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Sugar Stocks Drop After Export Ban Extension

चीनी निर्यात पर रोक का असर, Balrampur Chini समेत शुगर शेयरों में बड़ी गिरावट

surbhi मई 14, 2026 0
Sugar company shares fall after India extends ban on sugar exports till September 2026
Sugar Stocks Fall After Export Ban Decision

सरकार द्वारा सितंबर 2026 तक चीनी निर्यात पर रोक लगाने के फैसले के बाद गुरुवार को शुगर सेक्टर के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली। बाजार खुलते ही कई प्रमुख चीनी कंपनियों के स्टॉक्स दबाव में आ गए, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई।

सरकार के इस फैसले का सबसे ज्यादा असर उन कंपनियों पर पड़ा जिनका कारोबार निर्यात पर काफी हद तक निर्भर माना जाता है। शुरुआती कारोबार में Balrampur Chini के शेयर में करीब 4 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा Dalmia Bharat Sugar and Industries, EID Parry India और अन्य शुगर कंपनियों के शेयर भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे।

सितंबर 2026 तक निर्यात पर लगी रोक

केंद्र सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रित रखने के उद्देश्य से चीनी निर्यात पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। यह रोक 30 सितंबर 2026 तक लागू रहेगी।

हालांकि सरकार ने यूरोपीय यूनियन (EU) और अमेरिका को टैरिफ रेट कोटा (TRQ) व्यवस्था के तहत होने वाले निर्यात को इस प्रतिबंध से बाहर रखा है। यानी इन विशेष समझौतों के तहत सीमित मात्रा में चीनी का निर्यात जारी रहेगा।

पहले से भेजे जा रहे माल को मिली राहत

सरकार ने उन निर्यात खेपों को राहत दी है जो पहले से निर्यात प्रक्रिया में शामिल हैं। यानी जिन शिपमेंट्स की प्रक्रिया पहले शुरू हो चुकी थी, उन्हें कुछ शर्तों के साथ निर्यात की अनुमति दी जा सकती है।

इस फैसले से घरेलू बाजार में चीनी की सप्लाई बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन शेयर बाजार में निवेशकों ने इसे शुगर कंपनियों के मुनाफे पर असर डालने वाला कदम माना।

शुगर शेयरों में कैसा रहा हाल?

सरकारी फैसले के बाद कई प्रमुख शुगर कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई—

  • Balrampur Chini के शेयर में करीब 4% तक की कमजोरी
  • EID Parry India करीब 1.40% फिसलकर 794 रुपये के आसपास पहुंचा
  • Dalmia Bharat Sugar and Industries भी दबाव में दिखा
  • अन्य चीनी कंपनियों के शेयरों में भी बिकवाली का माहौल रहा

क्यों अहम है सरकार का यह फैसला?

विशेषज्ञों का मानना है कि देश में बढ़ती मांग और संभावित उत्पादन दबाव को देखते हुए सरकार घरेलू कीमतों को नियंत्रण में रखना चाहती है। चीनी निर्यात पर रोक से घरेलू बाजार में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रहेगा, जिससे महंगाई को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि दूसरी तरफ इस फैसले से चीनी कंपनियों की एक्सपोर्ट कमाई प्रभावित हो सकती है, जिसका असर उनके शेयरों पर दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर सरकार की आगे की नीति और घरेलू चीनी उत्पादन के आंकड़ों पर बनी रहेगी।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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शेयर बाजार में गिरावट, Sensex 71 अंक टूटा; Nifty 24,400 के नीचे बंद

मुंबई, एजेंसियां। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ। Sensex 70.71 अंक यानी 0.09% फिसलकर 78,009.25 पर, जबकि Nifty 50 29.85 अंक यानी 0.12% गिरकर 24,366 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला और व्यापक बाजार में भी दबाव बना रहा।   किन वजहों से दबाव में रहा बाजार   निवेशकों का ध्यान वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर बना रहा। Brent क्रूड करीब 87 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा। इसके अलावा घरेलू स्तर पर कंपनियों के तिमाही नतीजों और आने वाले आर्थिक आंकड़ों को लेकर भी बाजार सतर्क नजर आया।   सेक्टर और शेयरों का प्रदर्शन   कारोबार में ऑटो, एनर्जी, FMCG, मेटल, फार्मा और रियल्टी जैसे कई सेक्टर दबाव में रहे, जबकि कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और मीडिया शेयरों में करीब 1% की मजबूती देखने को मिली। बाजार में 1,855 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 2,244 शेयरों में गिरावट रही।

