई स्मार्ट फीचर्स का उपयोग किया जाता है। यदि भविष्य में कंपनी ऐप का सपोर्ट बंद कर दे या नियमित अपडेट न दे, तो कई स्मार्ट सुविधाएं प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए यह भी देखें कि कंपनी कितने समय से बाजार में मौजूद है, उसकी वित्तीय स्थिति कैसी है, सर्विस नेटवर्क कितना मजबूत है और ऐप को नियमित अपडेट मिलते हैं या नहीं। सिर्फ रेंज नहीं, पूरी तस्वीर देखें इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदना एक लंबी अवधि का निवेश है। ऐसे में केवल अधिक रेंज या कम कीमत देखकर फैसला करना सही नहीं होगा। अगर आप रेंज के साथ बैटरी की गुणवत्ता, वारंटी, चार्जिंग सुविधा, सर्विस नेटवर्क और कंपनी की विश्वसनीयता जैसे पहलुओं का भी ध्यान रखेंगे, तो भविष्य में होने वाली परेशानियों और अनावश्यक खर्च से बच सकते हैं। सही जानकारी के साथ लिया गया फैसला न केवल आपके पैसे बचाएगा बल्कि बेहतर ओनरशिप अनुभव भी देगा।  

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Vintage truck with black tape on headlights, showing an old road safety practice.
पुरानी गाड़ियों की हेडलाइट पर क्यों लगाई जाती थी काली पट्टी? वजह जानकर रह जाएंगे हैरान

आज की आधुनिक कारों और ट्रकों में एडवांस LED और प्रोजेक्टर हेडलाइट्स देखने को मिलती हैं, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब सड़कों पर चलने वाले कई ट्रकों, बसों और कारों की हेडलाइट पर काली पट्टी लगाई जाती थी। नई पीढ़ी के लिए यह सिर्फ एक अजीब डिजाइन लग सकता है, लेकिन इसके पीछे सड़क सुरक्षा, तकनीकी सीमाएं और ऐतिहासिक कारण जुड़े हुए थे। तेज रोशनी से बचाने के लिए अपनाया जाता था यह तरीका पहले के दौर में वाहनों में आधुनिक हेडलाइट तकनीक उपलब्ध नहीं थी। अधिकांश गाड़ियों में साधारण बल्ब आधारित हेडलाइट्स लगी होती थीं, जिनमें रोशनी को नियंत्रित करने के लिए बेहतर फोकसिंग सिस्टम नहीं होता था। ऐसे में हाई बीम की तेज रोशनी सामने से आने वाले वाहन चालक की आंखों में पड़कर दुर्घटना का कारण बन सकती थी। इसी समस्या से बचने के लिए कई ड्राइवर हेडलाइट के ऊपरी हिस्से पर काली पट्टी या काला रंग लगा देते थे। इससे रोशनी का कुछ हिस्सा अवरुद्ध हो जाता था और प्रकाश सड़क पर अधिक केंद्रित रहता था, जिससे सामने वाले वाहन चालक को कम ग्लेयर महसूस होता था। द्वितीय विश्व युद्ध से भी जुड़ा है इसका इतिहास हेडलाइट पर काली पट्टी लगाने का चलन केवल आम वाहनों तक सीमित नहीं था। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान कई देशों की सैन्य गाड़ियों में भी हेडलाइट्स को आंशिक रूप से ढंका जाता था। इसका उद्देश्य दुश्मन को वाहन की सटीक स्थिति और दिशा का अंदाजा लगाने से रोकना था। रात में सीमित रोशनी के साथ वाहन चलाना उस समय सैन्य रणनीति का हिस्सा माना जाता था। इसलिए हेडलाइट की चमक को नियंत्रित करना आवश्यक समझा जाता था। भारतीय ट्रक ड्राइवरों का लोकप्रिय जुगाड़ भारत में 1970 से 1990 के दशक के बीच ट्रक और बस चालकों के बीच यह तरीका काफी लोकप्रिय था। कई ड्राइवर अपने अनुभव के आधार पर हेडलाइट पर तिरछी काली पट्टी लगाते थे। उनका मानना था कि इससे सामने वाले वाहन चालक को कम चकाचौंध होती है और रात के समय दुर्घटनाओं की आशंका घट जाती है। दिलचस्प बात यह है कि यह किसी सरकारी नियम या कानून का हिस्सा नहीं था, बल्कि पूरी तरह ड्राइवरों के अनुभव और व्यवहारिक समझ पर आधारित एक देसी जुगाड़ था। अब क्यों नहीं दिखाई देती काली पट्टी? समय के साथ वाहन तकनीक में बड़ा बदलाव आया है। आज की कारों और ट्रकों में लो बीम और हाई बीम सिस्टम अलग-अलग तरीके से काम करते हैं। LED, प्रोजेक्टर और मैट्रिक्स हेडलाइट्स रोशनी को अधिक सटीक दिशा में भेजती हैं। कई आधुनिक वाहनों में ऑटोमैटिक हाई-बीम कंट्रोल जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, आज के दौर में हेडलाइट पर काली पट्टी लगाने से चालक की अपनी विजिबिलिटी प्रभावित हो सकती है, इसलिए इसकी जरूरत लगभग खत्म हो चुकी है। तकनीक ने बदल दी पुरानी परंपरा जिस समस्या का समाधान कभी ड्राइवर काली पट्टी लगाकर करते थे, आज वही काम आधुनिक हेडलाइट तकनीक आसानी से कर रही है। हालांकि पुराने ट्रकों और बसों की तस्वीरों में दिखाई देने वाली यह काली पट्टी आज भी ऑटोमोबाइल इतिहास की एक दिलचस्प याद के रूप में देखी जाती है।  

surbhi जून 24, 2026 0
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