बोकारो। झारखंड के बोकारो जिले के गोमिया प्रखंड से रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है। तिलैया पंचायत के कारीपानी गांव में एक युवक ने शराब के नशे में अपने ही पिता की टांगी से हमला कर हत्या कर दी। घटना शुक्रवार देर रात की है। वारदात के बाद पूरे गांव में सनसनी फैल गई, जबकि पुलिस ने आरोपी बेटे को गिरफ्तार कर हत्या में प्रयुक्त टांगी भी बरामद कर ली है।
जानकारी के अनुसार, 30 वर्षीय अर्जुन करमाली अपने मामा के घर आयोजित एक कार्यक्रम से देर रात नशे की हालत में घर लौटा था। उसकी शराब पीने की आदत से परेशान पिता जयलाल करमाली (63) ने उसे समझाते हुए फटकार लगाई। उन्होंने बेटे से कहा कि उसकी शराब की लत के कारण परिवार में हमेशा तनाव बना रहता है और उसकी पत्नी भी मारपीट से तंग आकर मायके चली गई है।
पिता की बात सुनकर अर्जुन गुस्से में आपा खो बैठा। दोनों के बीच कहासुनी बढ़ी और आवेश में आकर उसने घर में रखी टांगी उठाकर पिता के सिर पर हमला कर दिया। गंभीर चोट लगने से जयलाल करमाली की मौके पर ही मौत हो गई।
घटना के बाद ग्रामीणों ने आरोपी को भागने नहीं दिया। उसे पकड़कर घर में ही बांध दिया गया और पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही जगेश्वर बिहार थाना पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है तथा हत्या में प्रयुक्त टांगी भी जब्त कर ली है।
थाना प्रभारी प्रकाश यादव ने बताया कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है और मामले की हर पहलू से जांच जारी है।
शनिवार सुबह तिलैया पंचायत की मुखिया चिंता देवी घटनास्थल पहुंचीं और घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नशे की बढ़ती प्रवृत्ति परिवार और समाज दोनों के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। उन्होंने लोगों से नशे से दूर रहने और सामाजिक जागरूकता बढ़ाने की अपील की। इस घटना ने एक बार फिर शराब की लत से उत्पन्न सामाजिक और पारिवारिक समस्याओं को उजागर कर दिया है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रांची। झारखंड की राजधानी रांची में बिजली बिलिंग व्यवस्था की गंभीर खामियां सामने आई हैं। बिजली उपभोक्ता लगातार गलत बिल, बिल नहीं मिलने और शिकायतों के समाधान में देरी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) ने शिकायतों के लिए केंद्रीयकृत कॉल सेंटर की व्यवस्था की है, लेकिन उपभोक्ताओं का कहना है कि शिकायत दर्ज होने के बावजूद समाधान समय पर नहीं हो रहा है। निगम की हालिया रिपोर्ट में भी सबसे अधिक शिकायतें बिजली बिल से जुड़ी दर्ज की गई हैं। रिपोर्ट में सामने आईं सबसे ज्यादा बिल संबंधी शिकायतें निगम की कैंप रिपोर्ट के अनुसार कुल 1,616 शिकायतों में से 191 शिकायतें बिल नहीं मिलने, 416 बिल सुधार और 559 शिकायतें मोबाइल नंबर बिल से लिंक नहीं होने की थीं। कई मामलों में उपभोक्ताओं ने फोरम और अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद महीनों तक कोई कार्रवाई नहीं होने की बात कही है। सरेंडर मीटर पर लगातार भेजे जा रहे बिल रांची के एक उपभोक्ता ने मीटर सरेंडर करने के बाद भी हर महीने बिजली बिल मिलने की शिकायत की है। उपभोक्ता का कहना है कि सुरक्षा जमा राशि उपलब्ध होने के बावजूद अंतिम समायोजन नहीं किया गया और बार-बार अधिकारियों को आवेदन देने के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है। चालू कनेक्शन का महीनों से नहीं आया बिल वहीं, मोरहाबादी के एक सेवानिवृत्त प्रोफेसर फरवरी 2025 से बिजली बिल नहीं मिलने से परेशान हैं। उनका कहना है कि वे नियमित भुगतान करना चाहते हैं, ताकि एकमुश्त भारी बिल का बोझ न पड़े। कई बार शिकायत दर्ज कराने और अधिकारियों से मिलने के बावजूद उन्हें अब तक कोई समाधान नहीं मिला है। राजस्व लक्ष्य के बीच एजेंसियों पर सवाल रांची के छह डिवीजनों में बिजली निगम ने 400 करोड़ रुपये से अधिक राजस्व संग्रह का लक्ष्य रखा है। करीब 3.5 लाख स्मार्ट मीटरों के माध्यम से हर महीने 80 से 90 करोड़ रुपये की वसूली का लक्ष्य तय किया गया है। बावजूद इसके, बिलिंग एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। निगम ने एजेंसियों को घर-घर जाकर सही बिल उपलब्ध कराने और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन उपभोक्ताओं का कहना है कि जमीनी स्तर पर स्थिति में अब तक अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है।