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अल्ट्राटेक सीमेंट में बड़ी शेयर बिक्री, प्रमोटर ने ₹2,896 करोड़ में बेची 0.85% हिस्सेदारी

मुंबई, एजेंसियां। अल्ट्राटेक सीमेंट में गुरुवार को बड़ी ब्लॉक डील हुई। कंपनी के प्रमोटर समूह की इकाई Pilani Investment and Industries Corporation ने खुले बाजार में 25 लाख शेयर, यानी करीब 0.85% हिस्सेदारी, बेच दी। इस सौदे की कुल कीमत लगभग ₹2,896 करोड़ रही।   ₹11,585 प्रति शेयर के औसत भाव पर हुई बिक्री   BSE के ब्लॉक डील आंकड़ों के अनुसार, Pilani Investment ने करीब ₹11,585 प्रति शेयर के औसत भाव पर ये शेयर बेचे। सौदा 18 अलग-अलग ट्रांजैक्शन में हुआ। इसके बाद Pilani Investment की अल्ट्राटेक में हिस्सेदारी करीब 1.5% से घटकर लगभग 1% रह गई।   प्रमोटर समूह की हिस्सेदारी भी घटी   इस बिक्री के बाद अल्ट्राटेक सीमेंट में प्रमोटर और प्रमोटर समूह की संयुक्त हिस्सेदारी 59.33% से घटकर 58.49% रह गई। सौदे में कई घरेलू संस्थागत निवेशकों के साथ विदेशी निवेशकों ने भी शेयर खरीदे।   शेयर पर दिखा बिक्री का दबाव   शेयर बिक्री की खबर के बीच अल्ट्राटेक सीमेंट का शेयर गुरुवार को करीब 1% गिरकर ₹11,750 पर बंद हुआ। हालांकि, कंपनी के हालिया कारोबारी प्रदर्शन में मजबूती दिखाई दी है। जून तिमाही में कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 17.23% बढ़कर ₹2,603.72 करोड़ रहा था।   अल्ट्राटेक ने ग्रीन एनर्जी में भी बढ़ाया कदम   शेयर बिक्री से एक दिन पहले अल्ट्राटेक सीमेंट ने Solaris Horizon Energy में 26% हिस्सेदारी खरीदने के लिए समझौते की घोषणा की थी। यह कदम कंपनी की नवीकरणीय ऊर्जा जरूरतों को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है।

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भारतीय रेलवे की कमाई रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची, FY26 में राजस्व 3.2% बढ़कर ₹2.74 लाख करोड़

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय रेलवे की कमाई में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में रेलवे का सकल राजस्व रिकॉर्ड ₹2.74 लाख करोड़ पर पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष के करीब ₹2.65 लाख करोड़ की तुलना में 3.2% अधिक है।   माल ढुलाई से रेलवे को बड़ा सहारा     रेलवे की कमाई में माल ढुलाई की भूमिका सबसे अहम बनी हुई है। जुलाई 2026 में रेलवे ने 14.13 करोड़ टन माल की ढुलाई की, जो पिछले साल के समान महीने के 12.97 करोड़ टन से करीब 9% अधिक है। कोयला, लौह अयस्क, उर्वरक और खाद्यान्न की ढुलाई में बढ़ोतरी से मालभाड़े की आय को मजबूती मिली।     यात्री सेवाओं से भी आय बढ़ाने का लक्ष्य     वित्त वर्ष 2026-27 के बजट अनुमान में रेलवे ने यात्री सेवाओं से ₹87,300 करोड़ और माल ढुलाई से ₹1.89 लाख करोड़ राजस्व जुटाने का लक्ष्य रखा है। कुल आंतरिक राजस्व का अनुमान ₹3.02 लाख करोड़ रखा गया है।     2026-27 में भी बढ़ोतरी की उम्मीद     सरकार ने रेलवे के आंतरिक राजस्व में वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान करीब 8.4% वृद्धि का अनुमान लगाया है। हालांकि, रेलवे की वित्तीय स्थिति में माल ढुलाई अभी भी सबसे बड़ा योगदान देने वाला क्षेत्र है।  

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