झारखंड

मोहर्रम पर कल रांची के सभी स्कूल रहेंगे बंद

anjali kumari जून 26, 2026 0
Ranchi School Holiday
Ranchi School Holiday

रांची। मोहर्रम पर्व के अवसर पर 27 जून (शनिवार) को रांची जिले के विभिन्न क्षेत्रों में ताजिया और अखाड़ा जुलूस निकाले जाएंगे। बड़ी संख्या में धार्मिक जुलूसों के कारण शहर के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित रहने की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए जिले के सभी सरकारी, गैर-सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी विद्यालयों में एक दिन का अवकाश घोषित किया है।

 

रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देश पर जारी आदेश के अनुसार, स्कूली बच्चों की सुरक्षा और सुगम यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। प्रशासन का मानना है कि जुलूस के दौरान शहर के विभिन्न इलाकों में भारी भीड़ और ट्रैफिक डायवर्जन रहेगा, जिससे विद्यार्थियों और अभिभावकों को परेशानी हो सकती है।

 

जरूरी परीक्षाओं को मिली सशर्त अनुमति


जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिन विद्यालयों में पहले से निर्धारित परीक्षाएं आयोजित की जानी अत्यंत आवश्यक हैं, वे जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) रांची को पूर्व सूचना देकर परीक्षा आयोजित कर सकते हैं। इसके अलावा सभी शैक्षणिक गतिविधियां 27 जून को स्थगित रहेंगी।

 

ट्रैफिक व्यवस्था में रहेगा बदलाव


मोहर्रम के अवसर पर शहर के कई प्रमुख मार्गों से ताजिया और अखाड़ा जुलूस गुजरेंगे। इसे देखते हुए यातायात पुलिस द्वारा विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया जाएगा। कई मार्गों पर वाहनों की आवाजाही सीमित या डायवर्ट की जा सकती है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे आवश्यक होने पर ही घर से निकलें तथा वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें।

 

शांति और भाईचारे के साथ पर्व मनाने की अपील


इस बीच शिया समुदाय के प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री से मुलाकात कर उन्हें मुख्य जुलूस में शामिल होने का निमंत्रण दिया। उपायुक्त ने भरोसा दिलाया कि जिला प्रशासन मोहर्रम को शांतिपूर्ण और गरिमामय ढंग से संपन्न कराने के लिए पूरी तरह तैयार है।

 

मौलाना तहजीब उल हसन रिजवी समेत शिया समुदाय के प्रतिनिधियों ने भी प्रशासन के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि मोहर्रम का आयोजन पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार शांति, भाईचारे और धार्मिक अनुशासन के साथ किया जाएगा। प्रशासन ने सभी नागरिकों, विद्यालय प्रबंधन और अभिभावकों से सहयोग बनाए रखने तथा सामाजिक सौहार्द कायम रखने की अपील की है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले कल आएंगे रांची

रांची। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले 27 जून को झारखंड दौरे पर आएंगे। वे सुबह 11.50 बजे सेवा विमान से रांची पहुंचेंगे और वहां से रामगढ़ जाएंगे। राधा गोविंद विश्वविद्यालय में दोपहर एक बजे डॉ. भीमराव अंबेडकर पर आयोजित सेमिनार में भाग लेंगे। सेमिनार का विषय आर्थिक असमानता और बेरोजगारी के संदर्भ में अंबेडकर का दृष्टिकोण है। शाम छह बजे स्टेट गेस्ट हाउस में समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों से बैठक करेंगे। शाम सात बजे दलादिली चौक पर पार्टी के प्रदेश कार्यालय का उद्घाटन कर दिल्ली लौट जाएंगे।

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झारखंड की 65 हजार महिला किसान बनेंगी आत्मनिर्भर, 748 करोड़ की जलवायु अनुकूल बागवानी परियोजना को मिली सशर्त मंजूरी

