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पाकिस्तान ने अमेरिका से मांगी 10 अरब डॉलर की सुविधा

पाकिस्तान ने विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत करने के लिए अमेरिका से मांगी 10 अरब डॉलर की सुविधा

ranjan kumar tiwari अगस्त 21, 2026 0
पाकिस्तान की विदेशी मुद्रा और अमेरिकी वित्तीय सुविधा को लेकर बातचीत
पाकिस्तान ने विदेशी मुद्रा भंडार के लिए अमेरिका से मांगी 10 अरब डॉलर की सुविधा

इस्लामाबाद, एजेंसियां। पाकिस्तान ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने और पाकिस्तानी रुपये पर दबाव कम करने के लिए अमेरिका से 10 अरब डॉलर की Exchange Stabilisation Support Facility मांगी है। पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने अब इसकी औपचारिक पुष्टि की है। अमेरिका के साथ इस प्रस्ताव पर बातचीत अभी जारी है और कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है।

 

पारंपरिक कर्ज से अलग होगी सुविधा

 

 

औरंगजेब ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित 10 अरब डॉलर की सुविधा को सामान्य कर्ज या क्रेडिट लाइन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। सरकार का कहना है कि इसका प्रमुख उद्देश्य पाकिस्तान की मुद्रा और विदेशी मुद्रा स्थिरता का भरोसा मजबूत करना है, ताकि देश अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजार से लंबी अवधि के लिए धन जुटा सके।

 

 

विदेशी मुद्रा भंडार और रुपये को मिलेगा सहारा

 

 

अगर अमेरिका इस सुविधा को मंजूरी देता है तो इससे पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिलने और रुपये पर दबाव कम होने की उम्मीद है। इससे पाकिस्तान को बार-बार मित्र देशों से अल्पकालिक वित्तीय मदद या कर्ज रोलओवर पर निर्भरता घटाने में भी मदद मिल सकती है।

 

 

सितंबर के अंत तक अमेरिका के जवाब की उम्मीद

 

 

पाकिस्तान सरकार को उम्मीद है कि अमेरिकी ट्रेजरी या अमेरिकी एक्सिम बैंक सितंबर के अंत तक प्रस्ताव पर अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं। फिलहाल बातचीत चल रही है और सुविधा को लेकर अंतिम निर्णय अमेरिका की ओर से आना बाकी है।

 

 

IMF कार्यक्रम के बीच पाकिस्तान की नई रणनीति

 

 

पाकिस्तान पहले से ही IMF कार्यक्रम के तहत आर्थिक सुधार लागू कर रहा है। सरकार अब विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत करने के साथ-साथ अपनी क्रेडिट रेटिंग सुधारकर अंतरराष्ट्रीय बाजार से 5, 7 और 10 साल की अवधि वाले वित्तपोषण की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Ranjan Kumar Tiwari Ranjan123

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Gold Rate Today
कमजोर डॉलर और बॉन्ड यील्ड में गिरावट से सोना 3 महीने के उच्च स्तर पर, चांदी भी चमकी

नई दिल्ली, एजेंसियां। कमजोर अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में गिरावट के बीच दिल्ली के सराफा बाजार में सोने की कीमतों में जोरदार उछाल आया। 20 अगस्त 2026 को 99.9% शुद्धता वाला सोना ₹4,300 बढ़कर ₹1,62,300 प्रति 10 ग्राम पहुंच गया, जो करीब तीन महीने का उच्च स्तर है। इससे पहले 26 मई को सोना ₹1,62,400 प्रति 10 ग्राम के आसपास था।   सोने में एक दिन में ₹4,300 की तेजी   दिल्ली सराफा बाजार में बुधवार को ₹1,58,000 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ सोना गुरुवार को ₹1,62,300 पर पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना मजबूत रहा और शुक्रवार को हाजिर सोना करीब 4,540 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया।   चांदी ₹10,000 महंगी   सोने के साथ चांदी में भी बड़ी तेजी देखने को मिली। दिल्ली में चांदी की कीमत ₹10,000 बढ़कर ₹2,45,000 प्रति किलोग्राम हो गई। यह करीब सात सप्ताह का उच्च स्तर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी लगभग 1.3% बढ़कर 68.92 डॉलर प्रति औंस पर पहुंची।   कमजोर डॉलर और घटती यील्ड बनी वजह   अमेरिकी डॉलर के कमजोर होने से डॉलर में कीमत वाले सोने की मांग बढ़ी है। साथ ही अमेरिकी ट्रेजरी की लंबी अवधि के बॉन्ड की बायबैक योजना से यील्ड में गिरावट आई, जिससे ब्याज नहीं देने वाली संपत्तियों के मुकाबले सोना निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक हुआ। डॉलर इंडेक्स भी करीब तीन महीने के निचले स्तर के आसपास है।   सुरक्षित निवेश की मांग भी बढ़ी   अमेरिका-ईरान तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच निवेशकों का रुझान सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर बढ़ा है। इससे सोने और चांदी दोनों को समर्थन मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस सप्ताह सोना करीब 3.6% ऊपर है।

