Central Board of Secondary Education (CBSE) के 10वीं और 12वीं के करीब 35 लाख से ज्यादा छात्र-छात्राएं इस समय अपने रिजल्ट का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। राज्य बोर्ड्स के नतीजे धीरे-धीरे जारी होने लगे हैं, जिससे CBSE छात्रों की उत्सुकता और भी बढ़ गई है। सोशल मीडिया पर भी रिजल्ट डेट को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
अगर पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो CBSE आमतौर पर मई के दूसरे हफ्ते में रिजल्ट जारी करता रहा है:
इन आंकड़ों से साफ है कि सामान्य परिस्थितियों में बोर्ड मई के मध्य तक रिजल्ट जारी कर देता है।
इस साल CBSE परीक्षाएं 17 फरवरी 2026 से शुरू हुई थीं।
विशेषज्ञों और पिछले ट्रेंड के आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि:
हालांकि, नई शिक्षा नीति के तहत दो-फेज सिस्टम और सख्त मूल्यांकन प्रक्रिया के चलते तारीखों में थोड़ा बदलाव संभव है। बोर्ड इस बार “जीरो एरर पॉलिसी” के साथ तेजी से कॉपियों की जांच कर रहा है।
रिजल्ट चेक करने के लिए छात्रों को ये डिटेल्स तैयार रखनी चाहिए:
CBSE का रिजल्ट इन आधिकारिक वेबसाइट्स पर जारी किया जाएगा:
अगर इंटरनेट स्लो या बंद है, तब भी छात्र अपने रिजल्ट इन माध्यमों से देख सकते हैं:
CBSE ने इस बार डिजिटल मॉनिटरिंग को और मजबूत किया है, ताकि रिजल्ट में किसी भी तरह की गलती की संभावना लगभग खत्म हो सके।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया। देशभर में परीक्षा व्यवस्था, NEET पेपर लीक विवाद और छात्रों के लगातार जारी आंदोलन के बीच उनका यह फैसला सामने आया है। धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी अपना इस्तीफा सार्वजनिक करते हुए कहा कि यह निर्णय उन्होंने देश के युवाओं के हितों और लोकतांत्रिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए लिया है। इस्तीफे में युवाओं का किया जिक्र अपने इस्तीफे में धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि छात्रों की चिंताओं और युवाओं की आकांक्षाओं का सम्मान करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को लेकर जो स्थिति बनी है, उसे किसी भी तरह राष्ट्रविरोधी ताकतों द्वारा इस्तेमाल नहीं होने देना चाहिए। इसी भावना के साथ उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंपने का फैसला किया। लगातार बढ़ रहा था राजनीतिक और जनदबाव पिछले कई सप्ताह से NEET पेपर लीक और अन्य परीक्षा अनियमितताओं को लेकर देशभर में छात्र आंदोलन जारी था। दिल्ली के जंतर-मंतर सहित कई शहरों में प्रदर्शन हुए, जबकि विपक्ष ने संसद के भीतर और बाहर लगातार धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई। आंदोलन को लेकर सरकार और छात्र संगठनों के बीच कई दौर की बातचीत भी हुई, लेकिन शिक्षा मंत्री का इस्तीफा प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग बना रहा। अब सरकार के अगले कदम पर नजर धर्मेंद्र प्रधान द्वारा इस्तीफा सौंपे जाने के बाद अब सभी की नजर प्रधानमंत्री कार्यालय पर है। समाचार लिखे जाने तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या राष्ट्रपति भवन की ओर से इस्तीफा स्वीकार किए जाने अथवा नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी किसे मिलेगी, इस पर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने देशभर के शिक्षकों से अपील की है कि वे स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों में संभावित दिव्यांगता और विशेष जरूरतों की पहचान के लिए 'प्रशस्त' (PRASHAST) ऐप का इस्तेमाल करें। उन्होंने कहा कि समय रहते बच्चों की जरूरतों को पहचानने से उन्हें बेहतर शिक्षा, सहायता और समान अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं। शिक्षकों की भूमिका को बताया महत्वपूर्ण धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि शिक्षक बच्चों के व्यवहार, सीखने की क्षमता और शारीरिक गतिविधियों को सबसे करीब से देखते हैं। इसलिए वे प्रारंभिक स्तर पर किसी भी तरह की सीखने संबंधी कठिनाई या दिव्यांगता के संकेतों को पहचानने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे प्रशस्त ऐप के माध्यम से बच्चों की स्क्रीनिंग करें और जरूरत पड़ने पर उन्हें उचित विशेषज्ञ सहायता से जोड़ें। क्या है प्रशस्त ऐप 'प्रशस्त' ऐप शिक्षा मंत्रालय की ओर से शुरू किया गया एक डिजिटल टूल है, जिसका उद्देश्य स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों में दिव्यांगता की प्रारंभिक पहचान करना है। इसके माध्यम से शिक्षक बच्चों में विभिन्न प्रकार की विशेष जरूरतों के संकेतों को दर्ज कर सकते हैं और आगे की सहायता के लिए जानकारी उपलब्ध करा सकते हैं। यह ऐप समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। दिव्यांग बच्चों को बेहतर शिक्षा देने पर जोर शिक्षा मंत्री ने कहा कि हर बच्चे को उसकी क्षमता के अनुसार सीखने का अवसर मिलना चाहिए। दिव्यांग बच्चों को सामान्य बच्चों के साथ समान शिक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक पहचान होने से बच्चों को सही समय पर विशेष प्रशिक्षण, सहायक उपकरण और आवश्यक शैक्षणिक सहयोग मिल सकता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लक्ष्यों से जुड़ा कदम प्रशस्त ऐप का उपयोग राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत समावेशी और समान शिक्षा के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की दिशा में देखा जा रहा है। सरकार का उद्देश्य है कि कोई भी बच्चा केवल किसी शारीरिक या सीखने संबंधी कठिनाई के कारण शिक्षा से पीछे न रह जाए। स्कूलों में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल पर जोर धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल तकनीक का उपयोग लगातार बढ़ाया जा रहा है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, ऐप और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित समाधान शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और बच्चों के अनुकूल बनाने में मदद कर रहे हैं। उन्होंने शिक्षकों से तकनीक का उपयोग कर बच्चों की जरूरतों को समझने और उन्हें बेहतर शैक्षणिक माहौल देने की अपील की।
Work From Home Jobs: डिजिटल दौर में घर से काम (Work From Home) करने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। अब नौकरी के लिए हर दिन ऑफिस जाना जरूरी नहीं रह गया है। टेलीकॉलिंग, कस्टमर सपोर्ट, डिजिटल मार्केटिंग, डेटा एंट्री, ऑनलाइन टीचिंग और फ्रीलांसिंग जैसे कई क्षेत्रों में घर बैठे काम करने के अवसर उपलब्ध हैं। इन नौकरियों में फ्रेशर्स और अनुभवी दोनों उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। योग्यता, अनुभव और स्किल्स के आधार पर उम्मीदवार हर महीने 10,000 रुपये से 75,000 रुपये या उससे अधिक तक की कमाई कर सकते हैं। अगर आपके पास इंटरनेट कनेक्शन, लैपटॉप या कंप्यूटर और अच्छी कम्युनिकेशन स्किल है, तो आप आसानी से वर्क फ्रॉम होम करियर शुरू कर सकते हैं। 1. टेलीकॉलिंग और कस्टमर सपोर्ट वर्क फ्रॉम होम की सबसे ज्यादा मांग वाली नौकरियों में टेलीकॉलिंग और कस्टमर सपोर्ट शामिल हैं। इसमें ग्राहकों से बातचीत करना, उनकी समस्याओं का समाधान देना, लीड जनरेट करना और उत्पादों या सेवाओं की जानकारी देना शामिल होता है। संभावित वेतन: ₹10,000 से ₹50,000 प्रति माह जरूरी स्किल्स: अच्छी कम्युनिकेशन स्किल हिंदी और अंग्रेजी का सामान्य ज्ञान बेसिक कंप्यूटर नॉलेज 2. सेल्स और डिजिटल मार्केटिंग डिजिटल मार्केटिंग, सोशल मीडिया मैनेजमेंट, बिजनेस डेवलपमेंट और ऑनलाइन सेल्स से जुड़े कई वर्क फ्रॉम होम अवसर उपलब्ध हैं। इन पदों पर फिक्स सैलरी के साथ इंसेंटिव भी मिलता है। संभावित कमाई: ₹20,000 से ₹75,000+ प्रति माह जरूरी स्किल्स: SEO Social Media Marketing Content Writing Email Marketing Lead Generation 3. बैक ऑफिस और डेटा एंट्री यदि आपको MS Excel, MS Word और बेसिक कंप्यूटर का ज्ञान है, तो बैक ऑफिस और डेटा एंट्री की नौकरियां भी अच्छा विकल्प हो सकती हैं। इन पदों पर मुख्य कार्य होते हैं— डेटा अपडेट करना रिकॉर्ड मैनेज करना रिपोर्ट तैयार करना डॉक्यूमेंटेशन संभावित वेतन: ₹18,000 से ₹30,000 प्रति माह 4. ऑनलाइन टीचिंग ऑनलाइन एजुकेशन सेक्टर लगातार बढ़ रहा है। स्कूल, कॉलेज और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले कई प्लेटफॉर्म ऑनलाइन टीचर्स की भर्ती करते हैं। यदि किसी विषय में आपकी अच्छी पकड़ है, तो घर बैठे ऑनलाइन क्लास लेकर अच्छी आय अर्जित की जा सकती है। संभावित कमाई: विषय और अनुभव के अनुसार ₹15,000 से ₹80,000+ प्रति माह Work From Home Jobs कहां खोजें? विश्वसनीय जॉब पोर्टल्स और प्रोफेशनल प्लेटफॉर्म पर नियमित रूप से नई वर्क फ्रॉम होम वैकेंसी प्रकाशित होती हैं। LinkedIn Jobs Naukri.com Indeed India Foundit (Formerly Monster) Apna App Internshala Freelancer Upwork Fiverr FlexJobs (International Remote Jobs) Remote OK Wellfound (Startup Jobs) ध्यान दें: नौकरी के नाम पर किसी भी कंपनी को पहले पैसे न दें। केवल सत्यापित (Verified) जॉब पोर्टल या कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट से ही आवेदन करें। घर बैठे स्किल्स कहां सीखें? अगर आप अपनी कमाई बढ़ाना चाहते हैं, तो इन प्लेटफॉर्म्स से नई स्किल्स सीख सकते हैं— Google Digital Garage Google Skillshop Coursera Udemy LinkedIn Learning HubSpot Academy Microsoft Learn Great Learning Academy Skill India Digital SWAYAM YouTube (Official Educational Channels) किन लोगों के लिए हैं ये जॉब्स? फ्रेशर्स स्टूडेंट्स गृहिणियां पार्ट-टाइम जॉब तलाशने वाले वर्क फ्रॉम होम प्रोफेशनल्स करियर बदलने वाले उम्मीदवार फ्रीलांसर्स ध्यान रखें :- वर्क फ्रॉम होम नौकरी चुनते समय कंपनी की विश्वसनीयता, जॉब प्रोफाइल, सैलरी स्ट्रक्चर और रिव्यू जरूर जांचें। किसी भी फर्जी जॉब ऑफर, रजिस्ट्रेशन फीस या सिक्योरिटी डिपॉजिट मांगने वाले विज्ञापनों से सावधान रहें।