झारखंड के Dhanbad में बढ़ते वायु प्रदूषण और अवैध कोयला खनन को लेकर Jharkhand High Court ने कड़ा रुख अपनाया है। गुरुवार को इस मामले में दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने धनबाद के उपायुक्त, एसएसपी, नगर आयुक्त और झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव को तलब किया है। सभी अधिकारियों को 2 अप्रैल को अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।
मामले की सुनवाई M. S. Sonak और Rajesh Shankar की खंडपीठ में हुई। अदालत ने कहा कि धनबाद में वायु गुणवत्ता का स्तर बेहद खराब हो चुका है और अवैध खनन तथा कोयले के परिवहन के कारण प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है, जो गंभीर चिंता का विषय है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि अवैध खनन रोकने के लिए पुलिस की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जा रही है। जबकि Bharat Coking Coal Limited की ओर से इस संबंध में कई प्राथमिकी दर्ज कराई जा चुकी हैं।
कोर्ट ने BCCL के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) को भी अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है, ताकि वे इस समस्या के समाधान के लिए ठोस सुझाव दे सकें।
अदालत ने कहा कि कोल डस्ट के कारण धनबाद में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे लोगों को सांस संबंधी बीमारियों समेत कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
BCCL की ओर से अधिवक्ता Amit Kumar Das ने अदालत को बताया कि बंद पड़ी खुली खदानों को भरकर वहां पार्क विकसित किए जा रहे हैं। साथ ही अवैध खनन रोकने के लिए कई प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई हैं।
हालांकि BCCL की ओर से यह भी कहा गया कि अवैध खनन रोकने के मामलों में पुलिस की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है।
धनबाद में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर Gramin Ekta Manch की ओर से जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिका में कहा गया है कि शहर में प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसे रोकने के लिए प्रशासन और नगर निगम की ओर से पर्याप्त कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 2 अप्रैल को होगी, जिसमें संबंधित अधिकारियों को अदालत में अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रांची। झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन लगातार चर्चा में बना हुआ है। अब बॉलीवुड अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा भी प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में सामने आई हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर छात्रों के प्रदर्शन से जुड़ी पोस्ट साझा करते हुए उनकी स्थिति पर चिंता जताई और सवाल किया कि ‘यह सब कब रुकेगा?’ छात्रों के समर्थन में सोनाक्षी की पोस्ट सोनाक्षी सिन्हा ने सोशल मीडिया पर झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन से जुड़ी सामग्री साझा की। उन्होंने छात्रों की परेशानी और लगातार विरोध प्रदर्शन को लेकर दुख जताया। अभिनेत्री का यह पोस्ट सामने आने के बाद झारखंड के छात्र आंदोलन को लेकर चर्चा और तेज हो गई है। सोनाक्षी का समर्थन ऐसे समय आया है जब JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक जैसे आरोपों को लेकर छात्र निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। 29 जुलाई से धरने पर बैठे हैं छात्र रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शनकारी छात्र 29 जुलाई से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। छात्रों की प्रमुख मांगों में कथित परीक्षा अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच और भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना शामिल है। रिपोर्टों के मुताबिक आंदोलन में बड़ी संख्या में छात्र शामिल हैं और प्रदर्शन लगातार जारी है। छात्रों का कहना है कि सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जानी चाहिए। आंदोलन को मिल रहा सेलिब्रिटी समर्थन सोनाक्षी सिन्हा के समर्थन के बाद छात्र आंदोलन को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा बढ़ गई है। अभिनेत्री पहले भी छात्रों से जुड़े मुद्दों पर सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया देती रही हैं। हालांकि, सोनाक्षी ने किसी राजनीतिक दल का समर्थन करने के बजाय प्रदर्शन कर रहे छात्रों की स्थिति और उनकी मांगों को लेकर चिंता व्यक्त की है। उनके पोस्ट के बाद अब इस आंदोलन पर सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।
