शिक्षा

CBSE 12वीं कंपार्टमेंट रिजल्ट 2026 का इंतजार, अगस्त में जारी होने की उम्मीद

anjali kumari अगस्त 12, 2026 0
CBSE Class 12 Compartment Result 2026
CBSE Class 12 Compartment Result 2026

नई दिल्ली। CBSE कक्षा 12वीं के कंपार्टमेंट यानी सप्लीमेंट्री परीक्षा 2026 के रिजल्ट का विद्यार्थियों को इंतजार है। ताजा उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, CBSE ने अभी तक रिजल्ट जारी करने की आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है, लेकिन रिजल्ट अगस्त 2026 में जारी होने की उम्मीद है।

 

13 मई को आया था मुख्य रिजल्ट

 

CBSE ने कक्षा 12वीं का मुख्य परीक्षा परिणाम 13 मई 2026 को जारी किया था। इस साल कुल 85.20 प्रतिशत विद्यार्थी पास हुए थे, जबकि 1,63,800 विद्यार्थी कंपार्टमेंट श्रेणी में रखे गए थे। इसके बाद कंपार्टमेंट विद्यार्थियों के लिए सप्लीमेंट्री परीक्षा आयोजित की गई। CBSE ने परीक्षा की डेटशीट भी जारी की थी।

 

कब जारी होगा रिजल्ट?

 

फिलहाल CBSE की ओर से रिजल्ट की निश्चित तारीख और समय की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। हालांकि, पिछले वर्षों के परिणाम जारी होने के पैटर्न और इस साल की परीक्षा प्रक्रिया को देखते हुए अगस्त में रिजल्ट आने की संभावना जताई जा रही है। विद्यार्थियों को सलाह है कि वे रिजल्ट के लिए केवल CBSE के आधिकारिक पोर्टल और DigiLocker पर भरोसा करें।

 

रिजल्ट कहां और कैसे देख सकेंगे?

 

रिजल्ट जारी होने के बाद विद्यार्थी अपना परिणाम इन माध्यमों से देख सकेंगे:

 

CBSE की आधिकारिक वेबसाइट


CBSE Results पोर्टल
DigiLocker
UMANG ऐप

रिजल्ट देखने के लिए विद्यार्थियों को अपना रोल नंबर और मांगी गई अन्य जानकारी दर्ज करनी होगी। CBSE की आधिकारिक वेबसाइट पर फिलहाल 2026 के सप्लीमेंट्री परीक्षा से संबंधित नोटिस और परीक्षा कार्यक्रम उपलब्ध हैं।

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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तमिलनाडु विधानसभा में NEET खत्म करने का प्रस्ताव पारित
तमिलनाडु विधानसभा ने NEET खत्म करने की मांग वाला प्रस्ताव किया पास, 12वीं के अंकों से मेडिकल दाखिले की मांग

