मुंबई, एजेंसियां। सिनेमाघरों में इमरान हाशमी की ‘आवारापन 2’ और सनी देओल की ‘बंटवारा 1947’ के बीच बॉक्स ऑफिस मुकाबला जारी है। पांचवें दिन भी ‘आवारापन 2’ ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया, जबकि ‘बंटवारा 1947’ की कमाई 30 करोड़ रुपये के पार पहुंची है।
सैकनिल्क के आंकड़ों के मुताबिक, ‘आवारापन 2’ ने रिलीज के पांचवें दिन भारत में करीब 9.50 करोड़ रुपये नेट कमाए। इसके साथ फिल्म का घरेलू नेट कलेक्शन 100.50 करोड़ रुपये हो गया है। फिल्म ने महज पांच दिनों में 100 करोड़ क्लब में जगह बना ली है।
फिल्म का भारत में ग्रॉस कलेक्शन करीब 120.04 करोड़ रुपये बताया गया है। वहीं, विदेशों में फिल्म ने पांचवें दिन लगभग 2 करोड़ रुपये ग्रॉस कमाए, जिससे इसकी कुल ओवरसीज कमाई करीब 23.80 करोड़ रुपये हो गई है। फिल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन बढ़कर 143.84 करोड़ रुपये पहुंच गया है।
फिल्म ने पहले दिन 22 करोड़ रुपये, दूसरे दिन 33.75 करोड़ रुपये, तीसरे दिन 26 करोड़ रुपये और चौथे दिन 9.25 करोड़ रुपये कमाए थे। पांचवें दिन 9.50 करोड़ रुपये जोड़ने के बाद फिल्म ने 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया।
वहीं, सनी देओल स्टारर ‘बंटवारा 1947’ की रफ्तार ‘आवारापन 2’ की तुलना में धीमी बनी हुई है। फिल्म ने पांचवें दिन करीब 2.15 करोड़ रुपये नेट का कलेक्शन किया। इसके साथ भारत में फिल्म की कुल नेट कमाई 30.65 करोड़ रुपये हो गई है।
फिल्म का घरेलू ग्रॉस कलेक्शन करीब 36.42 करोड़ रुपये है। पांचवें दिन विदेशों से लगभग 50 लाख रुपये ग्रॉस की कमाई के साथ फिल्म का ओवरसीज कलेक्शन 6.75 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं, इसका वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन करीब 43.17 करोड़ रुपये हो गया है।
सनी देओल की फिल्म ने पहले दिन 5.75 करोड़ रुपये, दूसरे दिन 13.50 करोड़ रुपये, तीसरे दिन 7.25 करोड़ रुपये और चौथे दिन 2 करोड़ रुपये कमाए थे। पांचवें दिन 2.15 करोड़ रुपये जोड़कर फिल्म 30 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई।
पांचवें दिन के आंकड़ों से साफ है कि ‘आवारापन 2’ इस बॉक्स ऑफिस मुकाबले में काफी आगे है। इमरान हाशमी की फिल्म जहां पांच दिनों में भारत में 100.50 करोड़ रुपये नेट कमा चुकी है, वहीं ‘बंटवारा 1947’ की घरेलू नेट कमाई 30.65 करोड़ रुपये है।
यानी दोनों फिल्मों के बीच करीब 70 करोड़ रुपये का अंतर नजर आ रहा है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में ‘बंटवारा 1947’ की कमाई रफ्तार पकड़ती है या ‘आवारापन 2’ अपनी मजबूत पकड़ बरकरार रखती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान का मशहूर बंगला ‘मन्नत’ उस समय चर्चा में आ गया, जब 17 अगस्त की शाम परिसर में दो सांप दिखाई दिए। सूचना मिलने के बाद सांपों को सुरक्षित निकालने के लिए रेस्क्यू टीम को बुलाया गया। तलाशी के दौरान करीब 8 फीट लंबा धामन यानी इंडियन रैट स्नेक पकड़ा गया। सीढ़ियों के नीचे छिपा मिला 8 फीट का सांप रिपोर्ट के मुताबिक, सांपों को रात करीब 8 बजे मन्नत के परिसर में देखा गया था। इसके बाद स्नेक रेस्क्यूअर विक्की दुबे को बुलाया गया। तलाशी अभियान के दौरान एक सांप सीढ़ियों के नीचे छिपा मिला, जिसे सावधानी से पकड़ लिया गया। धामन सांप जहरीला नहीं होता रेस्क्यू किए गए सांप की पहचान धामन के रूप में हुई है। यह इंडियन रैट स्नेक है और जहरीला नहीं होता। रेस्क्यू के बाद सांप को सुरक्षित तरीके से उसके प्राकृतिक वातावरण में छोड़ दिया गया। दूसरा सांप अब भी नहीं मिला मन्नत परिसर में कुल दो सांप देखे गए थे, लेकिन रेस्क्यू टीम को अभी केवल एक ही पकड़ने में सफलता मिली है। दूसरे सांप की तलाश की गई, लेकिन उसकी मौजूदगी का बाद में कोई स्पष्ट पता नहीं चल सका। नाग पंचमी के दिन हुई घटना ने खींचा ध्यान इस घटना की सबसे खास बात यह रही कि सांप 17 अगस्त यानी नाग पंचमी के दिन मन्नत परिसर में दिखाई दिए। घटना सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी यह खबर तेजी से चर्चा में आ गई। बताया गया है कि मन्नत में फिलहाल मरम्मत और विस्तार का काम चल रहा है और शाहरुख खान अपने परिवार के साथ वहां नहीं रह रहे हैं।
मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड अभिनेता कार्तिक आर्यन अपनी आगामी फिल्म की शूटिंग के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कबीर खान की अनटाइटल्ड फिल्म के एक हाई-इंटेंसिटी एक्शन सीन की शूटिंग के दौरान उनके घुटने में चोट लगी। चोट के बाद उन्हें मुंबई के फोर्टिस रहेजा अस्पताल में भर्ती कराया गया है और जल्द ही उनके घुटने की सर्जरी होने की बात सामने आई है। एक्शन सीन की शूटिंग के दौरान लगी चोट रिपोर्टों के अनुसार, हादसा फिल्म की शूटिंग के अंतिम चरण के दौरान हुआ। कार्तिक फिल्म में कई मुश्किल एक्शन सीक्वेंस कर रहे थे और इसके लिए उन्होंने पहले से विशेष ट्रेनिंग भी ली थी। शूटिंग के दौरान उनके घुटने में गंभीर चोट लग गई, जिसके बाद उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता दी गई। घुटने की सर्जरी के बाद लेंगे आराम प्रोडक्शन से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि डॉक्टरों ने कार्तिक को घुटने की सर्जरी कराने की सलाह दी है। सर्जरी के बाद उन्हें कुछ दिनों तक आराम करना होगा। इसके बाद उनकी स्थिति के अनुसार वह दोबारा शूटिंग शुरू कर सकते हैं। कबीर खान के साथ दूसरी फिल्म कार्तिक आर्यन और निर्देशक कबीर खान इससे पहले चंदू चैंपियन में साथ काम कर चुके हैं। उनकी आगामी अनटाइटल्ड फिल्म भी स्पोर्ट्स ड्रामा है, जिसमें कार्तिक एक कोच की भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म का अंतिम शेड्यूल चल रहा था, तभी यह चोट लगी। चोट के बाद आगामी फिल्मों के शेड्यूल पर नजर सर्जरी और रिकवरी के बाद कार्तिक के अनुराग बसु की आगामी रोमांटिक फिल्म पर काम शुरू करने की उम्मीद है। इसके अलावा वह नागजिला और कैप्टन इंडिया जैसी फिल्मों से भी जुड़े हुए हैं। ऐसे में उनकी चोट के कारण आने वाले दिनों में शूटिंग शेड्यूल में बदलाव हो सकता है।