झारखंड में आसमानी आफत, वज्रपात से 15 लोगों की मौत; कई घायल, भारी बारिश का अलर्ट रांची। झारखंड में भारी बारिश के बीच वज्रपात ने मंगलवार को जमकर कहर बरपाया। राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बिजली गिरने की घटनाओं में कम से कम 15 लोगों की मौत हुई है, जिनमें चार बच्चे भी शामिल हैं। कई लोगों के झुलसने की भी सूचना है। गिरिडीह में सबसे ज्यादा तबाही वज्रपात की घटनाओं में गिरिडीह जिला सबसे ज्यादा प्रभावित रहा। देवरी क्षेत्र में फुटबॉल खेल रहे चार किशोरों समेत पांच लोगों की मौत की खबर है। जिले में अलग-अलग स्थानों पर वज्रपात से कुल नौ लोगों की जान जाने की रिपोर्ट सामने आई है. एक अन्य घटना में कुछ लोग बारिश के दौरान मोबाइल पर गेम खेल रहे थे, तभी बिजली गिरने से उनकी मौत हो गई। इन घटनाओं के बाद स्थानीय इलाकों में शोक का माहौल है। दुमका समेत कई जिलों में भी मौतें गिरिडीह के अलावा दुमका में भी वज्रपात से तीन लोगों की मौत की सूचना है। यहां धान की रोपाई के दौरान बिजली गिरने से हादसा हुआ। अलग-अलग जिलों में खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों पर मौजूद लोगों के वज्रपात की चपेट में आने की घटनाएं सामने आई हैं। लगातार बारिश और गरज-चमक के बीच प्रशासन ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। आज भी खराब मौसम की आशंका झारखंड में मौसम का मिजाज अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुआ है। भारी बारिश और वज्रपात की आशंका को देखते हुए लोगों को खुले मैदान, पेड़ के नीचे और बिजली के खंभों के आसपास जाने से बचने की सलाह दी गई है। मौसम खराब होने के दौरान घर के अंदर सुरक्षित रहने और प्रशासन की ओर से जारी स्थानीय चेतावनियों का पालन करने की अपील की गई है। खराब मौसम के बीच वज्रपात से मौतों का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
बोकारो में ट्रिपल मर्डर से सनसनी, बुजुर्ग दंपती समेत तीन लोगों की हत्या की जांच तेज बोकारो। झारखंड के बोकारो जिले में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत से सनसनी फैल गई। मृतकों में बुजुर्ग दंपती समेत तीन लोग शामिल बताए जा रहे हैं। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य जुटाए हैं और मौत के कारणों की पड़ताल की जा रही है। तीन लोगों की मौत से मचा हड़कंप घटना सामने आने के बाद इलाके में लोगों की भीड़ जुट गई। मृतकों में बुजुर्ग दंपती के अलावा एक अन्य व्यक्ति के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजने की कार्रवाई शुरू की। घटना के पीछे की वजह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है। पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। घटनास्थल पर पहुंची पुलिस टीम सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस के अधिकारी और जांच टीम मौके पर पहुंची। घटनास्थल की बारीकी से जांच की गई और वहां से महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए गए। पुलिस आसपास के लोगों और मृतकों के परिचितों से भी पूछताछ कर रही है। घटना से पहले परिवार के सदस्यों की गतिविधियों और उनके संपर्क में रहे लोगों की जानकारी भी जुटाई जा रही है। हत्या की आशंका की जांच तीनों की मौत को लेकर हत्या की आशंका से भी जांच की जा रही है। हालांकि, पुलिस की अंतिम जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट होगी। जांच एजेंसियां घटनास्थल के साक्ष्यों के साथ-साथ तकनीकी और फोरेंसिक साक्ष्यों की भी पड़ताल कर सकती हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना कब और किन परिस्थितियों में हुई। पुलिस जांच के बाद खुलेगा राज फिलहाल बोकारो पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत के बाद इलाके में तनाव और चिंता का माहौल है। पुलिस ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और जांच में सहयोग करने की अपील की है।