झारखंड

Women crews run trains in Ranchi and Dhanbad on Women’s Day.

महिला शक्ति की मिसाल: रांची और धनबाद में महिला क्रू ने संभाली ट्रेनों की कमान

surbhi मार्च 9, 2026 0
Women railway crew operating passenger train at Ranchi station on International Women’s Day initiative
Women Railway Crew Operate Train on Women’s Day

 

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर रेलवे की अनोखी पहल

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर झारखंड के रांची और धनबाद रेल मंडलों में महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरक पहल देखने को मिली। रेलवे प्रशासन ने इस अवसर पर ट्रेनों के संचालन से लेकर सुरक्षा और टिकट जांच तक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां महिला कर्मचारियों को सौंपीं।

इस पहल के तहत कई ट्रेनों को पूरी तरह महिला क्रू द्वारा संचालित किया गया, जिससे महिलाओं की क्षमता और नेतृत्व कौशल का शानदार उदाहरण सामने आया।

 

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दी शुभकामनाएं

इस अवसर पर झारखंड के मुख्यमंत्री Hemant Soren ने महिलाओं को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपने संदेश में कहा कि देश की आधी आबादी को इस खास दिन की हार्दिक शुभकामनाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि माताएं और बहनें केवल परिवार की ताकत ही नहीं, बल्कि समाज और राज्य के विकास की मजबूत आधारशिला भी हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं अपनी मेहनत, साहस और दृढ़ संकल्प से हर क्षेत्र में नई पहचान बना रही हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन रही हैं।

 

रांची–इरगांव ट्रेन का संचालन महिलाओं ने किया

रांची रेलवे स्टेशन से चलने वाली रांची–इरगांव ट्रेन का संचालन पूरी तरह महिला कर्मचारियों की टीम ने संभाला। इस विशेष पहल के तहत करीब 15 महिला रेलकर्मियों की टीम बनाई गई थी।

इस टीम में लोको पायलट, सहायक लोको पायलट, ट्रेन मैनेजर, टीटीई और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की महिला जवान शामिल थीं। ट्रेन की रवानगी से लेकर यात्रियों की सुरक्षा और व्यवस्था तक की सभी जिम्मेदारियां महिला टीम ने सफलतापूर्वक निभाईं।

 

यात्रियों ने तालियां बजाकर किया उत्साहवर्धन

रांची रेल मंडल की सीनियर डीसीएम सूची सिंह ने स्टेशन पर मौजूद महिला रेलकर्मियों को गुलाब का फूल देकर सम्मानित किया।

इस दौरान प्लेटफॉर्म पर मौजूद यात्रियों में भी इस पहल को लेकर उत्साह दिखाई दिया। लोगों ने तालियां बजाकर महिला कर्मचारियों का हौसला बढ़ाया और उनकी सराहना की। अधिकारियों ने कहा कि महिला दिवस महिलाओं के संघर्ष, उपलब्धियों और समाज में उनके योगदान को सम्मान देने का अवसर है।

 

धनबाद–सिंदरी टाउन ट्रेन भी महिला क्रू ने चलाई

धनबाद रेल मंडल में भी महिला दिवस के अवसर पर विशेष पहल की गई। धनबाद से सुबह 11:30 बजे खुलने वाली धनबाद–सिंदरी टाउन पैसेंजर ट्रेन का संचालन पूरी तरह महिला क्रू ने किया।

इस ट्रेन में रेल चालक के रूप में जानकी बल्लभ बारी, सहायक रेल चालक के रूप में वंदना कुमारी और ट्रेन मैनेजर के रूप में दीपा कुमारी ने जिम्मेदारी निभाई। वापसी में सिंदरी टाउन से धनबाद आने वाली ट्रेन का संचालन भी महिला कर्मचारियों ने ही किया।

 

स्टेशन की जिम्मेदारी भी महिलाओं के हाथ

धनबाद स्टेशन पर टिकट काउंटर, टिकट जांच, ट्रेन सिग्नलिंग और सुरक्षा से जुड़ी कई जिम्मेदारियां भी महिला कर्मचारियों को सौंपी गईं।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार इस पहल का उद्देश्य महिलाओं की क्षमता को सामने लाना और समाज में यह संदेश देना है कि महिलाएं हर क्षेत्र में जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह सक्षम हैं।
अधिकारियों ने यह भी कहा कि महिलाओं को समान अवसर देने और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए इस तरह की पहल आगे भी जारी रहेगी।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

