नई दिल्ली, एजेंसियां। UGC NET जून 2026 की प्रोविजनल आंसर की जारी नहीं होने से नाराज अभ्यर्थियों ने आज यानी 11 अगस्त 2026 को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करने का आह्वान किया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा खत्म हुए 40 दिन से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक आंसर की जारी नहीं की गई है।
UGC NET जून 2026 की परीक्षा 22 जून से 5 जुलाई 2026 के बीच आयोजित की गई थी। परीक्षा समाप्त होने के बाद से लाखों उम्मीदवार प्रोविजनल आंसर की, रिकॉर्डेड रिस्पॉन्स और आगे के परिणाम से जुड़ी प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं।
अभ्यर्थियों का आरोप है कि आंसर की में देरी के कारण वे अपने संभावित स्कोर का आकलन नहीं कर पा रहे हैं। साथ ही JRF, असिस्टेंट प्रोफेसर और आगे की शैक्षणिक योजनाओं को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है।
अभ्यर्थियों ने NTA से मांग की थी कि 10 अगस्त तक जून 2026 की प्रोविजनल आंसर की जारी की जाए। ऐसा नहीं होने की स्थिति में 11 अगस्त से NTA कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करने की घोषणा की गई थी।
प्रदर्शन का उद्देश्य NTA पर आंसर की जल्द जारी करने और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट समयसीमा बताने का दबाव बनाना है। सोशल मीडिया पर भी उम्मीदवार लंबे समय से आंसर की जारी करने की मांग उठा रहे हैं।
इसी बीच आज सामने आए अपडेट में NTA की ओर से UGC NET जून 2026 की प्रोविजनल आंसर की इसी सप्ताह जारी करने की बात कही गई है। आंसर की के साथ उम्मीदवारों की रिकॉर्डेड रिस्पॉन्स शीट और प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए जाने की उम्मीद है।
आंसर की जारी होने के बाद उम्मीदवारों को गलत उत्तरों के खिलाफ निर्धारित प्रक्रिया के तहत आपत्ति दर्ज कराने का मौका मिलेगा। आपत्तियों की समीक्षा के बाद अंतिम आंसर की तैयार की जाएगी।
आंसर की में देरी को लेकर अभ्यर्थियों का प्रदर्शन ऐसे समय हो रहा है जब NTA ने इसी सप्ताह आंसर की जारी करने का अपडेट दिया है। अब उम्मीदवारों की नजर इस बात पर है कि एजेंसी किस तारीख को आंसर की जारी करती है।
फिलहाल अभ्यर्थियों की मुख्य मांग है कि आंसर की और रिकॉर्डेड रिस्पॉन्स शीट जल्द उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे अपने प्रदर्शन का आकलन कर सकें और आगे की भर्ती एवं शैक्षणिक प्रक्रियाओं के लिए समय पर तैयारी कर सकें।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। QS World University Rankings 2027 में भारत की मौजूदगी बढ़कर 52 संस्थानों तक पहुंच गई है। QS के अनुसार भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था ने वैश्विक स्तर पर अपनी मौजूदगी में उल्लेखनीय विस्तार किया है। पिछले एक दशक में भारतीय संस्थानों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है और इस बार कई संस्थानों ने अपनी वैश्विक रैंकिंग में सुधार भी किया है। IIT दिल्ली 118वें स्थान पर QS World University Rankings 2027 में IIT दिल्ली भारत का सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला संस्थान रहा। संस्थान ने वैश्विक स्तर पर 118वां स्थान हासिल किया, जो पिछले संस्करण के 123वें स्थान से पांच पायदान बेहतर है। यह किसी भारतीय संस्थान की QS रैंकिंग में अब तक की सर्वश्रेष्ठ स्थिति के बराबर है। भारत के शीर्ष संस्थानों में IIT बॉम्बे 134वें, IIT मद्रास 170वें, IIT खड़गपुर 205वें और IIT कानपुर तथा IISc बेंगलुरु 221वें स्थान पर रहे। दिल्ली विश्वविद्यालय 322वें स्थान पर रहा। 