झारखंड

हर खदान का बनेगा सुरक्षा रिपोर्ट कार्ड, 35 से कम पर निगरानी

हर खदान का बनेगा सुरक्षा रिपोर्ट कार्ड, 35 से कम रेटिंग पर बढ़ेगी निगरानी

ranjan kumar tiwari अगस्त 21, 2026 0
खदानों के सुरक्षा रिपोर्ट कार्ड और नई रेटिंग प्रणाली की तैयारी
खदानों के लिए नई सुरक्षा रेटिंग प्रणाली तैयार कर रहा DGMS

धनबाद। देशभर की खदानों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) नई रेटिंग प्रणाली लागू करने की तैयारी में है। इसके तहत हर खदान का सुरक्षा रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जाएगा। खदानों को जोखिम, सुरक्षा नियमों के पालन और सुरक्षा प्रबंधन के आधार पर अंक दिए जाएंगे।

 

हादसे से पहले खतरे की पहचान पर जोर

 

नई व्यवस्था का उद्देश्य हादसा होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय संभावित खतरे की पहले ही पहचान कर उसे रोकना है। इसके लिए खदानों से सुरक्षा से जुड़े आंकड़े ऑनलाइन जुटाए जाएंगे। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर प्रत्येक खदान का सुरक्षा स्तर तय किया जाएगा।

 

खराब रेटिंग वाली खदानों पर बढ़ेगी निगरानी

 

प्रस्तावित व्यवस्था में बेहतर प्रदर्शन करने वाली खदानों को राहत और प्रोत्साहन देने की बात कही गई है। वहीं, कम रेटिंग वाली खदानों में निरीक्षण की संख्या बढ़ाई जाएगी और लक्षित तरीके से सुरक्षा जांच की जाएगी।

 

AI और डेटा एनालिसिस से मिलेगी खतरे की जानकारी

 

सुरक्षा रेटिंग प्रणाली में AI और डेटा एनालिसिस का भी इस्तेमाल प्रस्तावित है। इसके जरिए बार-बार होने वाले सुरक्षा उल्लंघन, दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी और सुरक्षा व्यवस्था में गिरावट जैसे संकेतों की पहचान पहले की जा सकेगी। इससे संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों में समय रहते सुधारात्मक कदम उठाने में मदद मिलेगी।

 

जोखिम के आधार पर तीन श्रेणियां

 

राष्ट्रीय जोखिम रेटिंग में खदान की भूगर्भीय स्थिति, खनन की गहराई, छत और किनारों की स्थिति तथा मशीनों की हालत जैसे पहलुओं को शामिल किया जाएगा। जोखिम के आधार पर खदानों को तीन श्रेणियों में बांटने का प्रस्ताव है।

70 से अधिक अंक: उच्च जोखिम

30 से 70 अंक: मध्यम जोखिम

30 से कम अंक: कम जोखिम

 

नियमों के पालन के भी मिलेंगे अंक

 

सुरक्षा कानूनों और नियमों का पालन भी रेटिंग का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। सुरक्षा योजना, मानक कार्यप्रणाली, कर्मचारियों का प्रशिक्षण, दुर्घटना के बाद की कार्रवाई, सुरक्षा अभ्यास, आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल और सुरक्षा उपकरणों के रखरखाव को भी मूल्यांकन में शामिल किया जाएगा।

 

35 से कम अंक पर खदान की स्थिति बेहद खराब

 

राष्ट्रीय जोखिम रेटिंग और अनुपालन रेटिंग के आधार पर समग्र खान सुरक्षा रेटिंग तैयार की जाएगी। प्रस्ताव के अनुसार:

85-100 अंक: उत्कृष्ट

70-84 अंक: अच्छी

50-69 अंक: औसत

35-49 अंक: खराब

35 से कम अंक: बेहद खराब

DGMS ने इस प्रस्ताव का मसौदा सार्वजनिक कर सुझाव मांगे हैं। सुझाव मिलने के बाद व्यवस्था में आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं।

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Ranjan Kumar Tiwari Ranjan123

झारखंड

View more
Cable Company PF Case
Cable Company PF Case: पुणे में भुगतान, जमशेदपुर के कर्मचारियों की नजर 24 अगस्त पर

जमशेदपुर। इंकैब इंडस्ट्रीज (केबुल कंपनी) की पुणे यूनिट के कर्मचारियों को पीएफ राशि का भुगतान शुरू होने के बाद जमशेदपुर यूनिट के कर्मचारियों की उम्मीदें भी बढ़ी हैं। पुणे के कर्मचारियों को एनसीएलटी के आदेश के बाद वर्ष 2017 से 2019 तक की बकाया पीएफ राशि चेक के माध्यम से दी जा रही है। वहीं, जमशेदपुर के कर्मचारी अभी अपने पीएफ दावे के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।   पुणे यूनिट के कर्मचारियों को मिला पीएफ का भुगतान   पुणे यूनिट के कर्मचारियों के पीएफ दावे को एनसीएलटी ने स्वीकार किया था। इसके बाद रिज्यूलेशन प्रोफेशनल (आरपी) की ओर से बुधवार को कर्मचारियों को उनके क्लेम की गयी पूरी पीएफ राशि का भुगतान चेक के माध्यम से शुरू किया गया। यह राशि वर्ष 2017 से 2019 की अवधि से संबंधित है।   जमशेदपुर के कर्मचारियों का दावा खारिज   इधर, जमशेदपुर यूनिट के कर्मचारियों को अभी पीएफ राशि मिलने का इंतजार है। मजदूर नेता जोगिंदर यादव के अनुसार, एनसीएलटी कोलकाता ने पुणे यूनिट के कर्मचारियों के पीएफ दावे को स्वीकार कर लिया, जबकि जमशेदपुर यूनिट के कर्मचारियों का दावा खारिज कर दिया गया।   इस फैसले के बाद जमशेदपुर के कर्मचारियों में नाराजगी है। उनका कहना है कि जब पुणे यूनिट के कर्मचारियों के पीएफ दावे पर भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो सकती है, तो जमशेदपुर के कर्मचारियों को भी उनके बकाये का लाभ मिलना चाहिए।   24 अगस्त को होगी एनसीएलएटी में सुनवाई   एनसीएलटी के फैसले के खिलाफ जमशेदपुर यूनिट के कर्मचारियों ने एनसीएलएटी, नई दिल्ली का दरवाजा खटखटाया है। मामले में 24 अगस्त को सुनवाई निर्धारित है। अब कर्मचारियों की नजर इसी सुनवाई पर टिकी है। उन्हें उम्मीद है कि अपीलीय न्यायाधिकरण से राहत मिलने के बाद उनके पीएफ भुगतान का रास्ता साफ हो सकता है।   मुख्य बातें पुणे यूनिट के कर्मचारियों को पीएफ भुगतान शुरू। भुगतान वर्ष 2017 से 2019 की राशि का किया जा रहा है। जमशेदपुर यूनिट के कर्मचारियों का पीएफ दावा एनसीएलटी में खारिज हुआ। फैसले के खिलाफ एनसीएलएटी में अपील की गयी। 24 अगस्त को मामले की सुनवाई होगी।

anjali kumari अगस्त 21, 2026 0
Devotees offering water at Baba Baidyanath Temple in Deoghar during the Shravani Mela

श्रावणी मेले के 22वें दिन देवघर में उमड़ी आस्था, 2.26 लाख श्रद्धालुओं ने किया बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक

खूंटी में जर्जर सड़क और पानी से भरे गड्ढों की स्थिति

खूंटी में जर्जर सड़क बनी मुसीबत, गड्ढों में भरा पानी; ग्रामीणों ने दी वोट बहिष्कार की चेतावनी

देवघर में करैत सांप के डंसने से महिला की मौत

देवघर में पलंग पर छिपा था करैत, हाथ पड़ते ही महिला को डंसा; इलाज के दौरान मौत

खदानों के सुरक्षा रिपोर्ट कार्ड और नई रेटिंग प्रणाली की तैयारी
हर खदान का बनेगा सुरक्षा रिपोर्ट कार्ड, 35 से कम रेटिंग पर बढ़ेगी निगरानी

धनबाद। देशभर की खदानों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) नई रेटिंग प्रणाली लागू करने की तैयारी में है। इसके तहत हर खदान का सुरक्षा रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जाएगा। खदानों को जोखिम, सुरक्षा नियमों के पालन और सुरक्षा प्रबंधन के आधार पर अंक दिए जाएंगे।   हादसे से पहले खतरे की पहचान पर जोर   नई व्यवस्था का उद्देश्य हादसा होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय संभावित खतरे की पहले ही पहचान कर उसे रोकना है। इसके लिए खदानों से सुरक्षा से जुड़े आंकड़े ऑनलाइन जुटाए जाएंगे। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर प्रत्येक खदान का सुरक्षा स्तर तय किया जाएगा।   खराब रेटिंग वाली खदानों पर बढ़ेगी निगरानी   प्रस्तावित व्यवस्था में बेहतर प्रदर्शन करने वाली खदानों को राहत और प्रोत्साहन देने की बात कही गई है। वहीं, कम रेटिंग वाली खदानों में निरीक्षण की संख्या बढ़ाई जाएगी और लक्षित तरीके से सुरक्षा जांच की जाएगी।   AI और डेटा एनालिसिस से मिलेगी खतरे की जानकारी   सुरक्षा रेटिंग प्रणाली में AI और डेटा एनालिसिस का भी इस्तेमाल प्रस्तावित है। इसके जरिए बार-बार होने वाले सुरक्षा उल्लंघन, दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी और सुरक्षा व्यवस्था में गिरावट जैसे संकेतों की पहचान पहले की जा सकेगी। इससे संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों में समय रहते सुधारात्मक कदम उठाने में मदद मिलेगी।   जोखिम के आधार पर तीन श्रेणियां   राष्ट्रीय जोखिम रेटिंग में खदान की भूगर्भीय स्थिति, खनन की गहराई, छत और किनारों की स्थिति तथा मशीनों की हालत जैसे पहलुओं को शामिल किया जाएगा। जोखिम के आधार पर खदानों को तीन श्रेणियों में बांटने का प्रस्ताव है। 70 से अधिक अंक: उच्च जोखिम 30 से 70 अंक: मध्यम जोखिम 30 से कम अंक: कम जोखिम   नियमों के पालन के भी मिलेंगे अंक   सुरक्षा कानूनों और नियमों का पालन भी रेटिंग का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। सुरक्षा योजना, मानक कार्यप्रणाली, कर्मचारियों का प्रशिक्षण, दुर्घटना के बाद की कार्रवाई, सुरक्षा अभ्यास, आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल और सुरक्षा उपकरणों के रखरखाव को भी मूल्यांकन में शामिल किया जाएगा।   35 से कम अंक पर खदान की स्थिति बेहद खराब   राष्ट्रीय जोखिम रेटिंग और अनुपालन रेटिंग के आधार पर समग्र खान सुरक्षा रेटिंग तैयार की जाएगी। प्रस्ताव के अनुसार: 85-100 अंक: उत्कृष्ट 70-84 अंक: अच्छी 50-69 अंक: औसत 35-49 अंक: खराब 35 से कम अंक: बेहद खराब DGMS ने इस प्रस्ताव का मसौदा सार्वजनिक कर सुझाव मांगे हैं। सुझाव मिलने के बाद व्यवस्था में आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं।

ranjan kumar tiwari अगस्त 21, 2026 0
Patients waiting for ambulances at SNMMCH in Dhanbad amid a shortage of emergency vehicles

धनबाद में स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल: एक एंबुलेंस में भेजे जा रहे 3-4 मरीज, गंभीर मरीज घंटों कर रहे इंतजार

रांची में अवैध केबल हटाने की कार्रवाई के बाद इंटरनेट सेवाएं प्रभावित

रांची में अवैध केबल पर कार्रवाई से इंटरनेट ठप, कई इलाकों में सेवाएं प्रभावित

Solar panels generating renewable energy for Tata Steel in Jamshedpur, Jharkhand

टाटा स्टील को 50 मेगावाट सौर बिजली खरीदने की मंजूरी, 2.54 रुपये प्रति यूनिट होगी दर

Government land records under scrutiny in the Baramuri land case in Dhanbad
बारामुड़ी जमीन मामले में तीन जमाबंदियां रद्द करने की सिफारिश, ऑनलाइन रिकॉर्ड की वैधता पर उठे गंभीर सवाल

धनबाद के बारामुड़ी में पूर्व सैनिक को सैनिक बंदोबस्ती के तहत आवंटित सरकारी जमीन के रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ियां सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर जांच तेज हो गई है। अंचल अधिकारी की जांच रिपोर्ट में ऑनलाइन भू-अभिलेखों में कई ऐसी प्रविष्टियां मिली हैं, जिनकी वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। मामले में तीन ऑनलाइन कायम जमाबंदियों को रद्द या विलोपित करने की कार्रवाई शुरू करने की अनुशंसा की गई है। मामला बारामुड़ी मौजा की 2.12 एकड़ सरकारी जमीन से जुड़ा है, जो सैनिक बंदोबस्ती के तहत कर्नल जीवन कुमार सिंह को आवंटित की गई थी। जमीन को स्वेच्छा से सरकार को वापस करने की प्रक्रिया के दौरान रिकॉर्ड की जांच की गई, जिसमें अलग-अलग नामों पर दर्ज प्रविष्टियों में अंतर सामने आया। 2.12 एकड़ जमीन कर्नल के नाम आवंटित अंचल कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार बारामुड़ी मौजा संख्या-03 में पुराना खाता संख्या-42 और प्लॉट संख्या-280 की कुल 18.12 एकड़ जमीन का हाल सर्वे किया गया था। हाल सर्वे के दौरान खाता संख्या-55 और प्लॉट संख्या-499/759 में 2.12 एकड़ जमीन दर्ज मिली। यह जमीन सैनिक बंदोबस्ती के तहत कर्नल जीवन कुमार सिंह, पिता प्रह्लाद प्रसाद सिंह को आवंटित की गई थी। बाद में जमीन को सरकार को वापस करने की प्रक्रिया शुरू हुई। इसी क्रम में संबंधित अभिलेखों की जांच की गई। जमीन पर दो लोगों ने किया दावा सरकार को जमीन वापस करने की प्रक्रिया के दौरान अंचल कार्यालय ने आम सूचना जारी कर संभावित दावेदारों से दस्तावेज मांगे थे। इसके बाद दुर्गा विश्वकर्मा और काशी ठाकुर ने जमीन पर अपना दावा पेश किया। रिपोर्ट के अनुसार दोनों ने अपने दावे के समर्थन में आवेदन तो दिया, लेकिन पर्याप्त दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके। इसके बाद प्रशासन ने ऑनलाइन उपलब्ध भू-अभिलेखों की विस्तृत जांच शुरू की। पंजी-11 और पंजी-2 में सामने आया अंतर जांच के दौरान झारभूमि पोर्टल पर उपलब्ध पंजी-11 और पंजी-2 के रिकॉर्ड की पड़ताल की गई। पंजी-11 में खाता संख्या-55, प्लॉट संख्या-499/759 की 2.12 एकड़ जमीन कर्नल जीवन कुमार सिंह के नाम दर्ज मिली। हालांकि, इसी खाता संख्या से संबंधित अन्य प्रविष्टियों में अलग-अलग व्यक्तियों और एक कंपनी के नाम जमीन दर्ज होने की जानकारी सामने आई। शंकर दयाल सिंह के नाम 7.07 डिसमिल, जबकि शारदा सिंह, ममता झा और ममता गुप्ता के नाम भी अलग-अलग प्रविष्टियां दर्ज मिलीं। इसके अलावा 16.5 डिसमिल और 33 डिसमिल जमीन एजी कोल सेल्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम दर्ज पायी गई। कंपनी की प्रविष्टि में निदेशक अशोक कुमार गुप्ता और उनकी पत्नी सुधा गुप्ता का उल्लेख है। शंकर दयाल सिंह की प्रविष्टि को बताया गया संदिग्ध ऑनलाइन अधिकार अभिलेख