शादी-ब्याह के सीजन के बीच सोने और चांदी की कीमतों में फिर तेजी देखने को मिली है। 7 मई 2026 को सर्राफा बाजार खुलते ही दोनों कीमती धातुओं के दाम बढ़ गए। India के कई बड़े शहरों में सोना और चांदी नए स्तर पर पहुंच गए हैं। ऐसे में अगर आप गहनों की खरीदारी करने की योजना बना रहे हैं, तो घर से निकलने से पहले ताजा रेट जरूर चेक कर लें।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ते तनाव, डॉलर की चाल और सुरक्षित निवेश की मांग के कारण सोने और चांदी की कीमतों में तेजी आई है। खासतौर पर शादी के सीजन में बढ़ी मांग का भी असर बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है।
आज 24 कैरेट सोने के दाम में लगभग 2,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक की तेजी दर्ज की गई है। हालांकि शहरवार तुलना में पिछले क्लोजिंग रेट से मामूली बढ़त भी देखने को मिली है।
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चांदी की कीमतों में भी लगातार तेजी बनी हुई है। इंडस्ट्रियल डिमांड और निवेशकों की बढ़ती रुचि के कारण चांदी महंगी हो गई है। कई शहरों में चांदी का भाव 2.65 लाख रुपये प्रति किलो के पार पहुंच गया है।
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सर्राफा बाजार में जारी ये रेट बेस प्राइस हैं। इनमें 3% GST, मेकिंग चार्ज और अन्य टैक्स शामिल नहीं होते। ज्वेलरी खरीदते समय डिजाइन और कारीगरी के हिसाब से अलग-अलग मेकिंग चार्ज जोड़े जाते हैं, जिससे अंतिम कीमत और बढ़ सकती है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि खरीदारी से पहले अपने नजदीकी ज्वेलर से लाइव रेट और कुल बिल की जानकारी जरूर लें, ताकि बाद में किसी तरह की परेशानी न हो।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। घरेलू सर्राफा बाजार में गुरुवार को सोने और चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिकी आर्थिक संकेतों और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग के चलते दोनों कीमती धातुओं के दाम नई ऊंचाइयों पर पहुंच गए हैं। 2 जुलाई 2026 को जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, सोना और चांदी दोनों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली। सोना पहुंचा नए शिखर पर बाजार में सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से सोने की कीमतों में करीब 1.33 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया। ताजा कारोबार में सोने का भाव बढ़कर 1,44,430 रुपये के स्तर पर पहुंच गया। विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव तथा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों को लेकर नरम रुख के संकेतों ने निवेशकों का भरोसा सोने की ओर बढ़ाया है। चांदी की चमक भी हुई तेज सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी मजबूती देखने को मिली। औद्योगिक मांग और निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी के कारण चांदी करीब 0.80 प्रतिशत मजबूत होकर 2,30,384 रुपये के स्तर पर पहुंच गई। बाजार जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आने पर चांदी की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। शहरों के अनुसार कीमतों में अंतर इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, देश के अलग-अलग शहरों में स्थानीय टैक्स, जीएसटी और मेकिंग चार्ज के कारण सोने और चांदी की खुदरा कीमतों में मामूली अंतर देखने को मिल सकता है। इसलिए खरीदारी से पहले अपने शहर के ताजा रेट की जानकारी लेना जरूरी है। खरीदारी से पहले रखें इन बातों का ध्यान बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव जारी रहते हैं तो आने वाले दिनों में सोना-चांदी और महंगे हो सकते हैं। हालांकि, खरीदारी से पहले हॉलमार्क की जांच करें, शुद्धता सुनिश्चित करें और विश्वसनीय जौहरी से ही आभूषण या बुलियन खरीदें। साथ ही अपने स्थानीय सर्राफा बाजार के ताजा भाव की पुष्टि करना भी बेहतर रहेगा।
मुंबई: निवेशकों के लिए पोर्टफोलियो को विविध (Diversified) बनाने का एक नया विकल्प सामने आया है। ICICI Prudential Mutual Fund ने अपना नया ICICI Prudential Multi-Asset Active Fund of Funds (FoF) लॉन्च किया है। यह एक ओपन-एंडेड फंड ऑफ फंड्स (FoF) स्कीम है, जिसका उद्देश्य निवेशकों को एक ही फंड के माध्यम से इक्विटी, डेट, गोल्ड ETF और सिल्वर ETF जैसे अलग-अलग एसेट क्लास में निवेश का अवसर देना है। यह न्यू फंड ऑफर (NFO) निवेश के लिए खुल चुका है और इसमें 14 जुलाई 2026 तक निवेश किया जा सकता है। क्या है Multi-Asset Active FoF? यह स्कीम सीधे शेयर या बॉन्ड में निवेश नहीं करती, बल्कि ICICI Prudential की विभिन्न एक्टिव इक्विटी स्कीम, डेट स्कीम और गोल्ड/सिल्वर ETF की यूनिट्स में निवेश करती है। इसका उद्देश्य अलग-अलग एसेट क्लास में निवेश कर जोखिम को संतुलित करना और लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न की संभावना तैयार करना है। बाजार के अनुसार बदलेगा निवेश का अनुपात ICICI Prudential का कहना है कि यह फंड बाजार की मौजूदा परिस्थितियों, वैल्यूएशन और व्यापक आर्थिक (Macro-economic) संकेतकों के आधार पर अलग-अलग एसेट क्लास में निवेश का अनुपात समय-समय पर बदलता रहेगा। यानी