शिक्षा

DU Defends Transparent CUET-Based Admissions 2026

DU Admission 2026: CUET के जरिए 70,000+ UG एडमिशन, पारदर्शिता पर उठे सवालों पर यूनिवर्सिटी की सफाई

surbhi मार्च 17, 2026 0
elhi University campus with students during admission process through CUET showing transparency in UG admissions
DU Admission 2026 CUET UG Admission Transparency

दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने एडमिशन और भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों पर विस्तार से सफाई दी है। यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट किया कि सभी प्रक्रियाएं तय गाइडलाइंस और पूरी पारदर्शिता के साथ संचालित होती हैं, और किसी भी तरह के भेदभाव के आरोप निराधार हैं।

 

CUET के जरिए मेरिट-बेस्ड एडमिशन

DU के अनुसार, अब ज्यादातर अंडरग्रेजुएट (UG) और कई पोस्टग्रेजुएट (PG) कोर्स में एडमिशन CUET के स्कोर के आधार पर होता है।

इस प्रक्रिया में इंटरव्यू की भूमिका सीमित कर दी गई है, जिससे एडमिशन पूरी तरह मेरिट आधारित हो गया है और गड़बड़ी की संभावना कम हुई है।

पिछले शैक्षणिक सत्र में UG कोर्सेज में 70,395 से ज्यादा छात्रों को एडमिशन मिला।

 

UG एडमिशन 2025-26: कैटेगरी वाइज आंकड़े

  • UR: 32,777 (46.56%)
     
  • OBC: 17,971 (25.52%)
     
  • SC: 10,517 (14.93%)
     
  • ST: 3,251 (4.62%)
     
  • EWS: 5,879 (8.35%)
     

PG एडमिशन 2025-26: संतुलित भागीदारी

  • UR: 4,022 (38.59%)
     
  • OBC: 3,115 (29.88%)
     
  • SC: 1,488 (14.27%)
     
  • ST: 614 (5.89%)
     
  • EWS: 1,203 (11.54%)
     

इन आंकड़ों से यूनिवर्सिटी का दावा है कि सभी वर्गों को समान अवसर दिया गया है।

 

टीचर भर्ती: 5,000+ नियुक्तियां

2021 से 15 मार्च 2026 के बीच DU में कुल 5,056 शिक्षकों की भर्ती की गई:

  • General: 2,123 (41.99%)
     
  • OBC: 1,282 (25.35%)
     
  • SC: 717 (14.18%)
     
  • ST: 349 (6.90%)
     
  • EWS: 422 (8.35%)
     
  • PwD: 163 (3.22%)
     

यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि भर्ती प्रक्रिया भी विविधता और नियमों के अनुरूप की गई है।

DU ने अपने आधिकारिक आंकड़ों के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि एडमिशन और भर्ती दोनों ही प्रक्रियाएं पारदर्शी, निष्पक्ष और मेरिट आधारित हैं। CUET सिस्टम के आने के बाद एडमिशन प्रक्रिया और अधिक संरचित और भरोसेमंद बनी है।

 

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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MBA और PhD के बाद बढ़ा DBA का क्रेज, जानिए क्या है यह ‘पावर डिग्री’

