भारत और अफगानिस्तान के बीच एकमात्र टेस्ट मैच का आगाज मुल्लांपुर के महाराजा यादवेंद्र सिंह क्रिकेट स्टेडियम में हो गया है। कप्तान शुभमन गिल ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया। इस मुकाबले में टीम इंडिया की प्लेइंग इलेवन संतुलित और आक्रामक नजर आ रही है, जिसमें एक नए खिलाड़ी को डेब्यू का मौका मिला है।
इस मैच का सबसे खास पल तब आया जब राजस्थान के युवा स्पिन ऑलराउंडर मानव सुथार को भारत की टेस्ट कैप सौंपी गई। घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के दम पर टीम में जगह बनाने वाले मानव को अनुभवी स्पिनर कुलदीप यादव ने डेब्यू कैप देकर सम्मानित किया।
रविंद्र जडेजा की अनुपस्थिति में मानव सुथार के पास अपनी गेंदबाजी और बल्लेबाजी से प्रभाव छोड़ने का बड़ा अवसर है।
भारतीय पारी की शुरुआत युवा स्टार यशस्वी जायसवाल और अनुभवी केएल राहुल करेंगे। वहीं नंबर-3 पर साई सुदर्शन को मौका दिया गया है, जिन पर मुख्य कोच गौतम गंभीर ने पहले ही भरोसा जताया था।
कप्तान शुभमन गिल नंबर-4 पर बल्लेबाजी करते नजर आएंगे।
टीम इंडिया ने इस मुकाबले में दो विकेटकीपर बल्लेबाजों के साथ उतरने का फैसला किया है। ऋषभ पंत विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी संभालेंगे, जबकि युवा बल्लेबाज ध्रुव जुरेल को भी प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया है। इससे भारत की बल्लेबाजी को अतिरिक्त मजबूती मिली है।
तेज गेंदबाजी की जिम्मेदारी मोहम्मद सिराज और प्रसिद्ध कृष्णा के कंधों पर होगी। वहीं स्पिन विभाग में कुलदीप यादव, वॉशिंगटन सुंदर और डेब्यू कर रहे मानव सुथार अहम भूमिका निभाएंगे।
भारत की यह प्लेइंग इलेवन अनुभव और युवा प्रतिभा का शानदार मिश्रण मानी जा रही है। अब सभी की नजरें इस बात पर होंगी कि शुभमन गिल की कप्तानी में टीम इंडिया अफगानिस्तान के खिलाफ कैसा प्रदर्शन करती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
कोयलांचल सुपर किंग्स अब भी नंबर-1, टॉप-4 की रेस में बढ़ी प्रतिस्पर्धा Jharkhand T20 League 2026 में 12 मुकाबलों के बाद पॉइंट्स टेबल का समीकरण और भी रोचक हो गया है। 15 जून को खेले गए मुकाबलों में रांची टाइटन्स और छोटानागपुर रॉयल्स ने शानदार जीत दर्ज कर अपनी स्थिति मजबूत कर ली, जबकि कोयलांचल सुपर किंग्स अब भी शीर्ष स्थान पर कायम है। टूर्नामेंट के शुरुआती चरण में ही प्लेऑफ की दौड़ रोमांचक होती जा रही है और हर मैच के साथ अंक तालिका में बदलाव देखने को मिल रहा है। कोयलांचल सुपर किंग्स की बादशाहत बरकरार Koylanchal Super Kings ने अब तक चार मैच खेले हैं, जिसमें तीन जीत हासिल की हैं जबकि एक मुकाबला बेनतीजा रहा। टीम के खाते में 7 अंक हैं और उसका नेट रन रेट +2.903 है, जो सभी टीमों में सबसे बेहतर है। शानदार प्रदर्शन के दम पर कोयलांचल सुपर किंग्स फिलहाल अंक तालिका में पहले स्थान पर बनी हुई है। रांची टाइटन्स ने लगाई लंबी छलांग Ranchi Titans ने संथाल स्ट्राइकर्स के खिलाफ रोमांचक जीत दर्ज कर अंक तालिका में दूसरा स्थान हासिल कर लिया है। पांच मैचों में तीन जीत और दो हार के साथ टीम के 6 अंक हैं। बेहतर नेट रन रेट (+0.339) के कारण रांची टाइटन्स छोटानागपुर रॉयल्स से आगे बनी हुई