रांची। झारखंड सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों की महिला किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने 748 करोड़ रुपये की 'झारखंड की महिला समूहों द्वारा जलवायु अनुकूल बागवानी उद्यमिता परियोजना' तैयार की है। गुरुवार को विकास आयुक्त की अध्यक्षता वाली राज्य योजना प्राधिकृत समिति ने इस महत्वाकांक्षी योजना को सशर्त मंजूरी दे दी। अब बजट और विदेशी ऋण पर ब्याज दर को लेकर वित्त विभाग की सहमति तथा कैबिनेट की मंजूरी के बाद योजना लागू की जाएगी।   19 जिलों की 65 हजार महिला किसानों को मिलेगा लाभ परियोजना के दूसरे चरण में राज्य के 19 जिलों के 65 प्रखंडों की करीब 65 हजार महिला किसानों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। यह योजना आठ वर्षों तक संचालित होगी। लाभार्थियों का चयन स्थानीय संसाधनों, उत्पादन क्षमता, बाजार तक पहुंच और सखी मंडलों की सक्रियता के आधार पर किया जाएगा।   बहुफसली खेती और आधुनिक तकनीक पर रहेगा जोर परियोजना का उद्देश्य महिला किसानों की आय बढ़ाने के साथ जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा देना है। इसके तहत महिलाओं को 25 डिसमिल मॉडल पर एक फसल की जगह साल में दो से तीन फसल लेने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही माइक्रो ड्रिप सिंचाई, जल संरक्षण, आधुनिक कृषि तकनीक और बागवानी आधारित उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे उनकी आय में स्थायी वृद्धि हो सके।   पहले चरण में बढ़ी किसानों की आय परियोजना का पहला चरण वर्ष 2016-17 से 2024-25 तक नौ जिलों के 30 प्रखंडों में संचालित किया गया था। इस दौरान 31,819 किसानों को माइक्रो ड्रिप सिंचाई प्रणाली से जोड़ा गया और प्रति किसान औसतन 22 हजार रुपये वार्षिक आय में वृद्धि दर्ज की गई। इसके अलावा 300 कृषि यंत्र बैंक, 14 बहुउद्देश्यीय सामुदायिक केंद्र और 10 कोल्ड चैंबर भी स्थापित किए गए।   इन महिलाओं को मिलेगी प्राथमिकता योजना का लाभ केवल सखी मंडल से जुड़ी महिलाओं को मिलेगा। लाभार्थी के पास कम से कम 25 डिसमिल भूमि होना अनिवार्य होगा। गरीब परिवारों और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) की महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।

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इंडिया वन एयर ने जमशेदपुर-कोलकाता उड़ान सेवा की स्थगित, वीजीएफ सपोर्ट खत्म होने से बढ़ी मुश्किलें

जमशेदपुर। झारखंड और पश्चिम बंगाल के बीच हवाई संपर्क को बड़ा झटका लगा है। इंडिया वन एयर ने जमशेदपुर-कोलकाता के बीच संचालित अपनी सीधी उड़ान सेवा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया है। एयरलाइन ने इस फैसले के पीछे पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) बंद किए जाने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) महंगा होने को प्रमुख वजह बताया है। इस निर्णय से दोनों शहरों के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।   तीन साल बाद खत्म हुआ वीजीएफ सपोर्ट एयरलाइन के अनुसार यह उड़ान केंद्र सरकार की उड़ान (UDAN)-रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम (RCS) के तहत शुरू की गई थी। इस योजना में चयनित क्षेत्रीय मार्गों पर तीन वर्षों तक वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद एयरलाइन को बिना सरकारी सहायता के सेवा संचालित करनी थी। पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा वीजीएफ सहायता आगे नहीं बढ़ाने और परिचालन लागत बढ़ने के कारण इस रूट पर उड़ान जारी रखना आर्थिक रूप से कठिन हो गया।   व्यापार, शिक्षा और इलाज के लिए बढ़ेगी परेशानी जमशेदपुर-कोलकाता सीधी उड़ान का सबसे अधिक लाभ व्यवसायियों, छात्रों, मरीजों और पर्यटकों को मिलता था। यह सेवा झारखंड के औद्योगिक शहर जमशेदपुर को पूर्वी भारत के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र कोलकाता से जोड़ती थी। उड़ान बंद होने से नियमित यात्रियों को अब सड़क या रेल मार्ग का सहारा लेना पड़ेगा, जिससे यात्रा का समय और खर्च दोनों बढ़ेंगे।   फरवरी 2023 में हुई थी शुरुआत इस उड़ान सेवा की शुरुआत फरवरी 2023 में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने की थी। इसे झारखंड के क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना गया था। फिलहाल एयरलाइन ने सेवा दोबारा शुरू करने की कोई समयसीमा घोषित नहीं की है। इस बीच क्षेत्रीय हवाई मार्गों के लिए सरकारी वित्तीय सहायता जारी रखने की मांग फिर से तेज हो गई है।

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