शिक्षा

CBSE का बड़ा ऐलान: 10वीं तक पुराने भाषा नियमों से ही पढ़ाई करेंगे मौजूदा छात्र

abhishek singh जून 26, 2026 0
CBSE Decision
CBSE Major Announcement

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने नई भाषा नीति को लेकर कक्षा 7, 8 और 9 के विद्यार्थियों को बड़ी राहत दी है। सूत्रों के अनुसार, तीन-भाषा नीति के तहत जिन छात्रों ने दो विदेशी भाषाओं का विकल्प चुना है, उन्हें कक्षा 10 तक उसी भाषा संयोजन के साथ पढ़ाई जारी रखने की अनुमति दी जाएगी। यानी नई भाषा नीति मौजूदा छात्रों पर पूर्व प्रभाव (रेट्रोस्पेक्टिव) से लागू नहीं होगी।

 

भविष्य के छात्रों पर लागू होंगे नए नियम


जानकारी के मुताबिक, नई व्यवस्था केवल उन विद्यार्थियों पर लागू होगी जो भविष्य में कक्षा 6 में प्रवेश लेंगे। ऐसे छात्रों के लिए तीन-भाषा नीति के तहत कम से कम दो भारतीय भाषाएं पढ़ना अनिवार्य होगा। इससे पहले से अध्ययनरत विद्यार्थियों की पढ़ाई और विषय चयन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

 

विद्यार्थियों और अभिभावकों को मिली राहत


इस फैसले से उन छात्रों और अभिभावकों को बड़ी राहत मिली है, जिन्होंने पहले से विदेशी भाषाओं के साथ अपना शैक्षणिक संयोजन तय कर लिया है। यदि नई नीति तत्काल लागू होती, तो उन्हें बीच सत्र में विषय बदलने जैसी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता था।

 

आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार


हालांकि, इस संबंध में अभी तक CBSE की ओर से कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है। समाचार एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है। बोर्ड की औपचारिक अधिसूचना जारी होने के बाद नई भाषा नीति के क्रियान्वयन और इसके विस्तृत दिशा-निर्देश स्पष्ट होंगे।

 

फिलहाल, कक्षा 7, 8 और 9 के विद्यार्थी अपने मौजूदा भाषा संयोजन के साथ बिना किसी बदलाव के कक्षा 10 तक पढ़ाई जारी रख सकेंगे, जबकि नई भाषा नीति का प्रभाव आगामी शैक्षणिक सत्रों में कक्षा 6 में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों पर दिखाई देगा।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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चाईबासा। चाईबासा स्थित कोल्हान विश्वविद्यालय में नए शैक्षणिक सत्र 2025-27 के लिए नामांकन प्रक्रिया जोरों पर है। स्नातक (UG) पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए अब तक चांसलर पोर्टल पर 14,948 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। वहीं स्नातकोत्तर (PG) में भी 24 जून से ऑनलाइन नामांकन प्रक्रिया शुरू होते ही छात्रों का उत्साह दिखने लगा है और अब तक 68 आवेदन प्राप्त हुए हैं।   PG नामांकन का पूरा शेड्यूल जारी विश्वविद्यालय प्रशासन ने पीजी प्रथम सेमेस्टर के नामांकन के लिए विस्तृत कार्यक्रम जारी कर दिया है। इसके अनुसार — ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि — 11 जुलाई 2026 प्रथम मेधा सूची प्रकाशन — 15 जुलाई 2026 चयनित छात्रों का नामांकन — 15 से 24 जुलाई 2026 कक्षाओं का आरंभ — 10 अगस्त 2026   अंतिम तिथि का इंतजार न करें विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्र-छात्राओं से विशेष अपील की है कि वे आवेदन की अंतिम तिथि का इंतजार न करें। अंतिम दिनों में पोर्टल पर अत्यधिक ट्रैफिक और तकनीकी समस्याओं की संभावना रहती है, जिससे आवेदन प्रक्रिया में बाधा आ सकती है। पात्र एवं इच्छुक विद्यार्थी समय रहते चांसलर पोर्टल पर जाकर अपना आवेदन पूरा कर लें। कोल्हान विश्वविद्यालय पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और पूर्वी सिंहभूम जिलों के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र है। इस बार नामांकन में बड़ी संख्या में आवेदन आना विश्वविद्यालय के प्रति छात्रों के बढ़ते रुझान को दर्शाता है।