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भारतीय शेयर बाजार में निफ्टी और सेंसेक्स की शुरुआती बढ़त
शेयर बाजार में तेजी के साथ शुरुआत, निफ्टी 24,284 के ऊपर; सेंसेक्स भी बढ़त में

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार ने 21 अगस्त 2026 को हल्की बढ़त के साथ कारोबार की शुरुआत की। शुरुआती कारोबार में निफ्टी 50 करीब 0.22% चढ़कर 24,284.05 पर पहुंचा, जबकि सेंसेक्स 0.21% की बढ़त के साथ 77,701.07 पर कारोबार कर रहा था।   सात दिन की गिरावट के बाद बाजार को राहत   गुरुवार के कारोबार में निफ्टी ने लगातार सात कारोबारी सत्रों की गिरावट का सिलसिला तोड़ा था। सेंसेक्स में भी लगातार चार सत्रों की गिरावट के बाद सुधार आया था। हालांकि, इस सप्ताह दोनों प्रमुख सूचकांक अभी भी करीब 0.4% नीचे हैं।   सभी प्रमुख सेक्टर हरे निशान में खुले   शुरुआती कारोबार में निफ्टी के सभी 16 प्रमुख सेक्टरों में तेजी देखने को मिली। स्मॉलकैप इंडेक्स करीब 0.5% और मिडकैप इंडेक्स करीब 0.1% ऊपर रहा। हालांकि, तेजी सीमित रही और बाजार में सतर्कता बनी हुई है।   महंगा कच्चा तेल बनी बड़ी चुनौती   बाजार में तेजी के बावजूद कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक बॉन्ड बाजार में दबाव निवेशकों की चिंता बढ़ा रहे हैं। मध्य-पूर्व में जारी तनाव के कारण तेल की कीमतें करीब एक महीने के उच्च स्तर पर पहुंची हैं, जिससे महंगाई और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।   शुरुआती बढ़त के बाद उतार-चढ़ाव   बाजार खुलने के कुछ ही समय बाद सेंसेक्स और निफ्टी में उतार-चढ़ाव बढ़ गया और शुरुआती बढ़त कमजोर पड़ने लगी। मध्य-पूर्व की स्थिति और महंगे तेल के कारण निवेशक फिलहाल आक्रामक खरीदारी से बचते नजर आ रहे हैं।   सुबह 9:15 बजे की स्थिति:   निफ्टी 50: 24,284.05, बढ़त 0.22% सेंसेक्स: 77,701.07, बढ़त 0.21% माहौल: शुरुआती तेजी, लेकिन सतर्क कारोबार मुख्य चिंता: कच्चा तेल और वैश्विक बॉन्ड बाजार

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कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से बाजार पर दबाव, ब्रेंट क्रूड 94 डॉलर के करीब

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शेयर बाजार में जोरदार वापसी, सेंसेक्स 628 अंक चढ़ा; निफ्टी की 7 दिन की गिरावट थमी

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार ने 20 अगस्त 2026 को लगातार कई दिनों की गिरावट के बाद शानदार वापसी की। सेंसेक्स 628 अंक यानी 0.82% बढ़कर 77,537.72 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 153 अंक यानी 0.64% चढ़कर 24,231.85 पर पहुंच गया। इसके साथ निफ्टी की लगातार 7 कारोबारी सत्रों की गिरावट थम गई।   IT और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी   आज बाजार में IT और वित्तीय कंपनियों के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी के 16 प्रमुख सेक्टरों में से 14 में तेजी रही। IT इंडेक्स करीब 0.8% और वित्तीय क्षेत्र करीब 0.7% मजबूत हुआ।   इन शेयरों में दिखी तेजी   Eternal, Kotak Mahindra Bank, Bajaj Finance, ITC, Shriram Finance और Muthoot Finance जैसे शेयरों में मजबूती रही। Muthoot Finance करीब 3.95% और Eternal करीब 2.48% चढ़ा।   वैश्विक संकेतों से बाजार को मिला सहारा   अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी और वैश्विक बाजारों में सुधार से भारतीय बाजार का सेंटीमेंट बेहतर हुआ। निवेशकों को अमेरिकी ट्रेजरी की ओर से लंबी अवधि के बॉन्ड की खरीद बढ़ाने के फैसले से भी राहत मिली।   निवेशकों के लिए राहत का दिन   आज की तेजी से पिछले कई कारोबारी सत्रों से जारी बिकवाली पर ब्रेक लगा। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और वैश्विक भू-राजनीतिक जोखिम अभी भी बाजार के लिए चुनौती बने हुए हैं।

abhishek singh अगस्त 20, 2026 0
NSE IPO

NSE IPO को लेकर बड़ा अपडेट, सितंबर में आ सकता है देश का सबसे बड़ा IPO; ₹5.26 लाख करोड़ तक वैल्यूएशन की तैयारी

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क्रेडिट कार्ड पेनल्टी पर बैंकों का सख्त रुख, मामूली बकाया पर भी लग सकता है लेट पेमेंट चार्ज

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में गिरावट

कच्चे तेल की तेजी से रुपया दबाव में, डॉलर के मुकाबले 95.75 तक फिसला; 96 का स्तर अहम

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