झारखंड

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Ambulance Review Meeting
55 में से 27 सरकारी एंबुलेंस खा रहीं जंग, स्वास्थ्य मंत्री ने 22 जुलाई को बुलाई समीक्षा बैठक

रांची। राजधानी रांची में सरकारी एंबुलेंस सेवा गंभीर संकट से गुजर रही है। जिले को आवंटित 55 एंबुलेंसों में से 27 कंडम हो चुकी हैं, जबकि कई अन्य खराब हालत में विभिन्न अस्पतालों और सर्विस सेंटरों में खड़ी हैं। मेंटेनेंस के अभाव में कई एंबुलेंस जंग खा रही हैं और कुछ झाड़ियों से ढंक चुकी हैं। इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है, जिन्हें अस्पताल पहुंचने या घर लौटने के लिए महंगी निजी एंबुलेंस सेवाओं का सहारा लेना पड़ रहा है।   सर्विस सेंटर में महीनों से खड़ी हैं खराब एंबुलेंस रांची के बजरा स्थित सर्विस सेंटर में दर्जनों 108 एंबुलेंस मरम्मत के इंतजार में लंबे समय से खड़ी हैं। कर्मचारियों के अनुसार, कई गाड़ियों को आए एक महीने से अधिक समय हो चुका है। राज्यभर में पहले से संचालित करीब 543 एंबुलेंसों में 80 से अधिक ऑफ रोड हो चुकी हैं। कई एंबुलेंसों में वेंटिलेटर खराब हैं या उपलब्ध ही नहीं हैं। आधे से अधिक वाहनों में इमरजेंसी किट नहीं है, जबकि कई एंबुलेंसों के शीशे टूटे हैं, मॉनिटर खराब हैं और दरवाजे रस्सी से बांधकर चलाए जा रहे हैं।   पुरानी एजेंसी पर लापरवाही के आरोप, नई एजेंसी का इंतजार 108 एंबुलेंस सेवा का संचालन कर रही सम्मान फाउंडेशन पर समय पर मरम्मत और रखरखाव नहीं करने के आरोप लगे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने संस्था का करार समाप्त कर दिया है, लेकिन नई एजेंसी के चयन तक संचालन की जिम्मेदारी उसी के पास है। विभाग का कहना है कि वर्तमान एजेंसी रखरखाव में अपेक्षित रुचि नहीं दिखा रही है, जिससे व्यवस्था और प्रभावित हुई है।   237 नई एंबुलेंस खरीदेगा स्वास्थ्य विभाग स्थिति सुधारने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने 237 एडवांस लाइफ सपोर्ट (ALS) एंबुलेंस खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस पर 100 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने बताया कि 22 जुलाई को एंबुलेंस संचालन और प्रबंधन को लेकर समीक्षा बैठक बुलाई गई है। उन्होंने भरोसा जताया कि नई एजेंसी के चयन और नई एंबुलेंसों की खरीद के बाद आने वाले कुछ महीनों में 108 एंबुलेंस सेवा पहले से कहीं अधिक बेहतर और प्रभावी हो जाएगी।

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धनबाद के स्कूल हॉस्टल में छात्र से बेरहमी, बेल्ट से पिटाई का वीडियो वायरल

