मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार ने 21 अगस्त 2026 को हल्की बढ़त के साथ कारोबार की शुरुआत की। शुरुआती कारोबार में निफ्टी 50 करीब 0.22% चढ़कर 24,284.05 पर पहुंचा, जबकि सेंसेक्स 0.21% की बढ़त के साथ 77,701.07 पर कारोबार कर रहा था।
गुरुवार के कारोबार में निफ्टी ने लगातार सात कारोबारी सत्रों की गिरावट का सिलसिला तोड़ा था। सेंसेक्स में भी लगातार चार सत्रों की गिरावट के बाद सुधार आया था। हालांकि, इस सप्ताह दोनों प्रमुख सूचकांक अभी भी करीब 0.4% नीचे हैं।
शुरुआती कारोबार में निफ्टी के सभी 16 प्रमुख सेक्टरों में तेजी देखने को मिली। स्मॉलकैप इंडेक्स करीब 0.5% और मिडकैप इंडेक्स करीब 0.1% ऊपर रहा। हालांकि, तेजी सीमित रही और बाजार में सतर्कता बनी हुई है।
बाजार में तेजी के बावजूद कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक बॉन्ड बाजार में दबाव निवेशकों की चिंता बढ़ा रहे हैं। मध्य-पूर्व में जारी तनाव के कारण तेल की कीमतें करीब एक महीने के उच्च स्तर पर पहुंची हैं, जिससे महंगाई और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।
बाजार खुलने के कुछ ही समय बाद सेंसेक्स और निफ्टी में उतार-चढ़ाव बढ़ गया और शुरुआती बढ़त कमजोर पड़ने लगी। मध्य-पूर्व की स्थिति और महंगे तेल के कारण निवेशक फिलहाल आक्रामक खरीदारी से बचते नजर आ रहे हैं।
निफ्टी 50: 24,284.05, बढ़त 0.22%
सेंसेक्स: 77,701.07, बढ़त 0.21%
माहौल: शुरुआती तेजी, लेकिन सतर्क कारोबार
मुख्य चिंता: कच्चा तेल और वैश्विक बॉन्ड बाजार
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने Basic Savings Bank Deposit (BSBD) खातों के लिए सेवा शुल्क में बदलाव किया है। नया नियम 1 अक्टूबर 2026 से लागू होगा। इसके तहत महीने में पहली 4 कैश निकासी मुफ्त रहेंगी, लेकिन पांचवीं और उसके बाद की प्रत्येक निकासी पर ₹15 + GST शुल्क देना होगा। SBI की आधिकारिक वेबसाइट पर भी 1 अक्टूबर 2026 से BSBD खाते के नए शुल्क लागू होने की जानकारी दी गई है। सिर्फ ATM ही नहीं, निकासी के अन्य माध्यम भी शामिल नई व्यवस्था में मुफ्त निकासी की चार लेनदेन की सीमा में ATM, बैंक शाखा और AEPS के जरिए होने वाली कैश निकासी शामिल होगी। यानी चार मुफ्त लेनदेन अलग-अलग माध्यमों के लिए नहीं, बल्कि कुल मिलाकर होंगे। डिजिटल लेनदेन को लेकर भी बदलाव सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि पहले चार मुफ्त कैश लेनदेन की गणना में कुछ डिजिटल/इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों को बाहर रखा जाता था। 1 अक्टूबर से AePS निकासी को भी चार मुफ्त लेनदेन की सीमा में गिना जाएगा। पांचवीं निकासी से ₹15 और GST अगर BSBD खाताधारक किसी महीने में चार से ज्यादा बार कैश निकालता है, तो पांचवीं, छठी और उसके बाद की प्रत्येक निकासी पर ₹15 + लागू GST लगेगा। उदाहरण के लिए, छह बार कैश निकालने पर पांचवीं और छठी निकासी पर शुल्क लगेगा। सभी SBI बचत खाताधारकों पर लागू नहीं यह बदलाव सभी SBI सेविंग अकाउंट ग्राहकों के लिए नया ATM नियम नहीं है। यह खास तौर पर Basic Savings Bank Deposit (BSBD) Account से संबंधित है। सामान्य SBI सेविंग अकाउंट के ATM फ्री ट्रांजेक्शन नियम अलग हैं। SBI ने ATM/ADWM के सामान्य शुल्कों के लिए अलग व्यवस्था पहले से जारी कर रखी है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत और मॉरीशस ने ऊर्जा सहयोग को मजबूत करते हुए पेट्रोल, डीजल और विमानन