2015 के मुकाबले बड़ी छलांग QS के आंकड़ों के मुताबिक 2015 में भारत के सिर्फ 11 संस्थान रैंकिंग में शामिल थे, जबकि 2027 के संस्करण में यह संख्या बढ़कर 52 हो गई है। QS के विश्लेषण के अनुसार भारत अब रैंकिंग में शामिल संस्थानों की संख्या के मामले में दुनिया की प्रमुख उच्च शिक्षा प्रणालियों में शामिल है। भारत की इस बढ़ती मौजूदगी को उच्च शिक्षा में संस्थागत विस्तार, शोध क्षमता और वैश्विक अकादमिक एवं नियोक्ता प्रतिष्ठा में सुधार से जोड़कर देखा जा रहा है। 26 भारतीय संस्थानों की रैंकिंग में सुधार 2027 संस्करण में 26 भारतीय संस्थानों ने अपनी पिछली रैंकिंग में सुधार किया। खास बात यह है कि बेहतर प्रदर्शन केवल IIT जैसे पारंपरिक शीर्ष संस्थानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अन्य भारतीय संस्थानों ने भी वैश्विक रैंकिंग में अपनी स्थिति मजबूत की है। QS World University Rankings 2027 में दुनियाभर के 1,504 संस्थान शामिल किए गए हैं। इस संस्करण में 98 नए संस्थानों ने भी पहली बार जगह बनाई है। भारतीय उच्च शिक्षा के लिए बढ़ी उम्मीद QS रैंकिंग में भारतीय संस्थानों की बढ़ती संख्या को देश के उच्च शिक्षा क्षेत्र के विस्तार के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर शीर्ष संस्थानों की संख्या और अंतरराष्ट्रीयकरण जैसे क्षेत्रों में भारत के सामने अभी भी चुनौतियां हैं। फिलहाल 52 संस्थानों की मौजूदगी और IIT दिल्ली के 118वें स्थान पर पहुंचने से भारतीय उच्च शिक्षा की वैश्विक पहचान को मजबूती मिली है। आने वाले वर्षों में शोध, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर जोर बढ़ाकर भारत अपनी स्थिति और बेहतर करने की कोशिश कर सकता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। UGC NET जून 2026 की प्रोविजनल आंसर की जारी नहीं होने से नाराज अभ्यर्थियों ने आज यानी 11 अगस्त 2026 को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करने का आह्वान किया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा खत्म हुए 40 दिन से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक आंसर की जारी नहीं की गई है। 7 लाख से ज्यादा अभ्यर्थी कर रहे इंतजार UGC NET जून 2026 की परीक्षा 22 जून से 5 जुलाई 2026 के बीच आयोजित की गई थी। परीक्षा समाप्त होने के बाद से लाखों उम्मीदवार प्रोविजनल आंसर की, रिकॉर्डेड रिस्पॉन्स और आगे के परिणाम से जुड़ी प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि आंसर की में देरी के कारण वे अपने संभावित स्कोर का आकलन नहीं कर पा रहे हैं। साथ ही JRF, असिस्टेंट प्रोफेसर और आगे की शैक्षणिक योजनाओं को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। 10 अगस्त तक आंसर की जारी करने की मांग अभ्यर्थियों ने NTA से मांग की थी कि 10 अगस्त तक जून 2026 की प्रोविजनल आंसर की जारी की जाए। ऐसा नहीं होने की स्थिति में 11 अगस्त से NTA कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करने की घोषणा की गई थी। प्रदर्शन का उद्देश्य NTA पर आंसर की जल्द जारी करने और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट समयसीमा बताने का दबाव बनाना है। सोशल मीडिया पर भी उम्मीदवार लंबे समय से आंसर की जारी करने की मांग उठा रहे हैं। NTA ने अब दिया आंसर की का अपडेट इसी बीच