Share Market News: देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने निवेशकों के लिए एक नया और अनोखा इंडेक्स Nifty 500 Ahimsa Index लॉन्च किया है। यह भारत का पहला ऐसा इंडेक्स है, जिसका उद्देश्य एथिकल (नैतिक) और जिम्मेदार निवेश को बढ़ावा देना है।
इस इंडेक्स में केवल उन कंपनियों को शामिल किया गया है, जो अपने कारोबार के दौरान जानबूझकर जानवरों को नुकसान नहीं पहुंचातीं और जिनकी कार्यप्रणाली अहिंसा के सिद्धांतों के अनुरूप मानी जाती है।
NSE ने इस इंडेक्स को Ahimsagain Foundation के सहयोग से उसके Ahimsa Investment Movement (AIM) फ्रेमवर्क के तहत विकसित किया है।
यह फ्रेमवर्क कंपनियों का मूल्यांकन इन आधारों पर करता है:
इन सभी पहलुओं को देखकर तय किया जाता है कि कंपनी अहिंसा और नैतिक कारोबारी सिद्धांतों के कितनी करीब है।
Nifty 500 Ahimsa Index भविष्य में कई नए निवेश उत्पादों का आधार बनेगा।
इसके आधार पर तैयार किए जा सकेंगे:
इससे उन निवेशकों को विकल्प मिलेगा जो ESG (Environmental, Social and Governance) और Ethical Investing में रुचि रखते हैं।
NSE के अनुसार, इस इंडेक्स में कई प्रमुख सेक्टरों की कंपनियों को शामिल किया गया है, जैसे:
इन कंपनियों का चयन AIM फ्रेमवर्क के तहत किया गया है।
NSE Indices की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार:
हालांकि, एक्सचेंज ने इनके बाहर रहने का अलग से विस्तृत कारण सार्वजनिक नहीं किया है। चयन AIM फ्रेमवर्क के निर्धारित मानकों के आधार पर किया गया है।
Ahimsagain Framework कंपनियों को तीन श्रेणियों में बांटता है:
केवल Green Band में आने वाली कंपनियों को इंडेक्स में शामिल किया जाता है, जबकि Orange और Red श्रेणी की कंपनियां बाहर रहती हैं।
Ahimsagain Foundation का कहना है कि इस पहल का मकसद निवेशकों की पूंजी को ऐसी कंपनियों की ओर आकर्षित करना है जो करुणा, दया और नैतिक कारोबारी मूल्यों को प्राथमिकता देती हैं।
संस्था का मानना है कि नैतिक निवेश करना चाहने वाले निवेशकों के पास अब तक स्पष्ट विकल्पों की कमी थी और यह इंडेक्स उस कमी को पूरा करेगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
मुंबई, एजेंसियां। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी जारी है। बुधवार को ब्रेंट क्रूड 92 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जिससे भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों की चिंता बढ़ गई है। मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के कारण तेल की कीमतों में यह उछाल देखने को मिला। भारत के आयात बिल पर बढ़ेगा दबाव भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ने से देश का आयात बिल बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो इससे चालू खाते के घाटे (CAD) और सरकारी वित्तीय संतुलन पर भी असर पड़ सकता है। महंगाई और ईंधन कीमतों पर पड़ सकता है असर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और परिवहन लागत पर पड़ सकता है। यदि वैश्विक बाजार में यह तेजी जारी रहती है, तो आने वाले समय में महंगाई बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। इसका प्रभाव खाद्य पदार्थों, लॉजिस्टिक्स और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है। सरकार और बाजार की नजर वैश्विक घटनाक्रम पर विश्लेषकों के अनुसार, फिलहाल बाजार की नजर मध्य-पूर्व की स्थिति और वैश्विक तेल आपूर्ति पर बनी हुई है। यदि तनाव और बढ़ता है या आपूर्ति प्रभावित होती है, तो ब्रेंट क्रूड की कीमतों में और उछाल आ सकता है। वहीं, सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर महंगाई के असर को कम करने के लिए कदम उठा सकती है।
