मुंबई, एजेंसियां। टीवी के चर्चित स्टंट रियलिटी शो Fear Factor: Khatron Ke Khiladi के 15वें सीजन के शुरू होने से पहले ही इसके संभावित विजेता को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। इसकी वजह बनीं कॉमेडियन Bharti Singh, जिनका एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में उन्होंने अभिनेता Vishal Aditya Singh को लेकर ऐसा बयान दिया, जिसे फैंस शो के रिजल्ट से जोड़कर देख रहे हैं।
हाल ही में विशाल आदित्य सिंह, भारती सिंह के शो Laughter Chefs में पहुंचे थे। इस दौरान दोनों मीडिया के सामने तस्वीरें खिंचवा रहे थे। तभी पैपराजी ने विशाल को "खतरों के खिलाड़ी 15 का विनर" कहकर पुकारा। इस पर भारती ने मुस्कुराते हुए कहा, "टॉप 3 खतरों के खिलाड़ी।" भारती का यह बयान सामने आते ही सोशल मीडिया पर चर्चाएं शुरू हो गईं। वहीं विशाल ने तुरंत उन्हें चुप रहने का इशारा किया, जिससे फैंस की उत्सुकता और बढ़ गई।
विशाल आदित्य सिंह टीवी इंडस्ट्री का जाना-पहचाना चेहरा हैं। वह Begusarai और Chandrakanta जैसे धारावाहिकों में मुख्य भूमिका निभा चुके हैं। इसके अलावा वह Bigg Boss 13, Nach Baliye 9 और Fear Factor: Khatron Ke Khiladi 11 जैसे लोकप्रिय रियलिटी शोज में भी अपनी प्रतिभा दिखा चुके हैं।
हालांकि, वायरल वीडियो के बावजूद शो के निर्माताओं की ओर से किसी भी विजेता या टॉप फाइनलिस्ट को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि विशाल आदित्य सिंह वास्तव में शो के विजेता हैं या नहीं। शो के प्रसारण से पहले वायरल हुए इस वीडियो ने जरूर दर्शकों की उत्सुकता बढ़ा दी है। अब सभी की नजरें Rohit Shetty द्वारा होस्ट किए जाने वाले इस बहुप्रतीक्षित सीजन पर टिकी हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड सितारों की लोकप्रियता का इस्तेमाल बड़े ब्रांड अपने विज्ञापनों के लिए करते हैं। पान मसाला और सरोगेट एडवरटाइजिंग को लेकर भी कई बड़े फिल्मी सितारे विवादों में रह चुके हैं। हाल ही में शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की ओर से पान मसाला विज्ञापन को लेकर कारण बताओ नोटिस दिए जाने की खबर सामने आई है। इसके बाद एक बार फिर पान मसाला विज्ञापनों में नजर आए बॉलीवुड सितारों की चर्चा शुरू हो गई है। शाहरुख, अजय और टाइगर को नोटिस रिपोर्ट के अनुसार, शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ जिस विज्ञापन में नजर आए हैं, उसे सरोगेट एडवरटाइजिंग से जोड़कर देखा जा रहा है। नियामक का कहना है कि विज्ञापन में इस्तेमाल किया गया 'इलायची' नाम एक पान मसाला ब्रांड से जुड़ा है। तीनों कलाकारों को अपना पक्ष रखने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। उन्हें विज्ञापन के प्रचार से जुड़े कदमों और सोशल मीडिया पर इसकी मौजूदगी को लेकर भी जवाब देना है। शाहरुख-अजय-टाइगर की फीस कितनी? मीडिया रिपोर्ट्स में किए गए दावों के मुताबिक, शाहरुख खान एक विज्ञापन के लिए करीब 4 से 10 करोड़ रुपये तक फीस लेते हैं। वहीं, अजय देवगन की फीस 4 से 5 करोड़ रुपये और टाइगर श्रॉफ की फीस 3 से 4 करोड़ रुपये के बीच बताई जाती है। हालांकि, इन फीस के आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित कलाकारों या ब्रांड की ओर से सार्वजनिक रूप से नहीं की गई है। अमिताभ बच्चन भी रह चुके हैं विवाद में पान मसाला विज्ञापन को लेकर अमिताभ बच्चन का नाम भी काफी चर्चा में रहा है। उन्होंने सिल्वर-कोटेड इलायची वाले एक कैंपेन में काम किया था। विज्ञापन को लेकर विरोध के बाद अमिताभ बच्चन ने अक्टूबर 2021 में कंपनी के साथ अपना अनुबंध समाप्त कर दिया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने इस एंडोर्समेंट से मिली पूरी फीस वापस कर दी थी। अभिनेता ने यह भी कहा था कि उन्हें जानकारी नहीं थी कि विज्ञापन को सरोगेट एडवरटाइजिंग के तौर पर देखा जा सकता है। रणवीर सिंह भी कर चुके हैं विज्ञापन रणवीर सिंह भी उसी पान मसाला कैंपेन का हिस्सा रहे थे, जिसमें अमिताभ बच्चन नजर आए थे। विज्ञापन टेलीविजन के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी प्रसारित हुआ था। मीडिया रिपोर्ट्स में रणवीर सिंह की एंडोर्समेंट फीस 3.5 से 7 करोड़ रुपये सालाना तक होने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, यह भी आधिकारिक रूप से पुष्टि किया गया आंकड़ा नहीं है। ऋतिक रोशन का नाम भी शामिल फिटनेस और हेल्थ-कॉन्शियस इमेज के लिए पहचाने जाने वाले ऋतिक रोशन भी एक पान मसाला ब्रांड के विज्ञापन में नजर आ चुके हैं। उनके विज्ञापन को लेकर प्रशंसकों के बीच भी चर्चा हुई थी। हालांकि, उन्होंने इस विज्ञापन से जुड़ी कोई सार्वजनिक सफाई या इससे पीछे हटने की घोषणा नहीं की थी। ऋतिक रोशन ने इस कैंपेन के लिए कितनी फीस ली थी, इसकी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं है। सलमान खान भी रह चुके हैं विवाद में सलमान खान का नाम भी पान मसाला से जुड़े विज्ञापन विवाद में सामने आ चुका है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजस्थान में उनके खिलाफ एक शिकायत भी दर्ज हुई थी। मामले में विज्ञापन में किए गए दावों को लेकर आपत्ति जताई गई थी। सलमान खान की पान मसाला एंडोर्समेंट फीस का भी कोई आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं है। मीडिया में अलग-अलग दावे जरूर सामने आते रहे हैं, लेकिन इनकी पुष्टि आधिकारिक दस्तावेजों से नहीं हुई है। सेलेब एंडोर्समेंट पर फिर उठे सवाल शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को नोटिस की खबर के बाद पान मसाला और सरोगेट एडवरटाइजिंग को लेकर बहस फिर तेज हो गई है। खासकर ऐसे उत्पादों के प्रचार में बड़े सितारों की भूमिका और उनकी जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठते रहे हैं। वहीं, सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट की फीस के आंकड़े भी अक्सर मीडिया रिपोर्ट्स और उद्योग के अनुमानों पर आधारित होते हैं, इसलिए इन्हें आधिकारिक आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए।
वॉशिंगटन, एजेंसियां। हॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री हेडेन पैनेटियर का 36 साल की उम्र में निधन हो गया। Heroes और Nashville जैसे लोकप्रिय टीवी शोज में अपनी दमदार भूमिकाओं के लिए पहचान बनाने वाली अभिनेत्री के निधन की पुष्टि उनके प्रतिनिधि ने की है। उनके निधन की वजह अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। हेडेन का जन्म 21 अगस्त 1989 को हुआ था और वह अपना 37वां जन्मदिन मनाने से महज कुछ दिन दूर थीं। उनके निधन की खबर से फैंस और मनोरंजन जगत में शोक की लहर है। 