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NCERT की कक्षा 9 की किताब में पहली बार शामिल हुआ ‘आपातकाल’ अध्याय

नई दिल्ली, एजेंसियां। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने पहली बार कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में 1975-77 के आपातकाल (Emergency) को शामिल किया है। नई पुस्तक ‘Understanding Society: India and Beyond’ में इसे भारतीय लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इस बदलाव को स्कूली शिक्षा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पुस्तक में बताया गया है कि 1970 के दशक की शुरुआत में बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और कुशासन के आरोपों के कारण तत्कालीन सरकार के खिलाफ जन असंतोष बढ़ा था। इसके बाद जून 1975 में देश में आंतरिक अशांति का हवाला देते हुए आपातकाल लागू किया गया। इस दौरान अधिकांश मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और कई राजनीतिक नेताओं व कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया।   जयप्रकाश नारायण के आंदोलन को प्रमुखता एनसीईआरटी ने आपातकाल विरोधी आंदोलन में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की भूमिका को भी विस्तार से शामिल किया है। पुस्तक के अनुसार, उनके नेतृत्व में बिहार और गुजरात समेत कई राज्यों में छात्रों और नागरिकों ने बड़े पैमाने पर आंदोलन किया। वर्ष 1977 में आपातकाल समाप्त होने के बाद हुए आम चुनाव में सत्ता परिवर्तन हुआ, जिसे भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का उदाहरण बताया गया है।   लोकतंत्र की चुनौतियों पर भी चर्चा नई पाठ्यपुस्तक में आपातकाल के अलावा फेक न्यूज, गलत सूचना, गरीबी, क्षेत्रवाद, सामाजिक भेदभाव, लैंगिक असमानता और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी चुनौतियों पर भी चर्चा की गई है। साथ ही ‘डेमोक्रेसी एंड यू’ नामक नया खंड जोड़ा गया है, जिससे छात्र लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में अपनी भूमिका को बेहतर ढंग से समझ सकें।   लोकतांत्रिक संस्थाओं और मीडिया की भूमिका पर जोर पुस्तक में मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बताते हुए उसकी जवाबदेही और भूमिका को रेखांकित किया गया है। इसके अलावा 2024 के आम चुनाव, मतदाताओं की भागीदारी, पंचायतों में महिलाओं के आरक्षण और स्थानीय लोकतंत्र के सफल उदाहरणों को भी शामिल किया गया है, ताकि छात्रों को भारतीय लोकतंत्र की व्यापक और व्यावहारिक समझ मिल सके।

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NEET-UG 2026 री-एग्जाम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न, NTA ने पेपर लीक के वायरल दावों को बताया फर्जी

नई दिल्ली, एजेंसियां। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने NEET-UG 2026 री-एग्जाम को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कथित पेपर लीक के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि परीक्षा पूरी सुरक्षा और निगरानी के बीच सफलतापूर्वक संपन्न हुई तथा पेपर लीक होने की खबरें पूरी तरह बेबुनियाद हैं। प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की फैक्ट-चेक यूनिट ने भी वायरल वीडियो को फर्जी करार देते हुए छात्रों और अभिभावकों से अफवाहों से बचने की अपील की है।   फर्जी वीडियो फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई एनटीए ने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो पूरी तरह मनगढ़ंत है और इसका उद्देश्य छात्रों को गुमराह करना है। एजेंसी ने बताया कि I4C और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सहयोग से इस फर्जी सामग्री को तैयार और प्रसारित करने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। एनटीए ने अभ्यर्थियों से केवल आधिकारिक वेबसाइट और आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से ही जानकारी प्राप्त करने की सलाह दी है।   20 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने दी परीक्षा एनटीए के अनुसार, देशभर के 5,440 परीक्षा केंद्रों और विदेश के 14 केंद्रों पर 20 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने री-एग्जाम दिया। परीक्षा 13 भाषाओं में आयोजित की गई और सभी केंद्रों पर कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए थे।   जल्द जारी होंगे परिणाम एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने बताया कि अब तक पेपर लीक की कोई शिकायत नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न हुई है और मूल्यांकन कार्य जल्द शुरू किया जाएगा। एजेंसी का लक्ष्य निर्धारित समय से पहले परिणाम घोषित करना है, ताकि अभ्यर्थियों को जल्द राहत मिल सके। एनटीए ने दोहराया कि परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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