रांची। झारखंड भाजपा ने 30 जून को मनाए जाने वाले हूल दिवस को भव्य और व्यापक रूप से आयोजित करने की तैयारी शुरू कर दी है। इस उद्देश्य से प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने नौ सदस्यीय आयोजन समिति का गठन किया है। समिति संथाल परगना के भोगनाडीह स्थित अमर शहीद स्थल पर होने वाले मुख्य कार्यक्रम की तैयारियों की जिम्मेदारी संभालेगी। पार्टी का उद्देश्य हूल क्रांति के महानायकों को श्रद्धांजलि देने के साथ उनके योगदान को जन-जन तक पहुंचाना है। हूल दिवस का ऐतिहासिक महत्व प्रदेश महामंत्री अमर कुमार बाउरी ने बताया कि 30 जून झारखंड और विशेषकर संथाल परगना के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है। वर्ष 1855 में इसी दिन अमर शहीद सिदो-कान्हू के नेतृत्व में अंग्रेजी शासन के खिलाफ हूल क्रांति का बिगुल फूंका गया था। इस आंदोलन में चांद-भैरव और वीरांगना फूलो-झानो ने भी अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि शोषण और दमन के खिलाफ आदिवासी समाज का यह संघर्ष भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के शुरुआती और ऐतिहासिक अध्यायों में शामिल है। भोगनाडीह में जुटेंगे भाजपा के नेता और कार्यकर्ता भाजपा के अनुसार, हूल दिवस के अवसर पर राज्यभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मुख्य आयोजन भोगनाडीह स्थित अमर शहीद स्थल पर होगा, जहां संथाल परगना सहित झारखंड के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में पार्टी के नेता, कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि शामिल होंगे। कार्यक्रम के माध्यम से हूल क्रांति के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। इन नेताओं को मिली आयोजन की जिम्मेदारी भाजपा द्वारा गठित नौ सदस्यीय आयोजन समिति में पूर्व विधायक लोबिन हेम्ब्रम, पूर्व सांसद सुनील सोरेन, अमर शहीद परिवार के वंशज मंडल मुर्मू, पूर्व प्रदेश मंत्री दुर्गा मरांडी, वरिष्ठ नेता गणेश तिवारी, साहिबगंज जिला अध्यक्ष गौतम यादव, पाकुड़ जिला अध्यक्ष सरिता मुर्मू, महिला मोर्चा की प्रदेश मंत्री अनिता सोरेन और अनुसूचित जनजाति मोर्चा की प्रदेश मंत्री अनिता मुर्मू को शामिल किया गया है। महानायकों के सम्मान का संदेश भाजपा का कहना है कि हूल दिवस का आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि झारखंड के वीर स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष, बलिदान और आदिवासी गौरव को सम्मान देने का अवसर है। पार्टी ने इसे ऐतिहासिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की महत्वपूर्ण पहल बताया है।
रांची। रांची में गैंगस्टर प्रिंस खान के नाम पर कारोबारियों से रंगदारी मांगने का सिलसिला लगातार जारी है। ताजा मामला हटिया के चांदनी चौक स्थित एक शराब दुकान के संचालक उमाशंकर सिंह से जुड़ा है। उन्हें व्हाट्सएप कॉल, मैसेज और ऑडियो संदेश के जरिए पांच करोड़ रुपये की रंगदारी देने की धमकी दी गई है। रंगदारी नहीं देने पर कारोबारी और उनके परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी गई है। परिवार को जान से मारने की धमकी शिकायत के अनुसार, धमकी देने वाले ने खुद को गैंगस्टर प्रिंस खान बताया और कारोबारी की निजी जानकारी भी साझा की। संदेश में उनकी गाड़ी का नंबर, कारोबार की जगह और मंदिर जाने के समय का जिक्र किया गया। साथ ही उनकी पत्नी, दोनों बेटों और भतीजे की हत्या कराने की धमकी दी गई। धमकी मिलने के बाद कारोबारी ने जगन्नाथपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है। दुबई नंबर से आया कॉल पुलिस के अनुसार, धमकी दुबई के मोबाइल नंबर (+971545920432) से दी गई। हटिया डीएसपी नीरज कुमार ने बताया कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और तकनीकी टीम की मदद से कॉल और मैसेज की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि धमकी वास्तव में विदेश से दी गई है या इंटरनेट कॉलिंग के जरिए किसी अन्य स्थान से। एक जैसा है धमकी देने का तरीका पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि हाल के दिनों में कारोबारियों को धमकी देने का तरीका लगभग एक जैसा है। पहले देर रात करीब 12 बजे व्हाट्सएप पर धमकी भरा संदेश भेजा जाता है। इसके बाद ऑडियो मैसेज और फिर व्हाट्सएप कॉल कर रंगदारी की मांग की जाती है। कॉल करने वाला हर बार खुद को प्रिंस खान बताता है और इसी दुबई नंबर का इस्तेमाल करता है। क्या है मामला ? गौरतलब है कि इससे पहले 8 जून को रांची के पॉल ज्वेलर्स के संचालक सुमन पॉल से भी इसी नंबर से पांच करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी गई थी। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने राजधानी के कारोबारी वर्ग में चिंता बढ़ा दी है। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की तकनीकी और साइबर स्तर पर जांच जारी है तथा दोषियों की पहचान कर जल्द कार्रवाई की जाएगी।