ईंधन (ATF) की आपूर्ति के लिए दीर्घकालिक व्यवस्था की है। इस समझौते में Indian Oil Corporation (IOCL) और मॉरीशस की State Trading Corporation (STC) की अहम भूमिका है। इसका उद्देश्य मॉरीशस को ईंधन की नियमित और भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित करना है। कई वर्षों तक सुरक्षित रहेगी ईंधन आपूर्ति समझौते के तहत मॉरीशस को रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की दीर्घकालिक आपूर्ति की जाएगी। रिपोर्टों के अनुसार इसमें पेट्रोल, डीजल, मरीन गैस ऑयल और ATF शामिल हैं। हालांकि, समझौते की सटीक मात्रा और कीमत से जुड़ी सभी व्यावसायिक शर्तें अभी सार्वजनिक नहीं की गई हैं। मौजूदा सप्लाई व्यवस्था की जगह लेगा नया समझौता मॉरीशस की मौजूदा ईंधन आपूर्ति व्यवस्था में OQ Trading का अनुबंध 30 सितंबर 2026 तक है। इसके बाद भारतीय कंपनी के साथ नई व्यवस्था लागू होने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। भारत-मॉरीशस ऊर्जा संबंध होंगे मजबूत यह समझौता दोनों देशों के बीच तेल और गैस क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है। मॉरीशस सरकार के अनुसार इससे ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति की निरंतरता और ईंधन की उपलब्धता बेहतर होगी। पश्चिम एशिया संकट के बीच अहम कदम पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक ईंधन आपूर्ति में अनिश्चितता के बीच यह समझौता मॉरीशस के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। दीर्घकालिक भारतीय आपूर्ति व्यवस्था से देश को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अचानक होने वाले आपूर्ति व्यवधानों से कुछ सुरक्षा मिल सकती है।
मुंबई, एजेंसियां। अमेरिका-ईरान तनाव और मध्य-पूर्व से तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी है। 21 अगस्त 2026 को ब्रेंट क्रूड करीब 94 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इससे भारतीय शेयर बाजार और रुपये पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है। ब्रेंट ने छुआ 94.71 डॉलर का स्तर ब्रेंट क्रूड गुरुवार को बढ़कर 94.71 डॉलर प्रति बैरल के एक महीने के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया था। शुक्रवार को इसमें थोड़ी नरमी आई, लेकिन कीमत अभी भी 94 डॉलर के आसपास बनी हुई है। अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी आपूर्ति की चिंता तेल बाजार में तेजी की मुख्य वजह अमेरिका-ईरान संघर्ष और होरमुज जलडमरूमध्य से आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता है। तनाव लंबा खिंचने पर मध्य-पूर्व से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका ने कीमतों को ऊपर बनाए रखा है। भारतीय बाजार और रुपये पर असर महंगा कच्चा तेल भारत के लिए खास चिंता का विषय है, क्योंकि देश अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऊंची तेल कीमतों से आयात बिल और महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। शुक्रवार को रुपया 7 पैसे मजबूत होकर 95.64 प्रति डॉलर पर खुला, हालांकि महंगे तेल को इसके लिए प्रमुख जोखिम माना जा रहा है। शेयर बाजार में निवेशक सतर्क तेल की तेजी के बीच भारतीय शेयर बाजार में शुरुआती बढ़त सीमित रही। शुक्रवार को निफ्टी 50 24,284.05 और सेंसेक्स 77,701.07 पर खुले, लेकिन मध्य-पूर्व की अनिश्चितता और महंगे तेल के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा।