झारखंड

देवघर में आस्था का सैलाब, दूसरी सोमवारी पर 20 किमी लंबी कांवरियों की कतार

anjali kumari अगस्त 10, 2026 0
Second Sawan Monday
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देवघर। सावन की दूसरी सोमवारी पर देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। बाबा भोलेनाथ के दर्शन और जलार्पण के लिए रविवार देर रात से ही कांवरियों की कतार लगनी शुरू हो गई थी। सोमवार सुबह तक मुख्य अर्घा की कतार मंदिर से करीब 20 किलोमीटर दूर कुमैठा स्टेडियम तक पहुंच गई।

 

वहीं, बाय अर्घा से जलार्पण करने वाले श्रद्धालुओं की कतार सरदार पंडा लाइन, शिवगंगा लेन और वीआईपी गेट के सामने तक फैली रही। प्रशासनिक अनुमान के अनुसार इस कतार में करीब 70 से 80 हजार श्रद्धालु शामिल रहे।

 

सुबह 3:05 बजे खुला मंदिर का पट

 

सावन की दूसरी सोमवारी पर बाबा बैद्यनाथ मंदिर का पट सुबह 3:05 बजे खोला गया। पट खुलने के बाद सबसे पहले पुरोहित समाज की ओर से बाबा भोलेनाथ की कच्चा जल पूजा की गई। करीब 15 मिनट तक चली इस विशेष पूजा में बाबा पर जल अर्पित कर विश्व कल्याण की कामना की गई। इसके बाद आम श्रद्धालुओं के लिए जलार्पण की तैयारी शुरू हुई।

 

सरदार पंडा ने की विशेष पूजा-अर्चना

 

कच्चा जल पूजा के बाद मंदिर के महंत सरदार पंडा श्री श्री गुलाब नंद ओझा ने विधि-विधान से बाबा बैद्यनाथ की विशेष पूजा की। इस दौरान बाबा को दूध, दही, घी और मधु समेत विभिन्न पूजन सामग्री अर्पित की गई।

पूजा के दौरान विश्व शांति और लोक कल्याण की कामना की गई।

 

4:10 बजे से आम श्रद्धालुओं का जलार्पण

 

विशेष पूजा संपन्न होने के बाद सुबह 4:10 बजे आम श्रद्धालुओं के लिए जलार्पण शुरू किया गया। दूसरी सोमवारी को उमड़ी भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर और जिला प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए।

कांवरिया रूट पर सुरक्षा बलों की तैनाती की गई और श्रद्धालुओं की आवाजाही पर लगातार निगरानी रखी गई। प्रशासन की कोशिश रही कि लंबी कतार के बावजूद श्रद्धालुओं को व्यवस्थित तरीके से बाबा बैद्यनाथ का जलार्पण कराया जा सके।

 

दूसरी सोमवारी पर देवघर में उमड़ी भीड़ ने एक बार फिर श्रावणी मेले में बाबा बैद्यनाथ के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था और भक्ति का अद्भुत नजारा पेश किया।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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देवघर में आस्था का सैलाब, दूसरी सोमवारी पर 20 किमी लंबी कांवरियों की कतार

