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Raja Shivaji Enters ₹100 Crore Club

ऋतेश देशमुख की ‘राजा शिवाजी’ ने रचा इतिहास, भारत में 100 करोड़ कमाने वाली पहली मराठी फिल्म बनी

surbhi मई 20, 2026 0
Riteish Deshmukh in Raja Shivaji as the film crosses ₹100 crore at Indian box office
Raja Shivaji 100 Crore Record

Raja Shivaji ने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रच दिया है। Riteish Deshmukh स्टारर इस ऐतिहासिक फिल्म ने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है। इसके साथ ही यह भारत में 100 करोड़ क्लब में पहुंचने वाली पहली मराठी फिल्म बन गई है।

तीसरे मंगलवार को फिल्म ने करीब 1.50 करोड़ रुपये की कमाई की, जिसके बाद इसका कुल भारतीय बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 100.85 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। फिल्म अब भी सिनेमाघरों में मजबूत पकड़ बनाए हुए है और ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसका लाइफटाइम कलेक्शन 110 से 115 करोड़ रुपये तक जा सकता है।

‘सैराट’ और ‘बाईपण भारी देवा’ को छोड़ा पीछे

इससे पहले Sairat और Baipan Bhari Deva जैसी फिल्मों ने शानदार प्रदर्शन किया था, लेकिन वे 100 करोड़ क्लब तक पहुंचने से थोड़ा पीछे रह गई थीं।

हालांकि दिलचस्प बात यह है कि उन फिल्मों की कमाई का बड़ा हिस्सा महाराष्ट्र से आया था, जबकि ‘राजा शिवाजी’ को महाराष्ट्र के बाहर भी अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। यही वजह है कि फिल्म ने ऑल इंडिया लेवल पर बड़ा रिकॉर्ड बना दिया।

महाराष्ट्र में अभी भी पीछे

भले ही ‘राजा शिवाजी’ ने नया रिकॉर्ड बनाया हो, लेकिन महाराष्ट्र के अंदर की कमाई के मामले में यह अभी भी कुछ बड़ी फिल्मों से पीछे है।

Tanhaji और Chhaava जैसी फिल्मों ने महाराष्ट्र में जबरदस्त बिजनेस किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आज के हिसाब से ‘तान्हाजी’ का एडजस्टेड कलेक्शन करीब 250 करोड़ रुपये और ‘छावा’ का कलेक्शन 300 करोड़ रुपये से ज्यादा माना जाता है।

ट्रेड रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘राजा शिवाजी’ महाराष्ट्र में 100 करोड़ रुपये के आंकड़े तक शायद नहीं पहुंच पाएगी, लेकिन फिर भी यह फिल्म मराठी सिनेमा के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

ऋतेश देशमुख ने फिर साबित किया स्टारडम

‘राजा शिवाजी’ की सफलता के साथ ऋतेश देशमुख ने एक बार फिर मराठी सिनेमा में अपनी मजबूत फैन फॉलोइंग साबित कर दी है। लगातार हिट फिल्मों के जरिए उन्होंने यह दिखाया है कि दर्शकों के बीच उनकी पकड़ काफी मजबूत है।

फिल्म का ऐतिहासिक विषय, भव्य प्रस्तुति और दमदार अभिनय दर्शकों को खूब पसंद आ रहा है।

भारत में ‘राजा शिवाजी’ का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन

समय

कमाई

पहला हफ्ता

61.75 करोड़ रुपये

दूसरा हफ्ता

28.00 करोड़ रुपये

तीसरा शुक्रवार

1.60 करोड़ रुपये

तीसरा शनिवार

3.00 करोड़ रुपये

तीसरा रविवार

3.75 करोड़ रुपये

तीसरा सोमवार

1.25 करोड़ रुपये

तीसरा मंगलवार

1.50 करोड़ रुपये (अनुमानित)

