साल 2026 का चौथा महीना फिल्म प्रेमियों के लिए खास होने वाला है। अप्रैल में बॉलीवुड अलग-अलग जॉनर की फिल्मों के साथ दर्शकों को एंटरटेन करने के लिए तैयार है। हॉरर-कॉमेडी से लेकर रोमांटिक ड्रामा और बायोपिक तक, इस महीने सिनेमाघरों में हर तरह का कंटेंट देखने को मिलेगा। खास बात यह है कि कई बड़ी स्टार कास्ट और चर्चित निर्देशक भी इस महीने अपनी फिल्मों के साथ वापसी कर रहे हैं।
आइए जानते हैं अप्रैल 2026 में रिलीज होने वाली 5 बड़ी हिंदी फिल्मों के बारे में:
स्टार कास्ट: Akshay Kumar, Paresh Rawal, Rajpal Yadav, Tabu, Wamiqa Gabbi
डायरेक्टर: Priyadarshan
जॉनर: हॉरर-कॉमेडी
रिलीज डेट: 10 अप्रैल 2026
करीब एक दशक बाद अक्षय कुमार और प्रियदर्शन की जोड़ी फिर से बड़े पर्दे पर वापसी कर रही है। “भूत बंगला” एक फैंटेसी हॉरर-कॉमेडी है, जिसमें कॉमेडी और डर का जबरदस्त मिश्रण देखने को मिलेगा।
स्टार कास्ट: Avinash Tiwary, Medha Shankr, Lillete Dubey, Sudhir Pandey, Govind Namdev
डायरेक्टर: Prasshant Jha
जॉनर: रोमांटिक कॉमेडी
रिलीज डेट: 24 अप्रैल 2026
यह फिल्म एक हल्की-फुल्की फैमिली एंटरटेनर है, जिसमें प्यार, रिश्ते और हास्य का शानदार मेल देखने को मिलेगा। पहले पार्ट की सफलता के बाद इसका सीक्वल काफी चर्चा में है।
स्टार कास्ट: Adil Hussain, Raj Vasudeva, Niharica Raizada
डायरेक्टर: Mitul Patel
जॉनर: सस्पेंस-ड्रामा
रिलीज डेट: 24 अप्रैल 2026
“मर्सी” एक इमोशनल और गहराई से भरी कहानी है, जो प्यार, बिछड़ने और इंसानी रिश्तों की जटिलताओं को दिखाती है।
स्टार कास्ट: Divya Agarwal, Rajniesh Duggall
डायरेक्टर: Saurabh Chaubey
जॉनर: सुपरनैचुरल हॉरर-थ्रिलर
रिलीज डेट: 24 अप्रैल 2026
यह फिल्म एक रहस्यमयी अलमारी के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसमें छिपे ऐसे राज सामने आते हैं जो कभी खुलने के लिए नहीं बने थे।
स्टार कास्ट: Subodh Bhave, Hiten Tejwani
डायरेक्टर: Sharad Singh Thakur
जॉनर: बायोग्राफिकल
रिलीज डेट: 24 अप्रैल 2026
यह फिल्म आध्यात्मिक गुरु नीब करौली बाबा के जीवन, शिक्षाओं और उनके प्रभाव को बड़े पर्दे पर पेश करेगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
2007 में रिलीज हुई बॉलीवुड की लोकप्रिय कॉमेडी फिल्म ‘धमाल’ एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह फिल्म की कॉमेडी नहीं बल्कि इसके राइट्स को लेकर सामने आया कानूनी विवाद है। फिल्म के निर्देशक इंद्र कुमार और निर्माता अशोक ठकेरिया के खिलाफ मुंबई में 1.50 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। मामला फिल्म के डिस्ट्रीब्यूशन, डिजिटल और कॉपीराइट राइट्स से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जिन अधिकारों के लिए उनसे रकम ली गई, उनमें से कुछ राइट्स पहले ही दूसरी कंपनी को दिए जा चुके थे। 17 अगस्त को दर्ज हुई FIR मुंबई के फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर विकास बलदेव राज साहनी, जो ‘ग्रैंड मास्टर’ नाम की डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी से जुड़े हैं, की शिकायत के आधार पर 17 अगस्त को अंबोली पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई। मामला भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और 3(5) के तहत दर्ज किया गया है। ये धाराएं कथित धोखाधड़ी और एक से अधिक लोगों की मिलीभगत से अपराध से संबंधित हैं। हालांकि, FIR में लगाए गए आरोपों का अदालत में अभी परीक्षण होना बाकी है। इसलिए आरोपों को फिलहाल आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। 