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JoSAA 2026 Rank vs College Guide

JoSAA Opening Closing Rank 2026: किस रैंक पर मिलेगा कौन सा IIT और NIT? समझें पूरा काउंसलिंग ट्रेंड

surbhi जून 5, 2026 0
Students checking JoSAA 2026 opening and closing ranks for IIT and NIT admissions
JoSAA Opening Closing Rank 2026 IIT NIT Admission

JEE Main और JEE Advanced 2026 के परिणाम जारी होने के बाद अब लाखों छात्रों की नजर JoSAA काउंसलिंग पर टिकी हुई है। हर अभ्यर्थी यह जानना चाहता है कि उसकी रैंक के आधार पर कौन सा IIT, NIT या पसंदीदा ब्रांच मिलने की संभावना है।

कॉलेज चयन के दौरान सबसे महत्वपूर्ण भूमिका Opening Rank और Closing Rank निभाती हैं। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर छात्र अपने लिए बेहतर विकल्प तय करते हैं। आइए समझते हैं कि JoSAA Opening Closing Rank 2026 का ट्रेंड क्या संकेत देता है और आपकी रैंक पर कौन से संस्थान मिल सकते हैं।

क्या होती है Opening और Closing Rank?

JoSAA काउंसलिंग में किसी कॉलेज और ब्रांच के लिए जिस सर्वोच्च रैंक वाले उम्मीदवार को पहली सीट आवंटित होती है, उसे Opening Rank कहा जाता है।

वहीं, जिस अंतिम रैंक तक सीटें भर जाती हैं और प्रवेश प्रक्रिया बंद हो जाती है, उसे Closing Rank कहते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, कॉलेज चुनते समय छात्रों को पिछले वर्षों की Closing Rank को सबसे महत्वपूर्ण मानक के रूप में देखना चाहिए। यदि आपकी रैंक पिछले वर्ष की क्लोजिंग रैंक के आसपास या उससे बेहतर है, तो प्रवेश मिलने की संभावना मजबूत मानी जाती है।

IITs में एडमिशन: कितनी रैंक पर कौन सा मौका?

IITs में प्रवेश पूरी तरह JEE Advanced की ऑल इंडिया रैंक (AIR) पर आधारित होता है।

टॉप IITs में कंप्यूटर साइंस

IIT Bombay, IIT Delhi, IIT Madras, IIT Kanpur और IIT Kharagpur जैसे शीर्ष संस्थानों में कंप्यूटर साइंस शाखा पाने के लिए सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को आमतौर पर टॉप 400 रैंक के भीतर रहना पड़ता है।

विशेष रूप से IIT Bombay में CSE की क्लोजिंग रैंक अक्सर 60-70 के आसपास ही समाप्त हो जाती है।

कोर इंजीनियरिंग ब्रांच

मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और सिविल जैसी प्रमुख शाखाओं के लिए शीर्ष IITs में सामान्यतः 1000 से 4500 रैंक के बीच अवसर बनते हैं।

नए IITs में बेहतर अवसर

IIT Bhilai, IIT Jammu, IIT Dharwad और IIT Goa जैसे नए IITs में 5000 से 10000 रैंक वाले छात्रों के लिए कंप्यूटर साइंस सहित कई लोकप्रिय शाखाओं में प्रवेश की संभावना बनी रहती है।

NITs में प्रवेश के लिए कितनी रैंक चाहिए?

NITs, IIITs और GFTIs में प्रवेश JEE Main की Common Rank List (CRL) के आधार पर होता है।

साथ ही NITs में 50 प्रतिशत सीटें होम स्टेट उम्मीदवारों के लिए आरक्षित रहती हैं, जिससे संबंधित राज्य के छात्रों को अतिरिक्त लाभ मिलता है।

Tier-1 NITs

NIT Tiruchirappalli, NIT Surathkal और NIT Warangal जैसे शीर्ष NITs में:

  • CSE के लिए रैंक लगभग 1500 से 4500 के भीतर होनी चाहिए।
  • सिविल और मैकेनिकल जैसी कोर शाखाओं के लिए 25,000 से 30,000 तक की रैंक सुरक्षित मानी जाती है।

Tier-2 NITs

MNIT Jaipur, MNNIT Allahabad, NIT Calicut और NIT Rourkela में:

  • CSE के लिए 5000 से 11,500 रैंक तक अवसर बन सकते हैं।
  • कोर ब्रांचेज के लिए 35,000 से 50,000 तक की रैंक पर भी प्रवेश संभव है।

नए और Tier-3 NITs

NIT Patna, NIT Raipur, NIT Jalandhar और NIT Agartala में:

  • CSE के लिए 12,000 से 22,000 तक रैंक पर अवसर मिल सकते हैं।
  • सिविल और मैकेनिकल जैसी शाखाओं में 60,000 से 1 लाख या उससे अधिक रैंक तक प्रवेश के अवसर देखे जाते हैं।

