फिल्म King की शूटिंग इन दिनों साउथ अफ्रीका के Cape Town में चल रही है, जहां से एक दिल छू लेने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में Deepika Padukone और Shah Rukh Khan एक रोमांटिक गाने की शूटिंग करते नजर आ रहे हैं, जबकि सेट पर मौजूद एक खास मेहमान ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
वीडियो में देखा जा सकता है कि दीपिका और शाहरुख अपनी शानदार केमिस्ट्री के साथ डांस कर रहे हैं। वहीं बैकग्राउंड में एक शख्स बच्चे को गोद में लिए नजर आता है, जिसे सोशल मीडिया यूजर्स Ranveer Singh और उनकी बेटी दुआ बता रहे हैं।
क्लिप में रणवीर अपनी बेटी को गोद में लेकर शूटिंग का आनंद लेते दिखते हैं और खुद भी म्यूजिक पर हल्का-फुल्का झूमते नजर आते हैं।
खास बात यह है कि दीपिका, जो अपने दूसरे बच्चे की उम्मीद कर रही हैं, अपने प्रोफेशनल कमिटमेंट्स को पूरा करने के लिए केप टाउन पहुंची हैं। इस दौरान उनके साथ पति रणवीर सिंह और बेटी दुआ भी मौजूद हैं।
रणवीर हाल ही में अपनी फिल्म Dhurandhar The Revenge की सफलता को एंजॉय कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने शूटिंग शेड्यूल के दौरान दीपिका का साथ देने का फैसला किया।
King का निर्देशन Siddharth Anand कर रहे हैं और यह फिल्म साल 2026 की सबसे बहुप्रतीक्षित फिल्मों में शामिल मानी जा रही है।
यह फिल्म शाहरुख खान और दीपिका पादुकोण की छठी ऑन-स्क्रीन साझेदारी होगी। इससे पहले दोनों Om Shanti Om, Chennai Express और Jawan जैसी हिट फिल्मों में साथ नजर आ चुके हैं।
फिल्म में Suhana Khan के थिएटर डेब्यू को लेकर भी काफी चर्चा है। इसके अलावा Abhishek Bachchan, Rani Mukerji और Arshad Warsi भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे।
फिल्म के 24 दिसंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने की संभावना है।
इस वायरल वीडियो में जहां एक तरफ शाहरुख और दीपिका की केमिस्ट्री ने फैंस को एक्साइट किया, वहीं दूसरी तरफ रणवीर और दुआ का क्यूट मोमेंट लोगों को काफी पसंद आ रहा है।
यह वीडियो न सिर्फ स्टार पावर दिखाता है, बल्कि परिवार और प्रोफेशन के संतुलन की खूबसूरत झलक भी पेश करता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
सिंगल मदर श्वेता तिवारी ने अकेले की बेटी की परवरिश टीवी इंडस्ट्री की मशहूर अभिनेत्री Shweta Tiwari की बेटी Palak Tiwari ने अपने बचपन और परिवार को लेकर खुलकर बात की है। पलक ने कहा कि उन्होंने कभी अपने जीवन में पिता की कमी महसूस नहीं की, क्योंकि उनकी मां, नानी और पूरे परिवार ने हमेशा उन्हें प्यार और सुरक्षा दी। ‘घर हमेशा लोगों से भरा रहता था’ एक इंटरव्यू में Palak Tiwari ने कहा कि बचपन में उन्हें कभी ऐसा नहीं लगा कि उनके जीवन में कुछ अधूरा है। उन्होंने कहा, “बच्चे स्पंज की तरह होते हैं, वे वही महसूस करते हैं जो उनके माता-पिता उन्हें दिखाते हैं। मुझे कभी नहीं लगा कि कुछ कमी है। मेरे साथ मेरी नानी, मां और पूरा परिवार था। घर हमेशा लोगों से भरा रहता था।” पलक ने आगे कहा कि उन्हें जीवन में कभी किसी चीज की कमी महसूस नहीं हुई। मां श्वेता तिवारी हमेशा रहीं प्रोटेक्टिव पलक तिवारी ने बताया कि उनकी मां Shweta Tiwari हमेशा उनके लिए बेहद प्रोटेक्टिव रही हैं। उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि किसी ने उनसे कहा था कि उनके घर में पिता नहीं हैं। इस पर पलक ने अपनी मां को बताया, जिसके बाद श्वेता खुद उस व्यक्ति के घर पहुंचीं और कहा कि पलक का परिवार है – उसकी मां और नानी ही उसका परिवार हैं। नानी ने निभाई बड़ी भूमिका पलक ने बताया कि बचपन में उनकी मां शूटिंग में व्यस्त रहती थीं, क्योंकि टीवी इंडस्ट्री में लंबे घंटे काम करना पड़ता है। ऐसे में उनकी नानी ने उनकी परवरिश में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कहा, “मेरी नानी ने मुझे सब कुछ सिखाया। मैं काफी हद तक उन्हीं जैसी हूं।” घरेलू हिंसा के आरोपों के बाद हुआ था तलाक बताया जाता है कि Shweta Tiwari ने साल 2007 में अपने पूर्व पति Raja Chaudhary से तलाक के लिए आवेदन किया था। उन्होंने घरेलू हिंसा और शराब की लत को इसकी वजह बताया था। एक पुराने इंटरव्यू में श्वेता तिवारी ने बताया था कि उन्होंने शादी छोड़ने में करीब नौ साल क्यों लगाए। उन्होंने कहा था कि परिवार और समाज के दबाव के कारण यह फैसला आसान नहीं था। ‘खुश परिवार के लिए मानसिक शांति जरूरी’ श्वेता तिवारी ने यह भी कहा था कि शुरुआत में उन्हें चिंता थी कि उनकी बेटी बिना पिता के कैसे बड़ी होगी। लेकिन बाद में उन्हें एहसास हुआ कि खुशहाल परिवार वही होता है जहां मानसिक शांति और सम्मान हो।
वाशिंगटन, एजेंसियां। न्यूयॉर्क में आयोजित Met Gala 2026 इस बार सिर्फ फैशन के लिए ही नहीं, बल्कि बॉलीवुड कनेक्शन को लेकर भी चर्चा में रहा। रेड कार्पेट पर पहुंचे अंतरराष्ट्रीय सितारों के लुक्स को देखकर भारतीय फैंस ने उन्हें बॉलीवुड से जोड़ते हुए मजेदार तुलना शुरू कर दी, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। सेलेब्स के लुक में दिखा बॉलीवुड टच सुपरमॉडल Heidi Klum का ‘लिविंग स्टैच्यू’ लुक काफी चर्चा में रहा। फैंस ने इसे Hrithik Roshan के फिल्म Dhoom 2 वाले सीन से जोड़ दिया, जहां उन्होंने मूर्ति बनकर चोरी की थी। वहीं पॉप स्टार Katy Perry के मास्क लुक की तुलना Raj Kundra के स्टाइलिश मास्क अवतार से की गई, जो पहले भी चर्चा में रह चुका है। दीपिका और उर्फी से जुड़ी तुलना Hailey Bieber के आउटफिट को देखकर फैंस को Deepika Padukone की फिल्म Yeh Jawaani Hai Deewani का ‘बदतमीज दिल’ लुक याद आ गया। वहीं Jenna Ortega के मेटल ड्रेस अवतार ने Urfi Javed की यूनिक फैशन स्टाइल की याद दिला दी, जिसके लिए वह अक्सर सुर्खियों में रहती हैं। रणवीर और टीवी शो तक पहुंचा कनेक्शन फैशन डिजाइनर जॉर्डन रोथ के अजीबोगरीब लुक को फैंस ने Vikram Aur Betaal से जोड़ा, जबकि कॉनर स्टोरी के आउटफिट की तुलना Ranveer Singh के पुराने स्टाइल से की गई। सोशल मीडिया पर छाया ट्रेंड इन तुलना भरे मीम्स और पोस्ट्स ने यह साबित कर दिया कि बॉलीवुड का प्रभाव अब ग्लोबल फैशन तक पहुंच चुका है। फैंस के ये क्रिएटिव कनेक्शन न सिर्फ मनोरंजक हैं, बल्कि भारतीय सिनेमा और फैशन की बढ़ती वैश्विक पहचान को भी दर्शाते हैं।
मुंबई, एजेंसियां। Raja Shivaji बॉक्स ऑफिस पर लगातार मजबूत प्रदर्शन कर रही है। रितेश देशमुख द्वारा निर्देशित और अभिनीत इस ऐतिहासिक फिल्म को दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है। ओपनिंग वीकेंड पर शानदार कमाई करने के बाद फिल्म ने वीकडेज में भी अपनी पकड़ बनाए रखी है। पहले चार दिनों में शानदार कलेक्शन फिल्म ने पहले दिन 11.35 करोड़ रुपये के साथ शानदार शुरुआत की थी। दूसरे दिन इसमें हल्की गिरावट आई और 10.55 करोड़ रुपये की कमाई हुई। तीसरे दिन रविवार का फायदा मिला और कलेक्शन 12 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वहीं सोमवार को कमाई में गिरावट दर्ज की गई, लेकिन इसके बावजूद फिल्म ने 5.60 करोड़ रुपये जुटाए। इस तरह चार दिनों में फिल्म का कुल नेट कलेक्शन 39.50 करोड़ रुपये और ग्रॉस कलेक्शन करीब 46.95 करोड़ रुपये हो चुका है। पांचवें दिन भी जारी कमाई का सिलसिला मंगलवार यानी रिलीज के पांचवें दिन भी फिल्म ने धीमी लेकिन स्थिर शुरुआत की है। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक दोपहर 1 बजे तक फिल्म ने लगभग 0.28 करोड़ रुपये की कमाई कर ली है। इस दौरान दोपहर के शो में लगभग 9.7% ऑक्यूपेंसी दर्ज की गई, जो वीकडे के हिसाब से ठीक मानी जा रही है। वीकडेज में भी दर्शकों का साथ हालांकि सोमवार को फिल्म की कमाई में गिरावट देखी गई थी, लेकिन इसके बावजूद यह अन्य फिल्मों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन कर रही है। वीकडेज में भी दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचना फिल्म की बड़ी सफलता मानी जा रही है। ‘राजा शिवाजी’ का बॉक्स ऑफिस पर प्रदर्शन यह दिखाता है कि फिल्म को मजबूत वर्ड ऑफ माउथ मिल रहा है। अगर यही रफ्तार बनी रही, तो आने वाले दिनों में यह फिल्म 50 करोड़ के आंकड़े को पार कर सकती है। अब सभी की नजर इसके फाइनल डे 5 कलेक्शन पर टिकी है, जो रात तक सामने आएंगे।