1.50 करोड़ रुपये की कथित डील क्या थी? शिकायत के मुताबिक, 15 अक्टूबर 2019 को ‘ग्रैंड मास्टर’ और मारुति इंटरनेशनल के बीच एक समझौता हुआ था। इसके तहत ‘धमाल’ के परमानेंट वर्ल्डवाइड डिस्ट्रीब्यूशन, डिजिटल और कॉपीराइट राइट्स के लिए कथित तौर पर 1.50 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि उस समय उन्हें बताया गया था कि ये राइट्स किसी अन्य कंपनी को नहीं दिए गए हैं। बाद में उन्हें कथित तौर पर पता चला कि फिल्म के लाइफटाइम OTT और डिजिटल राइट्स इससे करीब चार साल पहले, 2015 में ही शेमारू एंटरटेनमेंट को दिए जा चुके थे। यही बात पूरे विवाद का मुख्य आधार बन गई है। पुराने एग्रीमेंट से कैसे उलझा मामला? शिकायत के अनुसार, जनवरी 2020 में अशोक ठकेरिया डिस्ट्रीब्यूटर के कार्यालय पहुंचे और शेमारू एंटरटेनमेंट के साथ हुए पुराने समझौते की जानकारी दी। इसके बाद फिल्म के अधिकारों को लेकर स्थिति और जटिल हो गई। आरोप है कि अक्टूबर 2020 में मारुति इंटरनेशनल और शेमारू के बीच एक सप्लीमेंट्री एग्रीमेंट भी हुआ, जिसके बाद निर्माता के पास फिल्म के अधिकार सीमित रह गए। दूसरी ओर, ग्रैंड मास्टर ने मार्च 2020 में ‘धमाल’ के सिनेमैटोग्राफ कॉपीराइट के लिए आवेदन किया था। शिकायतकर्ता के मुताबिक, अप्रैल 2023 में उन्हें कॉपीराइट सर्टिफिकेट भी प्राप्त हुआ। विकास साहनी का दावा है कि उनके पास संबंधित दस्तावेजों के साथ फिल्म की ओरिजिनल नेगेटिव भी मौजूद है। डिस्ट्रीब्यूटर ने करोड़ों के नुकसान का लगाया आरोप विकास साहनी ने आरोप लगाया है कि राइट्स को लेकर स्पष्टता नहीं होने के कारण उनकी कंपनी कई डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ संभावित समझौते नहीं कर सकी। इससे कंपनी को करोड़ों रुपये का कथित आर्थिक नुकसान हुआ। उन्होंने इस मामले में जनवरी 2023 में आरोपियों को कानूनी नोटिस भी भेजा था। शिकायतकर्ता का कहना है कि संतोषजनक समाधान नहीं मिलने के बाद पुलिस में शिकायत की गई और अब FIR दर्ज हुई है। मारुति इंटरनेशनल ने क्या कहा? मामला सामने आने के बाद अशोक ठकेरिया से जुड़ी मारुति इंटरनेशनल की ओर से कहा गया है कि संबंधित पक्षों के बीच बातचीत चल रही है और विवाद को आपसी सहमति से सुलझाने की कोशिश की जा रही है। इससे संकेत मिलता है कि मामला फिलहाल कानूनी प्रक्रिया के साथ-साथ बातचीत के स्तर पर भी आगे बढ़ रहा है। क्या है ‘धमाल’ फिल्म? इंद्र कुमार के निर्देशन और अशोक ठकेरिया के प्रोडक्शन में बनी ‘धमाल’ सितंबर 2007 में रिलीज हुई थी। फिल्म में संजय दत्त, अरशद वारसी, जावेद जाफरी और रितेश देशमुख प्रमुख भूमिकाओं में थे। कॉमेडी और मनोरंजन से भरपूर इस फिल्म को दर्शकों ने पसंद किया था। इसकी सफलता के बाद ‘धमाल’ एक फ्रैंचाइजी में बदल गई और आगे इसके कई सीक्वल भी बनाए गए। अब फिल्म के राइट्स को लेकर दर्ज हुई FIR ने करीब दो दशक पुरानी इस हिट फिल्म को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। हालांकि, मामले में आरोपों की अंतिम सच्चाई जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
