नई दिल्ली, एजेंसियां। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की ओर से NDA और NA Examination (II), 2026 की परीक्षा तिथि तय कर दी गई है। परीक्षा 13 सितंबर 2026 को देशभर के विभिन्न केंद्रों पर ऑफलाइन मोड में आयोजित होगी। इस परीक्षा के जरिए कुल 394 पदों पर भर्ती की जाएगी।
UPSC NDA और NA 2 परीक्षा 2026 का आयोजन 13 सितंबर 2026 को पेन-पेपर मोड में किया जाएगा। परीक्षा दो शिफ्ट में होगी। पहली शिफ्ट में Mathematics और दूसरी शिफ्ट में General Ability Test (GAT) का पेपर आयोजित किया जाएगा।
पेपर समय अवधि
Mathematics सुबह 10 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक 2 घंटे 30 मिनट
General Ability Test (GAT) दोपहर 2 बजे से शाम 4 बजे तक 2 घंटे
NDA और NA 2 परीक्षा के माध्यम से इस बार कुल 394 रिक्त पदों को भरा जाएगा। इनमें 370 पद पुरुष उम्मीदवारों और 24 पद महिला उम्मीदवारों के लिए निर्धारित हैं। उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन के साथ आगे की चयन प्रक्रिया के लिए भी तैयार रहना होगा।
NDA और NA की लिखित परीक्षा में Mathematics और GAT दोनों पेपर होते हैं। इसलिए उम्मीदवारों को किसी एक विषय पर निर्भर रहने के बजाय दोनों की संतुलित तैयारी करनी चाहिए। परीक्षा ऑफलाइन होने के कारण पेन-पेपर से मॉक टेस्ट और समयबद्ध अभ्यास करना भी उपयोगी रहेगा।
NDA और NA 2, 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है। UPSC ने 20 मई 2026 से आवेदन शुरू किए थे और उम्मीदवारों को 11 जून 2026 तक आवेदन करने का अवसर दिया गया था।
अब आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को परीक्षा की तैयारी पर ध्यान देना होगा। परीक्षा से पहले UPSC की ओर से एडमिट कार्ड और अन्य जरूरी निर्देश जारी किए जाएंगे।
UPSC NDA NA 2 Exam 2026: एक नजर में
परीक्षा: NDA और NA Examination (II), 2026
तारीख: 13 सितंबर 2026
मोड: ऑफलाइन
कुल पद: 394
Mathematics: सुबह 10 बजे से 12:30 बजे तक
GAT: दोपहर 2 बजे से शाम 4 बजे तक
आवेदन प्रक्रिया: 20 मई से 11 जून 2026 तक
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। GATE 2027 को लेकर उम्मीदवारों के लिए 14 अगस्त 2026 को बड़ा अपडेट सामने आया है। पहले Graduate Aptitude Test in Engineering (GATE) 2027 का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन आज से शुरू होना था, लेकिन IIT मद्रास ने आवेदन प्रक्रिया की तारीख आगे बढ़ा दी है। अब GATE 2027 का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन 27 अगस्त 2026 से शुरू होगा। 27 अगस्त से खुलेगा आवेदन पोर्टल IIT मद्रास की ओर से जारी आधिकारिक GATE 2027 वेबसाइट पर बताया गया है कि GOAPS रजिस्ट्रेशन को 27 अगस्त 2026 तक री-शेड्यूल किया गया है। इसलिए उम्मीदवार 14 अगस्त को आवेदन शुरू होने की उम्मीद न करें। नई तारीख के अनुसार ही आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी। DigiLocker से रजिस्ट्रेशन होगा जरूरी GATE 2027 में सभी भारतीय नागरिकों के लिए सत्यापित DigiLocker अकाउंट के जरिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है। उम्मीदवारों को आवेदन से पहले अपना DigiLocker अकाउंट बनाकर या अपडेट करके उसे सत्यापित रखना होगा। DigiLocker से नाम, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर, ई-मेल, प्रोफाइल फोटो, पता और सत्यापित ID कार्ड नंबर जैसी जानकारी प्राप्त की जाएगी। फरवरी 2027 में होगी परीक्षा GATE 2027 परीक्षा फरवरी 2027 में कई तारीखों पर आयोजित की जाएगी। परीक्षा में इस बार Robotics and Automation सहित कुल 30 पेपर होंगे। उम्मीदवार अधिकतम दो पेपर चुन सकते हैं, लेकिन इसके लिए निर्धारित पेपर संयोजन लागू होंगे।
नई दिल्ली, एजेंसियां। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की ओर से NDA और NA Examination (II), 2026 की परीक्षा तिथि तय कर दी गई है। परीक्षा 13 सितंबर 2026 को देशभर के विभिन्न केंद्रों पर ऑफलाइन मोड में आयोजित होगी। इस परीक्षा के जरिए कुल 394 पदों पर भर्ती की जाएगी। 13 सितंबर को होगी NDA-NA परीक्षा UPSC NDA और NA 2 परीक्षा 2026 का आयोजन 13 सितंबर 2026 को पेन-पेपर मोड में किया जाएगा। परीक्षा दो शिफ्ट में होगी। पहली शिफ्ट में Mathematics और दूसरी शिफ्ट में General Ability Test (GAT) का पेपर आयोजित किया जाएगा। पेपर समय अवधि Mathematics सुबह 10 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक 2 घंटे 30 मिनट General Ability Test (GAT) दोपहर 2 बजे से शाम 4 बजे तक 2 घंटे 394 पदों पर होगी भर्ती NDA और NA 2 परीक्षा के माध्यम से इस बार कुल 394 रिक्त पदों को भरा जाएगा। इनमें 370 पद पुरुष उम्मीदवारों और 24 पद महिला उम्मीदवारों के लिए निर्धारित हैं। उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन के साथ आगे की चयन प्रक्रिया के लिए भी तैयार रहना होगा। दोनों पेपर की तैयारी जरूरी NDA और NA की लिखित परीक्षा में Mathematics और GAT दोनों पेपर होते हैं। इसलिए उम्मीदवारों को किसी एक विषय पर निर्भर रहने के बजाय दोनों की संतुलित तैयारी करनी चाहिए। परीक्षा ऑफलाइन होने के कारण पेन-पेपर से मॉक टेस्ट और समयबद्ध अभ्यास करना भी उपयोगी रहेगा। मई-जून में पूरी हो चुकी है आवेदन प्रक्रिया NDA और NA 2, 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है। UPSC ने 20 मई 2026 से आवेदन शुरू किए थे और उम्मीदवारों को 11 जून 2026 तक आवेदन करने का अवसर दिया गया था। अब आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को परीक्षा की तैयारी पर ध्यान देना होगा। परीक्षा से पहले UPSC की ओर से एडमिट कार्ड और अन्य जरूरी निर्देश जारी किए जाएंगे। UPSC NDA NA 2 Exam 2026: एक नजर में परीक्षा: NDA और NA Examination (II), 2026 तारीख: 13 सितंबर 2026 मोड: ऑफलाइन कुल पद: 394 Mathematics: सुबह 10 बजे से 12:30 बजे तक GAT: दोपहर 2 बजे से शाम 4 बजे तक आवेदन प्रक्रिया: 20 मई से 11 जून 2026 तक
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल सरकार ने वेस्ट बंगाल सेंट्रल स्कूल सर्विस कमीशन (WBSSC) में चार नए सदस्यों की नियुक्ति की है। इस संबंध में 11 अगस्त 2026 को राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से अधिसूचना जारी की गई। नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं। तीन सदस्य रामकृष्ण मिशन से नई नियुक्तियों में रामकृष्ण मिशन से जुड़े तीन संन्यासी शामिल हैं। इनमें स्वामी आत्मप्रियानंद, स्वामी शास्त्रज्ञानंद और स्वामी तत्त्सारानंद के नाम शामिल हैं। चौथी सदस्य के तौर पर आईआईएम कोलकाता की स्ट्रैटेजिक मैनेजमेंट ग्रुप की प्रोफेसर रम्या तारकाडा वेंकटेश्वरन को नियुक्त किया गया है। स्वामी आत्मप्रियानंद रामकृष्ण मिशन विवेकानंद एजुकेशनल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (RKMVERI) के प्रो-चांसलर और सचिव हैं। स्वामी शास्त्रज्ञानंद रामकृष्ण मिशन आश्रम, नरेंद्रपुर के सचिव हैं, जबकि स्वामी तत्त्सारानंद बेलूर मठ के ट्रस्टी और रामकृष्ण मिशन की गवर्निंग बॉडी के सदस्य हैं। नियुक्तियां तुरंत प्रभावी राज्य सरकार की अधिसूचना के मुताबिक चारों नए सदस्य तत्काल प्रभाव से अपना काम शुरू करेंगे। वे अगले आदेश तक आयोग में अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे। नियुक्ति पश्चिम बंगाल स्कूल सर्विस कमीशन अधिनियम, 1997 की धारा 3(4) के तहत की गई है। यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया पहले से ही काफी महत्वपूर्ण दौर से गुजर रही है। 2025 की शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के दस्तावेजों की जांच अभी जारी है। शिक्षक भर्ती प्रक्रिया पर भी असर WBSSC के चेयरमैन दुष्यंत नारियाला ने हाल में भर्ती प्रक्रिया को लेकर जानकारी दी थी। रिपोर्ट के मुताबिक 2025 की शिक्षक भर्ती में करीब 39 हजार उम्मीदवारों की प्रक्रिया में से लगभग 15 हजार उम्मीदवारों के दस्तावेजों का सत्यापन किया जा चुका है। इसके अलावा 2016 की अपर प्राइमरी भर्ती में लंबित 1,177 नियुक्तियों की प्रक्रिया पूरी होने की जानकारी भी दी गई है। वहीं, कक्षा 11वीं-12वीं के शिक्षकों को 14 अगस्त को सिफारिश पत्र देने की योजना पर भी संशय जताया गया है। आयोग की ओर से भर्ती प्रक्रिया को जल्द पूरा करने की कोशिश की जा रही है। भर्ती विवाद के बीच महत्वपूर्ण नियुक्ति पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया लंबे समय से कानूनी और प्रशासनिक विवादों के बीच रही है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2016 की भर्ती प्रक्रिया को रद्द किए जाने के बाद आयोग को नए सिरे से नियुक्तियां करने की प्रक्रिया आगे बढ़ानी पड़ी है। ऐसे समय में चार नए सदस्यों की नियुक्ति से आयोग के कामकाज और भर्ती प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है।