स्वास्थ्य

eGFR Slope Predicts Kidney Disease Risk

किडनी रोग IgA Nephropathy में बड़ा संकेत: eGFR स्लोप से पता चल सकता है बीमारी का भविष्य

surbhi अप्रैल 29, 2026 0
Doctor analyzing kidney report with eGFR levels for IgA Nephropathy patient monitoring
eGFR Slope Kidney Disease Study

किडनी रोगों के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण रिसर्च सामने आई है, जिसमें IgA Nephropathy के मरीजों में बीमारी की प्रगति का अनुमान लगाने के लिए नए तरीके की पुष्टि हुई है। अध्ययन के अनुसार, eGFR का “स्लोप” यानी समय के साथ इसमें गिरावट की गति, मरीज के भविष्य के किडनी जोखिम को बेहतर तरीके से दर्शा सकता है।

क्या था अध्ययन का उद्देश्य

जापान के एक बड़े कोहोर्ट अध्ययन में 937 वयस्क मरीजों को शामिल किया गया, जिनमें IgA Nephropathy की पुष्टि बायोप्सी के जरिए हुई थी। करीब 6 साल तक मरीजों को फॉलो किया गया, ताकि यह समझा जा सके कि eGFR में समय के साथ होने वाले बदलाव (slope) किडनी के परिणामों को कैसे प्रभावित करते हैं।

eGFR में गिरावट से बढ़ता खतरा

रिसर्च में पाया गया कि जिन मरीजों में eGFR तेजी से गिरता है, उनमें किडनी खराब होने का जोखिम काफी ज्यादा होता है।

  • 8.3% मरीजों में गंभीर स्थिति (≥40% eGFR गिरावट या किडनी रिप्लेसमेंट की जरूरत) देखी गई
  • हर 1 स्टैंडर्ड डिविएशन की गिरावट पर जोखिम लगभग 1.82 गुना बढ़ गया

यह संबंध अन्य मेडिकल फैक्टर्स को ध्यान में रखने के बाद भी मजबूत बना रहा।

क्यों अहम है eGFR स्लोप

अब तक डॉक्टर आमतौर पर एक समय के eGFR स्तर को देखकर बीमारी का आकलन करते थे। लेकिन यह अध्ययन बताता है कि समय के साथ eGFR का ट्रेंड यानी स्लोप, बीमारी की असली गति और जोखिम को बेहतर तरीके से दिखाता है।

इलाज और रिसर्च में बड़ा बदलाव

इस खोज से भविष्य में दो बड़े फायदे हो सकते हैं:

  • मरीजों की जल्दी पहचान और सही समय पर इलाज
  • नई दवाओं के ट्रायल में तेजी, क्योंकि लंबे समय तक इंतजार किए बिना प्रभाव का आकलन संभव होगा

क्या है इसका मतलब

यह रिसर्च इस बात को मजबूत करती है कि IgA Nephropathy जैसे धीमी गति से बढ़ने वाले किडनी रोगों में नियमित मॉनिटरिंग और डेटा आधारित विश्लेषण बेहद जरूरी है। eGFR स्लोप को अपनाने से डॉक्टर मरीजों के लिए अधिक सटीक और व्यक्तिगत उपचार योजना बना सकेंगे।

 

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

स्वास्थ्य

View more
Blood sample analysis showing plasma proteins linked to urological cancer risk and detection
प्लाज्मा प्रोटीन से मिले यूरोलॉजिकल कैंसर के संकेत: नई रिसर्च ने खोले इलाज और पहचान के रास्ते

कैंसर रिसर्च के क्षेत्र में एक अहम प्रगति सामने आई है, जहां वैज्ञानिकों ने खून में मौजूद प्लाज्मा प्रोटीन के जरिए यूरोलॉजिकल कैंसर के जोखिम और संभावित इलाज के नए रास्ते खोजे हैं। Mendelian randomisation आधारित इस बड़े अध्ययन में यह पाया गया कि कुछ खास प्रोटीन कैंसर के खतरे को बढ़ा या घटा सकते हैं। किन कैंसर पर हुआ अध्ययन इस रिसर्च में चार प्रमुख यूरोलॉजिकल कैंसर शामिल थे: Bladder Cancer Prostate Cancer Renal Cell Carcinoma Testicular Cancer शोधकर्ताओं ने बड़े पैमाने पर जीन डेटा और प्लाज्मा प्रोटीन के अध्ययन के लिए FinnGen और UK Biobank जैसे डेटाबेस का उपयोग किया। ब्लैडर कैंसर में अहम प्रोटीन ब्लैडर कैंसर के मामले में चार प्रमुख प्रोटीन की पहचान हुई: PSCA: कैंसर के खतरे को बढ़ाता है GSTM1, GSTM3, GSTM4: जोखिम को कम करने से जुड़े ये प्रोटीन ट्यूमर में मौजूद खास कोशिकाओं जैसे यूरोथीलियल और इम्यून सेल्स में सक्रिय पाए गए। प्रोस्टेट कैंसर में 15 बायोमार्कर प्रोस्टेट कैंसर में कुल 15 प्रोटीन बायोमार्कर सामने आए: जोखिम बढ़ाने वाले: AGER, ALAD, CHMP2B, PEX14, ZG16B, PPP1R14A, SERPINA3 जोखिम घटाने वाले: BTN2A1, CEACAM21, DNAJB9, MSMB, PYGL, HLA-E, SOD2, TOR1AIP1 इनमें से SOD2 और CHMP2B को सबसे मजबूत कारणात्मक बायोमार्कर माना गया। इलाज के नए अवसर इस अध्ययन की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पहचाने गए सात प्रोटीन पहले से ही अन्य बीमारियों के इलाज में उपयोग होने वाली दवाओं का हिस्सा हैं। इसका मतलब है कि भविष्य में इन्हें यूरोलॉजिकल कैंसर के इलाज के लिए दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। क्या है इसका महत्व यह रिसर्च दिखाती है कि प्लाज्मा प्रोटीन न सिर्फ कैंसर के जोखिम की भविष्यवाणी कर सकते हैं, बल्कि नए इलाज विकसित करने में भी मददगार साबित हो सकते हैं। इससे आने वाले समय में कैंसर की पहचान और उपचार दोनों अधिक सटीक और प्रभावी हो सकते हैं।  

surbhi अप्रैल 29, 2026 0
Doctor analyzing kidney report with eGFR levels for IgA Nephropathy patient monitoring

किडनी रोग IgA Nephropathy में बड़ा संकेत: eGFR स्लोप से पता चल सकता है बीमारी का भविष्य

Coffee health risks

कॉफी पीने से बीपी पर क्या असर पड़ता है? जानें डॉक्टर की राय

Puri cooking tips

अब पूड़ी नहीं सोखेगी ज्यादा तेल, जानें सही तरीका और 5 गलतियां

HER2 cancer vaccine research showing immune response targeting tumor cells in lab study
कैंसर इलाज में नई उम्मीद: HER-2 वैक्सीन ने दिखाया असर, एंटीबॉडी थेरेपी के साथ भी कायम रही ताकत

कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक नई रिसर्च ने उम्मीद जगाई है। वैज्ञानिकों द्वारा विकसित नई HER-2 वैक्सीन ने न सिर्फ मजबूत इम्यून रिस्पॉन्स दिखाया है, बल्कि मोनोक्लोनल एंटीबॉडी थेरेपी के साथ भी प्रभावी बनी रही है। यह खोज खासतौर पर HER-2 पॉजिटिव कैंसर–जैसे कुछ प्रकार के ब्रेस्ट कैंसर–के इलाज के लिए अहम मानी जा रही है। क्या है नई HER-2 वैक्सीन? यह नई वैक्सीन, ES2B-C001, वायरस जैसे कणों (Virus-like particles) पर आधारित है, जो HER-2 प्रोटीन के पूरे बाहरी हिस्से को प्रदर्शित करती है। प्रीक्लिनिकल (प्रयोगशाला) अध्ययनों में इस वैक्सीन ने शरीर में मजबूत एंटीबॉडी प्रतिक्रिया पैदा की, जो ट्यूमर और मेटास्टेसिस (फैलाव) को खत्म करने में सक्षम रही। मजबूत इम्यून रिस्पॉन्स का दावा शोध में पाया गया कि इस वैक्सीन से शरीर में एंटी-HER-2 इम्यूनोग्लोबुलिन G (IgG) का स्तर काफी ऊंचा रहा और यह प्रभाव 6 महीने से अधिक समय तक बना रहा। साथ ही, T-सेल्स की सक्रियता भी बढ़ी, जो कैंसर कोशिकाओं से लड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। एंटीबॉडी थेरेपी के साथ भी असर बरकरार सबसे अहम बात यह रही कि जब इस वैक्सीन को एंटी-HER-2 मोनोक्लोनल एंटीबॉडी (जैसे 4D5) के साथ दिया गया, तब भी इसकी प्रभावशीलता कम नहीं हुई। इसका मतलब है कि पहले से चल रहे इलाज के साथ भी यह वैक्सीन असरदार बनी रह सकती है। ट्यूमर पर कितना असर? माउस मॉडल (चूहों पर किए गए अध्ययन) में: केवल वैक्सीन देने पर 20 में से 13 चूहे लंबे समय तक ट्यूमर-फ्री रहे वैक्सीन + एंटीबॉडी थेरेपी के साथ यह आंकड़ा बढ़कर 20 में से 15 हो गया यह दर्शाता है कि वैक्सीन अकेले और कॉम्बिनेशन दोनों में प्रभावी है। भविष्य के लिए क्या संकेत? यह वैक्सीन अब क्लिनिकल डेवलपमेंट के चरण में पहुंच चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इंसानों पर भी इसके परिणाम सकारात्मक रहते हैं, तो यह HER-2 पॉजिटिव कैंसर के इलाज में बड़ा बदलाव ला सकती है। खासतौर पर उन मरीजों के लिए, जो पहले से एंटी-HER-2 थेरेपी जैसे ट्रास्टुजुमैब ले रहे हैं, यह एक अतिरिक्त और प्रभावी विकल्प बन सकता है। क्या है इसका महत्व? यह रिसर्च इस दिशा में एक बड़ा कदम है कि भविष्य में कैंसर इलाज सिर्फ दवाओं तक सीमित न रहकर वैक्सीन आधारित इम्यून थेरेपी तक भी विस्तारित हो सकता है।  

surbhi अप्रैल 28, 2026 0
Brain and heart connection illustration showing early cognitive decline before heart disease risk

दिल से पहले दिमाग देता है संकेत? नई रिसर्च में बड़ा खुलासा, वर्षों पहले शुरू हो सकती है कॉग्निटिव गिरावट

Makhana recipes

Makhana recipes: गर्मी में मखाना खाएं इन नए तरीकों से, मिलेगा ठंडक और एनर्जी दोनों का फायदा

Watermelon mojito

Watermelon mojito: तरबूज से बनाएं ये रिफ्रेशिंग मोहितो, गर्मी में मिलेगा इंस्टेंट आराम

Green tea benefits
ग्रीन टी क्यों है हेल्थ के लिए बेस्ट? जानिए इसके 10 बड़े बेनिफिट्स

नई दिल्ली, एजेंसियां। ग्रीन टी आज दुनिया भर में एक लोकप्रिय हेल्दी ड्रिंक बन चुकी है। इसकी शुरुआत चीन से हुई थी, लेकिन इसके औषधीय गुणों के कारण अब यह हर जगह पसंद की जाती है। यह Camellia sinensis की पत्तियों से बनती है और इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स और पॉलीफेनॉल्स पाए जाते हैं, जो शरीर को कई बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं।   वजन घटाने से लेकर कैंसर तक में सहायक ग्रीन टी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह मेटाबॉलिज्म को तेज कर फैट बर्न करने में मदद करती है, खासकर पेट की चर्बी कम करने में। इसके अलावा इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स कई प्रकार के कैंसर जैसे ब्रेस्ट और प्रोस्टेट कैंसर के खतरे को कम करने में सहायक माने जाते हैं।   डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में असरदार ग्रीन टी ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने और इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाने में मदद कर सकती है, जिससे Type 2 Diabetes का खतरा कम होता है। साथ ही यह खराब कोलेस्ट्रॉल को घटाकर और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाकर दिल को स्वस्थ रखने में मदद करती है।   ब्रेन और हार्ट हेल्थ के लिए फायदेमंद ग्रीन टी में मौजूद कैफीन और एल-थीनाइन दिमाग को सक्रिय रखते हैं और याददाश्त बेहतर बनाते हैं। यह Alzheimer's disease और Parkinson's disease जैसी बीमारियों के जोखिम को कम करने में भी सहायक हो सकती है। इसके अलावा यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित कर दिल की बीमारियों से बचाव करती है।   दांतों और त्वचा के लिए भी लाभकारी ग्रीन टी में मौजूद कैटेचिन बैक्टीरिया को खत्म कर दांतों को स्वस्थ रखते हैं और सांसों की बदबू कम करते हैं। इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण त्वचा को जवान बनाए रखने और झुर्रियों को कम करने में मदद करते हैं।   डॉक्टर की सलाह जरूरी हालांकि ग्रीन टी के कई फायदे हैं, लेकिन किसी भी स्वास्थ्य उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है, ताकि इसका सही और सुरक्षित लाभ मिल सके।

Anjali Kumari अप्रैल 27, 2026 0
Elderly man exercising with medical illustration showing prostate cancer lifestyle impact

प्रोस्टेट कैंसर में लाइफस्टाइल का बड़ा असर: एक्सरसाइज से दिमाग तेज, स्मोकिंग से बढ़ता खतरा

Elderly person sitting alone looking stressed while another performs exercise highlighting mental and physical health contrast

डिप्रेशन और शारीरिक निष्क्रियता बढ़ा रहे गंभीर बीमारियों का खतरा, नई स्टडी में बड़ा खुलासा

Healthy morning habits like hydration, exercise and planning help reduce stress and boost daily energy

सुबह की ये 5 आदतें बदल सकती हैं आपका दिन, कम होगा स्ट्रेस और बढ़ेगी एनर्जी

0 Comments

Top week

Donald Trump and Iranian leader amid rising tensions over nuclear talks and Strait of Hormuz
दुनिया

युद्ध रोकने को ईरान का नया प्रस्ताव, लेकिन ट्रंप खुश नहीं; परमाणु मुद्दे पर अड़ा अमेरिका

surbhi अप्रैल 28, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?