कुल कमाई

100.85 करोड़ रुपये

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Shilpa Shinde and Sunita Ahuja engage in a heated argument during Lock Upp 2 reality show episode.
Lock Upp 2 में छिड़ा बड़ा विवाद: शिल्पा शिंदे के सवाल पर भड़कीं सुनीता आहूजा, बोलीं- ‘जब तुम पर गुजरेगा तब समझोगी’

शो में वाइल्ड कार्ड एंट्री के बाद बढ़ा हाई-वोल्टेज ड्रामा रियलिटी शो Lock Upp 2: Sach Yaa Sazaa में ड्रामा लगातार बढ़ता जा रहा है। शो में वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट के तौर पर आईं Shilpa Shinde ने आते ही घर का माहौल गर्म कर दिया। उनकी सबसे तीखी बहस Sunita Ahuja के साथ देखने को मिली, जिसमें बात सीधे सुनीता और उनके पति Govinda के रिश्ते तक पहुंच गई। शिल्पा शिंदे ने उठाए शादी और रिश्ते पर सवाल एपिसोड के दौरान शिल्पा शिंदे ने सुनीता आहूजा से उनके वैवाहिक जीवन को लेकर सवाल किए। उन्होंने कहा कि गोविंदा के करोड़ों प्रशंसक हैं और ऐसे में उनके बारे में सार्वजनिक रूप से इस तरह की बातें करना सही नहीं है। शिल्पा ने यह भी पूछा कि क्या सुनीता को अपने फैसलों और बयानों के असर का अंदाजा है। उनकी इस टिप्पणी के बाद दोनों के बीच माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया और बहस तेज हो गई। सुनीता आहूजा का पलटवार शिल्पा के सवालों पर सुनीता आहूजा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि जब किसी व्यक्ति पर वैसी परिस्थिति आती है, तभी वह उसकी तकलीफ समझ सकता है। उन्होंने शिल्पा से उनके निजी जीवन में दखल न देने की बात भी कही। सुनीता की इस प्रतिक्रिया का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और दर्शकों के बीच इस बहस को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। राम कपूर से साझा की नाराजगी बाद में सुनीता आहूजा ने सह-प्रतियोगी Ram Kapoor से बातचीत के दौरान अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि उनके परिवार और निजी रिश्तों पर टिप्पणी करने का अधिकार किसी बाहरी व्यक्ति को नहीं है। सुनीता आहूजा बनीं शो की चर्चित कंटेस्टेंट Lock Upp 2 में सुनीता आहूजा शुरुआत से ही सबसे चर्चित प्रतिभागियों में शामिल रही हैं। शो के दौरान उन्होंने कई बार भावुक पल भी साझा किए हैं। वहीं, बाहर से उन्हें परिवार और करीबी लोगों का समर्थन मिल रहा है। Kashmera Shah सहित कई कलाकार खुलकर उनका समर्थन कर चुके हैं। हालांकि, शिल्पा शिंदे और सुनीता आहूजा के बीच हुई इस तीखी बहस ने शो में नया मोड़ ला दिया है। अब दर्शकों की नजर इस बात पर है कि आने वाले एपिसोड में दोनों के बीच यह टकराव और कितना आगे बढ़ता है।  