आज के समय में कॉरपोरेट दुनिया तेजी से बदल रही है और इसके साथ ही प्रोफेशनल एजुकेशन का ट्रेंड भी बदलता जा रहा है। लंबे समय तक Master of Business Administration और Doctor of Philosophy को मैनेजमेंट की सबसे बड़ी डिग्री माना जाता था, लेकिन अब एक नई डिग्री तेजी से लोकप्रिय हो रही है – DBA यानी Doctor of Business Administration। DBA को बिजनेस और मैनेजमेंट सेक्टर की हाई-लेवल डॉक्टरेट डिग्री माना जाता है। खास बात यह है कि इस डिग्री को पूरा करने के बाद उम्मीदवार अपने नाम के आगे “Dr.” भी लगा सकते हैं। क्या है DBA? Doctor of Business Administration यानी DBA एक प्रोफेशनल डॉक्टरेट डिग्री है, जिसे खासतौर पर अनुभवी कॉरपोरेट प्रोफेशनल्स और सीनियर मैनेजर्स के लिए डिजाइन किया गया है। यह डिग्री उन लोगों के लिए होती है जो बिजनेस की वास्तविक समस्याओं पर रिसर्च करना चाहते हैं और अपने प्रैक्टिकल अनुभव को अकादमिक पहचान देना चाहते हैं। इसमें पढ़ाई का फोकस सिर्फ थ्योरी पर नहीं, बल्कि रियल बिजनेस चैलेंज को सॉल्व करने पर होता है। MBA और DBA में क्या अंतर है? MBA क्या है? Master of Business Administration एक पोस्टग्रेजुएट डिग्री है, जिसे ज्यादातर छात्र ग्रेजुएशन के बाद या शुरुआती वर्क एक्सपीरियंस के साथ करते हैं। इस कोर्स में: मैनेजमेंट के बेसिक्स बिजनेस स्ट्रेटेजी मार्केटिंग फाइनेंस लीडरशिप जैसे विषय पढ़ाए जाते हैं। DBA कैसे अलग है? Doctor of Business Administration MBA से कहीं अधिक एडवांस और हाई-लेवल डिग्री मानी जाती है। DBA में एडमिशन के लिए आमतौर पर: MBA डिग्री 3 से 5 साल का कॉरपोरेट अनुभव जरूरी माना जाता है। यह कोर्स उन लोगों के लिए होता है जो: CXO लेवल तक पहुंचना चाहते हैं इंटरनेशनल बिजनेस लीडरशिप में जाना चाहते हैं रिसर्च और कॉरपोरेट स्ट्रेटेजी में विशेषज्ञ बनना चाहते हैं क्या DBA के बाद ‘Doctor’ लगा सकते हैं? हां, DBA एक मान्यता प्राप्त डॉक्टरेट लेवल की डिग्री है। इस कोर्स को पूरा करने के बाद उम्मीदवार अपने नाम के आगे “Dr.” लगा सकते हैं। कॉरपोरेट और इंटरनेशनल बिजनेस कम्युनिटी में DBA होल्डर्स को काफी सम्मान दिया जाता है और इन्हें कई मामलों में PhD होल्डर्स के बराबर माना जाता है। भारत में कहां से कर सकते हैं DBA? भारत में कई बड़े संस्थान DBA या इसके समकक्ष प्रोग्राम ऑफर करते हैं। प्रमुख संस्थान Indian Institute of Management Ahmedabad Indian Institute of Management Bangalore Indian Institute of Management Calcutta यहां Executive FPM प्रोग्राम ऑफर किए जाते हैं, जिन्हें DBA के बराबर माना जाता है। Indian School of Business यहां Executive DBA (EDBA) प्रोग्राम उपलब्ध है। SP Jain Institute of Management and Research BITS Pilani upGrad Symbiosis International University ये प्लेटफॉर्म विदेशी यूनिवर्सिटीज के साथ मिलकर ऑनलाइन DBA प्रोग्राम भी ऑफर करते हैं। DBA करने के क्या फायदे हैं? कॉरपोरेट दुनिया में हाई-लेवल पहचान CXO और टॉप लीडरशिप रोल्स के अवसर रिसर्च और कंसल्टिंग करियर में फायदा इंटरनेशनल नेटवर्किंग “Doctor” टाइटल का सम्मान

