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Box Office: रविवार को 'जन नायकन' का जलवा बरकरार, 'द ओडिसी' और 'धमाल 4' ने भी दिखाई दमदार पकड़

ranjan kumar tiwari जुलाई 27, 2026 0
बॉक्स ऑफिस पर फिल्म जन नायकन, द ओडिसी और धमाल 4 की कमाई का जलवा
Jana Nayakan The Odyssey Dhamaal 4 Box Office Collection Sunday

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय बॉक्स ऑफिस पर इस समय साउथ, बॉलीवुड और हॉलीवुड फिल्मों के बीच जबरदस्त मुकाबला देखने को मिल रहा है। रविवार को रिलीज के चौथे दिन थलापति विजय की फिल्म 'जन नायकन' ने शानदार कमाई करते हुए पहले वीकेंड में 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया। वहीं, क्रिस्टोफर नोलन की हॉलीवुड फिल्म 'द ओडिसी' और अजय देवगन स्टारर 'धमाल 4' ने भी अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी।

 

'जन नायकन' ने पहले वीकेंड में मचाया धमाल

 

सैकनिल्क के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, 'जन नायकन' ने रिलीज के चौथे दिन यानी रविवार को 32 करोड़ रुपये का कारोबार किया। इससे पहले फिल्म ने पहले दिन 42.70 करोड़ रुपये, दूसरे दिन 21.15 करोड़ रुपये और तीसरे दिन 28.90 करोड़ रुपये की कमाई की थी। इसके साथ ही फिल्म का पहले वीकेंड का कुल कलेक्शन 124.75 करोड़ रुपये पहुंच गया।

 

फिल्म के तमिल और तेलुगु संस्करण के साथ-साथ हिंदी डब संस्करण को भी दर्शकों का अच्छा समर्थन मिल रहा है। रविवार की कमाई में करीब 9 करोड़ रुपये हिंदी संस्करण से आए।

 

'द ओडिसी' का शानदार प्रदर्शन जारी

 

क्रिस्टोफर नोलन के निर्देशन में बनी हॉलीवुड फिल्म 'द ओडिसी' ने दूसरे रविवार को 11.45 करोड़ रुपये की कमाई की। इसके साथ ही भारत में फिल्म का कुल बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 119.78 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। मैट डेमन, टॉम हॉलैंड और ऐनी हैथवे अभिनीत यह फिल्म लगातार दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में सफल रही है।

 

150 करोड़ क्लब की दहलीज पर 'धमाल 4'

 

निर्देशक इंद्र कुमार की कॉमेडी फिल्म 'धमाल 4' भी बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई कर रही है। फिल्म ने रिलीज के 17वें दिन 6.15 करोड़ रुपये का कारोबार किया, जबकि शनिवार को इसकी कमाई 4.50 करोड़ रुपये रही थी। अब तक फिल्म का कुल कलेक्शन 149.55 करोड़ रुपये हो चुका है और इसके जल्द ही 150 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार करने की उम्मीद है।

 

तीनों फिल्मों के बीच दिलचस्प मुकाबला

 

जहां 'जन नायकन' पहले वीकेंड में शानदार शुरुआत के साथ आगे निकलती दिख रही है, वहीं 'द ओडिसी' अपनी स्थिर कमाई से मजबूत बनी हुई है। दूसरी ओर 'धमाल 4' भी तीसरे सप्ताह में शानदार प्रदर्शन करते हुए 150 करोड़ क्लब में शामिल होने के बेहद करीब पहुंच गई है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Ranjan Kumar Tiwari Ranjan123

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मुंबई, एजेंसियां। थलपति विजय की आखिरी फिल्म मानी जा रही 'जन नायकन' बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है। रिलीज के तीसरे दिन फिल्म ने कलेक्शन में जोरदार उछाल दर्ज किया और भारत में नेट कलेक्शन ₹92.35 करोड़ के पार पहुंच गया। फिल्म का प्रदर्शन खासकर तमिलनाडु में बेहद मजबूत बना हुआ है और सप्ताहांत का फायदा भी इसे मिल रहा है।   तीसरे दिन कमाई में आया उछाल   पहले दिन दमदार ओपनिंग के बाद दूसरे दिन फिल्म की कमाई में गिरावट आई थी, लेकिन तीसरे दिन दर्शकों की संख्या बढ़ने के साथ कलेक्शन में लगभग 35% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। मल्टीप्लेक्स और सिंगल स्क्रीन दोनों जगह फिल्म को अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। ट्रेड विश्लेषकों का मानना है कि वीकेंड खत्म होने तक फिल्म भारत में 100 करोड़ रुपये के नेट क्लब में प्रवेश कर सकती है।   दुनियाभर में भी शानदार प्रदर्शन   फिल्म ने विदेशी बाजारों में भी अच्छी पकड़ बनाए रखी है। दो दिनों में ही 100 करोड़ रुपये से अधिक का वर्ल्डवाइड ग्रॉस हासिल करने के बाद तीसरे दिन भी कमाई में बढ़ोतरी देखने को मिली। शुरुआती ट्रेड रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म का वैश्विक कारोबार लगातार बढ़ रहा है और यह विजय की सबसे सफल फिल्मों में शामिल होने की ओर बढ़ रही है।   विजय की विदाई फिल्म को मिल रहा दर्शकों का भरपूर प्यार   निर्देशक एच. विनोथ के निर्देशन में बनी इस फिल्म में थलपति विजय के साथ पूजा हेगड़े, बॉबी देओल, प्रकाश राज और ममिता बैजू अहम भूमिकाओं में हैं। राजनीति में सक्रिय होने से पहले विजय की यह आखिरी फिल्म मानी जा रही है, जिसके चलते दर्शकों में इसे लेकर खास उत्साह देखने को मिल रहा है। ट्रेड विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रफ्तार बनी रही तो फिल्म पहले सप्ताह में कई नए बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड अपने नाम कर सकती है।

