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Banks Collect ₹7,100 Crore in MAB Penalties

Minimum Average Balance Penalty: बैंकों ने ग्राहकों से वसूले ₹7,100 करोड़, HDFC Bank सबसे आगे; जानिए किस बैंक ने कितनी पेनल्टी ली

surbhi जुलाई 30, 2026 0
Banks collected ₹7,100 crore in minimum average balance penalties, with HDFC Bank leading the list
Minimum Average Balance Penalty: HDFC Bank Leads Collections

नई दिल्ली: बैंक खाते में तय मिनिमम एवरेज बैलेंस (MAB) नहीं रखना ग्राहकों के लिए महंगा साबित हो रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश के बैंकों ने ग्राहकों से मिनिमम बैलेंस बनाए नहीं रखने के एवज में करीब ₹7,100 करोड़ की पेनल्टी वसूली है। यह रकम वित्त वर्ष 2024-25 में वसूले गए करीब ₹6,800 करोड़ से लगभग ₹300 करोड़ अधिक है।

इस वसूली में प्राइवेट बैंक सबसे आगे रहे। आंकड़ों के मुताबिक, कुल MAB पेनल्टी का करीब 70 फीसदी यानी ₹4,948 करोड़ प्राइवेट बैंकों ने वसूला। इनमें HDFC Bank सबसे आगे रहा।

HDFC Bank ने वसूले करीब ₹1,800 करोड़

मिनिमम एवरेज बैलेंस नहीं रखने पर पेनल्टी वसूलने वाले बैंकों में HDFC Bank सबसे ऊपर रहा। बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 में ग्राहकों से करीब ₹1,800 करोड़ MAB चार्ज के तौर पर वसूले।

इसके बाद Axis Bank का स्थान रहा, जिसने करीब ₹1,081 करोड़ वसूले। वहीं ICICI Bank ने ₹353 करोड़, Kotak Mahindra Bank ने ₹290 करोड़ और Yes Bank ने करीब ₹195 करोड़ की पेनल्टी वसूली।

इसके अलावा IDBI Bank ने भी MAB चार्ज के रूप में करीब ₹175 करोड़ वसूले।

प्राइवेट बैंकों की MAB पेनल्टी

  • HDFC Bank: करीब ₹1,800 करोड़
  • Axis Bank: करीब ₹1,081 करोड़
  • ICICI Bank: करीब ₹353 करोड़
  • Kotak Mahindra Bank: करीब ₹290 करोड़
  • Yes Bank: करीब ₹195 करोड़
  • IDBI Bank: करीब ₹175 करोड़

सरकारी बैंकों ने घटाई MAB पेनल्टी की वसूली

सरकारी बैंकों की तस्वीर इससे कुछ अलग है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, देश के 12 सरकारी बैंकों में से 10 ने सेविंग्स अकाउंट में मिनिमम एवरेज बैलेंस नहीं रखने पर पेनल्टी वसूलना बंद कर दिया है। बाकी दो बैंकों ने भी इस व्यवस्था को पहले की तुलना में अधिक व्यावहारिक बनाया है।

इसका असर सरकारी बैंकों की कुल MAB वसूली पर भी दिखा। वित्त वर्ष 2025-26 में 12 सरकारी बैंकों ने मिलकर करीब ₹2,137 करोड़ वसूले, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा करीब ₹2,775 करोड़ था।

SBI ने करंट अकाउंट से वसूले ₹477 करोड़

State Bank of India यानी SBI ने सेविंग्स अकाउंट पर MAB चार्ज बंद कर रखा है, लेकिन करंट अकाउंट के लिए मिनिमम बैलेंस से जुड़े चार्ज लागू हैं।

बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 में MAB पेनल्टी के तौर पर करीब ₹477 करोड़ वसूले। इसके बाद Bank of Baroda ने ₹394 करोड़, Indian Bank ने ₹299 करोड़ और Canara Bank ने करीब ₹213 करोड़ वसूले।

पिछले कुछ वर्षों में ₹28,000 करोड़ से ज्यादा की वसूली

MAB चार्ज से बैंकों की कमाई लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2021-22 से सरकारी बैंकों ने MAB चार्ज के तौर पर करीब ₹12,000 करोड़ वसूले हैं।

वहीं, प्राइवेट बैंकों के लिए वित्त वर्ष 2022-23 से पहले का समान डेटा उपलब्ध नहीं है। लेकिन वित्त वर्ष 2022-23 के बाद से निजी बैंकों ने ग्राहकों से MAB पेनल्टी के तौर पर करीब ₹16,000 करोड़ वसूले हैं।

इस तरह उपलब्ध अवधि में सरकारी और निजी बैंकों की कुल वसूली करीब ₹28,000 करोड़ तक पहुंचती है।

पेनल्टी लगाने से पहले ग्राहक को सूचना देना जरूरी

सरकार के मुताबिक, यदि किसी ग्राहक के खाते में तय मिनिमम बैलेंस नहीं है, तो Reserve Bank of India ने बैंकों को ग्राहक को इसकी जानकारी देने की सलाह दी है।

बैंक SMS, ईमेल, पत्र या अन्य उपयुक्त माध्यमों से ग्राहक को सूचित कर सकते हैं। आम तौर पर ग्राहक को मिनिमम बैलेंस पूरा करने के लिए उचित समय दिया जाना चाहिए। इसके बाद ही संबंधित नियमों के तहत पेनल्टी लगाई जाती है।

ग्राहकों के लिए क्या है जरूरी?

बैंक खाता खोलते समय ग्राहकों को केवल ब्याज दर या बैंक की सुविधाओं पर ध्यान नहीं देना चाहिए। खाते में मिनिमम बैलेंस की शर्त, नॉन-मेंटेनेंस चार्ज, ATM शुल्क और अन्य बैंकिंग फीस की जानकारी भी पहले से समझ लेना जरूरी है।

अगर आपका खाता ऐसे बैंक में है जहां MAB की शर्त लागू है, तो खाते में निर्धारित राशि बनाए रखने की कोशिश करें। इससे अनावश्यक पेनल्टी से बचा जा सकता है।

 

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

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यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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31 जुलाई ITR डेडलाइन से पहले अलर्ट, समय पर रिटर्न दाखिल नहीं करने पर जुर्माना और ब्याज दोनों देना पड़ सकता है

आयकर विभाग ने करदाताओं से समय रहते ITR दाखिल करने की अपील की   नई दिल्ली, एजेंसियां। आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई नजदीक आने के साथ ही आयकर विभाग ने करदाताओं को समय रहते रिटर्न भरने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि तय समय सीमा के भीतर ITR दाखिल नहीं करने पर करदाताओं को लेट फीस, बकाया टैक्स पर ब्याज और अन्य कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।    लेट फीस और ब्याज दोनों का भुगतान करना पड़ सकता है   आयकर अधिनियम के तहत निर्धारित समय सीमा के बाद ITR दाखिल करने पर आय और अन्य शर्तों के आधार पर ₹1,000 से ₹5,000 तक की लेट फीस लग सकती है। इसके अलावा यदि कोई टैक्स बकाया है, तो उस पर नियमानुसार ब्याज भी देना पड़ सकता है।    रिफंड मिलने में भी हो सकती है देरी   विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर ITR दाखिल करने से टैक्स रिफंड की प्रक्रिया भी जल्दी पूरी होती है। देर से रिटर्न दाखिल करने पर रिफंड मिलने में अधिक समय लग सकता है और कुछ कर लाभों पर भी असर पड़ सकता है।    अंतिम समय की भीड़ से बचने की सलाह   आयकर विभाग ने करदाताओं से अपील की है कि पोर्टल पर अंतिम समय में बढ़ने वाले ट्रैफिक और तकनीकी दिक्कतों से बचने के लिए 31 जुलाई से पहले ही अपना ITR दाखिल कर दें। साथ ही, रिटर्न भरने के बाद उसका ई-वेरिफिकेशन करना भी आवश्यक है, तभी प्रक्रिया पूरी मानी जाएगी।

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e Vitara की वैश्विक मांग से निर्यात में रिकॉर्ड उछाल   नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत से इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के निर्यात में मारुति सुजुकी ने बड़ी बढ़त हासिल की है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में देश के कुल EV निर्यात में कंपनी की हिस्सेदारी करीब 97% रही। मारुति की नई इलेक्ट्रिक SUV e Vitara की वैश्विक मांग ने इस उपलब्धि में अहम भूमिका निभाई है।   100 से ज्यादा देशों में होगा निर्यात   मारुति सुजुकी ने भारत को अपने वैश्विक EV मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित किया है। कंपनी गुजरात स्थित अपने संयंत्र से e Vitara का निर्यात 100 से अधिक देशों में करने की योजना पर काम कर रही है।   भारत के EV निर्यात में कई गुना उछाल   उद्योग रिपोर्ट के अनुसार, जून तिमाही में भारत का इलेक्ट्रिक वाहन निर्यात पिछले वर्ष की तुलना में 14 गुना बढ़ा है। इस तेज वृद्धि के पीछे मारुति सुजुकी की निर्यात रणनीति और e Vitara की मजबूत अंतरराष्ट्रीय मांग को प्रमुख कारण माना जा रहा है।   वैश्विक बाजार में भारत की मजबूत होती स्थिति   विशेषज्ञों का मानना है कि EV निर्यात में मारुति की बढ़त से भारत वैश्विक इलेक्ट्रिक वाहन आपूर्ति श्रृंखला में अपनी स्थिति और मजबूत कर रहा है। आने वाले महीनों में अन्य भारतीय वाहन निर्माता भी विदेशी बाजारों में अपने इलेक्ट्रिक मॉडल उतारने की तैयारी कर रहे हैं, जिससे देश का EV निर्यात और बढ़ने की उम्मीद है।

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Banks collected ₹7,100 crore in minimum average balance penalties, with HDFC Bank leading the list
Minimum Average Balance Penalty: बैंकों ने ग्राहकों से वसूले ₹7,100 करोड़, HDFC Bank सबसे आगे; जानिए किस बैंक ने कितनी पेनल्टी ली

