UPSC Success Story of IPS Pratap Gopendra: कहते हैं कि मेहनत, धैर्य और सही फैसले इंसान की किस्मत बदल सकते हैं। उत्तर प्रदेश कैडर के IPS अधिकारी प्रताप गोपेंद्र की कहानी इसका जीता-जागता उदाहरण है। एक समय ऐसा था जब उन्हें UPSC जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा अपनी पहुंच से बाहर लगती थी, लेकिन संघर्षों से हार मानने के बजाय उन्होंने लगातार मेहनत की और आखिरकार भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में जगह बनाई।
ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े प्रताप गोपेंद्र का बचपन बेहद साधारण परिस्थितियों में गुजरा। उन्होंने आठवीं तक की पढ़ाई बोरी पर बैठकर की। बचपन में वह गाय-भैंस चराते थे और सीमित संसाधनों के बीच अपना जीवन बिताते थे। उस समय उनके सामने कोई बड़ा लक्ष्य नहीं था, लेकिन कठिन परिस्थितियों ने उन्हें मजबूत बनाया।
प्रताप गोपेंद्र के पिता एक छोटी डिस्पेंसरी चलाते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी, लेकिन शिक्षा को महत्व दिया जाता था। उन्होंने वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से बीएससी की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने का फैसला किया।
साल 2005 में वह इलाहाबाद (अब प्रयागराज) पहुंचे और UPSC तथा UPPCS की तैयारी शुरू की।
शुरुआत में उन्होंने जूलॉजी और बॉटनी विषय चुने, लेकिन इन विषयों में आत्मविश्वास की कमी महसूस हुई। इसके बाद दोस्तों की सलाह पर उन्होंने इतिहास और दर्शनशास्त्र को वैकल्पिक विषय के रूप में चुना। यही फैसला उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
प्रताप गोपेंद्र के सामने आर्थिक चुनौतियां लगातार बनी रहीं। इतिहास की कोचिंग की फीस 3000 रुपये थी, जो बातचीत के बाद 2500 रुपये कर दी गई। लेकिन एक साथ इतनी रकम देना भी उनके लिए आसान नहीं था। उन्होंने पांच किश्तों में फीस जमा की।
इसी दौरान दर्शनशास्त्र के शिक्षक ने उनके उत्तर लेखन की सराहना की, जिससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ा और पहली बार उन्हें लगा कि वह UPSC परीक्षा पास कर सकते हैं।
साल 2008 में उन्होंने पहली बार UPSC प्रीलिम्स और मेन्स परीक्षा पास की, लेकिन इंटरव्यू में चयन नहीं हो सका। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार प्रयास जारी रखा।
आखिरकार उन्होंने UPSC परीक्षा में सफलता हासिल की और 2012 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के IPS अधिकारी बने।
आज प्रताप गोपेंद्र पुलिस उप-महानिरीक्षक (DIG) के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनकी संघर्ष से सफलता तक की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रांची। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत शुरू की गई ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री (APAAR) ID को झारखंड में तेजी से लागू किया जा रहा है। राज्य सरकार ने स्कूलों से लेकर विश्वविद्यालयों तक छात्रों के लिए APAAR ID और Academic Bank of Credits (ABC) ID को अनिवार्य बनाने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों की पूरी शैक्षणिक यात्रा को डिजिटल रूप से सुरक्षित और व्यवस्थित करना है। नामांकन से परीक्षा तक होगी जरूरी रांची विश्वविद्यालय सहित राज्य के विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों को छात्रों की 100 प्रतिशत APAAR ID बनाने का लक्ष्य दिया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में नामांकन, परीक्षा फॉर्म