'Heroes' से मिली दुनियाभर में पहचान हेडेन पैनेटियर ने बतौर बाल कलाकार मनोरंजन जगत में कदम रखा था। साल 2006 में आए NBC के साइंस-फिक्शन ड्रामा 'Heroes' में क्लेयर बेनेट का किरदार निभाकर वह दुनियाभर में मशहूर हुईं। उनके किरदार में खुद को ठीक करने की असाधारण क्षमता दिखाई गई थी। इस भूमिका ने उन्हें कई पुरस्कार दिलाए। इसके बाद उन्होंने 'Nashville' में जूलियट बार्न्स का किरदार निभाया। म्यूजिकल ड्रामा में उनके अभिनय और गायन को खूब सराहा गया और उन्हें दो गोल्डन ग्लोब नामांकन भी मिले। फिल्मों में भी छोड़ी खास छाप टीवी के अलावा हेडेन ने फिल्मों में भी काम किया। उनकी प्रमुख फिल्मों में Remember the Titans, Ice Princess, Scream 4 और Scream VI शामिल हैं। उन्होंने A Bug's Life में डॉट के किरदार को अपनी आवाज भी दी थी। हाल ही में रिलीज हुई थी उनकी आत्मकथा हेडेन ने इसी साल मई में अपनी आत्मकथा 'This Is Me: A Reckoning' प्रकाशित की थी। इसमें उन्होंने अपने जीवन, करियर, मातृत्व और निजी संघर्षों के बारे में खुलकर बात की थी। वह हाल के महीनों में किताब के प्रमोशन को लेकर भी सक्रिय थीं। 27 जुलाई की पोस्ट बनी आखिरी इंस्टाग्राम पोस्ट हेडेन की आखिरी इंस्टाग्राम पोस्ट 27 जुलाई को सामने आई थी। इसमें वह फोटोग्राफर रैंडल स्लाविन के साथ मुस्कुराती हुई नजर आई थीं। उन्होंने तस्वीर के साथ दोस्ती और अच्छे पलों से जुड़ा संदेश साझा किया था। मौत की वजह अभी सामने नहीं आई हेडेन पैनेटियर के निधन की पुष्टि उनके पिता स्किप पैनेटियर की ओर से की गई। परिवार ने उन्हें प्यार और खुशी बांटने वाली शख्सियत बताया। हालांकि, उनकी मृत्यु का कारण अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। उनके निधन की खबर के बाद फैंस सोशल मीडिया पर उनकी फिल्मों और टीवी किरदारों को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
मुंबई, एजेंसियां। अभिनेता अनुपम खेर जल्द ही प्रभास की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘फौजी’ में नजर आएंगे। हनु राघवपुड़ी के निर्देशन में बन रही यह फिल्म 1940 के दशक के ब्रिटिश भारत की पृष्ठभूमि पर आधारित पीरियड वॉर-रोमांटिक एक्शन ड्रामा है। फिल्म में प्रभास एक सैनिक की भूमिका निभा रहे हैं। अनुपम खेर के साथ मिथुन चक्रवर्ती और जयाप्रदा भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई देंगी। प्रभास के साथ पहली बार दिखेंगे अनुपम खेर ‘फौजी’ में प्रभास एक ऐसे सैनिक का किरदार निभा रहे हैं, जिसकी कहानी देश के स्वतंत्रता आंदोलन और उस दौर की राजनीतिक परिस्थितियों से जुड़ी बताई जा रही है। फिल्म का निर्देशन हनु राघवपुड़ी कर रहे हैं, जबकि इसका निर्माण माइथ्री मूवी मेकर्स के बैनर तले हो रहा है। अनुपम खेर की एंट्री ने फिल्म की स्टारकास्ट को और मजबूत कर दिया है। हालांकि, उनके किरदार के बारे में मेकर्स ने अभी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। 1940 के ब्रिटिश भारत में सेट है कहानी फिल्म की कहानी आजादी से पहले के भारत में सेट है। रिपोर्टों के मुताबिक, इसमें एक्शन, देशभक्ति, रोमांस और भावनात्मक ड्रामा का मिश्रण देखने को मिलेगा। प्रभास का किरदार ब्रिटिश शासन के दौर में एक सैनिक के रूप में नजर आएगा। फिल्म से बॉलीवुड अभिनेत्री इमानवी अपना फिल्मी डेब्यू कर रही हैं। उनके अलावा मिथुन चक्रवर्ती और जयाप्रदा भी प्रमुख भूमिकाओं में हैं। बड़े पैमाने पर बन रही है फिल्म ‘फौजी’ को बड़े बजट की पीरियड फिल्म के रूप में तैयार किया जा रहा है। फिल्म के संगीत की जिम्मेदारी विशाल चंद्रशेखर संभाल रहे हैं। निर्माताओं की योजना इसे बड़े स्तर पर दर्शकों तक पहुंचाने की है। फिलहाल फिल्म की अंतिम रिलीज तारीख को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है, लेकिन रिपोर्टों में 2026 के अंत में रिलीज की संभावना जताई गई है।