नई दिल्ली: बैंक खाते में तय मिनिमम एवरेज बैलेंस (MAB) नहीं रखना ग्राहकों के लिए महंगा साबित हो रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश के बैंकों ने ग्राहकों से मिनिमम बैलेंस बनाए नहीं रखने के एवज में करीब ₹7,100 करोड़ की पेनल्टी वसूली है। यह रकम वित्त वर्ष 2024-25 में वसूले गए करीब ₹6,800 करोड़ से लगभग ₹300 करोड़ अधिक है। इस वसूली में प्राइवेट बैंक सबसे आगे रहे। आंकड़ों के मुताबिक, कुल MAB पेनल्टी का करीब 70 फीसदी यानी ₹4,948 करोड़ प्राइवेट बैंकों ने वसूला। इनमें HDFC Bank सबसे आगे रहा। HDFC Bank ने वसूले करीब ₹1,800 करोड़ मिनिमम एवरेज बैलेंस नहीं रखने पर पेनल्टी वसूलने वाले बैंकों में HDFC Bank सबसे ऊपर रहा। बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 में ग्राहकों से करीब ₹1,800 करोड़ MAB चार्ज के तौर पर वसूले। इसके बाद Axis Bank का स्थान रहा, जिसने करीब ₹1,081 करोड़ वसूले। वहीं ICICI Bank ने ₹353 करोड़, Kotak Mahindra Bank ने ₹290 करोड़ और Yes Bank ने करीब ₹195 करोड़ की पेनल्टी वसूली। इसके अलावा IDBI Bank ने भी MAB चार्ज के रूप में करीब ₹175 करोड़ वसूले। प्राइवेट बैंकों की MAB पेनल्टी HDFC Bank: करीब ₹1,800 करोड़ Axis Bank: करीब ₹1,081 करोड़ ICICI Bank: करीब ₹353 करोड़ Kotak Mahindra Bank: करीब ₹290 करोड़ Yes Bank: करीब ₹195 करोड़ IDBI Bank: करीब ₹175 करोड़ सरकारी बैंकों ने घटाई MAB पेनल्टी की वसूली सरकारी बैंकों की तस्वीर इससे कुछ अलग है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, देश के 12 सरकारी बैंकों में से 10 ने सेविंग्स अकाउंट में मिनिमम एवरेज बैलेंस नहीं रखने पर पेनल्टी वसूलना बंद कर दिया है। बाकी दो बैंकों ने भी इस व्यवस्था को पहले की तुलना में अधिक व्यावहारिक बनाया है। इसका असर सरकारी बैंकों की कुल MAB वसूली पर भी दिखा। वित्त वर्ष 2025-26 में 12 सरकारी बैंकों ने मिलकर करीब ₹2,137 करोड़ वसूले, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा करीब ₹2,775 करोड़ था। SBI ने करंट अकाउंट से वसूले ₹477 करोड़ State Bank of India यानी SBI ने सेविंग्स अकाउंट पर MAB चार्ज बंद कर रखा है, लेकिन करंट अकाउंट के लिए मिनिमम बैलेंस से जुड़े चार्ज लागू हैं। बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 में MAB पेनल्टी के तौर पर करीब ₹477 करोड़ वसूले। इसके बाद Bank of Baroda ने ₹394 करोड़, Indian Bank ने ₹299 करोड़ और Canara Bank ने करीब ₹213 करोड़ वसूले। पिछले कुछ वर्षों में ₹28,000 करोड़ से ज्यादा की वसूली MAB चार्ज से बैंकों की कमाई लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2021-22 से सरकारी बैंकों ने MAB चार्ज के तौर पर करीब ₹12,000 करोड़ वसूले हैं। वहीं, प्राइवेट बैंकों के लिए वित्त वर्ष 2022-23 से पहले का समान डेटा उपलब्ध नहीं है। लेकिन वित्त वर्ष 2022-23 के बाद से निजी बैंकों ने ग्राहकों से MAB पेनल्टी के तौर पर करीब ₹16,000 करोड़ वसूले हैं। इस तरह उपलब्ध अवधि में सरकारी और निजी बैंकों की कुल वसूली करीब ₹28,000 करोड़ तक पहुंचती है। पेनल्टी लगाने से पहले ग्राहक को सूचना देना जरूरी सरकार के मुताबिक, यदि किसी ग्राहक के खाते में तय मिनिमम बैलेंस नहीं है, तो Reserve Bank of India ने बैंकों को ग्राहक को इसकी जानकारी देने की सलाह दी है। बैंक SMS, ईमेल, पत्र या अन्य उपयुक्त माध्यमों से ग्राहक को सूचित कर सकते हैं। आम तौर पर ग्राहक को मिनिमम बैलेंस पूरा करने के लिए उचित समय दिया जाना चाहिए। इसके बाद ही संबंधित नियमों के तहत पेनल्टी लगाई जाती है। ग्राहकों के लिए क्या है जरूरी? बैंक खाता खोलते समय ग्राहकों को केवल ब्याज दर या बैंक की सुविधाओं पर ध्यान नहीं देना चाहिए। खाते में मिनिमम बैलेंस की शर्त, नॉन-मेंटेनेंस चार्ज, ATM शुल्क और अन्य बैंकिंग फीस की जानकारी भी पहले से समझ लेना जरूरी है। अगर आपका खाता ऐसे बैंक में है जहां MAB की शर्त लागू है, तो खाते में निर्धारित राशि बनाए रखने की कोशिश करें। इससे अनावश्यक पेनल्टी से बचा जा सकता है।  

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