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HDFC AMC Gets ₹3000 Target from Brokerages

HDFC AMC पर Prabhudas Lilladher का भरोसा बरकरार, ₹3000 का टारगेट दिया

surbhi अप्रैल 17, 2026 0
Stock market chart showing HDFC AMC shares with financial analysis report and growth trend
HDFC AMC Stock Target Price Report

मुंबई: ब्रोकरेज फर्म Prabhudas Lilladher ने HDFC Asset Management Company (HDFC AMC) के शेयर पर अपनी सकारात्मक राय दोहराते हुए ‘BUY’ रेटिंग बनाए रखी है। 16 अप्रैल 2026 की अपनी रिसर्च रिपोर्ट में फर्म ने इस स्टॉक के लिए ₹3000 का टारगेट प्राइस निर्धारित किया है।

तिमाही प्रदर्शन रहा थोड़ा कमजोर

रिपोर्ट के मुताबिक, HDFC AMC की Q4FY26 तिमाही अपेक्षा से थोड़ी नरम रही। कंपनी की कोर इनकम ₹8.4 बिलियन रही, जो अनुमान से 2.3% कम है। इसका मुख्य कारण राजस्व में कमी बताया गया है।

मैनेजमेंट के अनुसार, चौथी तिमाही में कम दिनों (90 दिन) की वजह से आय पर असर पड़ा, जबकि पिछली तिमाही Q3FY26 में 92 दिन थे।

GST और नए TER नियमों का असर

कंपनी ने संकेत दिया है कि नए TER (Total Expense Ratio) दिशानिर्देशों के तहत GST का असर लगभग 3-4 बेसिस पॉइंट (bps) तक हो सकता है। हालांकि, इस अतिरिक्त लागत को डिस्ट्रीब्यूटर्स तक पास किया जा सकता है, जिससे कंपनी के मार्जिन पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

मजबूत इक्विटी प्रदर्शन से बढ़त

HDFC AMC का इक्विटी सेगमेंट में प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है।

  • FY26 में नेट फ्लो में कंपनी की मार्केट हिस्सेदारी 15% रही, जो उद्योग में दूसरी सबसे बड़ी है।
  • Q4FY26 में इक्विटी मार्केट शेयर 6 bps बढ़कर 13% हो गया।

आगे की रणनीति और अनुमान

ब्रोकरेज का मानना है कि HDFC AMC अपने मजबूत ब्रांड और ट्रैक रिकॉर्ड के चलते नए नियमों के प्रभाव को बेहतर तरीके से संभाल सकती है। रिपोर्ट में FY26 से FY28 के बीच इक्विटी यील्ड में हर साल 1 bps की गिरावट का अनुमान लगाया गया है।

इसके बावजूद, कंपनी के मजबूत फंडामेंटल को देखते हुए वैल्यूएशन मल्टीपल को 36x (मार्च 2028 के अनुमानित EPS पर) रखा गया है और ₹3000 का टारगेट कायम रखा गया है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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PhonePe का FY26 में राजस्व 11.5% बढ़ा, लेकिन घाटा बढ़कर ₹2,792 करोड़ पहुंचा

बेंगलुरु, एजेंसियां। डिजिटल पेमेंट कंपनी PhonePe ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का परिचालन राजस्व (Revenue from Operations) 11.5% बढ़कर ₹7,920.48 करोड़ हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष में ₹7,105.01 करोड़ था। हालांकि, बढ़ते खर्च और कुछ नियामकीय बदलावों के कारण कंपनी का शुद्ध घाटा (Net Loss) बढ़कर ₹2,791.59 करोड़ हो गया, जबकि FY25 में यह ₹1,727.41 करोड़ था।   राजस्व बढ़ा, लेकिन खर्च भी तेजी से बढ़े   PhonePe ने बताया कि डिजिटल भुगतान, वित्तीय सेवाओं और अन्य बिजनेस से आय में लगातार वृद्धि हुई है। इसके बावजूद कंपनी के कुल खर्च में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसका सीधा असर मुनाफे पर पड़ा। कंपनी ने कहा कि नए कारोबारों में निवेश, तकनीकी विस्तार और नियामकीय बदलावों के चलते लाभप्रदता पर दबाव बना रहा।   IPO से पहले निवेशकों की नजर   PhonePe इन दिनों अपने प्रस्तावित IPO (Initial Public Offering) की तैयारी में भी जुटी हुई है। कंपनी का कहना है कि वह लंबी अवधि की वृद्धि और डिजिटल वित्तीय सेवाओं के विस्तार पर फोकस बनाए रखेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्व में लगातार बढ़ोतरी कंपनी के कारोबार की मजबूती दिखाती है, लेकिन बढ़ता घाटा निवेशकों के लिए चिंता का विषय हो सकता है। आने वाले महीनों में कंपनी की लागत नियंत्रण रणनीति और लाभप्रदता सुधार के प्रयासों पर बाजार की नजर रहेगी।

