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'धमाल 4' की बॉक्स ऑफिस पर शानदार पकड़ बरकरार, आठवें दिन भी कमाए करोड़ों

abhishek singh जुलाई 18, 2026 0
Dhamaal 4 Movie
Dhamaal 4 Movie Box Office Collection

मुंबई, एजेंसियां। अजय देवगन स्टारर कॉमेडी फिल्म 'धमाल 4' बॉक्स ऑफिस पर लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही है। बिना बड़े प्रमोशन के 10 जुलाई को रिलीज हुई इस फिल्म ने पहले सप्ताह में ही 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है। हॉलीवुड फिल्म 'द ओडिसी' की रिलीज के बावजूद फिल्म ने अपनी पकड़ बनाए रखी और आठवें दिन भी अच्छी कमाई दर्ज की।

 

सैकनिल्क के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक


सैकनिल्क के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, रिलीज के आठवें दिन यानी शुक्रवार को 'धमाल 4' ने भारत में 5.50 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया। इसके साथ ही फिल्म की कुल भारतीय नेट कमाई 101.50 करोड़ रुपये पहुंच गई है। वहीं, फिल्म का वर्ल्डवाइड कलेक्शन 139.78 करोड़ रुपये हो गया है। मौजूदा रफ्तार को देखते हुए फिल्म जल्द ही 150 करोड़ रुपये का वैश्विक कारोबार पार कर सकती है।

 

फिल्म ने पहले दिन 14 करोड़ रुपये के साथ अच्छी शुरुआत की थी। दूसरे दिन 22.50 करोड़ और तीसरे दिन 28.50 करोड़ रुपये की कमाई कर वीकेंड का भरपूर फायदा उठाया। हालांकि सप्ताह के दिनों में कलेक्शन में सामान्य गिरावट देखने को मिली, लेकिन फिल्म 100 करोड़ क्लब में शामिल होने में सफल रही।

 

फिल्म 'द ओडिसी' 


इस बीच 17 जुलाई को हॉलीवुड की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'द ओडिसी' भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज हुई। पहले दिन इस फिल्म ने भारत में करीब 17 करोड़ रुपये का कारोबार किया, जो 'धमाल 4' के आठवें दिन के कलेक्शन से काफी अधिक रहा। इसके बावजूद 'धमाल 4' की कमाई पूरी तरह प्रभावित नहीं हुई और फिल्म ने दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में सफलता हासिल की।

 

इंद्र कुमार के निर्देशन में बनी 'धमाल 4' लोकप्रिय 'धमाल' फ्रेंचाइजी की चौथी फिल्म है। इसमें अजय देवगन के अलावा अरशद वारसी, रितेश देशमुख, जावेद जाफरी, रवि किशन, संजय मिश्रा, उपेंद्र लिमये, अंजलि आनंद, संजीदा शेख और ईशा गुप्ता प्रमुख भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। पारिवारिक कॉमेडी और मनोरंजन से भरपूर यह फिल्म दर्शकों को खूब पसंद आ रही है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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'सतलुज' विवाद में दिलजीत के समर्थन में उतरे मनकीरत औलख, बोले- सच दिखाया है

मुंबई, एजेंसियां। दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म 'सतलुज' को लेकर जारी विवाद के बीच मशहूर पंजाबी गायक मनकीरत औलख ने खुलकर फिल्म का समर्थन किया है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि "फिल्म 'सतलुज' हमारे दिलों के करीब है। दिलजीत दोसांझ ने जो हुआ, उसका सच दिखाया है।" उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब फिल्म को लेकर देशभर में बहस तेज है और इसके प्रदर्शन पर सवाल उठाए जा रहे हैं।   48 घंटे में OTT से हटाई गई फिल्म फिल्म 'सतलुज' रिलीज के करीब 48 घंटे के भीतर ही OTT प्लेटफॉर्म से हटा दी गई थी। सरकार के निर्देश के बाद मेकर्स ने इसे प्लेटफॉर्म से हटाया, जिसके बाद इस फैसले को लेकर कई पक्षों की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। फिल्म के समर्थन और विरोध में लगातार बयानबाजी जारी है।   इतिहास छिपाने के बजाय सामने लाने की मांग फिल्म विवाद पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और पंजाब ह्यूमन राइट्स ऑर्गेनाइजेशन से जुड़े जस्टिस (सेवानिवृत्त) रंजीत सिंह ने भी कहा कि इतिहास को छिपाया नहीं जाना चाहिए। उन्होंने जसवंत सिंह खालड़ा मामले का जिक्र करते हुए कहा कि नई पीढ़ी को उस दौर की सच्चाई और हुए अत्याचारों की जानकारी मिलनी चाहिए, ताकि वे इतिहास से सीख ले सकें। उन्होंने दोषी पुलिस अधिकारी की रिहाई पर भी सवाल उठाते हुए दोबारा गिरफ्तारी की मांग की।   फिल्म में कई चर्चित कलाकार निर्देशक हनी त्रेहान की इस फिल्म का निर्माण RSVP और मैकगफिन पिक्चर्स ने किया है। फिल्म में दिलजीत दोसांझ के साथ अर्जुन रामपाल, कंवलजीत सिंह, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या भी अहम भूमिकाओं में नजर आए हैं। हालांकि फिल्म को लेकर विवाद अभी भी जारी है, लेकिन मनकीरत औलख सहित कई लोग इसे ऐतिहासिक घटनाओं को सामने लाने वाली महत्वपूर्ण फिल्म बता रहे हैं।

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'लॉक अप' में अर्जुन कपूर ने शादी को लेकर कही ऐसी बात, बोले- 'मैं अभी भी जवान हूं और शादी के लिए तैयार हूं'

मुंबई, एजेंसियां। अभिनेता अर्जुन कपूर ने नेटफ्लिक्स के रियलिटी शो 'लॉक अप: सच या सज़ा' में अपनी शादी को लेकर ऐसा बयान दिया, जिसने सभी का ध्यान खींच लिया। शो के Judgement Day एपिसोड में बतौर मेहमान पहुंचे अर्जुन ने कंटेस्टेंट पामेला सेरेना से बातचीत के दौरान मजाकिया अंदाज में कहा, "मैं अभी भी जवान हूं और शादी के लिए तैयार हूं।" अर्जुन की यह बात सुनकर पामेला शर्मा गईं, जबकि बाकी कंटेस्टेंट्स और होस्ट्स ठहाके लगाने लगे।   पामेला सेरेना से की मजाकिया बातचीत   शो के दौरान अर्जुन कपूर ने बताया कि वह पामेला सेरेना के लोकप्रिय सेगमेंट 'कलेशी कॉर्नर' के बड़े प्रशंसक हैं। बातचीत के बीच उन्होंने हंसते हुए पामेला से कहा, "मैं शादी के लिए तैयार हूं।" अर्जुन की इस बात पर पामेला मुस्कुरा उठीं और पूरा माहौल हल्का-फुल्का हो गया।   'हमारी पसंद एक जैसी है'   मजाक को आगे बढ़ाते हुए अर्जुन ने कंटेस्टेंट आकांक्षा चमोला की ओर इशारा करते हुए कहा, "हमारी पसंद एक जैसी है।" उनके इस कमेंट के बाद शो में मौजूद सभी लोग हंस पड़े और यह पल सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल होने लगा।   सोशल मीडिया पर छिड़ी चर्चा   अर्जुन कपूर का यह वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर फैंस तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोगों ने इसे सिर्फ मजाक बताया, जबकि कई यूजर्स ने इसे अभिनेता की निजी जिंदगी और शादी की योजनाओं से जोड़कर भी देखा। हालांकि अर्जुन ने शो में इसे पूरी तरह हल्के-फुल्के अंदाज में कहा था।   'लॉक अप' में गेस्ट एंट्री बनी चर्चा का विषय   अर्जुन कपूर ने इस एपिसोड में 'जनता की आवाज़' के रूप में एंट्री की और कंटेस्टेंट्स से तीखे सवाल भी किए। लेकिन उनकी शादी वाली टिप्पणी एपिसोड का सबसे चर्चित पल बन गई, जिसकी क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।

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टॉम क्रूज भी हुए 'द ओडिसी' के मुरीद, थिएटर से निकलते ही की जमकर तारीफ

मुंबई, एजेंसियां। क्रिस्टोफर नोलन की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'द ओडिसी' 17 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है और रिलीज के साथ ही इसे दर्शकों और समीक्षकों से शानदार प्रतिक्रिया मिल रही है। अब इस फिल्म की तारीफ करने वालों की सूची में हॉलीवुड सुपरस्टार टॉम क्रूज का नाम भी जुड़ गया है। अपनी दमदार एक्शन फिल्मों और खतरनाक स्टंट्स के लिए मशहूर अभिनेता ने फिल्म देखने के बाद सोशल मीडिया पर इसकी खुलकर सराहना की।   टॉम क्रूज ने आईमैक्स 70mm थिएटर के बाहर फिल्म की टिकट हाथ में लिए अपनी तस्वीर साझा करते हुए लिखा, "वाह! क्रिस, एमा और आपकी शानदार कास्ट व क्रू को बहुत-बहुत धन्यवाद। मूवी थिएटर में एक शानदार रात के लिए शुक्रिया। मैं इसे दोबारा देखने का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं।" उनके इस पोस्ट ने सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर उत्साह और बढ़ा दिया।   एक यूजर ने लिखा क्रूज की इस प्रतिक्रिया पर फैंस ने भी दिलचस्प कमेंट किए। एक यूजर ने लिखा, "अगर कोई फिल्म देखकर तुरंत दोबारा थिएटर जाने का मन करे, तो वही सबसे बड़ा रिव्यू होता है।" वहीं दूसरे ने मजाकिया अंदाज में कहा, "जब सचमुच चट्टानों से कूदने वाला इंसान किसी फिल्म की सिफारिश करे, तो बिना सोचे टिकट बुक कर लेनी चाहिए।" कई लोगों ने इसे नोलन की फिल्म के लिए सबसे बड़ी रिकमेंडेशन बताया।   लिखित और निर्देशित 'द ओडिसी' क्रिस्टोफर नोलन द्वारा लिखित और निर्देशित 'द ओडिसी' होमर की प्रसिद्ध ग्रीक महाकाव्य कविता पर आधारित एक एपिक फैंटेसी-एक्शन फिल्म है। फिल्म में मैट डेमन ओडिसियस, टॉम हॉलैंड टेलीमैकस, ऐनी हैथवे पेनेलोप और रॉबर्ट पैटिनसन एंटिनस की भूमिका में नजर आए हैं। कहानी ट्रोजन युद्ध के बाद ओडिसियस की दस वर्षों तक चली संघर्षपूर्ण घर वापसी की यात्रा और उनके पारिवारिक व भावनात्मक रिश्तों को दिखाती है। 'ओपेनहाइमर' के बाद नोलन की यह पहली फिल्म है, जिसे भारत में बिना किसी कट के 'A' सर्टिफिकेट के साथ रिलीज किया गया है।

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