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Taapsee’s Rise Story

तापसी पन्नू की कहानी: फ्लॉप फिल्मों से ‘पनौती’ तक, फिर बनीं कंटेंट क्वीन

surbhi अप्रैल 3, 2026 0
Taapsee Pannu journey from struggling actress to successful content-driven Bollywood performer
Taapsee Pannu Inspiring Journey

दिल्ली के एक साधारण परिवार से निकलकर इंजीनियरिंग करने वाली तापसी पन्नू ने कभी नहीं सोचा था कि वह फिल्म इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाएंगी। लेकिन किस्मत और मेहनत ने उन्हें यहां तक पहुंचा दिया।

शुरुआत मॉडलिंग से हुई, जहां उनका मकसद सिर्फ एक्स्ट्रा कमाई था। लेकिन धीरे-धीरे यही शौक करियर बन गया और उन्हें साउथ फिल्म इंडस्ट्री में मौका मिला। हालांकि, वहां उन्हें लंबे समय तक सिर्फ ग्लैमरस रोल्स तक सीमित रखा गया।

जब फ्लॉप फिल्मों ने दिया ‘पनौती’ का टैग

साउथ में कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर नहीं चलीं, जिसके बाद तापसी को ‘पनौती’ तक कहा गया। इस टैग ने उनके आत्मविश्वास को हिला दिया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

बॉलीवुड में एंट्री भी आसान नहीं रही। ‘चश्मे बद्दूर’ से शुरुआत के बाद कई फिल्में औसत या फ्लॉप रहीं। इस दौरान तापसी खुद को लेकर असुरक्षित महसूस करती थीं-उन्हें लगता था कि वह हीरोइन बनने के लायक नहीं हैं।

आत्म-संदेह और स्ट्रगल का दौर

तापसी ने खुद स्वीकार किया कि वह अपने लुक, स्टाइल और कॉन्फिडेंस को लेकर काफी परेशान रहती थीं। हर फिल्म उनके लिए एक डर की तरह थी।

उन्हें यह भी लगता था कि वह बाकी हीरोइनों जितनी खूबसूरत नहीं हैं, इसलिए शायद इंडस्ट्री उन्हें स्वीकार नहीं करेगी। यह दौर उनके लिए मानसिक रूप से भी काफी कठिन रहा।

‘पिंक’ से बदली किस्मत

2016 में आई फिल्म ‘पिंक’ उनके करियर का टर्निंग पॉइंट बनी। इस फिल्म ने उनकी इमेज पूरी तरह बदल दी और उन्हें एक गंभीर अभिनेत्री के रूप में पहचान दिलाई।

कंटेंट-ड्रिवन फिल्मों से बनाई अलग पहचान

‘पिंक’ के बाद तापसी ने सिर्फ वही फिल्में चुननी शुरू कीं जिनकी कहानी मजबूत हो।
उन्होंने ‘मुल्क’, ‘मनमर्जियां’, ‘बदला’, ‘थप्पड़’ जैसी फिल्मों से साबित किया कि वह सिर्फ ग्लैमरस एक्ट्रेस नहीं, बल्कि एक दमदार परफॉर्मर हैं।

खासकर ‘थप्पड़’ में उनके अभिनय को काफी सराहा गया और उन्हें फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवॉर्ड भी मिला।

आउटसाइडर से इंडस्ट्री की मजबूत आवाज तक

तापसी ने हमेशा कंटेंट को प्राथमिकता दी, न कि सिर्फ कमर्शियल सफलता को।
उन्होंने अपने फैसलों से यह साबित किया कि टैलेंट और सही चुनाव के दम पर इंडस्ट्री में जगह बनाई जा सकती है।

पर्सनल लाइफ और शुरुआती सफर

  • जन्म: 1 अगस्त 1987, नई दिल्ली
  • परिवार: जाट सिख परिवार
  • शिक्षा: कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग
  • करियर शुरुआत: मॉडलिंग और एड्स

1984 के सिख दंगों का असर उनके परिवार ने भी झेला, लेकिन मुश्किल समय में पड़ोसियों की मदद से वे सुरक्षित रहे।

सीख क्या मिलती है?