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ईमानदार करदाताओं के लिए आयकर प्रक्रिया सरल बनाने पर बात करतीं केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
ईमानदार करदाताओं को राहत देने के लिए आयकर प्रक्रिया और सरल होगी, वित्त मंत्री सीतारमण ने दिए संकेत

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि सरकार ईमानदार करदाताओं को बेहतर और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए आयकर प्रणाली को लगातार सरल बनाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि करदाताओं के लिए अनुपालन (Compliance) आसान बनाना और कर प्रशासन को अधिक पारदर्शी व तकनीक आधारित बनाना सरकार की प्राथमिकता है।   करदाताओं को मिलेगी अधिक सुविधा   वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य ऐसा आयकर तंत्र विकसित करना है, जिसमें करदाताओं को कम से कम दिक्कतों का सामना करना पड़े। इसके लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया को और आसान बनाने, ऑनलाइन सेवाओं को मजबूत करने तथा शिकायतों के त्वरित निस्तारण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।   डिजिटल टैक्स सिस्टम पर सरकार का फोकस   सीतारमण ने कहा कि डिजिटल तकनीक के व्यापक उपयोग से कर प्रणाली पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी और तेज हुई है। फेसलेस असेसमेंट, ऑनलाइन सत्यापन और डिजिटल सेवाओं जैसी पहल ने करदाताओं और आयकर विभाग के बीच प्रक्रिया को सरल बनाया है। सरकार भविष्य में भी तकनीक आधारित सुधारों को आगे बढ़ाएगी।   ईमानदार करदाताओं को मिलेगा प्रोत्साहन   वित्त मंत्री ने कहा कि समय पर कर भुगतान करने वाले ईमानदार करदाता देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सरकार ऐसे करदाताओं का भरोसा बढ़ाने और उन्हें बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार सुधारात्मक कदम उठा रही है।   कर प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में प्रयास जारी   सरकार का मानना है कि सरल और पारदर्शी कर व्यवस्था से स्वैच्छिक कर अनुपालन (Voluntary Tax Compliance) को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही कारोबार करना आसान होगा और निवेशकों का विश्वास भी मजबूत होगा। आने वाले समय में आयकर प्रणाली में और सुधारों की घोषणा किए जाने की संभावना जताई जा रही है।  

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BPCL announces expansion of 10 kg LPG cylinder availability to 100 cities across 24 states by August 15, 2026.
BPCL LPG Update: 15 अगस्त तक 100 शहरों में मिलेगा 10 किलो LPG सिलेंडर, जानें किन ग्राहकों को होगा सबसे ज्यादा फायदा

