पटना। बिहार में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी अपडेट सामने आई है। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) की ओर से Bihar STET 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 17 अगस्त 2026 से शुरू की जाएगी। लंबे समय से परीक्षा का इंतजार कर रहे उम्मीदवारों के लिए यह राहत की खबर है।
BSEB के अध्यक्ष डॉ. त्यागराजन एसएम ने STET 2026 को लेकर आवेदन शुरू होने की जानकारी दी है। अभ्यर्थी 17 अगस्त से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।
हालांकि, बोर्ड ने अभी विस्तृत नोटिफिकेशन जारी नहीं किया है। ऐसे में आवेदन की अंतिम तारीख, परीक्षा की तारीख, आवेदन शुल्क और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए अभ्यर्थियों को डिटेल्ड नोटिफिकेशन का इंतजार करना होगा।
Bihar STET 2026 की परीक्षा दो पेपर में आयोजित की जाएगी। पेपर-1 माध्यमिक स्तर के विषयों के लिए होगा, जबकि पेपर-2 उच्च माध्यमिक स्तर से जुड़े विषयों के लिए आयोजित किया जाएगा।
अभ्यर्थियों को अपने विषय और शैक्षणिक योग्यता के अनुसार संबंधित पेपर के लिए आवेदन करना होगा।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पेपर-1 के लिए संबंधित विषय में ग्रेजुएशन के साथ B.Ed या निर्धारित अन्य योग्यता जरूरी हो सकती है। वहीं पेपर-2 के लिए संबंधित विषय में पोस्ट ग्रेजुएशन के साथ B.Ed या नोटिफिकेशन में निर्धारित योग्यता आवश्यक होगी।
विषय के अनुसार योग्यता अलग-अलग हो सकती है। इसलिए विस्तृत नोटिफिकेशन जारी होने के बाद उम्मीदवारों को अपनी पात्रता जरूर जांचनी चाहिए।
STET 2026 के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष बताई गई है। अधिकतम आयु सीमा पुरुष अभ्यर्थियों के लिए 37 वर्ष और महिला अभ्यर्थियों के लिए 40 वर्ष बताई गई है। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट मिलेगी।
फिलहाल BSEB की ओर से आवेदन शुरू होने की तारीख की जानकारी दी गई है। आवेदन की अंतिम तारीख, फीस, विषयवार योग्यता, परीक्षा पैटर्न और अन्य नियमों की पूरी जानकारी विस्तृत नोटिफिकेशन जारी होने के बाद स्पष्ट होगी।
अभ्यर्थियों को सलाह है कि वे आवेदन प्रक्रिया शुरू होने से पहले अपने जरूरी दस्तावेज तैयार रखें और BSEB की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी होने वाली सूचना पर नजर बनाए रखें।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय सीट आवंटन बोर्ड (CSAB) ने CSAB Special Round 2 Seat Allotment Result 2026 जारी कर दिया है। जिन उम्मीदवारों ने CSAB स्पेशल काउंसलिंग में भाग लिया था, वे अपना सीट अलॉटमेंट स्टेटस आधिकारिक वेबसाइट पर लॉगिन करके देख सकते हैं। ताजा रिपोर्टों के अनुसार रिजल्ट 12 अगस्त 2026 को जारी किया गया। JEE Main रैंक और पसंद के आधार पर सीट आवंटन CSAB स्पेशल राउंड के जरिए NIT, IIIT, IIEST और अन्य GFTI संस्थानों में खाली बची सीटों पर दाखिला दिया जाता है। राउंड-2 में सीट आवंटन उम्मीदवार की JEE Main 2026 रैंक, भरी गई पसंद और उपलब्ध सीटों के आधार पर किया गया है। राउंड-2 में सीट पाने वाले उम्मीदवारों को अब तय समय के भीतर ऑनलाइन रिपोर्टिंग की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। 14 अगस्त तक ऑनलाइन रिपोर्टिंग और फीस भुगतान CSAB के राउंड-2 में सीट मिलने के बाद उम्मीदवारों को Institute Admission Fee-II (IAF-II) का भुगतान, जरूरी दस्तावेज अपलोड और ऑनलाइन रिपोर्टिंग पूरी करनी होगी। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार ऑनलाइन रिपोर्टिंग और फीस भुगतान की अंतिम समयसीमा 14 अगस्त 2026 शाम 5 बजे तक है। यदि दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान कोई आपत्ति या सवाल उठाया जाता है तो उम्मीदवारों को निर्धारित समय के भीतर उसका जवाब देना होगा। दस्तावेज संबंधी प्रश्नों के समाधान की अंतिम समयसीमा 17 अगस्त 2026 शाम 5 बजे बताई गई है। कैसे चेक करें CSAB राउंड-2 रिजल्ट? उम्मीदवार इन चरणों से अपना रिजल्ट देख सकते हैं: CSAB की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। CSAB Special Round-II Seat Allotment Result के लिंक पर क्लिक करें। अपना JEE Main 2026 एप्लीकेशन नंबर और पासवर्ड दर्ज करें। सिक्योरिटी पिन भरकर लॉगिन करें। स्क्रीन पर अपना आवंटित संस्थान और शाखा देखें। Allotment Letter डाउनलोड करके सुरक्षित रखें।