मुंबई, एजेंसियां। विश्व फोटोग्राफी दिवस के मौके पर वरिष्ठ फोटोग्राफर प्रदीप चंद्रा ने भारतीय सिनेमा के दिग्गज सितारों से जुड़े अपने कई यादगार अनुभव साझा किए। करीब पांच पीढ़ियों के कलाकारों को कैमरे में कैद कर चुके प्रदीप चंद्रा ने राजेश खन्ना, दिलीप कुमार, अमिताभ बच्चन और जैकी श्रॉफ से जुड़े दिलचस्प किस्से बताए। राजेश खन्ना को इतनी पसंद आई तस्वीर, मंगवाईं 300 कॉपियां प्रदीप चंद्रा ने बताया कि महबूब स्टूडियो में उन्होंने राजेश खन्ना की कुछ तस्वीरें खींची थीं। तस्वीरें देखने के बाद अभिनेता को एक फोटो बेहद पसंद आई। उन्होंने उस तस्वीर की 300 कॉपियां मंगवाईं, ताकि उन्हें फैन मेल के लिए इस्तेमाल किया जा सके। दिलीप कुमार ने भी मांगी थी अपनी तस्वीर एक बार वीटी स्टेशन पर प्रदीप चंद्रा ने दिलीप कुमार और सायरा बानो की तस्वीरें खींचीं। दिलीप कुमार ने मजाकिया अंदाज में कहा कि फोटोग्राफर तस्वीरें तो ले लेते हैं, लेकिन उन्हें देते नहीं। बाद में उन्होंने अपनी तस्वीरें मंगवाने की बात कही। यह मुलाकात भी प्रदीप चंद्रा की यादों में खास बन गई। अमिताभ बच्चन की तस्वीर को मिला खास नाम साल 1991 में प्रदीप चंद्रा को अमिताभ बच्चन की तस्वीर लेने के लिए उनके बंगले ‘प्रतीक्षा’ भेजा गया था। उन्होंने कई तस्वीरें खींचीं, लेकिन दूर से ली गई एक तस्वीर उन्हें सबसे ज्यादा पसंद आई। लेखक और पत्रकार प्रीतिश नंदी ने इस तस्वीर को देखकर इसे ‘ए क्वाइट कमबैक’ नाम दिया। प्रदीप चंद्रा ने यह भी बताया कि अमिताभ बच्चन की कुछ कैंडिड तस्वीरें उन्होंने दूर से जूम लेंस से खींची थीं। बाद में ये तस्वीरें अभिनेता को पसंद आईं। जैकी श्रॉफ को आज भी याद है पहला फोटोशूट प्रदीप चंद्रा ने बताया कि उन्होंने जैकी श्रॉफ को पहली बार एक फिल्म मैगजीन के ऑफिस में देखा था। इसके बाद उनका पहला फोटोशूट जैकी की तत्कालीन मंगेतर आयशा श्रॉफ के घर से कपड़े लेकर किया गया था। खास बात यह है कि जैकी श्रॉफ को आज भी वह पहला शूट याद है। सुचित्रा सेन की सभी आठ तस्वीरें हो गई थीं खराब प्रदीप चंद्रा ने अपने शुरुआती दौर का एक किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि बॉम्बे टॉकीज में सुचित्रा सेन की तस्वीरें खींचते समय उन्होंने अपने नए कैमरे से आठों फ्रेम शूट किए। लेकिन जब फिल्म रोल डेवलप हुआ तो सभी तस्वीरें हिली हुई निकलीं। यह उनके लिए बेहद निराशाजनक अनुभव था। कुछ सितारों ने तस्वीरें इस्तेमाल न करने की गुजारिश की प्रदीप चंद्रा ने बताया कि कई बार कलाकारों ने उनसे अपनी तस्वीरों को प्रकाशित या इस्तेमाल न करने की अपील भी की। ऐसे मौकों पर उन्होंने कलाकारों की इच्छा का सम्मान किया। उनके मुताबिक, फोटोग्राफी में सिर्फ अच्छा फ्रेम हासिल करना ही महत्वपूर्ण नहीं, बल्कि सामने वाले की निजता और भरोसे का सम्मान करना भी जरूरी है। एक पल को कैमरे में कैद करना ही असली फोटोग्राफी प्रदीप चंद्रा के मुताबिक कई तस्वीरें ऐसी होती हैं जिन्हें खींचते समय अंदाजा नहीं होता कि वे आगे चलकर इतनी महत्वपूर्ण बन जाएंगी। एक खास पल को कैमरे में कैद कर लेना और समय के साथ उस तस्वीर का महत्व बढ़ जाना ही फोटोग्राफी की सबसे खूबसूरत बात है।