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मुंबई, एजेंसियां। फिल्म निर्माता करन जौहर ने फिल्म 'Alpha' की शानदार शुरुआत के बाद अभिनेत्री आलिया भट्ट की जमकर सराहना की है। करन ने कहा कि आलिया ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह बॉलीवुड की सबसे भरोसेमंद और दमदार अभिनेत्रियों में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि महिला प्रधान फिल्मों को लेकर बनी कई धारणाओं को आलिया ने अपने प्रदर्शन और बॉक्स ऑफिस सफलता से गलत साबित किया है।    'आलिया की स्टार पावर पर कोई सवाल नहीं'   करन जौहर ने सोशल मीडिया पर फिल्म की सफलता पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि "आलिया भट्ट की स्टार पावर पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता। उन्होंने हर बार अपनी मेहनत और अभिनय से खुद को साबित किया है।" उन्होंने फिल्म की पूरी टीम को बधाई देते हुए दर्शकों का भी आभार जताया।    'Alpha' को मिल रहा दर्शकों का शानदार रिस्पॉन्स   रिलीज के बाद से 'Alpha' को दर्शकों और समीक्षकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। फिल्म ने पहले दो दिनों में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बॉक्स ऑफिस पर मजबूत कमाई दर्ज की है। एक्शन, कहानी और आलिया भट्ट के प्रदर्शन की खास तौर पर सराहना की जा रही है। ट्रेड विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रफ्तार जारी रही तो फिल्म पहले वीकेंड में शानदार कारोबार कर सकती है।    महिला प्रधान फिल्मों को मिला नया भरोसा   फिल्म इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि 'Alpha' की सफलता महिला-केंद्रित फिल्मों के लिए सकारात्मक संकेत है। करन जौहर ने भी कहा कि मजबूत कहानी और दमदार अभिनय के दम पर ऐसी फिल्में दर्शकों का भरोसा जीत रही हैं और बॉक्स ऑफिस पर भी अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं।

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'अल्फा' पर छिड़ा नया विवाद, पाकिस्तानी अभिनेत्री की पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर बवाल

मुंबई, एजेंसियां। रिलीज के साथ ही बॉक्स ऑफिस पर अच्छी शुरुआत करने वाली फिल्म 'अल्फा' अब नए विवादों में घिर गई है। पाकिस्तान की अभिनेत्री इकरा अजीज की एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद फिल्म को लेकर भारत और पाकिस्तान के संदर्भ में नई बहस छिड़ गई है। अभिनेत्री की पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने फिल्म की आलोचना करते हुए इसके बहिष्कार और बैन की मांग शुरू कर दी है।   'धुरंधर' का जवाब बताया 'अल्फा' को इकरा अजीज ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर फिल्म 'अल्फा' का पोस्टर साझा करते हुए लिखा कि यह फिल्म "धुरंधर का जवाब" है और लोगों से इसे देखने की अपील की। उनकी इस टिप्पणी ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया। कई भारतीय यूजर्स ने इस पोस्ट को लेकर फिल्म के निर्माताओं और कलाकारों पर सवाल उठाए, हालांकि फिल्म से जुड़े किसी पक्ष की ओर से इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।   दो फिल्मों की कहानी को लेकर शुरू हुई तुलना सोशल मीडिया पर हो रही चर्चा में यूजर्स 'धुरंधर' और 'अल्फा' की कहानी की तुलना कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि 'धुरंधर' में रणवीर सिंह भारतीय जासूस की भूमिका में पाकिस्तान जाकर भारत विरोधी साजिशों को नाकाम करते हैं, जबकि 'अल्फा' में बॉबी देओल एक पाकिस्तानी एजेंट के किरदार में हैं, जो भारतीय सुरक्षा व्यवस्था के खिलाफ साजिश रचता है। इसी आधार पर इकरा अजीज की टिप्पणी को कई लोगों ने राजनीतिक और संवेदनशील मुद्दों से जोड़कर देखा।   बॉक्स ऑफिस पर अच्छी शुरुआत, अभिनय की हो रही सराहना विवादों के बीच 'अल्फा' बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन कर रही है। फिल्म में आलिया भट्ट, शरवरी, अनिल कपूर, बॉबी देओल और दिव्येंदु भट्टाचार्य अहम भूमिकाओं में हैं, जबकि ऋतिक रोशन ने कैमियो किया है। समीक्षकों ने फिल्म को मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है, लेकिन आलिया भट्ट और शरवरी के अभिनय तथा एक्शन दृश्यों की सराहना की जा रही है। पहले दिन फिल्म ने लगभग 9 करोड़ रुपये का कारोबार किया है।

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