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रांची। Central University of Jharkhand ने पीजी एडमिशन 2026 के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा कर दी है। विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए आवेदन प्रक्रिया 20 मई से शुरू होगी। इस बार छात्रों को बड़ी राहत देते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने एक ही रजिस्ट्रेशन फीस में तीन अलग-अलग पीजी कोर्स चुनने की सुविधा दी है। इससे छात्रों को अलग-अलग आवेदन फॉर्म भरने और बार-बार शुल्क जमा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।   विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, छात्र एक ही आवेदन फॉर्म के माध्यम से अपनी पसंद के तीन कोर्स का चयन कर सकेंगे। नई व्यवस्था का उद्देश्य छात्रों को ज्यादा विकल्प देना और एडमिशन प्रक्रिया को सरल बनाना है। विश्वविद्यालय का मानना है कि इससे छात्रों का समय और पैसा दोनों बचेगा।   CUET PG स्कोर के आधार पर मिलेगा दाखिला पीजी पाठ्यक्रमों में प्रवेश CUET PG 2026 के स्कोर के आधार पर किया जाएगा। ऐसे में छात्रों के लिए पहले CUET PG परीक्षा में शामिल होना अनिवार्य होगा। परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर ही मेरिट सूची तैयार की जाएगी और उसी के अनुसार दाखिला दिया जाएगा। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि केवल वही छात्र आवेदन कर सकेंगे जिनके पास वैध CUET PG स्कोर होगा। इसके साथ ही अभ्यर्थियों को संबंधित कोर्स के लिए निर्धारित पात्रता मानदंड भी पूरा करना होगा।   आरक्षित वर्ग को शुल्क में राहत सीयूजे ने आर्थिक रूप से कमजोर और आरक्षित वर्ग के छात्रों को राहत देते हुए आवेदन शुल्क में छूट देने का फैसला लिया है। सामान्य वर्ग की तुलना में एससी, एसटी और अन्य आरक्षित वर्ग के छात्रों को कम रजिस्ट्रेशन फीस देनी होगी। विश्वविद्यालय के इस निर्णय को छात्रों के हित में बड़ा कदम माना जा रहा है।   पूरी आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन विश्वविद्यालय की ओर से एडमिशन प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन रखा गया है। छात्र CUJ Official Website पर जाकर आवेदन कर सकेंगे। आवेदन के दौरान छात्रों को जरूरी दस्तावेज, CUET PG स्कोर कार्ड और कैटेगरी सर्टिफिकेट अपलोड करना होगा।   हेल्पडेस्क से मिलेगी सहायता एडमिशन प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की समस्या आने पर छात्र विश्वविद्यालय की ओर से जारी हेल्पडेस्क नंबर और ईमेल के माध्यम से सहायता प्राप्त कर सकते हैं। विश्वविद्यालय ने छात्रों से समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी करने की अपील की है ताकि अंतिम समय की परेशानी से बचा जा सके।

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देशभर के लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। National Testing Agency ने NEET-UG 2026 परीक्षा की नई तारीख का एलान कर दिया है। अब यह परीक्षा 21 जून 2026 को आयोजित की जाएगी। इससे पहले 3 मई को हुई परीक्षा को पेपर लीक की आशंका और गड़बड़ियों के आरोपों के चलते रद्द कर दिया गया था। एनटीए ने साफ किया है कि परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी और इसके लिए छात्रों को किसी तरह की अतिरिक्त फीस नहीं देनी होगी। नई परीक्षा तारीख और अन्य जरूरी दिशा-निर्देश जल्द आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किए जाएंगे। पेपर लीक विवाद के बाद बड़ा फैसला NEET-UG परीक्षा इस बार पेपर लीक के आरोपों को लेकर लगातार विवादों में रही। कई राज्यों से परीक्षा में अनियमितताओं और पेपर लीक की शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच Central Bureau of Investigation यानी CBI को सौंप दी गई। मामले को लेकर छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी देखने को मिली थी। परीक्षा रद्द होने के बाद लाखों उम्मीदवारों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई थी। शिक्षा मंत्री ने की उच्च स्तरीय बैठक केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने भी इस मुद्दे पर उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की थी। बैठक में परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने पर चर्चा हुई। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि दोबारा परीक्षा में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाएंगे ताकि किसी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे। मेडिकल प्रवेश के लिए अहम परीक्षा NEET-UG देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा मानी जाती है। इसी परीक्षा के जरिए MBBS, BDS समेत कई मेडिकल और पैरामेडिकल कोर्स में दाखिला दिया जाता है। हर साल लाखों छात्र इस परीक्षा में शामिल होते हैं। अब नई तारीख घोषित होने के बाद छात्रों को तैयारी के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है। एनटीए ने उम्मीदवारों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें और किसी भी अफवाह से बचें।  

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21 जून को फिर होगी NEET-UG 2026 परीक्षा

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