Share Market Crash Today: घरेलू शेयर बाजार में लगातार तीसरे कारोबारी दिन भी गिरावट देखने को मिली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आयातित जेनेरिक दवाओं पर चरणबद्ध तरीके से भारी टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ गई। इसका सबसे बड़ा असर भारतीय फार्मा कंपनियों के शेयरों पर देखने को मिला, क्योंकि उनकी आय का बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार से आता है। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 600 अंक से अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी 50 भी 24,000 अंक के करीब पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में बाजार का हाल सुबह करीब 9:40 बजे: सेंसेक्स: 76,894.82 अंक (575.29 अंक या 0.74% की गिरावट) निफ्टी 50: 24,028.55 अंक (159.15 अंक या 0.66% की गिरावट) सेंसेक्स के 30 में से 25 शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। किन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट? गिरावट वाले प्रमुख शेयर: इंडिगो (InterGlobe Aviation) सन फार्मा एक्सिस बैंक एसबीआई इन्फोसिस टेक महिंद्रा एचडीएफसी बैंक आईसीआईसीआई बैंक टीसीएस बजाज फिनसर्व भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) वहीं कुछ शेयरों में खरीदारी भी देखने को मिली: मारुति सुजुकी महिंद्रा एंड महिंद्रा टाइटन हिंदुस्तान यूनिलीवर फार्मा शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव ट्रंप के टैरिफ प्लान का सबसे ज्यादा असर फार्मा सेक्टर पर पड़ा। प्रमुख गिरावट: सन फार्मा: 2% तक कमजोर सिप्ला: करीब 2.5% की गिरावट ल्यूपिन: लगभग 2.5% टूटा डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज: 1% से अधिक गिरावट जाइडस, एल्केम और टोरेंट फार्मा में भी 2% तक की कमजोरी बाजार क्यों टूटा? अमेरिका ने घोषणा की है कि 2028 से आयातित जेनेरिक दवाओं पर 100% टैरिफ लगाया जाएगा, जिसे बाद में बढ़ाकर 200% तक किया जा सकता है। भारतीय दवा कंपनियों का बड़ा कारोबार अमेरिकी बाजार पर निर्भर है। ऐसे में निवेशकों को आशंका है कि इस फैसले से फार्मा कंपनियों की कमाई और निर्यात पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से फार्मा शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। अन्य सेक्टरों पर भी असर फार्मा के अलावा: निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में गिरावट निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स भी लाल निशान में बैंकिंग और आईटी शेयरों में भी बिकवाली इसके अलावा रुपये में भी कमजोरी देखने को मिली और डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा हल्की गिरावट के साथ खुली। निवेशकों के लिए क्या संकेत? विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अमेरिका की टैरिफ नीति और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर बाजार की नजर रहेगी। यदि टैरिफ को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होती है, तो फार्मा सेक्टर में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी मुद्रा (Forex) बाजार में तरलता बढ़ाने के लिए उठाए गए विशेष कदमों का सकारात्मक असर देखने को मिला है। केंद्रीय बैंक ने जानकारी दी है कि उसके हालिया फॉरेक्स उपायों के जरिए अब तक 20.7 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह हुआ है। इन कदमों का उद्देश्य विदेशी मुद्रा बाजार में स्थिरता बनाए रखना और रुपये पर बढ़ते दबाव को कम करना है। विशेष फॉरेक्स योजनाओं से बढ़ा विदेशी मुद्रा प्रवाह RBI ने विदेशी निवेश आकर्षित करने और बैंकिंग प्रणाली में डॉलर की उपलब्धता बढ़ाने के लिए कई विशेष उपाय लागू किए थे। इनमें विदेशी मुद्रा जमा योजनाओं और बैंकों के लिए विशेष प्रोत्साहन शामिल रहे, जिनके चलते विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ा है। रुपये को मिली मजबूती केंद्रीय बैंक का मानना है कि इन उपायों से विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की उपलब्धता बेहतर हुई है। इससे रुपये पर दबाव कम करने और विनिमय दर में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में मदद मिली है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच राहत विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता के बावजूद RBI के कदमों ने भारतीय विदेशी मुद्रा बाजार को सहारा दिया है। आगे भी स्थिति पर RBI की नजर RBI ने संकेत दिया है कि वह विदेशी मुद्रा बाजार की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है। यदि जरूरत पड़ी तो रुपये की स्थिरता और वित्तीय बाजारों में संतुलन बनाए रखने के लिए आगे भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।