चेन्नई, एजेंसियां। तमिलनाडु विधानसभा ने मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को स्नातक मेडिकल पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए NEET खत्म करने की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया। प्रस्ताव में केंद्र सरकार से NEET व्यवस्था को समाप्त कर तमिलनाडु में कक्षा 12 के अंकों के आधार पर मेडिकल दाखिले की व्यवस्था बहाल करने के लिए आवश्यक कानूनी बदलाव करने का आग्रह किया गया है।   स्वास्थ्य मंत्री ने पेश किया प्रस्ताव   यह प्रस्ताव तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री के. जी. अरुणराज ने विधानसभा में पेश किया। प्रस्ताव में कहा गया कि NEET सामाजिक न्याय और समानता के सिद्धांतों के खिलाफ है तथा मेडिकल शिक्षा के मामले में राज्यों के अधिकारों को प्रभावित करता है। राज्य सरकार का तर्क है कि एक केंद्रीकृत प्रवेश परीक्षा का असर ग्रामीण, आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्गों के विद्यार्थियों पर पड़ता है। सरकार ने यह भी दावा किया कि NEET ने महंगे कोचिंग संस्थानों पर निर्भरता बढ़ाई है।   ज्यादातर दलों ने किया समर्थन   विधानसभा में DMK, AIADMK, PMK और वाम दलों समेत कई दलों ने प्रस्ताव का समर्थन किया। हालांकि, BJP के एकमात्र विधायक ने प्रस्ताव का विरोध करते हुए सदन से वॉकआउट किया। BJP की ओर से तर्क दिया गया कि NEET ग्रामीण और गरीब विद्यार्थियों के लिए भी अवसर उपलब्ध कराता है।   12वीं के अंकों से दाखिले की मांग   प्रस्ताव में केंद्र से ऐसा कानूनी ढांचा तैयार करने का आग्रह किया गया है, जिससे तमिलनाडु में MBBS समेत स्नातक मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश कक्षा 12 के अंकों के आधार पर किया जा सके। राज्य पहले भी NEET से छूट की मांग करता रहा है। हालांकि, विधानसभा का यह प्रस्ताव अपने आप NEET को तमिलनाडु से खत्म नहीं करता। इसके लिए केंद्र स्तर पर संबंधित कानूनों में बदलाव और आवश्यक संवैधानिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

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QS रैंकिंग 2027 में भारतीय संस्थानों की संख्या बढ़कर 52 हुई, IIT दिल्ली भारत में सबसे आगे

नई दिल्ली, एजेंसियां। QS World University Rankings 2027 में भारत की मौजूदगी बढ़कर 52 संस्थानों तक पहुंच गई है। QS के अनुसार भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था ने वैश्विक स्तर पर अपनी मौजूदगी में उल्लेखनीय विस्तार किया है। पिछले एक दशक में भारतीय संस्थानों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है और इस बार कई संस्थानों ने अपनी वैश्विक रैंकिंग में सुधार भी किया है।   IIT दिल्ली 118वें स्थान पर   QS World University Rankings 2027 में IIT दिल्ली भारत का सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला संस्थान रहा। संस्थान ने वैश्विक स्तर पर 118वां स्थान हासिल किया, जो पिछले संस्करण के 123वें स्थान से पांच पायदान बेहतर है। यह किसी भारतीय संस्थान की QS रैंकिंग में अब तक की सर्वश्रेष्ठ स्थिति के बराबर है। भारत के शीर्ष संस्थानों में IIT बॉम्बे 134वें, IIT मद्रास 170वें, IIT खड़गपुर 205वें और IIT कानपुर तथा IISc बेंगलुरु 221वें स्थान पर रहे। दिल्ली विश्वविद्यालय 322वें स्थान पर रहा।   2015 के मुकाबले बड़ी छलांग   QS के आंकड़ों के मुताबिक 2015 में भारत के सिर्फ 11 संस्थान रैंकिंग में शामिल थे, जबकि 2027 के संस्करण में यह संख्या बढ़कर 52 हो गई है। QS के विश्लेषण के अनुसार भारत अब रैंकिंग में शामिल संस्थानों की संख्या के मामले में दुनिया की प्रमुख उच्च शिक्षा प्रणालियों में शामिल है। भारत की इस बढ़ती मौजूदगी को उच्च शिक्षा में संस्थागत विस्तार, शोध क्षमता और वैश्विक अकादमिक एवं नियोक्ता प्रतिष्ठा में सुधार से जोड़कर देखा जा रहा है।   26 भारतीय संस्थानों की रैंकिंग में सुधार   2027 संस्करण में 26 भारतीय संस्थानों ने अपनी पिछली रैंकिंग में सुधार किया। खास बात यह है कि बेहतर प्रदर्शन केवल IIT जैसे पारंपरिक शीर्ष संस्थानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अन्य भारतीय संस्थानों ने भी वैश्विक रैंकिंग में अपनी स्थिति मजबूत की है। QS World University Rankings 2027 में दुनियाभर के 1,504 संस्थान शामिल किए गए हैं। इस संस्करण में 98 नए संस्थानों ने भी पहली बार जगह बनाई है।   भारतीय उच्च शिक्षा के लिए बढ़ी उम्मीद   QS रैंकिंग में भारतीय संस्थानों की बढ़ती संख्या को देश के उच्च शिक्षा क्षेत्र के विस्तार के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर शीर्ष संस्थानों की संख्या और अंतरराष्ट्रीयकरण जैसे क्षेत्रों में भारत के सामने अभी भी चुनौतियां हैं। फिलहाल 52 संस्थानों की मौजूदगी और IIT दिल्ली के 118वें स्थान पर पहुंचने से भारतीय उच्च शिक्षा की वैश्विक पहचान को मजबूती मिली है। आने वाले वर्षों में शोध, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर जोर बढ़ाकर भारत अपनी स्थिति और बेहतर करने की कोशिश कर सकता है।