भरने, क्रेडिट ट्रांसफर और शैक्षणिक रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण के लिए APAAR ID आवश्यक होगी। नए नामांकन के दौरान चांसलर पोर्टल पर भी छात्रों से APAAR और ABC ID की जानकारी ली जा रही है। रांची विश्वविद्यालय के डीएसडब्ल्यू डॉ. सुदेश कुमार साहू के अनुसार, यह डिजिटल पहचान छात्रों को मल्टीपल एंट्री-एग्जिट सिस्टम, क्रेडिट ट्रांसफर और अन्य संस्थानों में पढ़ाई के दौरान कई सुविधाएं प्रदान करेगी। स्कूलों में अभियान जारी, प्रगति अभी अधूरी झारखंड शिक्षा परियोजना के निर्देश पर सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों में भी APAAR ID बनाने का अभियान चल रहा है। हालांकि अभी तक राज्य में केवल 40 से 55 प्रतिशत विद्यार्थियों की ही ID बन सकी है। धनबाद में 1259 ऐसे स्कूल चिन्हित किए गए हैं जहां एक भी नया APAAR ID नहीं बना है। वहीं बोकारो में करीब 55 प्रतिशत और हजारीबाग में 44 प्रतिशत छात्रों की ID तैयार हो पाई है। डेटा मिसमैच बनी बड़ी बाधा अभियान की सबसे बड़ी चुनौती आधार कार्ड और स्कूल रिकॉर्ड के बीच डेटा का मेल न होना है। नाम, जन्मतिथि और अभिभावकों की जानकारी में अंतर होने से सत्यापन प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल जागरूकता की कमी भी प्रगति में बाधा बन रही है। शिक्षा विभाग का कहना है कि विशेष शिविरों के माध्यम से तकनीकी समस्याओं का समाधान कर शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है। APAAR ID को भविष्य की "वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी" व्यवस्था की मजबूत नींव माना जा रहा है।
रांची। रांची वीमेंस कालेज के डमांडिंग कोर्स फैशन डिजाइनिंग और क्लिनिकल न्यूट्रीशन एंड डाइटेटिक्स (CND) को अब बंद कर दिया गया है। अब इस कॉलेज में इन दोनों ही विषयों की पढ़ाई नहीं होगी। इसके साथ ही कई विषयों की पढ़ाई भी बंद की गई है। बीते कुछ सालों में रोजगारोन्मुख विषय होने के कारण वोकेशनल कोर्सेज की काफी डिमांड बढ़ी है। इसके कारण बेसिक पारंपरिक विषयों में छात्रों की भीड़ घटी है। बावजूद इसके रांची यूनिवर्सिटी ने नया बदलाव करते हुए कई कॉलेजों में कुछ वोकेशनल कोर्सेज को आगामी सत्र से बंद करने का निर्णय लिया है। स्नातक के सत्र 2026-30 में कॉलेजों को विषय और सीटें आवंटित की गयी हैस उसमें कई वोकेशनल कोर्स को बंद कर दिया गया है। मसलन डोरंडा कालेज में अब बीबीए की पढ़ाई नहीं होगी और मारवाड़ी कॉलेज में बीसीए की पढ़ाई नहीं होगी। इसी तरह एसएस मेमोरियल कॉलेज में भी बीबीए और बीसीए की पढ़ाई इस सत्र से नहीं होगी। उसकी जगह बीए बीएड और फारेन लैंग्वेज को शामिल किया गया है। वहीं, रांची वीमेंस कालेज में जहां छह वोकेशनल कोर्स की पढ़ाई होती थी, अब वहां सिर्फ तीन वोकेशनल कोर्स को ही पढ़ाई होगी। कई वोकेशनल कोर्स कॉलेजों के लिस्ट से हुए गायब रांची विश्वविद्यालय में पारंपरिक कोर्स में जहां सीटों में कमी की गयी है, वहीं कई वोकेशनल कोर्स कॉलेजों के लिस्ट से गायब हो गये हैं। रांची विवि के सबसे बड़े कॉलेज मारवाड़ी कॉलेज में पहले बीएससी सीए, बीएससी आइटी, बायोटेक्नोलाजी, बीबीए, बैचलर इन कंम्यूटर मेंटेनेंस, सीएनडी और फैशन डिजाइनिंग की पढ़ाई होती थी। लेकिन, कोर्स और सीटों का फिर से संशोधित करने के बाद अब मारवाड़ी कालेज में सिर्फ बीबीए और बीकाम-बीएड की पढ़ाई सेल्फ फाइनेंस यानि वोकेशनल कोर्स के रूप में होगी। कहां कौन से कोर्स बंद, कौन चलेंगे मारवाड़ी कॉलेजः पहले- बीएससी, सीए, बीबीए बीएससी, सीए, बीबीए बीएससी आईटी अब -बीकॉम, बीएड बीएससी