कैटेगरी और फीमेल कोटा का बड़ा असर

JoSAA काउंसलिंग में OBC-NCL, EWS, SC और ST वर्ग के उम्मीदवारों को उनकी संबंधित कैटेगरी रैंक के आधार पर सीटें आवंटित की जाती हैं। इससे क्लोजिंग रैंक सामान्य वर्ग की तुलना में काफी आगे तक जाती है।

इसके अलावा, छात्राओं के लिए उपलब्ध Female Supernumerary Seats भी बड़ा लाभ देती हैं। इस व्यवस्था के तहत कई बार लड़कियों को समान संस्थान और शाखा में सामान्य सीटों की तुलना में अधिक रैंक पर भी प्रवेश मिल जाता है।

कॉलेज चुनते समय रखें इन बातों का ध्यान

  • केवल कॉलेज नहीं, ब्रांच को भी प्राथमिकता दें।
  • पिछले वर्षों की क्लोजिंग रैंक जरूर देखें।
  • होम स्टेट कोटे का लाभ समझें।
  • सभी काउंसलिंग राउंड में विकल्प भरें।
  • मॉक अलॉटमेंट के आधार पर अपनी चॉइस लिस्ट अपडेट करें।
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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NTA
NTA में बड़ा फेरबदल, 600 विशेषज्ञ हटाए गए; चार स्तर पर होगी प्रश्नपत्रों की जांच, CISF संभालेगी सुरक्षा

नई दिल्ली, एजेंसियां। राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने अपनी परीक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, परीक्षा संचालन टीम में करीब 600 विशेषज्ञों को हटाकर नए विशेषज्ञों को शामिल किया जा रहा है। इसके साथ ही प्रश्नपत्रों की गुणवत्ता और गोपनीयता मजबूत करने के लिए चार-स्तरीय जांच व्यवस्था लागू की जाएगी। NTA के नए कार्यालयों में सुरक्षा के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की तैनाती भी की जाएगी।    600 विशेषज्ञों की जगह नए विशेषज्ञ होंगे शामिल   शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि NTA की परीक्षा टीम में व्यापक बदलाव किया गया है। करीब 600 विशेषज्ञों को टीम से हटाया गया है और नए विशेषज्ञों को जोड़ा जा रहा है। इसके अलावा अगले दो से तीन सप्ताह में 20 से 25 अधिकारियों को NTA में शामिल करने की योजना है।   यह कदम परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है। NTA देश की कई महत्वपूर्ण प्रवेश और पात्रता परीक्षाएं आयोजित करता है, जिनमें JEE Main, NEET UG, CUET UG और UGC-NET शामिल हैं।   चार स्तर पर होगी प्रश्नपत्रों की जांच   नई व्यवस्था में प्रश्नपत्रों की तैयारी और जांच के लिए चार-स्तरीय जांच प्रणाली लागू की जाएगी। इसका उद्देश्य प्रश्नपत्रों में गलतियों की संभावना कम करना और परीक्षा से पहले हर स्तर पर उसकी समीक्षा सुनिश्चित करना है।   हाल के दिनों में UGC-NET के कुछ प्रश्नपत्रों में सामने आई गलतियों और अन्य परीक्षाओं को लेकर उठे सवालों के बाद NTA की परीक्षा प्रक्रिया पर लगातार निगरानी बढ़ी है। नई व्यवस्था को इसी दिशा में बड़ा सुधार माना जा रहा है।   NTA कार्यालयों में CISF की तैनाती   शिक्षा मंत्रालय के अनुसार NTA के कार्यालयों को नए परिसरों में स्थानांतरित किया जाएगा और वहां सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए CISF की तैनाती की जाएगी। सरकार का जोर परीक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण सामग्री और प्रक्रियाओं की सुरक्षा बढ़ाने पर है।   शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी की समीक्षा बैठकों के बाद ये कदम उठाए गए हैं। मंत्रालय ने NTA को परीक्षा संचालन के लिए आवश्यक सुरक्षा और आधारभूत सुविधाएं जल्द से जल्द सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।   परीक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करने की कोशिश   NTA में यह व्यापक बदलाव ऐसे समय किया जा रहा है, जब राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं को लेकर छात्रों और अभिभावकों के बीच पारदर्शिता और विश्वसनीयता से जुड़े सवाल उठते रहे हैं। नए विशेषज्ञों की नियुक्ति, चार-स्तरीय प्रश्नपत्र जांच और CISF सुरक्षा के जरिए सरकार परीक्षा व्यवस्था में भरोसा मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