आज सामने आए अपडेट में NTA की ओर से UGC NET जून 2026 की प्रोविजनल आंसर की इसी सप्ताह जारी करने की बात कही गई है। आंसर की के साथ उम्मीदवारों की रिकॉर्डेड रिस्पॉन्स शीट और प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए जाने की उम्मीद है। आंसर की जारी होने के बाद उम्मीदवारों को गलत उत्तरों के खिलाफ निर्धारित प्रक्रिया के तहत आपत्ति दर्ज कराने का मौका मिलेगा। आपत्तियों की समीक्षा के बाद अंतिम आंसर की तैयार की जाएगी। प्रदर्शन के बीच NTA पर बढ़ा दबाव आंसर की में देरी को लेकर अभ्यर्थियों का प्रदर्शन ऐसे समय हो रहा है जब NTA ने इसी सप्ताह आंसर की जारी करने का अपडेट दिया है। अब उम्मीदवारों की नजर इस बात पर है कि एजेंसी किस तारीख को आंसर की जारी करती है। फिलहाल अभ्यर्थियों की मुख्य मांग है कि आंसर की और रिकॉर्डेड रिस्पॉन्स शीट जल्द उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे अपने प्रदर्शन का आकलन कर सकें और आगे की भर्ती एवं शैक्षणिक प्रक्रियाओं के लिए समय पर तैयारी कर सकें।
पटना, एजेंसियां। बिहार में शिक्षक भर्ती की तैयारी के बीच शिक्षा विभाग ने सभी जिलों से खाली पड़े शिक्षक पदों की रिपोर्ट मांगी है। जिलों से रिक्तियों का नया आंकड़ा मिलने के बाद भर्ती में शामिल किए जाने वाले पदों की संख्या बढ़ने की संभावना है। इसी प्रक्रिया के चलते शिक्षक भर्ती का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी होने में थोड़ी देरी हो सकती है। सभी जिलों से मांगा गया रिक्तियों का ब्योरा शिक्षा विभाग की ओर से जिलों को अपने यहां खाली पड़े शिक्षक पदों का विस्तृत ब्योरा उपलब्ध कराने को कहा गया है। इसमें विभिन्न विद्यालयों और विषयों के अनुसार रिक्त पदों की जानकारी शामिल की जा सकती है। विभाग का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया शुरू करने से पहले रिक्त पदों का अद्यतन आंकड़ा तैयार करना है, ताकि अधिक से अधिक खाली पदों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल किया जा सके। बढ़ सकती है शिक्षक भर्ती में पदों की संख्या जिलों से मिलने वाली रिपोर्ट के आधार पर शिक्षक भर्ती में पहले अनुमानित पदों की तुलना में अधिक रिक्तियां शामिल होने की संभावना है। इससे बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को सरकारी शिक्षक बनने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, अंतिम पद संख्या जिलों से प्राप्त आंकड़ों और विभागीय स्वीकृति के बाद ही स्पष्ट होगी। नोटिफिकेशन में हो सकती है थोड़ी देरी रिक्त पदों का नया आंकड़ा तैयार करने की प्रक्रिया के कारण शिक्षक भर्ती का नोटिफिकेशन निर्धारित समय से थोड़ा आगे खिसक सकता है। विभाग की कोशिश है कि सभी जिलों की रिक्तियों को मिलाकर भर्ती का विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया जाए। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे आधिकारिक भर्ती विज्ञापन जारी होने तक पदों की संख्या और आवेदन की तारीख को अंतिम न मानें। अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण अपडेट शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए यह खबर राहत देने वाली हो सकती है, क्योंकि रिक्तियों की संख्या बढ़ने पर चयन के अवसर भी बढ़ सकते हैं। हालांकि, विषयवार पद, कुल रिक्तियां, शैक्षणिक योग्यता, परीक्षा पैटर्न और आवेदन की अंतिम तारीख आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी होने के बाद ही निश्चित मानी जाएगी।