झारखंड में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। साइक्लोनिक सर्कुलेशन के प्रभाव से राज्य के अधिकांश हिस्सों में 25 और 26 मार्च को आसमान में घने बादल छाए रहने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में मौसम का यह अस्थिर रुख जारी रहेगा, जिससे आम जनजीवन के साथ-साथ त्योहारों और खेती पर भी असर पड़ सकता है।
इस बार रामनवमी के अवसर पर मौसम पूरी तरह साफ नहीं रहने वाला है। विभाग का अनुमान है कि इस दिन हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसे भगवान श्रीराम का “प्राकृतिक जलाभिषेक” भी माना जा रहा है, लेकिन इससे जुलूस और आयोजन प्रभावित हो सकते हैं।
मौसम केंद्र ने 27 और 28 मार्च के लिए कई जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है। इन दिनों 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। इसके साथ ही मेघ गर्जन, वज्रपात और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। लोगों को खुले स्थानों, खासकर पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी गई है।
29 मार्च को मौसम कुछ हद तक राहत देगा। हालांकि बादल बने रहेंगे, लेकिन बारिश की संभावना कम है। वहीं 30 मार्च को एक बार फिर मौसम करवट ले सकता है और कई जिलों में गरज के साथ बारिश होने की संभावना जताई गई है।
राजधानी रांची में अधिकतम तापमान 31.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 17.1 डिग्री रहा। मेदिनीनगर और सरायकेला जैसे इलाकों में तापमान 35 डिग्री के पार पहुंच चुका है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले तीन दिनों में तापमान 4 से 5 डिग्री तक बढ़ सकता है, जिसके बाद हल्की गिरावट दर्ज की जाएगी।
जमशेदपुर में भी मौसम ने राहत दी है। 27, 28 और 30 मार्च को यहां बारिश के आसार हैं। मंगलवार को अधिकतम तापमान 34.8 डिग्री और न्यूनतम 21 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से थोड़ा कम रहा।
साहिबगंज जिले में बेमौसम बारिश और तेज हवा ने किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। गेहूं, मक्का, सरसों, मटर, मसूर और चना जैसी फसलें खेतों में ही बर्बाद हो गई हैं।
स्थानीय किसानों ने प्रशासन से जल्द सर्वे कर मुआवजा देने की मांग की है। छोटे और सीमांत किसान इस नुकसान से आर्थिक संकट में आ गए हैं।
उत्तर-पूर्वी जिलों में अधिकतम तापमान 33 से 36 डिग्री के बीच रहेगा, जबकि न्यूनतम 19 से 21 डिग्री तक रहने की संभावना है। रांची, हजारीबाग और बोकारो जैसे इलाकों में तापमान थोड़ा कम रहेगा। वहीं दक्षिणी जिलों में तापमान 37 डिग्री तक पहुंच सकता है।
कुल मिलाकर, झारखंड में इस सप्ताह मौसम पूरी तरह अस्थिर बना रहेगा। रामनवमी जैसे बड़े त्योहार के दौरान बारिश और तेज हवाएं प्रशासन और आम लोगों के लिए चुनौती बन सकती हैं। ऐसे में मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करना बेहद जरूरी है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रांची। झारखंड फिल्म फेस्टिवल 2026 का आयोजन रांची में 26 से 28 जून तक होगा। राज्यपाल संतोष गंगवार ने “चित्रपट झारखंड फिल्म फेस्टिवल 2026” के पोस्टर का विमोचन किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर, क्षेत्र प्रचारक रामनवमी जी, विभाग संपर्क प्रमुख भानु जालान, महानगर प्रचार प्रमुख स्निग्ध रंजन, चित्रपट झारखंड के अध्यक्ष नंद कुमार सिंह तथा कोषाध्यक्ष सुमित मित्तल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। सरला बिरला स्कूल में होगा आयोजन चित्रपट झारखंड द्वारा यह फिल्म महोत्सव आगामी 26, 27 एवं 28 जून 2026 को सरला बिरला विश्वविद्यालय परिसर, टाटीसिल्वे, रांची में आयोजित किया जाएगा। झारखंड के युवा फिल्म