यदि किसी समय इक्विटी आकर्षक लगेगी तो उसका हिस्सा बढ़ाया जा सकता है, जबकि बाजार में जोखिम बढ़ने पर डेट या गोल्ड का आवंटन बढ़ाया जा सकता है। कंपनी ने क्या कहा? ICICI Prudential Asset Management Company के Executive Director और Chief Investment Officer (CIO) एस. नरेन के अनुसार, अलग-अलग आर्थिक और बाजार चक्रों में प्रत्येक एसेट क्लास का प्रदर्शन अलग होता है। ऐसे में अनुशासित एसेट एलोकेशन लंबी अवधि के निवेश का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यह स्कीम निवेशकों को रिसर्च आधारित रणनीति के माध्यम से इक्विटी, डेट और कीमती धातुओं में संतुलित निवेश का अवसर प्रदान करती है, जिससे बदलते बाजार में पोर्टफोलियो अधिक संतुलित रह सकता है। कैसे काम करेगा एसेट एलोकेशन? यह फंड किसी एक एसेट क्लास पर निर्भर रहने के बजाय उनकी आकर्षकता के आधार पर निवेश का अनुपात तय करेगा। संभावित एसेट एलोकेशन इस प्रकार रहेगा— एक्टिव इक्विटी स्कीम: 30% से 80% एक्टिव डेट स्कीम: 10% से 60% गोल्ड ETF और/या सिल्वर ETF: 10% से 30% निवेशकों को क्या मिलेंगे फायदे? इस स्कीम का उद्देश्य तीन प्रमुख निवेश लक्ष्यों को एक साथ पूरा करना है— इक्विटी के जरिए लंबी अवधि में पूंजी वृद्धि (Wealth Creation) डेट स्कीम के माध्यम से अपेक्षाकृत स्थिर आय और कम उतार-चढ़ाव गोल्ड और सिल्वर ETF के जरिए पोर्टफोलियो में विविधता और महंगाई के प्रभाव से संभावित सुरक्षा इस तरह निवेशकों को एक ही फंड में कई एसेट क्लास का एक्सपोजर मिल सकता है। न्यूनतम निवेश कितना? इस NFO में निवेश की शुरुआत ₹1,000 से की जा सकती है। इसके बाद निवेश ₹1,000 के गुणकों में किया जा सकेगा। निवेशकों के लिए इसमें डायरेक्ट प्लान और रेगुलर प्लान दोनों विकल्प उपलब्ध हैं। फंड मैनेजर और बेंचमार्क इस स्कीम का प्रबंधन अनुभवी फंड मैनेजरों की टीम करेगी, जिसमें शामिल हैं— धर्मेश कक्कड़ मनीष बंथिया अखिल कक्कड़ शर्मिला डी'सिल्वा गौरव चिकने इसका बेंचमार्क निम्नलिखित मिश्रित इंडेक्स पर आधारित होगा— 55% निफ्टी 200 TRI 35% निफ्टी कंपोजिट डेट इंडेक्स 7% घरेलू गोल्ड प्राइस 3% घरेलू सिल्वर प्राइस निवेश से पहले रखें इन बातों का ध्यान हालांकि मल्टी-एसेट फंड्स पोर्टफोलियो में विविधता लाने का अवसर देते हैं, लेकिन किसी भी म्यूचुअल फंड में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है। निवेश करने से पहले अपनी वित्तीय जरूरतों, जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश अवधि का आकलन करना जरूरी है। यदि आवश्यक हो तो किसी प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श लेना बेहतर रहेगा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। जून 2026 में भारत का वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह मजबूत बढ़त के साथ ₹1.94 लाख करोड़ के स्तर पर पहुंच गया। वित्त मंत्रालय के अनुसार, जून में सकल जीएसटी संग्रह ₹1,94,812 करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष जून 2025 के ₹1,71,105 करोड़ की तुलना में 13.9 प्रतिशत अधिक है। इस वृद्धि की सबसे बड़ी वजह आयातित वस्तुओं पर मिलने वाले कर संग्रह में रिकॉर्ड बढ़ोतरी रही। आयात कर ने बढ़ाई रफ्तार जून के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी सामानों के आयात पर मिलने वाला टैक्स 34.6 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि के साथ ₹60,038 करोड़ तक पहुंच गया। इसके मुकाबले घरेलू कारोबार से मिलने वाला जीएसटी संग्रह 6.5 प्रतिशत बढ़कर ₹1,34,774 करोड़ रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि आयात में तेजी से सरकारी राजस्व को मजबूती मिली है, हालांकि घरेलू मांग में अपेक्षाकृत धीमी बढ़त चिंता का विषय बनी हुई है। रिफंड के बाद भी बढ़ा शुद्ध राजस्व सरकार ने जून के दौरान करदाताओं को ₹32,436 करोड़ का जीएसटी रिफंड जारी किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 29.1 प्रतिशत अधिक है। इसके बावजूद सरकार का शुद्ध जीएसटी राजस्व ₹1,62,377 करोड़ रहा, जो सालाना आधार पर 11.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। पहली तिमाही में 6.31 लाख करोड़ से अधिक संग्रह चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में कुल ₹6,31,699 करोड़ का जीएसटी संग्रह दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से 8.4 प्रतिशत अधिक है। इस दौरान आयात कर संग्रह में 26.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि घरेलू कर संग्रह में 2.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। राज्यों का प्रदर्शन रहा मिला-जुला राज्यों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो महाराष्ट्र सबसे अधिक ₹30,714 करोड़ के संग्रह के साथ शीर्ष पर रहा। उत्तर प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। वहीं सिक्किम, पुडुचेरी, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और तमिलनाडु में जीएसटी संग्रह में गिरावट देखने को मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत आयात गतिविधियां अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत हैं, लेकिन दीर्घकालिक संतुलित विकास के लिए घरेलू उपभोग और बाजार मांग को भी गति देना आवश्यक होगा।