पटना। बिहार में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी अपडेट सामने आई है। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) की ओर से Bihar STET 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 17 अगस्त 2026 से शुरू की जाएगी। लंबे समय से परीक्षा का इंतजार कर रहे उम्मीदवारों के लिए यह राहत की खबर है। 17 अगस्त से भर सकेंगे ऑनलाइन फॉर्म BSEB के अध्यक्ष डॉ. त्यागराजन एसएम ने STET 2026 को लेकर आवेदन शुरू होने की जानकारी दी है। अभ्यर्थी 17 अगस्त से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। हालांकि, बोर्ड ने अभी विस्तृत नोटिफिकेशन जारी नहीं किया है। ऐसे में आवेदन की अंतिम तारीख, परीक्षा की तारीख, आवेदन शुल्क और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए अभ्यर्थियों को डिटेल्ड नोटिफिकेशन का इंतजार करना होगा। दो पेपर में होगी परीक्षा Bihar STET 2026 की परीक्षा दो पेपर में आयोजित की जाएगी। पेपर-1 माध्यमिक स्तर के विषयों के लिए होगा, जबकि पेपर-2 उच्च माध्यमिक स्तर से जुड़े विषयों के लिए आयोजित किया जाएगा। अभ्यर्थियों को अपने विषय और शैक्षणिक योग्यता के अनुसार संबंधित पेपर के लिए आवेदन करना होगा। कौन कर सकेगा आवेदन? उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पेपर-1 के लिए संबंधित विषय में ग्रेजुएशन के साथ B.Ed या निर्धारित अन्य योग्यता जरूरी हो सकती है। वहीं पेपर-2 के लिए संबंधित विषय में पोस्ट ग्रेजुएशन के साथ B.Ed या नोटिफिकेशन में निर्धारित योग्यता आवश्यक होगी। विषय के अनुसार योग्यता अलग-अलग हो सकती है। इसलिए विस्तृत नोटिफिकेशन जारी होने के बाद उम्मीदवारों को अपनी पात्रता जरूर जांचनी चाहिए। आयु सीमा भी तय STET 2026 के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष बताई गई है। अधिकतम आयु सीमा पुरुष अभ्यर्थियों के लिए 37 वर्ष और महिला अभ्यर्थियों के लिए 40 वर्ष बताई गई है। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट मिलेगी। नोटिफिकेशन का करना होगा इंतजार फिलहाल BSEB की ओर से आवेदन शुरू होने की तारीख की जानकारी दी गई है। आवेदन की अंतिम तारीख, फीस, विषयवार योग्यता, परीक्षा पैटर्न और अन्य नियमों की पूरी जानकारी विस्तृत नोटिफिकेशन जारी होने के बाद स्पष्ट होगी। अभ्यर्थियों को सलाह है कि वे आवेदन प्रक्रिया शुरू होने से पहले अपने जरूरी दस्तावेज तैयार रखें और BSEB की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी होने वाली सूचना पर नजर बनाए रखें।
चेन्नई, एजेंसियां। तमिलनाडु विधानसभा ने मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को स्नातक मेडिकल पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए NEET खत्म करने की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया। प्रस्ताव में केंद्र सरकार से NEET व्यवस्था को समाप्त कर तमिलनाडु में कक्षा 12 के अंकों के आधार पर मेडिकल दाखिले की व्यवस्था बहाल करने के लिए आवश्यक कानूनी बदलाव करने का आग्रह किया गया है। स्वास्थ्य मंत्री ने पेश किया प्रस्ताव यह प्रस्ताव तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री के. जी. अरुणराज ने विधानसभा में पेश किया। प्रस्ताव में कहा गया कि NEET सामाजिक न्याय और समानता के सिद्धांतों के खिलाफ है तथा मेडिकल शिक्षा के मामले में राज्यों के अधिकारों को प्रभावित करता है। राज्य सरकार का तर्क है कि एक केंद्रीकृत प्रवेश परीक्षा का असर ग्रामीण, आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्गों के विद्यार्थियों पर पड़ता है। सरकार ने यह भी दावा किया कि NEET ने महंगे कोचिंग संस्थानों पर निर्भरता बढ़ाई है। ज्यादातर दलों ने किया समर्थन विधानसभा में DMK, AIADMK, PMK और वाम दलों समेत कई दलों ने प्रस्ताव का समर्थन किया। हालांकि, BJP के एकमात्र विधायक ने प्रस्ताव का विरोध करते हुए सदन से वॉकआउट किया। BJP की ओर से तर्क दिया गया कि NEET ग्रामीण और गरीब विद्यार्थियों के लिए भी अवसर उपलब्ध कराता है। 12वीं के अंकों से दाखिले की मांग प्रस्ताव में केंद्र से ऐसा कानूनी ढांचा तैयार करने का आग्रह किया गया है, जिससे तमिलनाडु में MBBS समेत स्नातक मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश कक्षा 12 के अंकों के आधार पर किया जा सके। राज्य पहले भी NEET से छूट की मांग करता रहा है। हालांकि, विधानसभा का यह प्रस्ताव अपने आप NEET को तमिलनाडु से खत्म नहीं करता। इसके लिए केंद्र स्तर पर संबंधित कानूनों में बदलाव और आवश्यक संवैधानिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी।