स्वास्थ्य

Severe Asthma Shows Distinct Patterns

गंभीर अस्थमा के मरीजों में अलग-अलग ‘क्लिनिकल पैटर्न’ की पहचान, इलाज को लेकर नई दिशा

surbhi अप्रैल 14, 2026 0
Doctor examining lung scan and asthma patient chart showing severe asthma clinical patterns in hospital.
Severe Asthma Clinical Patterns Study

यूरोप में किए गए एक बड़े अध्ययन ने Severe Asthma के मरीजों में मौजूद अन्य बीमारियों (comorbidities) के खास पैटर्न की पहचान की है। इस रिसर्च से पता चलता है कि गंभीर अस्थमा केवल एक फेफड़ों की बीमारी नहीं, बल्कि कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के साथ जुड़ी एक जटिल स्थिति है।

क्या है Severe Asthma और Multimorbidity?

Severe asthma ऐसे मरीजों में देखा जाता है, जहां:

  • लक्षण लगातार बने रहते हैं
  • बार-बार अटैक (exacerbations) आते हैं
  • हाई-डोज दवाओं के बावजूद फेफड़ों की क्षमता कम रहती है

अक्सर इन मरीजों में कई दूसरी बीमारियां भी साथ होती हैं, जिसे “multimorbidity” कहा जाता है।

क्या कहता है यूरोप का बड़ा अध्ययन?

11 यूरोपीय देशों के 2,690 मरीजों पर किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि:

  • अलग-अलग बीमारियां रैंडम तरीके से नहीं जुड़तीं
  • बल्कि कुछ तय पैटर्न (clusters) में एक साथ दिखाई देती हैं
  • ये पैटर्न अलग-अलग क्षेत्रों में भी समान पाए गए

तीन प्रमुख ‘क्लस्टर’ सामने आए

रिसर्च में तीन स्थिर पैटर्न (clusters) की पहचान हुई:

1. स्टेरॉयड से जुड़ा क्लस्टर

  • Osteoporosis (हड्डियों की कमजोरी)
  • वजन बढ़ना (steroid-induced weight gain)
      यह लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाओं के असर को दर्शाता है

2. एलर्जिक क्लस्टर

  • Eczema
  • Allergic Rhinitis
      यह एलर्जी से जुड़ी प्रोफाइल को दर्शाता है

3. अपर एयरवे क्लस्टर

  • Chronic Sinusitis
  • Nasal Polyps
      यह नाक और साइनस से जुड़ी समस्याओं को दिखाता है

अन्य बीमारियों में दिखी विविधता

कुछ अन्य स्थितियां जैसे:

  • मोटापा (Obesity)
  • Bronchiectasis
  • Acid Reflux (GERD)
  • मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं

इनका पैटर्न स्थिर नहीं रहा, जिससे यह स्पष्ट होता है कि severe asthma हर मरीज में अलग तरह से प्रकट हो सकता है।

इलाज और परिणामों पर असर

अध्ययन में पाया गया कि:

  • स्टेरॉयड से जुड़ा पैटर्न सबसे खराब परिणामों से जुड़ा था
    • ज्यादा दवाओं की जरूरत
    • फेफड़ों की खराब कार्यक्षमता
    • ज्यादा अटैक
  • Maximal multimorbidity ग्रुप में:
    • कई बीमारियां एक साथ
    • Biologic therapies की ज्यादा जरूरत

डॉक्टरों के लिए क्या संकेत?

यह रिसर्च बताती है कि:

  • मरीजों को सिर्फ अस्थमा के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी पूरी स्वास्थ्य स्थिति को देखकर इलाज करना चाहिए
  • स्टेरॉयड पर निर्भर मरीजों में जल्दी वैकल्पिक इलाज (steroid-sparing therapies) पर विचार करना जरूरी है
  • हर मरीज के लिए पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट जरूरी है 
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

स्वास्थ्य

View more
Soaked almonds benefits
बादाम खाने का सही तरीका क्या है? छिलके के साथ या बिना, जानें पूरा सच

नई दिल्ली, एजेंसियां। बादाम को सुपरफूड माना जाता है और यह सेहत के लिए बेहद लाभकारी होता है। लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि बादाम को छीलकर खाना चाहिए या बिना छीले। न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स के अनुसार, दोनों तरीकों के अपने-अपने फायदे हैं, लेकिन सही तरीका जानना जरूरी है ताकि शरीर को अधिकतम पोषण मिल सके।   छिलके में छिपे हैं जरूरी पोषक तत्व विशेषज्ञों के मुताबिक बादाम के छिलके में पॉलीफेनॉल्स, विटामिन E और डाइटरी फाइबर जैसे अहम पोषक तत्व मौजूद होते हैं। ये तत्व शरीर को एंटीऑक्सीडेंट सुरक्षा देते हैं और त्वचा व दिमाग के लिए फायदेमंद होते हैं। बताया जाता है कि छिलका हटाने से करीब 70 प्रतिशत पॉलीफेनॉल्स कम हो जाते हैं, जिससे इसके कुछ महत्वपूर्ण फायदे घट सकते हैं।   भिगोकर छीलकर खाने के फायदे वहीं, बादाम को भिगोकर छीलकर खाने से पाचन आसान हो जाता है। छिलके में मौजूद टैनिन एंजाइम की क्रिया को बाधित करता है, जिससे पाचन धीमा हो सकता है। भिगोने से बादाम नरम हो जाता है और शरीर पोषक तत्वों को बेहतर तरीके से अवशोषित कर पाता है। इसके अलावा, फाइटिक एसिड की मात्रा भी कम हो जाती है, जिससे कैल्शियम, आयरन और जिंक जैसे मिनरल्स का अवशोषण बेहतर होता है।   क्या है सही तरीका? स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आपका पाचन मजबूत है तो आप बादाम छिलके सहित खा सकते हैं। वहीं, जिन लोगों को पाचन संबंधी दिक्कत होती है, उनके लिए भिगोकर छीलकर खाना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। कुल मिलाकर, दोनों तरीकों से बादाम खाने के फायदे मिलते हैं, लेकिन जरूरत और शरीर के अनुसार तरीका चुनना बेहतर होता है। डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य ज्ञान पर आधारित है। किसी भी तरह का डाइट बदलाव करने से पहले डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Anjali Kumari अप्रैल 14, 2026 0
Foods rich in iron

शरीर में आयरन की कमी से बचने के लिए अपनाएं सही डाइट, जानें क्या खाएं

Easy mango recipes

गर्मियों में आम से बनाएं ये 5 मजेदार रेसिपी, हर कोई करेगा तारीफ

Bottle gourd tips

लौकी खरीदते समय न करें ये गलती, ऐसे पहचानें ताजी और बासी सब्जी

Doctor examining lung scan and asthma patient chart showing severe asthma clinical patterns in hospital.
गंभीर अस्थमा के मरीजों में अलग-अलग ‘क्लिनिकल पैटर्न’ की पहचान, इलाज को लेकर नई दिशा

यूरोप में किए गए एक बड़े अध्ययन ने Severe Asthma के मरीजों में मौजूद अन्य बीमारियों (comorbidities) के खास पैटर्न की पहचान की है। इस रिसर्च से पता चलता है कि गंभीर अस्थमा केवल एक फेफड़ों की बीमारी नहीं, बल्कि कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के साथ जुड़ी एक जटिल स्थिति है। क्या है Severe Asthma और Multimorbidity? Severe asthma ऐसे मरीजों में देखा जाता है, जहां: लक्षण लगातार बने रहते हैं बार-बार अटैक (exacerbations) आते हैं हाई-डोज दवाओं के बावजूद फेफड़ों की क्षमता कम रहती है अक्सर इन मरीजों में कई दूसरी बीमारियां भी साथ होती हैं, जिसे “multimorbidity” कहा जाता है। क्या कहता है यूरोप का बड़ा अध्ययन? 11 यूरोपीय देशों के 2,690 मरीजों पर किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि: अलग-अलग बीमारियां रैंडम तरीके से नहीं जुड़तीं बल्कि कुछ तय पैटर्न (clusters) में एक साथ दिखाई देती हैं ये पैटर्न अलग-अलग क्षेत्रों में भी समान पाए गए तीन प्रमुख ‘क्लस्टर’ सामने आए रिसर्च में तीन स्थिर पैटर्न (clusters) की पहचान हुई: 1. स्टेरॉयड से जुड़ा क्लस्टर Osteoporosis (हड्डियों की कमजोरी) वजन बढ़ना (steroid-induced weight gain)   यह लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाओं के असर को दर्शाता है 2. एलर्जिक क्लस्टर Eczema Allergic Rhinitis   यह एलर्जी से जुड़ी प्रोफाइल को दर्शाता है 3. अपर एयरवे क्लस्टर Chronic Sinusitis Nasal Polyps   यह नाक और साइनस से जुड़ी समस्याओं को दिखाता है अन्य बीमारियों में दिखी विविधता कुछ अन्य स्थितियां जैसे: मोटापा (Obesity) Bronchiectasis Acid Reflux (GERD) मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं इनका पैटर्न स्थिर नहीं रहा, जिससे यह स्पष्ट होता है कि severe asthma हर मरीज में अलग तरह से प्रकट हो सकता है। इलाज और परिणामों पर असर अध्ययन में पाया गया कि: स्टेरॉयड से जुड़ा पैटर्न सबसे खराब परिणामों से जुड़ा था ज्यादा दवाओं की जरूरत फेफड़ों की खराब कार्यक्षमता ज्यादा अटैक Maximal multimorbidity ग्रुप में: कई बीमारियां एक साथ Biologic therapies की ज्यादा जरूरत डॉक्टरों के लिए क्या संकेत? यह रिसर्च बताती है कि: मरीजों को सिर्फ अस्थमा के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी पूरी स्वास्थ्य स्थिति को देखकर इलाज करना चाहिए स्टेरॉयड पर निर्भर मरीजों में जल्दी वैकल्पिक इलाज (steroid-sparing therapies) पर विचार करना जरूरी है हर मरीज के लिए पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट जरूरी है 

surbhi अप्रैल 14, 2026 0
Saliva sample in laboratory for Alzheimer’s disease biomarker testing.

क्या लार (Saliva) से अल्जाइमर का सही पता चल सकता है? नई स्टडी ने उठाए सवाल

High blood pressure diet

क्या फ्रूट जूस पीने से बढ़ सकता है ब्लड प्रेशर? जानिए क्या कहती है ताजा हेल्थ रिसर्च

Doctor conducting penicillin allergy testing in a hospital to ensure accurate antibiotic treatment.

पेनिसिलिन एलर्जी टेस्टिंग से बड़ा बदलाव: WHO-रिस्ट्रिक्टेड एंटीबायोटिक्स का उपयोग घटा, इलाज हुआ अधिक सटीक

Laboratory scientist analyzing DNA sequencing data for paediatric leukaemia diagnosis using advanced genomic technology.
बच्चों में ल्यूकेमिया की पहचान में नई क्रांति: Long Read Sequencing से बढ़ी सटीकता और तेजी

बाल चिकित्सा के क्षेत्र में Paediatric Leukaemia की पहचान और इलाज को लेकर एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रगति सामने आई है। हाल ही में हुए एक अध्ययन में Long Read Sequencing तकनीक ने पारंपरिक जांच तरीकों की तुलना में अधिक सटीक और व्यापक परिणाम दिए हैं, जिससे बीमारी की पहचान और वर्गीकरण में बड़ा सुधार संभव हुआ है। क्या है Long Read Sequencing और क्यों है खास? ल्यूकेमिया में जीन फ्यूजन (Gene Fusion) बीमारी के मुख्य कारणों में से एक होते हैं, जो संरचनात्मक बदलावों (Structural Variants) से उत्पन्न होते हैं। वर्तमान क्लीनिकल प्रक्रियाओं में इन बदलावों को पहचानने के लिए कई अलग-अलग परीक्षणों की जरूरत पड़ती है, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ जाते हैं। लेकिन Long Read Sequencing एक ही टेस्ट में इन जटिल जीन बदलावों को पहचानने में सक्षम है, जिससे पूरी प्रक्रिया सरल और तेज हो सकती है। अध्ययन में क्या सामने आया? इस प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट स्टडी में 17 बच्चों पर इस तकनीक का परीक्षण किया गया। परिणाम बेहद सकारात्मक रहे: सभी पहले से ज्ञात महत्वपूर्ण जीन बदलाव (5/5) को इस तकनीक ने सही तरीके से पहचाना पारंपरिक जांच के साथ 100% समानता (Concordance) देखी गई कई नए और पहले छूटे हुए जीन बदलाव भी सामने आए नई खोज: छूटे हुए मामलों की पहचान सबसे अहम बात यह रही कि इस तकनीक ने ऐसे जीन बदलाव भी पकड़े, जो पहले की जांच में सामने नहीं आए थे। इन नई खोजों की मदद से 12 में से 4 मरीजों में ल्यूकेमिया के एक विशेष जीन सबटाइप की पहचान संभव हो सकी, जो पहले तय नहीं हो पाई थी। इन्हीं में एक जटिल बदलाव ins(11;10)(q23.3;p12p12) भी शामिल था, जिससे KMT2A::MLLT10 जीन फ्यूजन बना–जो क्लीनिकली बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इलाज और भविष्य पर असर इस अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि Long Read Sequencing भविष्य में Paediatric Leukaemia के निदान के लिए एक प्रभावी “वन-स्टॉप सॉल्यूशन” बन सकता है। इसके संभावित फायदे: तेज और सटीक निदान कम लागत और समय बेहतर जीन आधारित वर्गीकरण मरीज के लिए अधिक सटीक इलाज की योजना विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तकनीक को नियमित क्लीनिकल प्रैक्टिस में शामिल किया जाता है, तो यह बच्चों में ल्यूकेमिया के इलाज के तरीके को पूरी तरह बदल सकती है।  

surbhi अप्रैल 13, 2026 0
Illustration of pulmonary arterial hypertension showing affected lungs, heart, and brain inflammation.

Pulmonary Arterial Hypertension: फेफड़ों से आगे बढ़कर दिमाग को भी कर रहा प्रभावित, नई स्टडी में बड़ा खुलासा

Scientist analyzing blood sample for multi-cancer detection using advanced cfDNA methylation testing technology.

एक ही ब्लड टेस्ट से कई कैंसर का पता लगाने की दिशा में बड़ी सफलता, रिसर्च में चौंकाने वाले नतीजे

Doctor analyzing prostate MRI scan to assess cancer risk and surgical treatment planning.

प्रोस्टेट सर्जरी से पहले MRI से मिल सकता है कैंसर के भविष्य का संकेत, नई स्टडी में बड़ा खुलासा

0 Comments

Top week

Artemis II spacecraft orbiting the Moon’s far side during record-breaking human space mission.
दुनिया

Artemis II ने रचा इतिहास: इंसानों की पृथ्वी से सबसे दूर यात्रा, Apollo 13 का रिकॉर्ड टूटा

surbhi अप्रैल 7, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?