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Batwara 1947
सनी देओल की फिल्म 'बंटवारा 1947' को सेंसर बोर्ड से मिली मंजूरी, बिना कट के पास हुई फिल्म

मुंबई, एजेंसियां। अभिनेता सनी देओल की आगामी ऐतिहासिक ड्रामा फिल्म 'बंटवारा 1947' को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से मंजूरी मिल गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म को सेंसर बोर्ड ने बिना किसी कट के पास कर दिया है। फिल्म को 'A' (एडल्ट) सर्टिफिकेट दिया गया है और अब यह अपनी तय रिलीज डेट पर सिनेमाघरों में दस्तक देने के लिए तैयार है।   14 अगस्त को रिलीज होगी फिल्म   राजकुमार संतोषी के निर्देशन में बनी 'बंटवारा 1947' भारत-पाकिस्तान विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित फिल्म है। सेंसर प्रक्रिया पूरी होने के बाद फिल्म की रिलीज का रास्ता साफ हो गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म को 14 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज किया जाएगा, जो स्वतंत्रता दिवस वीकेंड के मौके पर दर्शकों के सामने आएगी। फिल्म की कहानी 1947 के विभाजन के दौरान आम लोगों की जिंदगी, दर्द, संघर्ष और सामाजिक परिस्थितियों को दिखाती है। मेकर्स ने इसे सिर्फ एक ऐतिहासिक घटना नहीं बल्कि उस दौर में बंटे परिवारों और इंसानी रिश्तों की कहानी के रूप में पेश करने की कोशिश की है।   सनी देओल के साथ नजर आएंगे प्रीति जिंटा और शबाना आजमी   फिल्म में सनी देओल मुख्य भूमिका में नजर आएंगे। उनके साथ प्रीति जिंटा, शबाना आजमी, अली फजल, करण देओल और अन्य कलाकार भी महत्वपूर्ण किरदारों में दिखाई देंगे। यह फिल्म सनी देओल और निर्देशक राजकुमार संतोषी की लंबे समय बाद वापसी वाली जोड़ी को भी दर्शाती है। राजकुमार संतोषी और सनी देओल की जोड़ी पहले भी कई सफल फिल्मों में काम कर चुकी है। ऐसे में इस फिल्म को लेकर दर्शकों में काफी उत्सुकता बनी हुई है।   बिना कट के पास होने से बढ़ी चर्चा   सेंसर बोर्ड से बिना किसी बदलाव के मंजूरी मिलना फिल्म के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म को एडल्ट सर्टिफिकेट दिया गया है, जिसका कारण इसकी गंभीर कहानी और विभाजन काल की परिस्थितियों का यथार्थ चित्रण बताया जा रहा है। फिल्म में 1947 के दौरान हुए सामाजिक और मानवीय संघर्षों को दिखाया गया है, इसलिए इसकी कहानी को लेकर पहले से ही काफी चर्चा थी। सेंसर मंजूरी के बाद अब दर्शकों की नजर फिल्म के ट्रेलर और प्रमोशन पर है।   राजकुमार संतोषी की पीरियड ड्रामा पर बड़ी उम्मीदें   'बंटवारा 1947' को एक बड़े स्तर की पीरियड फिल्म के रूप में तैयार किया गया है। फिल्म के जरिए मेकर्स विभाजन की त्रासदी और उस समय के लोगों के अनुभवों को पर्दे पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। सनी देओल की पिछली फिल्मों की सफलता के बाद इस फिल्म से भी बॉक्स ऑफिस पर अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद जताई जा रही है। अब दर्शकों को 14 अगस्त को फिल्म की रिलीज का इंतजार है।

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