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नई दिल्ली, एजेंसियां। UGC NET जून 2026 की प्रोविजनल आंसर की जारी नहीं होने से नाराज अभ्यर्थियों ने आज यानी 11 अगस्त 2026 को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करने का आह्वान किया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा खत्म हुए 40 दिन से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक आंसर की जारी नहीं की गई है।   7 लाख से ज्यादा अभ्यर्थी कर रहे इंतजार     UGC NET जून 2026 की परीक्षा 22 जून से 5 जुलाई 2026 के बीच आयोजित की गई थी। परीक्षा समाप्त होने के बाद से लाखों उम्मीदवार प्रोविजनल आंसर की, रिकॉर्डेड रिस्पॉन्स और आगे के परिणाम से जुड़ी प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं।   अभ्यर्थियों का आरोप है कि आंसर की में देरी के कारण वे अपने संभावित स्कोर का आकलन नहीं कर पा रहे हैं। साथ ही JRF, असिस्टेंट प्रोफेसर और आगे की शैक्षणिक योजनाओं को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है।   10 अगस्त तक आंसर की जारी करने की मांग     अभ्यर्थियों ने NTA से मांग की थी कि 10 अगस्त तक जून 2026 की प्रोविजनल आंसर की जारी की जाए। ऐसा नहीं होने की स्थिति में 11 अगस्त से NTA कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करने की घोषणा की गई थी।   प्रदर्शन का उद्देश्य NTA पर आंसर की जल्द जारी करने और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट समयसीमा बताने का दबाव बनाना है। सोशल मीडिया पर भी उम्मीदवार लंबे समय से आंसर की जारी करने की मांग उठा रहे हैं।   NTA ने अब दिया आंसर की का अपडेट     इसी बीच आज सामने आए अपडेट में NTA की ओर से UGC NET जून 2026 की प्रोविजनल आंसर की इसी सप्ताह जारी करने की बात कही गई है। आंसर की के साथ उम्मीदवारों की रिकॉर्डेड रिस्पॉन्स शीट और प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए जाने की उम्मीद है।   आंसर की जारी होने के बाद उम्मीदवारों को गलत उत्तरों के खिलाफ निर्धारित प्रक्रिया के तहत आपत्ति दर्ज कराने का मौका मिलेगा। आपत्तियों की समीक्षा के बाद अंतिम आंसर की तैयार की जाएगी।   प्रदर्शन के बीच NTA पर बढ़ा दबाव     आंसर की में देरी को लेकर अभ्यर्थियों का प्रदर्शन ऐसे समय हो रहा है जब NTA ने इसी सप्ताह आंसर की जारी करने का अपडेट दिया है। अब उम्मीदवारों की नजर इस बात पर है कि एजेंसी किस तारीख को आंसर की जारी करती है।   फिलहाल अभ्यर्थियों की मुख्य मांग है कि आंसर की और रिकॉर्डेड रिस्पॉन्स शीट जल्द उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे अपने प्रदर्शन का आकलन कर सकें और आगे की भर्ती एवं शैक्षणिक प्रक्रियाओं के लिए समय पर तैयारी कर सकें।

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