बायोटेक बीसीएम, सीएनडी, फैशन डिजाइनिंग रांची वीमेंस कॉलेज- पहले- बीबीए, सीए, बीएससी आईटी, बायोटेक्नोलॉजी, फैशन डिजाइनिंग, सीएनडी अब-बीसीए, बीए-बीएड, बीएससी-बीएड, बीकॉम-बीएड एसएस मेमोरियल कॉलेज पहले-बीबीए, बीसीए अब-फॉरेन लैंग्वेज, बीए-बीएड रामलखन सिंह यादव कॉलेज पहले-बीसीए अब-बीजेएमसी छात्र परेशान रांची विवि के कॉलेजों में संचालित होने वाले कुछ ऐसे वोकेशनल कोर्स को भी हटाया गया है, जिनकी डिमांड सबसे अधिक रहती थी। मारवाड़ी कॉलेज में बैचलर इन कंम्प्यूटर अप्लीकेशन कोर्स में सबसे अधिक नामांकन हुआ करता था। भीड़ इतनी होती थी कि कालेज की ओर से मेरिट लिस्ट जारी करना पड़ता था। इसके अलावा बैचलर इन कंम्प्यूटर मेंटेनेस में भी विद्यार्थियों का नामांकन सबसे अधिक होता था। लेकिन इन्हीं कोर्स को बंद कर दिया गया। वहीं रांची वीमेंस कॉलेज के सीएनडी और एफडी में भी सीटें फुल रहा करती थीं, लेकिन यहां भी इन कोर्सों को बंद कर दिया गया है। इससे छात्र-छात्राओं की परेशानी बढ़ गई है। इतना ही नहीं, सिर्फ एक कॉलेज में इन कोर्सों के संचालन से कई छात्रों को नामांकन से वंचित रहना पड़ सकता है।
पटना, एजेंसियां। पटना में चर्चित खान सर और रौशन आनंद की कोचिंग संस्थाओं के बीच विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इसी बीच एक नया सीसीटीवी वीडियो सामने आया है, जिसने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। वायरल वीडियो में एक व्यक्ति ज्ञान बिंदु कोचिंग के सम्मान समारोह का पोस्टर फाड़ता हुआ दिखाई दे रहा है। बताया जा रहा है कि यह घटना 31 मई की रात करीब 11:30 बजे की है। खान सर के स्टाफ पर लगे आरोप स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पोस्टर उसी परिसर में लगाया गया था जहां खान सर की कोचिंग और ज्ञान बिंदु कोचिंग संचालित होती हैं। दावा किया जा रहा है कि पोस्टर फाड़ने वाला व्यक्ति खान सर की कोचिंग से जुड़ा स्टाफ सदस्य है। घटना के बाद दोनों संस्थानों के कर्मचारियों के बीच बहस भी हुई थी। इसके बाद कथित तौर पर ज्ञान बिंदु कोचिंग के बोर्ड पर खान सर की कोचिंग का पोस्टर लगाए जाने की बात भी सामने आई है। आधिकारिक पुष्टि का इंतजार हालांकि, वायरल वीडियो की सत्यता और उसमें दिखाई दे रहे व्यक्ति की पहचान को लेकर अभी तक पुलिस या प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। जांच एजेंसियां वीडियो की जांच कर रही हैं और पुलिस का कहना है कि तथ्यों की पुष्टि के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा। पथराव और फायरिंग के आरोपों की भी जांच बताया जा रहा है कि पोस्टर विवाद के बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया था। इसी क्रम में खान सर की कोचिंग पर पथराव की घटना सामने आई थी। इससे पहले फायरिंग से जुड़े एक वायरल वीडियो के बाद पुलिस ने खान सर के दो सुरक्षा कर्मियों से पूछताछ की थी और कथित हथियार को जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा था। मामले में खान सर से भी पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई है। छात्रों का प्रदर्शन जारी दूसरी ओर, रौशन आनंद की रिहाई की मांग को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है। मुसल्लहपुर हाट क्षेत्र में बड़ी संख्या में छात्रों ने प्रदर्शन कर रौशन आनंद को निर्दोष बताते हुए उनकी रिहाई और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। फिलहाल पूरा मामला पुलिस जांच के अधीन है और आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट पर निर्भर करेगी।