BPCL LPG News: सरकारी तेल कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए बड़ा अपडेट जारी किया है। कंपनी ने घोषणा की है कि 15 अगस्त 2026 तक 24 राज्यों के 100 शहरों में 10 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता बढ़ाई जाएगी। इस पहल का उद्देश्य छोटे परिवारों, अकेले रहने वाले लोगों और कम गैस खपत वाले उपभोक्ताओं को अधिक सुविधाजनक विकल्प उपलब्ध कराना है। कंपनी ने यह जानकारी जून तिमाही (Q1) के वित्तीय नतीजों के बाद आयोजित कॉन्फ्रेंस कॉल में दी। इसके साथ ही बीपीसीएल ने कच्चे तेल की खरीद रणनीति में किए गए बदलाव और अपने वित्तीय प्रदर्शन की भी जानकारी साझा की। 15 अगस्त तक क्या बदलेगा? बीपीसीएल के मुताबिक, 10 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर का नेटवर्क तेजी से बढ़ाया जा रहा है। मुख्य बातें: 15 अगस्त तक 24 राज्यों के 100 शहरों में 10 किलो LPG सिलेंडर उपलब्ध होगा। छोटे परिवारों और कम गैस उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं को नया विकल्प मिलेगा। किराए के मकानों में रहने वाले, छात्र, नौकरीपेशा और अकेले रहने वाले लोगों के लिए यह सिलेंडर अधिक सुविधाजनक साबित हो सकता है। इससे ग्राहकों को कम लागत में एलपीजी खरीदने का विकल्प मिलेगा। क्रूड ऑयल खरीद की रणनीति में बदलाव जून तिमाही के दौरान बीपीसीएल ने कच्चे तेल की खरीद में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए। कुल क्रूड खरीद में रूस की हिस्सेदारी 38% रही। स्पॉट कार्गो के जरिए खरीद बढ़कर 69% हो गई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 44% थी। कंपनी ने वेनेजुएला और अंगोला से भी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई। फिलहाल बीपीसीएल के पास 38 लाख टन (3.8 मिलियन टन) कच्चे तेल का भंडार मौजूद है, जो लगभग 35 दिनों की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है। जून तिमाही में कंपनी का प्रदर्शन वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में बीपीसीएल को 3,962 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा (Net Loss) हुआ। पिछली तिमाही में कंपनी ने 3,919 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था। हालांकि, यह घाटा बाजार की अपेक्षाओं से काफी कम रहा। ब्लूमबर्ग के अनुमान के अनुसार कंपनी को लगभग 12,632 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता था। प्रमुख वित्तीय आंकड़े नेट लॉस: 3,962 करोड़ रुपये कुल राजस्व: 1.51 लाख करोड़ रुपये EBITDA: 4,077 करोड़ रुपये का घाटा इसके अलावा कंपनी ने बताया कि उसका मोजाम्बिक LNG प्रोजेक्ट वित्त वर्ष 2029 (FY29) में शुरू होने की उम्मीद है। ब्रोकरेज हाउस का क्या है नजरिया? कमजोर तिमाही नतीजों के बावजूद कई वैश्विक ब्रोकरेज हाउस बीपीसीएल के शेयर को लेकर सकारात्मक बने हुए हैं। Citi ने कंपनी पर 'Buy' रेटिंग बरकरार रखते हुए 350 रुपये का लक्ष्य मूल्य दिया है। ब्रोकरेज का मानना है कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद कंपनी का संचालन मजबूत बना हुआ है और यह ऑयल मार्केटिंग सेक्टर में उसकी पसंदीदा कंपनियों में शामिल है। वहीं Macquarie ने भी 'Outperform' रेटिंग कायम रखते हुए 370 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। उसके अनुसार मार्केटिंग कारोबार कमजोर रहा, लेकिन रिफाइनिंग बिजनेस ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया। हालांकि, उसने यह भी चेतावनी दी कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव भविष्य में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की कमाई को प्रभावित कर सकता है। शेयर बाजार में कैसी रही चाल? जून तिमाही के नतीजों के बाद कारोबार के दौरान बीपीसीएल का शेयर करीब 0.49% की गिरावट के साथ 312.95 रुपये पर कारोबार करता दिखाई दिया। इसी दौरान बीएसई सेंसेक्स भी लगभग 0.27% कमजोर रहा। ग्राहकों के लिए क्यों अहम है यह फैसला? 10 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता बढ़ने से उन उपभोक्ताओं को सबसे अधिक फायदा होगा, जिन्हें 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर की पूरी क्षमता की जरूरत नहीं पड़ती। इससे गैस पर होने वाला शुरुआती खर्च कम होगा और उपभोक्ताओं को अपनी जरूरत के अनुसार सिलेंडर चुनने की सुविधा मिलेगी।  

surbhi जुलाई 24, 2026 0
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