शिक्षा

बिहार शिक्षक भर्ती में बढ़ सकते हैं पद, सभी जिलों से खाली पदों की रिपोर्ट मांगी गई

abhishek singh अगस्त 9, 2026 0
BPSC TRE 4.0
Bihar BPSC TRE 4.0

पटना, एजेंसियां। बिहार में शिक्षक भर्ती की तैयारी के बीच शिक्षा विभाग ने सभी जिलों से खाली पड़े शिक्षक पदों की रिपोर्ट मांगी है। जिलों से रिक्तियों का नया आंकड़ा मिलने के बाद भर्ती में शामिल किए जाने वाले पदों की संख्या बढ़ने की संभावना है। इसी प्रक्रिया के चलते शिक्षक भर्ती का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी होने में थोड़ी देरी हो सकती है।

 

सभी जिलों से मांगा गया रिक्तियों का ब्योरा

 

शिक्षा विभाग की ओर से जिलों को अपने यहां खाली पड़े शिक्षक पदों का विस्तृत ब्योरा उपलब्ध कराने को कहा गया है। इसमें विभिन्न विद्यालयों और विषयों के अनुसार रिक्त पदों की जानकारी शामिल की जा सकती है। विभाग का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया शुरू करने से पहले रिक्त पदों का अद्यतन आंकड़ा तैयार करना है, ताकि अधिक से अधिक खाली पदों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल किया जा सके।

 

बढ़ सकती है शिक्षक भर्ती में पदों की संख्या

 

जिलों से मिलने वाली रिपोर्ट के आधार पर शिक्षक भर्ती में पहले अनुमानित पदों की तुलना में अधिक रिक्तियां शामिल होने की संभावना है। इससे बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को सरकारी शिक्षक बनने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, अंतिम पद संख्या जिलों से प्राप्त आंकड़ों और विभागीय स्वीकृति के बाद ही स्पष्ट होगी।

 

नोटिफिकेशन में हो सकती है थोड़ी देरी

 

रिक्त पदों का नया आंकड़ा तैयार करने की प्रक्रिया के कारण शिक्षक भर्ती का नोटिफिकेशन निर्धारित समय से थोड़ा आगे खिसक सकता है। विभाग की कोशिश है कि सभी जिलों की रिक्तियों को मिलाकर भर्ती का विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया जाए। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे आधिकारिक भर्ती विज्ञापन जारी होने तक पदों की संख्या और आवेदन की तारीख को अंतिम न मानें।

 

अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण अपडेट

 

शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए यह खबर राहत देने वाली हो सकती है, क्योंकि रिक्तियों की संख्या बढ़ने पर चयन के अवसर भी बढ़ सकते हैं। हालांकि, विषयवार पद, कुल रिक्तियां, शैक्षणिक योग्यता, परीक्षा पैटर्न और आवेदन की अंतिम तारीख आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी होने के बाद ही निश्चित मानी जाएगी।

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Abhishek Singh Abhishek123

शिक्षा

View more
BPSC TRE 4.0
बिहार शिक्षक भर्ती में बढ़ सकते हैं पद, सभी जिलों से खाली पदों की रिपोर्ट मांगी गई

पटना, एजेंसियां। बिहार में शिक्षक भर्ती की तैयारी के बीच शिक्षा विभाग ने सभी जिलों से खाली पड़े शिक्षक पदों की रिपोर्ट मांगी है। जिलों से रिक्तियों का नया आंकड़ा मिलने के बाद भर्ती में शामिल किए जाने वाले पदों की संख्या बढ़ने की संभावना है। इसी प्रक्रिया के चलते शिक्षक भर्ती का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी होने में थोड़ी देरी हो सकती है।   सभी जिलों से मांगा गया रिक्तियों का ब्योरा   शिक्षा विभाग की ओर से जिलों को अपने यहां खाली पड़े शिक्षक पदों का विस्तृत ब्योरा उपलब्ध कराने को कहा गया है। इसमें विभिन्न विद्यालयों और विषयों के अनुसार रिक्त पदों की जानकारी शामिल की जा सकती है। विभाग का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया शुरू करने से पहले रिक्त पदों का अद्यतन आंकड़ा तैयार करना है, ताकि अधिक से अधिक खाली पदों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल किया जा सके।   बढ़ सकती है शिक्षक भर्ती में पदों की संख्या   जिलों से मिलने वाली रिपोर्ट के आधार पर शिक्षक भर्ती में पहले अनुमानित पदों की तुलना में अधिक रिक्तियां शामिल होने की संभावना है। इससे बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को सरकारी शिक्षक बनने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, अंतिम पद संख्या जिलों से प्राप्त आंकड़ों और विभागीय स्वीकृति के बाद ही स्पष्ट होगी।   नोटिफिकेशन में हो सकती है थोड़ी देरी   रिक्त पदों का नया आंकड़ा तैयार करने की प्रक्रिया के कारण शिक्षक भर्ती का नोटिफिकेशन निर्धारित समय से थोड़ा आगे खिसक सकता है। विभाग की कोशिश है कि सभी जिलों की रिक्तियों को मिलाकर भर्ती का विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया जाए। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे आधिकारिक भर्ती विज्ञापन जारी होने तक पदों की संख्या और आवेदन की तारीख को अंतिम न मानें।   अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण अपडेट   शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए यह खबर राहत देने वाली हो सकती है, क्योंकि रिक्तियों की संख्या बढ़ने पर चयन के अवसर भी बढ़ सकते हैं। हालांकि, विषयवार पद, कुल रिक्तियां, शैक्षणिक योग्यता, परीक्षा पैटर्न और आवेदन की अंतिम तारीख आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी होने के बाद ही निश्चित मानी जाएगी।

abhishek singh अगस्त 9, 2026 0
Education Expenditure in India

भारत का शिक्षा खर्च UNESCO के 15% बेंचमार्क से नीचे, सरकारी खर्च में हिस्सेदारी 14.2% हुई

Dharmendra Pradhan

Gen Z को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता: धर्मेंद्र प्रधान, युवाओं की आकांक्षाओं को बताया अहम

IIT दिल्ली में PM मोदी ने युवाओं को जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार रहने का संदेश दिया

‘जिंदगी की परीक्षा में सब कुछ आउट ऑफ सिलेबस होता है’, IIT दिल्ली में PM मोदी का युवाओं को बड़ा संदेश

लखनऊ कोचिंग अग्निकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई
लखनऊ कोचिंग अग्निकांड पर SC सख्त, सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षा मानकों पर जताई नाराजगी

नई दिल्ली, एजेंसियां। लखनऊ के एक कोचिंग संस्थान में हुए अग्निकांड के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने शैक्षणिक और कोचिंग संस्थानों में अग्नि सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने संबंधित अधिकारियों से सुरक्षा व्यवस्था और नियमों के पालन को लेकर जवाब मांगा।   कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा पर सवाल   सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोचिंग संस्थानों में बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहते हैं। ऐसे में आग जैसी आपात स्थिति में सुरक्षित निकासी के लिए पर्याप्त रास्ते, अग्निशमन उपकरण और अन्य सुरक्षा इंतजाम होना जरूरी है। अदालत ने संबंधित प्रशासन से यह सुनिश्चित करने को कहा कि संस्थानों में फायर सेफ्टी नियमों और भवन सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है या नहीं।   सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर नाराजगी   सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर चिंता जताई कि कई शिक्षण संस्थान और कोचिंग सेंटर सुरक्षा मानकों को पूरा किए बिना संचालित हो रहे हैं। अदालत ने अधिकारियों से नियमों के उल्लंघन पर प्रभावी कार्रवाई करने की जरूरत बताई। सुप्रीम कोर्ट का रुख ऐसे समय आया है जब देश के कई शहरों में कोचिंग संस्थानों में विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठते रहे हैं।   छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता   अदालत ने स्पष्ट किया कि शिक्षा संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की जान की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। आग लगने की स्थिति में आपातकालीन निकासी, फायर अलार्म, अग्निशमन उपकरण और सुरक्षित भवन संरचना जैसी व्यवस्थाएं अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जानी चाहिए। मामले में आगे की सुनवाई के दौरान संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े विवरणों पर विचार किया जाएगा।

ranjan kumar tiwari अगस्त 8, 2026 0
दिल्ली प्राइवेट यूनिवर्सिटी में स्थानीय छात्रों के लिए 25 प्रतिशत सीटों का प्रस्ताव