तापसी पन्नू की कहानी बताती है कि:

  • असफलता अंत नहीं होती
  • आत्म-संदेह सबसे बड़ी बाधा है
  • सही मौके और मेहनत से पहचान बदली जा सकती है
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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Cannes 2026: कान्स रेड कार्पेट पर मां ऐश्वर्या संग दिखीं आराध्या बच्चन, 14 साल की स्टारकिड ने लूटी लाइमलाइट

Cannes Film Festival 2026 इस बार सिर्फ फिल्मों और ग्लैमरस फैशन की वजह से ही नहीं, बल्कि बच्चन परिवार की खास मौजूदगी को लेकर भी चर्चा में है। हर साल की तरह Aishwarya Rai Bachchan ने अपने शानदार लुक से सबका ध्यान खींचा, लेकिन इस बार सबसे ज्यादा सुर्खियां उनकी बेटी Aaradhya Bachchan ने बटोरीं। 14 साल की आराध्या ने पहली बार इंटरनेशनल रेड कार्पेट पर एंट्री की और आते ही सोशल मीडिया पर छा गईं। मां-बेटी की यह खूबसूरत जोड़ी अब इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रही है। ऐश्वर्या राय बच्चन का रॉयल लुक कान्स फिल्म फेस्टिवल में Aishwarya Rai Bachchan पहले एक ड्रामेटिक ब्लू आउटफिट में नजर आईं, जिसने सोशल मीडिया पर खूब चर्चा बटोरी। इसके बाद वह ‘लाइट्स ऑन वीमेन’स वर्थ’ इवेंट में बेहद एलिगेंट अंदाज में दिखाई दीं। इस खास मौके पर ऐश्वर्या ने डिजाइनर सोफी कॉउचर का पेस्टल पिंक गाउन पहना था। फ्लोरल डिटेलिंग और लंबी शीयर केप ने उनके पूरे लुक को बेहद रॉयल बना दिया। मिनिमल मेकअप और क्लासी स्टाइल के साथ उन्होंने एक बार फिर फैंस का दिल जीत लिया। आराध्या बच्चन ने बटोरी पूरी लाइमलाइट इस बार सबसे ज्यादा चर्चा Aaradhya Bachchan के लुक की रही। रेड साटन गाउन और शिमरी केप में आराध्या बेहद खूबसूरत नजर आईं। उन्होंने साइड-पार्टेड कर्ली हेयरस्टाइल के साथ अपना लुक पूरा किया। इवेंट से पहले होटल के बाहर के कुछ वीडियो भी सामने आए, जिनमें Aishwarya Rai Bachchan अपनी बेटी का हाथ पकड़कर कार तक जाती दिखाई दीं। सोशल मीडिया पर फैंस मां-बेटी की बॉन्डिंग और आराध्या के कॉन्फिडेंस की जमकर तारीफ कर रहे हैं। कान्स में बच्चन परिवार की खास मौजूदगी Aishwarya Rai Bachchan लंबे समय से कान्स फिल्म फेस्टिवल का हिस्सा रही हैं और एक इंटरनेशनल ब्यूटी ब्रांड की ग्लोबल एंबेसडर भी हैं। हालांकि Aaradhya Bachchan इससे पहले कई बार अपनी मां के साथ विदेश यात्राओं और बड़े इवेंट्स में नजर आ चुकी हैं, लेकिन रेड कार्पेट पर यह उनकी पहली आधिकारिक एंट्री मानी जा रही है। इस खास इवेंट में Eva Longoria, Ariana Greenblatt, Amy Jackson और कई इंटरनेशनल स्टार्स भी शामिल हुए।  

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Movie Review: चांद मेरा दिल: अनन्या पांडे-लक्ष्य की इमोशनल कहानी

मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड में प्रेम कहानियां हमेशा फेवरेट रही हैं, लेकिन ज्यादातर फिल्मों में प्यार का सफर वहीं खत्म हो जाता है जहां हीरो-हीरोइन एक हो जाते हैं। शादी के बाद क्या होता है, जिम्मेदारियां रिश्ते को कैसे बदल देती हैं और प्यार कब थकने लगता है, इन सवालों से हिंदी सिनेमा अक्सर बचता रहा है। ‘चांद मेरा दिल’ इसी मुश्किल हिस्से को पकड़ने की कोशिश करती है। डायरेक्टर विवेक सोनी की यह फिल्म प्यार को सिर्फ खूबसूरत एहसास की तरह नहीं दिखाती, बल्कि उसके साथ आने वाली उलझनों, गुस्से, टूटन और दोबारा जुड़ने की कोशिशों को भी सामने लाती है। फिल्म कई जगह आपको अपने आसपास के रिश्तों की याद दिलाती है। हालांकि इसकी रफ्तार कुछ हिस्सों में धीमी पड़ती है, लेकिन इमोशनल पकड़ बनी रहती है। कहानी कॉलेज के प्यार से शादी तक और फिर रिश्ते की असली परीक्षाः हैदराबाद के बैकड्रॉप में बनी यह कहानी इंजीनियरिंग स्टूडेंट चांदनी (अनन्या पांडे) और आरव (लक्ष्य) के इर्द-गिर्द घूमती है। आरव पहली नजर में चांदनी पर दिल हार बैठता है। धीरे-धीरे दोस्ती प्यार में बदलती है और दोनों एक-दूसरे की दुनिया बन जाते हैं। कॉलेज रोमांस, लंबी बाइक राइड्स, देर रात की बातें और भविष्य के सपनों के बीच दोनों शादी का फैसला कर लेते हैं। लेकिन, असली कहानी शादी के बाद शुरू होती है। करियर का दबाव, आर्थिक जिम्मेदारियां, परिवार का हस्तक्षेप और रिश्ते में बढ़ती गलतफहमियां दोनों को बदलने लगती हैं। एक ऐसा पल आता है जब आरव का गुस्सा रिश्ते में ऐसी दरार पैदा कर देता है, जहां प्यार से ज्यादा आत्मसम्मान बड़ा सवाल बन जाता है। रिश्ता टूटने की कगार पर पहुंच जाता है। क्या दोनों अपने रिश्ते को दूसरा मौका देंगे या प्यार जिम्मेदारियों के बोझ तले दब जाएगा, यही फिल्म का मूल संघर्ष है। अभिनय अनन्या पांडे ने किया सरप्राइज, लक्ष्य ने दिखाया नया रंगः अगर इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत किसी चीज को कहा जाए, तो वह इसकी एक्टिंग है। अनन्या पांडे ने अपने करियर की अब तक की सबसे संतुलित परफॉर्मेंस दी है। उन्होंने चांदनी के किरदार को सिर्फ एक रोमांटिक लड़की बनाकर नहीं छोड़ा, बल्कि उसकी उलझन, दर्द, असुरक्षा और मजबूती को अच्छे से दिखाया है। कई इमोशनल सीन्स में वह काफी प्रभाव छोड़ती हैं। वहीं लक्ष्य इस फिल्म का बड़ा सरप्राइज हैं। ‘किल’ जैसी एक्शन फिल्म के बाद यहां उनका बेहद संवेदनशील और टूटा हुआ रूप देखने को मिलता है। गुस्से, पछतावे और प्यार के बीच फंसे एक लड़के की बेचैनी उन्होंने अच्छे ढंग से निभाई है। कई जगह उनकी बॉडी लैंग्वेज और इमोशनल सीन आपको बांधे रखते हैं। दोनों कलाकारों की केमिस्ट्री फिल्म का सबसे मजबूत हिस्सा बनकर सामने आती है। कम स्क्रीन टाइम में परेश पाहुजा भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं। निर्देशन और तकनीक रिश्तों की बारीकियों को समझती फिल्म डायरेक्टर विवेक सोनी ने कहानी को जरूरत से ज्यादा फिल्मी बनाने की बजाय उसे जमीन से जोड़े रखने की कोशिश की है। अच्छी बात यह है कि यहां गुस्से को हीरोइज्म की तरह नहीं दिखाया गया। रिश्तों में छोटी गलतियां किस तरह बड़ी दूरी में बदल जाती हैं, फिल्म इसे संवेदनशील तरीके से दिखाती है। कैमरा वर्क खासकर इमोशनल सीक्वेंस में अच्छा लगता है। कुछ सीन की फ्रेमिंग और लाइटिंग कहानी की बेचैनी को और असरदार बनाती है। एडिटिंग पहले हाफ में अच्छी है, लेकिन दूसरे हिस्से में फिल्म थोड़ी लंबी महसूस होने लगती है। फिल्म की कमियां  दूसरे हाफ में ढीली पड़ती रफ्तार फिल्म का सबसे कमजोर हिस्सा इसकी लंबाई है। 2 घंटे 26 मिनट का रनटाइम कुछ जगह भारी महसूस होता है। सेकेंड हाफ में कुछ सीन जरूरत से ज्यादा खिंचे लगते हैं और कहानी थोड़ी दोहराव वाली महसूस होती है। हालांकि ये बातें फिल्म के इमोशनल असर को पूरी तरह कमजोर नहीं करतीं। संगीत फिल्म का टाइटल ट्रैक असरदारः सचिन-जिगर का संगीत फिल्म की जान है। गाने कहानी पर बोझ नहीं लगते, बल्कि उसे आगे बढ़ाने का काम करते हैं। टाइटल ट्रैक लंबे समय तक याद रहता है। बैकग्राउंड स्कोर कई इमोशनल पलों को और मजबूत बनाता है और रिश्ते की बेचैनी को महसूस कराता है। फिल्म देखें या नहीं? ‘चांद मेरा दिल’ ऐसी प्रेम कहानी है, जो सिर्फ प्यार में पड़ने की नहीं, प्यार को बचाने की जद्दोजहद दिखाती है। फिल्म पूरी तरह परफेक्ट नहीं है और दूसरे हाफ में थोड़ा खिंचती भी है, लेकिन इसकी ईमानदार कहानी, मजबूत एक्टिंग और रिश्तों की सच्चाई इसे देखने लायक बनाती है। अगर आपको ऐसी फिल्में पसंद हैं जो प्यार की चमक के साथ उसकी थकान भी दिखाएं, तो यह फिल्म एक बार जरूर देखी जा सकती है। रेटिंग: 3/5 स्टार अवधि: 2 घंटे 26 मिनट कास्ट- अनन्या पांडे, लक्ष्य ललवानी डायरेक्टर- विवेक सोनी

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Karuppu box office hit
‘करुप्पु’ का बॉक्स ऑफिस पर धमाका, 5 दिनों में तोड़े कई रिकॉर्ड

चेन्नई, एजेंसियां। साउथ सुपरस्टार सूर्या की नई फिल्म 'करुप्पु' बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है। रिलीज के महज पांच दिनों के भीतर फिल्म ने दुनियाभर में 161.04 करोड़ रुपये की कमाई कर बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। फिल्म में सूर्या के साथ एक्ट्रेस तृषा कृष्णन मुख्य भूमिका में नजर आ रही हैं। दर्शकों से मिल रहे जबरदस्त रिस्पॉन्स के चलते यह फिल्म अब सूर्या के करियर की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन गई है।   करीब 130 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म को लेकर शुरुआत में अनुमान लगाया जा रहा था कि इसकी ओपनिंग सामान्य रह सकती है, लेकिन रिलीज के बाद फिल्म ने उम्मीदों से कहीं ज्यादा प्रदर्शन किया। तमिलनाडु के अलावा विदेशों में भी फिल्म को शानदार रिस्पॉन्स मिल रहा है।   सूर्या की सुपरहिट फिल्मों को छोड़ा पीछे ‘करुप्पु’ ने कमाई के मामले में सूर्या की कई बड़ी फिल्मों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इससे पहले ‘सिंघम 2’, ‘24’, ‘7 औम अरिवु’ और ‘अंजान’ उनकी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल थीं। अब ‘करुप्पु’ ने इन सभी फिल्मों को पीछे छोड़ दिया है। फिल्म ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि मौजूदा रफ्तार को देखते हुए फिल्म जल्द ही 200 करोड़ क्लब में शामिल हो सकती है। कई विशेषज्ञ यह भी मान रहे हैं कि आने वाले दिनों में इसका कलेक्शन 300 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।   एक्शन और फैंटेसी से भरपूर है कहानी फिल्म का निर्देशन RJ Balaji ने किया है। कहानी एक काल्पनिक किरदार ‘वेट्टई करुप्पु’ पर आधारित है, जो गरीबों और जरूरतमंदों की रक्षा के लिए धरती पर इंसान के रूप में आता है। फिल्म में सूर्या ‘सरवनन’ नाम के एक निडर वकील की भूमिका निभा रहे हैं, जो भ्रष्ट व्यवस्था और अन्याय के खिलाफ लड़ते हुए गरीबों को इंसाफ दिलाता है। सूर्या की पिछली कुछ फिल्मों को अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी, ऐसे में ‘करुप्पु’ को उनके करियर की दमदार वापसी माना जा रहा है।

Anjali Kumari मई 20, 2026 0
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