है। छोटानागपुर रॉयल्स भी टॉप-3 में मजबूत Chotanagpur Royals ने भी अपनी तीसरी जीत दर्ज करते हुए 6 अंक हासिल कर लिए हैं। हालांकि टीम का नेट रन रेट (-0.012) रांची टाइटन्स से कम है, जिसके चलते उसे फिलहाल तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ रहा है। फिर भी प्लेऑफ की दौड़ में टीम मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है। जमशेदपुर स्टीलर्स की उम्मीदें कायम Jamshedpur Steelers ने चार मुकाबलों में दो जीत और दो हार के साथ 4 अंक जुटाए हैं। टीम चौथे स्थान पर है और आगामी मैचों में अच्छा प्रदर्शन कर टॉप-3 में प्रवेश कर सकती है। धनबाद और संथाल के लिए बढ़ी मुश्किलें Dhanbad Diamonds अब तक जीत का खाता नहीं खोल पाई है। तीन मैचों में दो हार और एक मुकाबला बेनतीजा रहने के कारण टीम के पास सिर्फ 1 अंक है। वहीं Santhal Strikers लगातार तीन मैच हार चुकी है और अभी तक अंक तालिका में अपना खाता भी नहीं खोल सकी है। झारखंड टी20 लीग 2026 पॉइंट्स टेबल रैंक टीम मैच जीत हार अंक NRR 1 कोयलांचल सुपर किंग्स 4 3 0 7 +2.903 2 रांची टाइटन्स 5 3 2 6 +0.339 3 छोटानागपुर रॉयल्स 5 3 2 6 -0.012 4 जमशेदपुर स्टीलर्स 4 2 2 4 -1.238 5 धनबाद डायमंड्स 3 0 2 1 -0.613 6 संथाल स्ट्राइकर्स 3 0 3 0 -0.869 प्लेऑफ की रेस हुई और रोमांचक टूर्नामेंट अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन शीर्ष चार स्थानों के लिए मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। रांची टाइटन्स और छोटानागपुर रॉयल्स की ताजा जीत ने प्लेऑफ की जंग को और कड़ा बना दिया है। दूसरी ओर, धनबाद डायमंड्स और संथाल स्ट्राइकर्स के लिए आने वाले मुकाबले बेहद अहम होंगे, क्योंकि एक और हार उनकी प्लेऑफ उम्मीदों को बड़ा झटका दे सकती है।
रांची। झारखंड राज्य क्रिकेट एसोसिएशन (JSCA) द्वारा आयोजित झारखंड टी20 लीग 2026 में रोमांच अपने चरम पर पहुंचता जा रहा है। टूर्नामेंट के अब तक नौ मुकाबले खेले जा चुके हैं और पॉइंट्स टेबल में टीमों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। लगातार शानदार प्रदर्शन के दम पर कोयलांचल सुपर किंग्स शीर्ष स्थान पर बनी हुई है, जबकि प्लेऑफ की दौड़ में अन्य टीमें भी अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश में जुटी हैं। कोयलांचल सुपर किंग्स का दबदबा कोयलांचल सुपर किंग्स ने अपने शुरुआती तीनों मुकाबले जीतकर छह अंक हासिल किए हैं। टीम का नेट रन रेट +2.903 है, जो इस समय सभी टीमों में सबसे बेहतर है। लगातार तीन जीत के साथ टीम ने खुद को खिताब की सबसे मजबूत दावेदारों में शामिल कर लिया है। टॉप-4 में कड़ी टक्कर दूसरे स्थान पर रांची टाइटंस है, जिसने चार मैचों में दो जीत और दो हार के साथ चार अंक जुटाए हैं। उसका नेट रन रेट +0.374 है। वहीं, छोटानागपुर रॉयल्स भी चार अंकों के साथ तीसरे स्थान पर है, लेकिन नेट रन रेट -0.054 होने के कारण वह रांची से पीछे है। जमशेदपुर स्टीलर्स ने अब तक केवल तीन मुकाबले खेले हैं और दो में जीत दर्ज कर चार अंक हासिल किए हैं। हालांकि नेट रन रेट -1.619 होने के कारण टीम चौथे स्थान पर है। कम मैच खेलने का फायदा उसे आगामी मुकाबलों में मिल सकता है और वह शीर्ष दो में जगह बनाने