मुंबई, एजेंसियां। सलमान खान के चर्चित रियलिटी शो ‘बिग बॉस 20’ को लेकर कंटेस्टेंट्स के नामों की चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच टीवी और बॉलीवुड अभिनेत्री मौनी रॉय का नाम भी सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शो के मेकर्स ने मौनी रॉय को बतौर कंटेस्टेंट शामिल होने के लिए अप्रोच किया है। हालांकि, अभिनेत्री की तरफ से अभी तक शो में शामिल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मेकर्स मौनी को शो में लाने के लिए उत्सुक रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि ‘बिग बॉस 20’ के निर्माता मौनी रॉय को शो का हिस्सा बनाने में काफी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। अभिनेत्री को इसके लिए अच्छी रकम ऑफर किए जाने की भी चर्चा है। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच बातचीत चलने की खबर है। ‘नागिन’ से मिली थी बड़ी पहचान मौनी रॉय को टीवी की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में गिना जाता है। ‘नागिन’ में उनके किरदार ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई थी। इसके बाद उन्होंने बॉलीवुड में भी कदम रखा और ‘गोल्ड’ तथा ‘ब्रह्मास्त्र’ जैसी फिल्मों में नजर आईं। अभी आधिकारिक ऐलान नहीं मौनी रॉय के बिग बॉस के घर में आने की खबर फिलहाल रिपोर्ट्स और चर्चाओं पर आधारित है। मेकर्स ने अभी कंटेस्टेंट के तौर पर उनके नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। इसलिए यह देखना दिलचस्प होगा कि अभिनेत्री सलमान खान के शो में एंट्री लेंगी या नहीं। सितंबर में शुरू हो सकता है नया सीजन रिपोर्ट्स के अनुसार ‘बिग बॉस 20’ सितंबर 2026 में शुरू होने की तैयारी में है, जबकि सलमान खान एक बार फिर शो की मेजबानी करते नजर आएंगे। मौनी रॉय के अलावा कई अन्य चर्चित नाम भी संभावित कंटेस्टेंट्स की सूची में चर्चा का विषय बने हुए हैं।
हैदराबाद, एजेंसियां। अभिनेता अक्षय खन्ना अपनी अगली फिल्म ‘महाकाली’ में बिल्कुल नए अवतार में नजर आने वाले हैं। फिल्म में वह असुरों के गुरु शुक्राचार्य की भूमिका निभा रहे हैं। निर्माताओं ने उनके किरदार का लुक जारी किया है, जिसमें लंबी सफेद दाढ़ी, जटाएं और गंभीर भाव के साथ अक्षय खन्ना पहचान में भी मुश्किल से आ रहे हैं। शुक्राचार्य के किरदार में दिखेगा दमदार रूप ‘महाकाली’ में अक्षय खन्ना को एक बेहद प्रभावशाली और रहस्यमयी किरदार में पेश किया जा रहा है। पौराणिक कथाओं में शुक्राचार्य को असुरों का गुरु और महान ज्ञानी माना जाता है। फिल्म में इसी किरदार को आधुनिक सिनेमाई अंदाज में दिखाने की तैयारी है। ‘धुरंधर’ के बाद फिर बदला लुक अक्षय खन्ना ने हाल ही में ‘धुरंधर’ में रहमान डकैत के किरदार से दर्शकों का ध्यान खींचा था। अब ‘महाकाली’ में उनका ट्रांसफॉर्मेशन उससे बिल्कुल अलग नजर आ रहा है। लंबे सफेद बाल, घनी दाढ़ी और गंभीर चेहरे ने उनके लुक को काफी प्रभावशाली बना दिया है। 24 अगस्त को सामने आएगी पहली झलक फिल्म के निर्माताओं ने संकेत दिया है कि ‘महाकाली’ की पहली आधिकारिक झलक 24 अगस्त 2026 को जारी की जाएगी। प्रोडक्शन हाउस ने सोशल मीडिया पर “24th August – The End Begins” संदेश के साथ इस रिवील को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है। प्रशांत वर्मा के सिनेमाई यूनिवर्स का हिस्सा ‘महाकाली’ प्रशांत वर्मा सिनेमैटिक यूनिवर्स की ‘हनु-मान’ के बाद अगली फिल्म है। फिल्म का निर्देशन पूजा अपर्णा कोल्लुरु कर रही हैं और इसमें भूमि शेट्टी मुख्य भूमिका में हैं। अक्षय खन्ना के अलावा रोहित सराफ समेत कई कलाकार भी फिल्म का हिस्सा हैं।