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नई दिल्ली,एजेंसियां। दिल्ली सरकार ने मेडिकल शिक्षा की क्षमता बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने राजधानी के सरकारी चिकित्सा संस्थानों में चरणबद्ध तरीके से 300 नई MBBS सीटें जोड़ने का प्रस्ताव रखा है। इसके अलावा 103 स्नातकोत्तर और DNB सीटें बढ़ाने की योजना है।   डॉ. बीएसए मेडिकल कॉलेज में बढ़ेंगी सीटें   प्रस्ताव के तहत डॉ. बीएसए मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में MBBS सीटों की संख्या 125 से बढ़ाकर 200 करने की योजना है। यानी यहां 75 अतिरिक्त सीटें मिलेंगी। वहीं, मौलाना आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज में BDS की सीटें 50 से बढ़ाकर 70 करने का प्रस्ताव है।   PG और DNB सीटों में भी विस्तार   मेडिकल शिक्षा के स्नातकोत्तर स्तर पर भी सीटें बढ़ाई जाएंगी। मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज (MAMC) में PG सीटें 260 से बढ़ाकर 295 करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा MAIDS में PG सीटें 22 से बढ़ाकर 42 करने की योजना है। BSA मेडिकल कॉलेज में 24 PG सीटों वाले नए पाठ्यक्रम भी प्रस्तावित हैं।   डॉक्टरों की कमी दूर करने पर जोर   दिल्ली सरकार का कहना है कि मेडिकल सीटों में यह विस्तार सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और विशेषज्ञों की कमी को दूर करने में मदद करेगा। मेडिकल शिक्षा की क्षमता बढ़ने से NEET-UG और PG अभ्यर्थियों के लिए भी आगे चलकर अधिक अवसर उपलब्ध होंगे।   यह कदम ऐसे समय आया है जब राष्ट्रीय स्तर पर भी मेडिकल सीटों में बड़ा विस्तार हुआ है। 2026-27 में देश में कुल MBBS सीटें बढ़कर 1,36,939 हो गई हैं और NMC ने 9,911 अतिरिक्त MBBS सीटों को मंजूरी दी है।

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CBSE Re-Evaluation 2026
CBSE 10वीं के अंकों की जांच और री-इवैल्यूएशन का मौका, 19 अगस्त तक करें आवेदन

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 10वीं के छात्रों के लिए अंकों के वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिन छात्रों ने अपनी उत्तरपुस्तिका की कॉपी प्राप्त कर ली है और उन्हें अंकों को लेकर आपत्ति है, वे दोबारा जांच के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तारीख 19 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है।   19 अगस्त तक करना होगा आवेदन   छात्रों को वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन के लिए सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन के दौरान छात्रों को अपनी Answer Book Application ID, Roll Number, School Number और Centre Number की आवश्यकता होगी।   निर्धारित समय सीमा के बाद आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे, इसलिए छात्रों को अंतिम तारीख का इंतजार नहीं करने की सलाह दी जाती है।   वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन में क्या अंतर?   अंकों का वेरिफिकेशन: इसमें उत्तरपुस्तिका में दिए गए अंकों की दोबारा जांच की जाती है। यह देखा जाता है कि सभी प्रश्नों के अंक सही तरीके से जोड़े गए हैं या नहीं, सभी उत्तरों के लिए अंक दिए गए हैं या नहीं और उत्तरपुस्तिका के पहले पेज पर दर्ज कुल अंक सही हैं या नहीं।   री-इवैल्यूएशन: इसमें छात्र किसी विशेष प्रश्न के उत्तर की दोबारा जांच कराने का अनुरोध कर सकता है। इसके लिए संबंधित प्रश्न के आधार पर आवेदन करना होता है।   कितनी है फीस?   CBSE ने दोनों प्रक्रियाओं के लिए अलग-अलग शुल्क निर्धारित किया है। अंकों का वेरिफिकेशन: 300 रुपये प्रति विषय री-इवैल्यूएशन: 100 रुपये प्रति प्रश्न शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा। ऐसे करें CBSE 10वीं री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन सबसे पहले CBSE की आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in पर जाएं। कक्षा 10वीं री-इवैल्यूएशन से संबंधित लिंक पर क्लिक करें। “Click here to apply” विकल्प चुनें। इसके बाद “Apply Class 10 (Verification/Re-Evaluation)” पर क्लिक करें। Answer Book Application ID, Roll Number, School Number और Centre Number दर्ज करें। Proceed पर क्लिक करें। वेरिफिकेशन या री-इवैल्यूएशन में से संबंधित विकल्प चुनें। निर्धारित शुल्क का ऑनलाइन भुगतान करें। आवेदन जमा करने के बाद इसकी जानकारी और भुगतान की रसीद सुरक्षित रख लें। जांच के बाद बदल सकते हैं अंक   CBSE छात्रों की ओर से दर्ज आपत्तियों की जांच करेगा। जांच के दौरान यदि किसी प्रकार की गलती सामने आती है, तो आवश्यकता के अनुसार अंकों में बदलाव किया जा सकता है। इसकी जानकारी छात्रों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत दी जाएगी।   छात्र ध्यान रखें कि आवेदन की अंतिम तारीख 19 अगस्त 2026 है। इसलिए जिन विद्यार्थियों को अपने अंकों के वेरिफिकेशन या किसी विशेष प्रश्न के री-इवैल्यूएशन की जरूरत है, उन्हें समय रहते ऑनलाइन आवेदन कर देना चाहिए।

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