की मजबूत दावेदार बनी हुई है। धनबाद और संथाल की चुनौती बढ़ी दूसरी ओर धनबाद डायमंड्स और संथाल स्ट्राइकर्स की शुरुआत निराशाजनक रही है। दोनों टीमों ने अपने शुरुआती दो-दो मुकाबले गंवाए हैं और अभी तक खाता नहीं खोल सकी हैं। धनबाद पांचवें और संथाल स्ट्राइकर्स छठे स्थान पर हैं। हालांकि टूर्नामेंट अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन मौजूदा प्रदर्शन को देखते हुए कोयलांचल सुपर किंग्स ने बाकी टीमों पर बढ़त बना ली है। वहीं, रांची टाइटंस, छोटानागपुर रॉयल्स और जमशेदपुर स्टीलर्स के बीच प्लेऑफ की जंग आने वाले मुकाबलों में और अधिक रोमांचक होने की उम्मीद है।
अंताल्या (तुर्की): भारतीय तीरंदाज Dhiraj Bommadevara ने आर्चरी वर्ल्ड कप स्टेज-3 में शानदार प्रदर्शन करते हुए दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए हैं। रविवार को पहले उन्होंने Kumkum Mohod के साथ मिक्स्ड टीम स्पर्धा में गोल्ड जीता और इसके बाद पुरुष व्यक्तिगत रिकर्व वर्ग में भी स्वर्ण पदक हासिल कर गोल्डन डबल पूरा किया। 24 वर्षीय धीरज ने फाइनल में दक्षिण कोरिया के ओलंपिक कांस्य पदक विजेता Lee Woo-seok को 7-3 से हराकर अपने करियर का सबसे बड़ा खिताब अपने नाम किया। पहला व्यक्तिगत वर्ल्ड कप गोल्ड यह धीरज बोम्मादेवरा का आर्चरी वर्ल्ड कप में पहला व्यक्तिगत स्वर्ण पदक है। इससे पहले वह तीन बार व्यक्तिगत वर्ग में कांस्य पदक जीत चुके थे। कुल मिलाकर यह उनका चौथा व्यक्तिगत वर्ल्ड कप मेडल है। उनकी इस उपलब्धि के साथ पुरुष व्यक्तिगत रिकर्व वर्ग में भारत का पांच साल का इंतजार भी समाप्त हो गया। इससे पहले 2021 में Atanu Das ने यह उपलब्धि हासिल की थी। वहीं Jayanta Talukdar व्यक्तिगत रिकर्व विश्व कप खिताब जीतने वाले दूसरे भारतीय रहे हैं। सेमीफाइनल में दिखाई शानदार वापसी धीरज का सफर आसान नहीं रहा। सेमीफाइनल में वह जर्मनी के मोरित्ज वीजर के खिलाफ 1-3 से पीछे चल रहे थे, लेकिन उन्होंने शानदार वापसी करते हुए मुकाबला 6-4 से अपने नाम किया और फाइनल में जगह बनाई। फाइनल में उन्होंने विश्व के शीर्ष रिकर्व तीरंदाजों में शामिल ली वू-सियोक को मात देकर स्वर्ण पदक हासिल किया। कुमकुम मोहोद के साथ भी जीता गोल्ड इससे पहले दिन में धीरज और 17 वर्षीय कुमकुम मोहोद की भारतीय जोड़ी ने रिकर्व मिश्रित टीम स्पर्धा में भी देश को स्वर्ण पदक दिलाया। तीसरी वरीयता प्राप्त भारतीय जोड़ी ने फाइनल में शीर्ष वरीयता प्राप्त दक्षिण कोरियाई जोड़ी ओह येजिन और Kim Je-deok को 5-1 से हराया। किम जे-डियोक उस दक्षिण कोरियाई टीम का हिस्सा रह चुके हैं जिसने टोक्यो ओलंपिक में मिश्रित टीम वर्ग का स्वर्ण पदक जीता था। भारत की तीसरी गोल्ड जीतने वाली मिक्स्ड रिकर्व जोड़ी धीरज और कुमकुम आर्चरी वर्ल्ड कप में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारत की तीसरी मिश्रित रिकर्व जोड़ी बन गई हैं। 2021 में पेरिस में Deepika Kumari और अतानु दास ने पहला गोल्ड जीता था। 2022 में अंताल्या में Tarundeep Rai और रिधि ने यह उपलब्धि दोहराई थी। अब 2026 में धीरज बोम्मादेवरा और कुमकुम मोहोद ने इस सूची में अपना नाम दर्ज करा लिया है। कुमकुम मोहोद के लिए यह लगातार दूसरा वर्ल्ड कप स्वर्ण पदक है।