देवघर। सावन की दूसरी सोमवारी पर देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। बाबा भोलेनाथ के दर्शन और जलार्पण के लिए रविवार देर रात से ही कांवरियों की कतार लगनी शुरू हो गई थी। सोमवार सुबह तक मुख्य अर्घा की कतार मंदिर से करीब 20 किलोमीटर दूर कुमैठा स्टेडियम तक पहुंच गई।   वहीं, बाय अर्घा से जलार्पण करने वाले श्रद्धालुओं की कतार सरदार पंडा लाइन, शिवगंगा लेन और वीआईपी गेट के सामने तक फैली रही। प्रशासनिक अनुमान के अनुसार इस कतार में करीब 70 से 80 हजार श्रद्धालु शामिल रहे।   सुबह 3:05 बजे खुला मंदिर का पट   सावन की दूसरी सोमवारी पर बाबा बैद्यनाथ मंदिर का पट सुबह 3:05 बजे खोला गया। पट खुलने के बाद सबसे पहले पुरोहित समाज की ओर से बाबा भोलेनाथ की कच्चा जल पूजा की गई। करीब 15 मिनट तक चली इस विशेष पूजा में बाबा पर जल अर्पित कर विश्व कल्याण की कामना की गई। इसके बाद आम श्रद्धालुओं के लिए जलार्पण की तैयारी शुरू हुई।   सरदार पंडा ने की विशेष पूजा-अर्चना   कच्चा जल पूजा के बाद मंदिर के महंत सरदार पंडा श्री श्री गुलाब नंद ओझा ने विधि-विधान से बाबा बैद्यनाथ की विशेष पूजा की। इस दौरान बाबा को दूध, दही, घी और मधु समेत विभिन्न पूजन सामग्री अर्पित की गई। पूजा के दौरान विश्व शांति और लोक कल्याण की कामना की गई।   4:10 बजे से आम श्रद्धालुओं का जलार्पण   विशेष पूजा संपन्न होने के बाद सुबह 4:10 बजे आम श्रद्धालुओं के लिए जलार्पण शुरू किया गया। दूसरी सोमवारी को उमड़ी भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर और जिला प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। कांवरिया रूट पर सुरक्षा बलों की तैनाती की गई और श्रद्धालुओं की आवाजाही पर लगातार निगरानी रखी गई। प्रशासन की कोशिश रही कि लंबी कतार के बावजूद श्रद्धालुओं को व्यवस्थित तरीके से बाबा बैद्यनाथ का जलार्पण कराया जा सके।   दूसरी सोमवारी पर देवघर में उमड़ी भीड़ ने एक बार फिर श्रावणी मेले में बाबा बैद्यनाथ के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था और भक्ति का अद्भुत नजारा पेश किया।

anjali kumari अगस्त 10, 2026 0
JPSC-JSSC protestors gathered near barricades during the Assembly gherao in Ranchi

JPSC-JSSC विधानसभा घेराव: चौथे बैरिकेड तक पहुंचे छात्र, देवेंद्र महतो भी आंदोलन में शामिल; BJP नेता हिरासत में

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CM आवास घेरने पहुंचे BJP नेता और कार्यकर्ता, पुलिस से झड़प; बाबूलाल समेत कई नेता हिरासत में

रांची: झारखंड में जारी छात्र आंदोलन के बीच भाजपा ने मुख्यमंत्री आवास का घेराव कर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में भाजपा विधायक और सैकड़ों कार्यकर्ता मुख्यमंत्री आवास के बाहर पहुंचे और प्रदर्शन शुरू कर दिया. प्रदर्शन को देखते हुए मुख्यमंत्री आवास के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गयी थी. बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गयी. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की, लेकिन भाजपा कार्यकर्ता पीछे हटने को तैयार नहीं हुए. इस दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच नोकझोंक और हल्की झड़प भी हुई. बाबूलाल मरांडी समेत कई नेता हिरासत में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे भाजपा नेताओं, विधायकों और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेना शुरू किया. आदित्य साहू और बाबूलाल मरांडी समेत कई नेताओं को हिरासत में लेकर खेलगांव ले जाया गया. भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार छात्रों की मांगों को गंभीरता से नहीं ले रही है. प्रदर्शन के दौरान भाजपा नेताओं ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग भी की. बाबूलाल बोले- मुख्यमंत्री तत्काल इस्तीफा दें नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि छात्रों के मुद्दे पर सरकार पूरी तरह विफल रही है. उन्होंने मुख्यमंत्री से तत्काल इस्तीफा देने की मांग की. वहीं, पूर्व राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश ने भी सरकार पर हमला बोला और आरोप लगाया कि छात्रों की मांगों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है. छात्र आंदोलन के बीच राजधानी में सुरक्षा कड़ी गौरतलब है कि JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के विरोध में छात्रों का आंदोलन लगातार तेज हो रहा है. आज विधानसभा घेराव का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है. इसे देखते हुए रांची के कई इलाकों में बैरिकेडिंग कर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है. मुख्यमंत्री आवास के घेराव की सूचना के बाद सुरक्षा और बढ़ा दी गयी. पुलिस अधिकारी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं. खेलगांव में डिटेन किए गए भाजपा नेता पुलिस ने हिरासत में लिए गए भाजपा विधायकों और नेताओं को खेलगांव पहुंचाया. वहां सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गयी. भाजपा कार्यकर्ताओं की भीड़ भी मौके पर जुटी रही. फिलहाल मुख्यमंत्री आवास और आसपास के इलाकों में पुलिस की तैनाती जारी है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन अलर्ट है.  

kalpana अगस्त 10, 2026 0
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बोल बम के जयघोष से गूंजा बाबाधाम, दूसरी सोमवारी पर केसरिया सैलाब में डूबा देवघर

देवघर बाबा बैद्यनाथ धाम में दूसरी सोमवारी पर जलाभिषेक करते श्रद्धालु
श्रावणी मेले की दूसरी सोमवारी पर देवघर में उमड़ा आस्था का सैलाब, 4 लाख भक्तों के पहुंचने का अनुमान

देवघर। सावन की दूसरी सोमवारी पर बाबा बैद्यनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। रविवार देर रात से ही कांवरियों और श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगनी शुरू हो गई थी। सोमवार सुबह बाबा बैद्यनाथ मंदिर का पट सुबह 4 बजे ही खोल दिया गया, जिसके बाद भक्तों ने बाबा का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना शुरू की। पूरा मंदिर परिसर और रूट लाइन ‘बोल बम’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंज उठा।   सुबह 7 बजे तक करीब एक लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान     श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने पहले से ही व्यापक तैयारियां की थीं। अनुमान के मुताबिक सुबह 7 बजे तक करीब एक लाख भक्त बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक और दर्शन कर चुके थे। देर शाम तक श्रद्धालुओं की संख्या चार लाख के पार पहुंचने का अनुमान है।   पहली सोमवारी की तुलना में इस बार करीब एक लाख अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई गई है। बिहार और सुल्तानगंज की ओर से आने वाले कांवरियों की संख्या को देखते हुए प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं।   रूट लाइन में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम     भक्तों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए रूट लाइन में जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई है। बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है। प्रशासन की कोशिश है कि श्रद्धालुओं को बिना परेशानी के मंदिर तक पहुंचाया जाए और जलाभिषेक की प्रक्रिया सुचारू रूप से जारी रहे।   देवघर के उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया, पुलिस अधीक्षक, एसडीएम और नगर आयुक्त समेत कई वरिष्ठ अधिकारी सुबह से ही मौके पर मौजूद रहे। अधिकारियों ने मंदिर परिसर और रूट लाइन का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।   भीड़ के बावजूद भक्तों में उत्साह बरकरार     बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करने पहुंचे श्रद्धालुओं का कहना है कि भीड़ काफी ज्यादा है और कुछ परेशानियां भी हो रही हैं, लेकिन बाबा के दर्शन और जलाभिषेक को लेकर उत्साह कम नहीं हुआ है। श्रद्धालु लगातार ‘बोल बम’ के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे हैं।     दूसरी सोमवारी का धार्मिक महत्व     मंदिर के वरिष्ठ पुरोहित लम्बोदर परिहस्त के अनुसार सावन की दूसरी सोमवारी को पूजा और जलाभिषेक का विशेष महत्व है। उन्होंने बताया कि सुबह और शाम का समय भगवान शिव की आराधना के लिए शुभ माना जाता है। इस बार सोमवारी के साथ प्रदोष काल का संयोग भी बन रहा है।   धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन सोमवार को विधि-विधान से भगवान शिव का पूजन और जलाभिषेक करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है। इसी आस्था के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ के दरबार में पहुंच रहे हैं।

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