दिल्ली में प्राइवेट यूनिवर्सिटी के लिए बड़ा प्रस्ताव, स्थानीय छात्रों के लिए 25% सीटें आरक्षित

NEET UG काउंसलिंग 2026 में मेडिकल कॉलेज चॉइस फिलिंग

NEET UG काउंसलिंग 2026: राउंड-1 चॉइस फिलिंग शुरू, 13 अगस्त तक दर्ज कर सकेंगे पसंद

DUSU Election 2026

दिल्ली यूनिवर्सिटी में DUSU चुनाव 2026 की प्रक्रिया शुरू, चुनाव अधिकारियों की नियुक्ति

Bihar School Half Day
बिहार के सरकारी स्कूलों में आज से शनिवार को फिर लागू हुआ हाफ-डे, नई व्यवस्था के तहत बदला टाइमटेबल

पटना, एजेंसियां। बिहार के सरकारी स्कूलों में शनिवार को हाफ-डे व्यवस्था आज, 8 अगस्त 2026 से फिर लागू हो गई है। शिक्षा विभाग के फैसले के अनुसार अब सोमवार से शुक्रवार तक स्कूल सामान्य समय के अनुसार चलेंगे, जबकि शनिवार को विद्यार्थियों के लिए आधे दिन की कक्षाएं संचालित होंगी।   शनिवार को आधे दिन ही होगी पढ़ाई   नई व्यवस्था के तहत शनिवार को विद्यार्थियों को पूरे दिन स्कूल में नहीं रहना होगा। शिक्षा विभाग ने शनिवार को हाफ-डे और नो-बैग डे के रूप में संचालित करने की योजना बनाई है। इस दौरान पढ़ाई के साथ खेल, कला, प्रश्नोत्तरी, कहानी और अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों पर भी जोर दिया जाएगा।   सोमवार से शुक्रवार सामान्य समय   शनिवार के अलावा सोमवार से शुक्रवार तक सरकारी स्कूलों में नियमित कक्षाएं चलेंगी। नई व्यवस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों और शिक्षकों पर पढ़ाई का अतिरिक्त दबाव कम करना तथा शनिवार को गतिविधि आधारित शिक्षण के लिए इस्तेमाल करना बताया गया है।   छात्रों को मिलेगा गतिविधियों के लिए समय   शिक्षा विभाग की नई पहल में शनिवार को केवल पारंपरिक पढ़ाई के बजाय खेलकूद, कला, रचनात्मक गतिविधियों, कहानी-कथन और प्रश्नोत्तरी जैसी गतिविधियों को शामिल करने पर जोर है। सरकार का उद्देश्य विद्यार्थियों के लिए शनिवार के स्कूल दिवस को अधिक रोचक और तनावमुक्त बनाना है।

abhishek singh अगस्त 8, 2026 0
Private school building representing fee regulation action after authorities fined schools for violating approved fee hike limits.

Private School Fee Hike: फीस बढ़ाने वाले 7 प्राइवेट स्कूलों पर ₹1-1 लाख जुर्माना, 45 स्कूलों को मिला था नोटिस

यूपी में सहायक अध्यापक भर्ती से जुड़ी जानकारी

यूपी में 11,508 सहायक अध्यापकों की भर्ती का रास्ता साफ, शहरी स्कूलों के पदों का अधियाचन अपलोड

Bihar Government School

बिहार के सरकारी स्कूलों में शनिवार को हाफ डे, 8 अगस्त से लागू होगी नई व्यवस्था

0 Comments

Top week

French Rafale multirole fighter jet during flight as France submits a 114-aircraft proposal to strengthen the Indian Air Force.
राष्ट्रीय

भारत की हवाई ताकत को मिलेगा बड़ा बूस्ट? फ्रांस ने 114 राफेल फाइटर जेट का प्रस्ताव सौंपा, 94 विमान भारत में बनाने की योजना

surbhi अगस्त 7, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?