धनबाद। धनबाद जिले के निरसा स्थित एक स्कूल के हॉस्टल में 10वीं कक्षा के एक छात्र के साथ कथित तौर पर हुई बेरहमी से मारपीट का मामला सामने आया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है। आरोप है कि 16 वर्षीय छात्र के साथ उसके ही कुछ सीनियर सहपाठियों ने हॉस्टल के कमरे में मारपीट की और घटना का वीडियो भी बनाया।   जानकारी के अनुसार जानकारी के अनुसार, मंगलवार देर रात मोबाइल के जरिए पैसे ट्रांसफर करने को लेकर छात्रों के बीच विवाद हुआ। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर सीनियर छात्रों ने रात करीब दो बजे पीड़ित के हाथ रस्सी से बांध दिए और बेल्ट से उसकी पिटाई की। वायरल वीडियो में छात्र के साथ अभद्र व्यवहार और गाली-गलौज किए जाने का भी आरोप है। साथ ही, घटना की जानकारी किसी को नहीं देने के लिए उसे धमकाते हुए भी दिखाया गया है।   घटना के बाद घटना के बाद छात्र भय के कारण दो दिनों तक चुप रहा। उसने स्कूल की नर्स से दवा लेकर अपना इलाज कराया और परिजनों को भी शुरुआत में अपनी स्थिति सामान्य बताई। हालांकि, तबीयत बिगड़ने पर उसने परिवार को पूरी घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही छात्र के परिजन स्कूल पहुंचे और मामले से स्कूल प्रबंधन को अवगत कराया। इसके बाद घायल छात्र को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।   पीड़ित छात्र गोविंदपुर थाना क्षेत्र का रहने वाला है। उसके पिता ने दोषी छात्रों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं पर सख्त कदम उठाना जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी अन्य छात्र के साथ ऐसी घटना न हो।   विद्यालय के प्रबंधक सी.के. यादव ने बताया विद्यालय के प्रबंधक सी.के. यादव ने बताया कि हॉस्टल में मारपीट की घटना की जानकारी मिली है। मामले की जांच के लिए एक कमेटी गठित की गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी पाए जाने वाले छात्रों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, घटना के सामने आने के बाद स्कूल हॉस्टलों में छात्रों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।

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झारखंड में भारी बारिश का अलर्ट, रांची समेत 10 जिलों के लिए येलो चेतावनी जारी

रांची। बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र का असर अब झारखंड में साफ दिखाई देने लगा है। मौसम विज्ञान केंद्र ने राज्य के कई जिलों में अगले दो दिनों तक भारी बारिश, वज्रपात और तेज हवाओं की संभावना जताते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विशेष रूप से 18 जुलाई के लिए रांची सहित 10 जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है।   इन जिलों में भारी बारिश की संभावना मौसम विभाग के अनुसार 17 जुलाई को खूंटी, गुमला, सिमडेगा, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां में भारी बारिश और वज्रपात की आशंका है। वहीं 18 जुलाई को रांची, लातेहार, चतरा, गुमला, खूंटी, रामगढ़, हजारीबाग, कोडरमा, बोकारो और लोहरदगा में तेज बारिश के साथ वज्रपात हो सकता है। विभाग ने इन जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी करते हुए लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे जाने से बचने की अपील की है।   वज्रपात से दो लोगों की मौत गुरुवार को राज्य के कई हिस्सों में बारिश दर्ज की गई। सबसे अधिक 42 मिमी वर्षा सिमडेगा में रिकॉर्ड की गई, जबकि मेदिनीनगर, जमशेदपुर, रामगढ़ और लोहरदगा में भी बारिश हुई। इसी दौरान लातेहार जिले में वज्रपात की चपेट में आने से दो युवकों की मौत हो गई, जिससे मौसम विभाग की चेतावनी की गंभीरता और बढ़ गई है।   20 जुलाई तक मौसम रहेगा सक्रिय मौसम विज्ञान केंद्र का अनुमान है कि 20 जुलाई तक राज्य के विभिन्न हिस्सों में बादल छाए रहेंगे तथा गरज-चमक, वज्रपात और तेज हवाओं के साथ रुक-रुककर बारिश होती रहेगी। गुरुवार को रांची का अधिकतम तापमान 31.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।   हालांकि मानसून सक्रिय होने के बावजूद झारखंड में अब तक सामान्य से कम वर्षा हुई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 16 जुलाई तक राज्य में सामान्य 348.9 मिमी वर्षा के मुकाबले केवल 207.1 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य से 41 प्रतिशत कम है। ऐसे में आगामी दिनों की बारिश कृषि और जल संसाधनों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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anjali kumari जुलाई 13, 2026 0

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