पंजी-2 की जांच में खाता संख्या-55 से संबंधित 2.12 एकड़ जमीन केवल कर्नल जीवन कुमार सिंह के नाम दर्ज मिली। इस वजह से पंजी-11 की कुछ अन्य प्रविष्टियों और पंजी-2 के रिकॉर्ड के बीच अंतर सामने आया। रिपोर्ट में शंकर दयाल सिंह के नाम दर्ज एक प्रविष्टि को विशेष रूप से संदिग्ध बताया गया है। जांच में पाया गया कि संबंधित प्लॉट संख्या खाता संख्या-55 में दर्ज नहीं है। इससे यह सवाल उठा है कि ऑनलाइन रिकॉर्ड में बाद की प्रविष्टियां कब, किस आधार पर और किन दस्तावेजों के आधार पर दर्ज की गईं। तीन जमाबंदियां रद्द करने की अनुशंसा अंचल अधिकारी ने उपायुक्त से तीन ऑनलाइन कायम जमाबंदियों को बिहार भूमि सुधार अधिनियम के तहत विलोपित या रद्द करने की कार्रवाई शुरू करने की अनुमति देने की अनुशंसा की है। इसके साथ ही यह पता लगाने की जरूरत बतायी गई है कि अन्य व्यक्तियों के नाम ऑनलाइन जमाबंदियां किस पदाधिकारी या कर्मी द्वारा और किन दस्तावेजों के आधार पर दर्ज की गईं। संबंधित नामांतरण मामलों की भी जांच प्रस्तावित है। रिपोर्ट में 2.12 एकड़ जमीन को झारखंड के राज्यपाल के नाम दर्ज करने की भी अनुशंसा की गई है। अब पूरे मामले में प्रशासनिक स्तर पर आगे की कार्रवाई और जांच से यह स्पष्ट होगा कि ऑनलाइन अभिलेखों में सामने आई संदिग्ध प्रविष्टियां किस प्रक्रिया के तहत दर्ज हुईं और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होती है। मुख्य सवाल सरकारी जमीन के रिकॉर्ड में अलग-अलग नामों की प्रविष्टियां कैसे हुईं? पंजी-11 और पंजी-2 के रिकॉर्ड में अंतर क्यों है? संदिग्ध जमाबंदियां किस आधार पर कायम की गईं? नामांतरण के लिए किन दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ? रिकॉर्ड में गड़बड़ी के लिए जिम्मेदारी किसकी तय होगी? आपकी इस मामले में क्या राय है? क्या सरकारी जमीन के ऑनलाइन रिकॉर्ड में हुई ऐसी प्रविष्टियों की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए? कमेंट में अपनी राय बताएं और खबर को शेयर करें।  

surbhi अगस्त 21, 2026 0
Ambulance outside a rural hospital in Tamar, Ranchi, amid concerns over snakebite treatment facilities

तमाड़ में एंटी स्नेक वेनम नहीं मिला, रिम्स ले जाते समय एंबुलेंस भी खराब; सर्पदंश से महिला की मौत

Political leaders at the foundation stone site of a model rural health research unit in Angada, Ranchi

केंद्र की योजना में सांसद की अनदेखी पर विवाद, पूर्व विधायक ने रुकवाया निर्माण कार्य

Parliamentary committee members meeting HEC workers and reviewing the corporation’s revival demands in Ranchi

HEC को पुनर्जीवन की उम्मीद: संसदीय समिति ने श्रमिक नेताओं को दिया भरोसा, केंद्र को देगी सकारात्मक रिपोर्ट

0 Comments

Top week

Lakhisarai Ashok Dham temple where seven women died after an electric shock during Sawan prayers
बिहार

लखीसराय के अशोक धाम में करंट का कहर, 7 महिलाओं की मौत; कई श्रद्धालु घायल, चार मृतकों की पहचान

surbhi अगस्त 17, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?