पश्चिम एशिया में तनाव का असर, बाजार में भारी बिकवाली
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कमजोर वैश्विक संकेतों के कारण भारतीय शेयर बाजार में इस सप्ताह जोरदार गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों की लगातार बिकवाली, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और रुपये की कमजोरी ने बाजार के माहौल को और नकारात्मक बना दिया। नतीजतन, घरेलू शेयर बाजार ने लगभग चार वर्षों की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट देखी।
सप्ताह के दौरान BSE सेंसेक्स में 5.51 प्रतिशत यानी 4,354.98 अंकों की बड़ी गिरावट दर्ज की गई और यह 74,563.92 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी50 भी 1,299.35 अंक यानी 5.31 प्रतिशत गिरकर 23,151.10 के स्तर पर आ गया।
पूरे सप्ताह में केवल मंगलवार को बाजार में हल्की तेजी देखने को मिली, जबकि बाकी सभी कारोबारी सत्रों में सूचकांक दबाव में रहे।
स्मॉलकैप कंपनियों के शेयर भी इस गिरावट से अछूते नहीं रहे। BSE स्मॉलकैप इंडेक्स में इस सप्ताह करीब 3.6 प्रतिशत की गिरावट आई।
इस दौरान Aqylon Nexus, Silver Touch Technologies, SEPC, InfoBeans Technologies, Amber Enterprises India, PG Electroplast, Yasho Industries, Sapphire Foods India, Capacite Infraprojects, Sunteck Realty, Rain Industries, Dynamatic Technologies और Precision Wires India जैसे कई शेयरों में 22 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई।
हालांकि कुछ कंपनियों के शेयरों में तेजी भी रही। Confidence Petroleum, Chemplast Sanmar, Jindal Poly Films, Happiest Minds Technologies, Apollo Pipes, Liberty Shoes और TTK Prestige जैसे शेयरों में 15 से 22 प्रतिशत तक उछाल दर्ज किया गया।
BSE लार्जकैप इंडेक्स में लगभग 5 प्रतिशत की गिरावट रही। इस दौरान Polycab India, IDBI Bank, Larsen & Toubro, TVS Motor Company, UltraTech Cement, Mahindra & Mahindra, Eicher Motors, IndusInd Bank, Maruti Suzuki India, Varun Beverages और Tata Motors के शेयरों में 10 से 15 प्रतिशत तक गिरावट आई।
वहीं BSE मिडकैप इंडेक्स भी 4.5 प्रतिशत कमजोर रहा। इस दौरान KEI Industries, Bharat Forge, Ashok Leyland, Schaeffler India, Colgate Palmolive India, Ramco Cements, IDFC First Bank, Godrej Industries और APL Apollo Tubes के शेयरों में 10–15 प्रतिशत तक गिरावट देखी गई।
दूसरी ओर Premier Energies, LT Technology Services, Aurobindo Pharma, Ipca Laboratories, Suzlon Energy और Dixon Technologies जैसे कुछ शेयरों में तेजी भी दर्ज की गई।
लगभग सभी सेक्टरल इंडेक्स इस सप्ताह लाल निशान में बंद हुए।
सबसे ज्यादा गिरावट ऑटो और बैंकिंग शेयरों में देखने को मिली।
विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार चौथे सप्ताह भी बिकवाली करते रहे। इस दौरान उन्होंने करीब 35,052 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) ने बाजार को कुछ सहारा दिया और उन्होंने लगभग 37,739 करोड़ रुपये की खरीदारी की।
शेयर बाजार के साथ-साथ भारतीय मुद्रा भी दबाव में रही। रुपया लगातार दूसरे सप्ताह कमजोर हुआ और शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.47 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया।
सप्ताह के अंत में रुपया 92.45 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जो एक सप्ताह पहले 91.74 के स्तर पर था।
विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां आने वाले समय में बाजार की दिशा तय करेंगी। यदि वैश्विक हालात सामान्य होते हैं तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है, लेकिन फिलहाल निवेशकों के लिए सतर्क रहना जरूरी माना जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव, खासकर ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक बाजारों को हिला दिया है। इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिख रहा है, जहां हालिया हफ्तों में 8 से 10 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, इस गिरावट के बीच कई ब्रोकरेज फर्म्स इसे एक बड़ा निवेश अवसर मान रही हैं और करीब 80 ऐसे शेयरों की पहचान की गई है जिन्हें ‘वैल्यू बाय’ माना जा रहा है। क्यों गिरा बाजार? बाजार में गिरावट के पीछे कई अहम कारण हैं: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भू-राजनीतिक तनाव कंपनियों की कमाई पर दबाव निवेशकों की बढ़ती अनिश्चितता Kotak Equities के मुताबिक, बाजार फिलहाल इस बात को लेकर चिंतित है कि युद्ध लंबा खिंचेगा या यह सिर्फ अल्पकालिक झटका है। इन सेक्टर्स में दिख रहा है मौका ब्रोकरेज हाउसों ने जिन सेक्टर्स को सबसे ज्यादा संभावनाओं वाला बताया है, उनमें शामिल हैं: कंजम्प्शन डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग इन सेक्टर्स के कई मजबूत फंडामेंटल वाले शेयर गिरावट के बाद आकर्षक वैल्यूएशन पर उपलब्ध हैं। टॉप ब्रोकरेज की पसंदीदा कंपनियां विभिन्न ब्रोकरेज फर्म्स ने जिन प्रमुख शेयरों को चुना है, उनमें शामिल हैं: Kotak Equities की पसंद DLF Godrej Consumer Products Info Edge Coforge Dixon Technologies Motilal Oswal की पसंद Bharti Airtel State Bank of India ICICI Bank Infosys Limited Tata Steel Elara Securities की पसंद HDFC Bank Larsen & Toubro Maruti Suzuki Apollo Hospitals Axis Securities की पसंद Bajaj Finance Kotak Mahindra Bank Avenue Supermarts Nestlé India UBS (Global) की पसंद Reliance Industries NTPC Limited Sun Pharmaceutical Industries Adani Ports क्यों बन रहा है निवेश का मौका? ब्रोकरेज फर्म्स के अनुसार, मौजूदा गिरावट ने बाजार में आकर्षक एंट्री पॉइंट बना दिया है: Nifty 50 लगभग 17.7x फॉरवर्ड P/E पर ट्रेड कर रहा है वैल्यूएशन लंबे समय के औसत से नीचे आ गया है उभरते बाजारों के मुकाबले प्रीमियम कम हुआ है एक्सपर्ट की राय Emkay Global ने दिसंबर 2026 तक निफ्टी का लक्ष्य 29,000 रखा है और FY27 में करीब 15% अर्निंग्स ग्रोथ का अनुमान जताया है। हालांकि, विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि कच्चे तेल की कीमतें अभी भी सबसे बड़ा जोखिम बनी हुई हैं। अगर युद्ध लंबा चलता है, तो महंगाई और कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है।
गुड फ्राइडे के मौके पर सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। अंतरराष्ट्रीय तनाव और डॉलर की मजबूती का असर घरेलू बाजार पर साफ नजर आ रहा है। देश में सोने के ताजा भाव (3 अप्रैल) दिल्ली: ₹1,49,110 प्रति 10 ग्राम (24 कैरेट) मुंबई: ₹1,48,960 प्रति 10 ग्राम एक दिन पहले दिल्ली में सोना ₹1,51,500 प्रति 10 ग्राम था, यानी करीब ₹3,500 की गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार का हाल हाजिर सोना: $4,591.52 प्रति औंस वैश्विक स्तर पर भी कीमतों पर दबाव बना हुआ है। क्यों सस्ता हुआ सोना? एक्सपर्ट्स के अनुसार, इसके पीछे कई बड़े कारण हैं: 🇺🇸 डॉलर मजबूत हुआ (0.5% बढ़कर 99–100 स्तर) कच्चे तेल की कीमतों में उछाल इजरायल-अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने की आशंका होर्मुज स्ट्रेट में सप्लाई बाधित होने का खतरा इन सभी कारणों से निवेशकों का रुख बदला, जिससे सोने की कीमतों पर दबाव पड़ा। चांदी का भी गिरा भाव सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली, हालांकि विस्तृत रेट अलग-अलग शहरों में अलग हो सकते हैं। क्या आगे और गिरेंगे दाम? विशेषज्ञों का मानना है कि: अगर डॉलर और मजबूत होता है, तो सोना और सस्ता हो सकता है लेकिन भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर कीमतें फिर उछल सकती हैं
देश की दिग्गज दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी Hero MotoCorp के शेयरों में गुरुवार को करीब 2% की गिरावट देखने को मिली, जबकि कंपनी ने मार्च 2026 में मजबूत बिक्री आंकड़े पेश किए हैं। बेहतर सेल्स प्रदर्शन के बावजूद शेयर में आई यह गिरावट बाजार के सेंटिमेंट और मुनाफावसूली की ओर इशारा कर रही है। मार्च में बिक्री ने दिखाया दम ऑपरेशनल स्तर पर कंपनी का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा। मार्च 2026 में कुल डिस्पैच 8.8% बढ़कर 5,98,198 यूनिट्स तक पहुंच गया पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 5,49,604 यूनिट्स था रिटेल सेगमेंट में भी कंपनी ने शानदार ग्रोथ दर्ज की- VAHAN रजिस्ट्रेशन 24% बढ़कर 5,42,436 यूनिट्स तक पहुंच गया घरेलू और एक्सपोर्ट दोनों में बढ़त घरेलू बिक्री 5,52,505 यूनिट्स रही एक्सपोर्ट 15.62% बढ़कर 45,693 यूनिट्स तक पहुंच गया खास बात यह रही कि वित्त वर्ष 2025-26 में एक्सपोर्ट सेगमेंट में करीब 40% की रिकॉर्ड ग्रोथ दर्ज की गई, जो कंपनी के ग्लोबल विस्तार की ओर मजबूत संकेत देती है। शेयर में गिरावट क्यों? मजबूत आंकड़ों के बावजूद शेयर में गिरावट के पीछे कुछ संभावित कारण हो सकते हैं- निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली (Profit Booking) पहले से ही अच्छे नतीजों की उम्मीद बाजार में शामिल होना व्यापक बाजार में उतार-चढ़ाव शेयर का प्रदर्शन पिछले कारोबारी सत्र में कंपनी का शेयर ₹5,124.15 पर बंद हुआ, जो ₹63.80 या 1.26% की बढ़त के साथ था। 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर: ₹6,390 52 हफ्ते का निचला स्तर: ₹3,322.60 वर्तमान स्तर: हाई से करीब 19.81% नीचे, लो से 54.22% ऊपर कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹1.03 लाख करोड़ है, जो इसे ऑटो सेक्टर की प्रमुख कंपनियों में शामिल करता है।