निर्माताओं को अवसर इस फिल्म महोत्सव का मुख्य उद्देश्य झारखंड के युवा फिल्म निर्माताओं को अपनी रचनात्मक प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए एक सशक्त मंच प्रदान करना तथा क्षेत्रीय सिनेमा को प्रोत्साहित करना है। इसके माध्यम से झारखंड के फिल्मकार अपनी कला के जरिए राज्य की ऐतिहासिक, पौराणिक एवं सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत कर सकेंगे। साथ ही, यह आयोजन सामाजिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित “वसुधैव कुटुम्बकम” की भावना को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य भी करेगा। सिर्फ झारखंड के निर्माताओं को मौका इस फिल्म महोत्सव में केवल झारखंड राज्य के फिल्म निर्माता ही अपनी फिल्में जमा कर सकते हैं। प्रतियोगिता में फिल्मों की तीन श्रेणियां निर्धारित की गई हैं— * लघु फिल्म (अधिकतम 20 मिनट) * वृत्तचित्र (अधिकतम 30 मिनट) * परिसर फिल्म (अधिकतम 15 मिनट; इसमें केवल लघु फिल्म ही मान्य होगी) *पंजीकरण शुल्क:* * लघु फिल्म – ₹500 * वृत्तचित्र – ₹500 * परिसर फिल्म – ₹250 विद्यार्थियों के लिए विशेष रियायत के तहत वे किसी भी श्रेणी में मात्र ₹250 शुल्क देकर अपनी फिल्म जमा कर सकते हैं। झारखंडी भाषाओं की फिल्मे झारखंड में बोली जाने वाली सभी भाषाओं में फिल्में स्वीकार की जाएंगी। हिंदी और अंग्रेजी के अतिरिक्त अन्य भाषाओं की फिल्मों के लिए हिंदी अथवा अंग्रेजी में उपशीर्षक अनिवार्य होगा। फिल्मों के 12 विषय निर्धारित 1. झारखंड का इतिहास 2. जनजातीय समाज 3. ग्राम विकास 4. महिला सशक्तिकरण 5. पर्यावरण 6. सामाजिक समरसता 7. युवा और नशामुक्ति 8. नागरिक कर्तव्य 9. खेल और प्रतिभा 10. पलायन 11. डिजिटल भारत / तकनीकी परिवर्तन 12. भ्रष्टाचार और पारदर्शिता 1 जुलाई 2023 के बाद निर्मित फिल्में मान्य आयोजन समिति द्वारा यह भी निर्धारित किया गया है कि केवल 1 जुलाई 2023 के बाद निर्मित फिल्में ही मान्य होंगी। फिल्म जमा करने की अंतिम तिथि रविवार, 7 जून 2026 निर्धारित की गई है, जबकि चयनित फिल्मों की सूची 15 जून 2026 को प्रकाशित की जाएगी। इस फिल्म महोत्सव में कुल ₹2,70,000 का नकद पुरस्कार रखा गया है। यह आयोजन झारखंड के युवाओं के लिए फिल्म निर्माण के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित करने का एक सुनहरा अवसर प्रदान करेगा। यह जानकारी चित्रपट झारखंड के सदस्य नवीन सहाय ने दी।
रांची। झारखंड शिक्षा परियोजना ने स्कूली शिक्षकों के लिए नया फरमान जारी किया है। इसके मुताबिक अब सभी शिक्षकों को अनिवार्य रूप से विषयवार पाठ्य योजना तैयार करनी होगी। ऐसा नहीं करने वाले शिक्षकों और पारा शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी। उनका मई माह तक का वेतन या मानदेय रोक दिया जाएगा। इस संबंध में झारखंड शिक्षा परियोजना के निदेशक शशि रंजन ने राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) और जिला शिक्षा अधीक्षकों (DSE) को स्पष्ट निर्देश दिया हैं। शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है उद्देश्य विभाग का उद्देश्य नए सत्र की शुरुआत से ही शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना और शिक्षण प्रक्रिया को व्यवस्थित करना है। पाठ्य योजना बनाना अनिवार्य निर्देश के अनुसार सभी शिक्षक अपने-अपने विषयों की विस्तृत पाठ्य योजना तैयार करेंगे और उसे प्रधानाध्यापक या संबंधित जिला शिक्षा पदाधिकारी से अनुमोदित कराएंगे। इसके बाद ही उस योजना को विद्यालयों में लागू किया जाएगा। शिक्षा विभाग का मानना है कि सुनियोजित पाठ्य योजना से छात्रों के सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी। पहले दो महीने ‘आधारभूत कक्षाओं’ पर जोर शिक्षा परियोजना ने यह भी निर्देश दिया है कि अप्रैल और मई महीने में विद्यालयों में ‘आधारभूत आरंभिक कक्षाओं’ का आयोजन किया जाए। इन कक्षाओं का उद्देश्य छात्रों के पूर्व ज्ञान का आकलन करना और उनकी कमजोरियों को दूर करना है। इसके तहत सभी छात्रों का बेसलाइन असेसमेंट किया जाएगा। इस आकलन के आधार पर छात्रों को ए, बी, सी और डी ग्रेड में वर्गीकृत किया जाएगा। खासतौर पर भाषा विषयों—हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत और उर्दू—में छात्रों के अक्षर ज्ञान, पढ़ने-लिखने की क्षमता और व्याकरण की समझ का मूल्यांकन किया जाएगा। ब्रिज कोर्स से शिक्षा की मजबूत नींव तैयार होगी नए नामांकित छात्रों और कमजोर विद्यार्थियों के लिए ब्रिज कोर्स भी संचालित किया जाएगा। इसके तहत छात्रों को उनकी समझ के स्तर के अनुसार समूहों में बांटकर पढ़ाया जाएगा। हर विषय की एक घंटी प्रतिदिन अनिवार्य रूप से संचालित की जाएगी, ताकि सभी विषयों में संतुलित सुधार हो सके। नई समय-सारिणी का होगा पालन बेसलाइन असेसमेंट और प्रारंभिक कक्षाओं के बाद विद्यालयों में सीबीएसई या जैक के अनुरूप समय-सारिणी तैयार की जाएगी। कक्षावार टाइम-टेबल बनाकर उसका सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा। इसके लिए विभाग ने कक्षावार और विषयवार सिलेबस भी जारी किया है। शिक्षा विभाग के इस फैसले को शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
रांची। झारखंड में लंबे समय से खाली पड़े संवैधानिक पदों को लेकर अब स्थति स्पष्ट होती दिख रही है। राज्य को जल्द ही लोकायुक्त नियुक्त होने वाला है। यह जानकारी राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान दी। मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ में सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता राजीव रंजन ने बताया कि लोकायुक्त और सूचना आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। सरकार ने आश्वासन दिया सरकार ने आश्वासन दिया कि चयन समिति की बैठक हो चुकी है और नामों पर चर्चा पूरी कर ली गई है। इसके बाद 7 अप्रैल तक नियुक्ति से जुड़ी अधिसूचना जारी होने की उम्मीद है। हालांकि मुख्यमंत्री के राज्य से बाहर होने के कारण औपचारिक घोषणा में थोड़ी देरी हुई है। हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 13 अप्रैल को तय की है। झारखंड में लोकायुक्त के अलावा राज्य मानवाधिकार आयोग और राज्य सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त सहित अन्य आयुक्तों के पद लंबे समय से खाली हैं। इन पदों के खाली रहने से प्रशासनिक कामकाज और शिकायतों के निपटारे पर असर पड़ता रहा है। लोकायुक्त क्या है? लोकायुक्त एक स्वतंत्र संस्था होती है, जिसे राज्य स्तर पर सरकारी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ शिकायतों की जांच के लिए बनाया जाता है। इसे आम भाषा में ओम्बुड्समैन भी कहा जाता है। लोकायुक्त भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और अन्य अनियमितताओं की जांच करता है। इस पद के लिए वही व्यक्ति चुना जा सकता है जो सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश या किसी हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश रह चुका हो। नियुक्ति के बाद सरकार सीधे तौर पर लोकायुक्त को हटा नहीं सकती; इसके लिए विधानसभा में महाभियोग प्रक्रिया अपनानी पड़ती है। लोकायुक्त के दायरे में मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक, सचिव स्तर के अधिकारी आते हैं। जांच के दौरान वह दस्तावेज मंगाने, पूछताछ करने और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई करने के अधिकार रखता है। यह पद प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।