रांची। बिना स्वीकृत नक्शे के बने भवनों को वैध कराने के लिए झारखंड सरकार द्वारा शुरू की गई भवन नियमितीकरण योजना अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। योजना के तहत आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 26 जून 2026 निर्धारित की गई है। इसके बाद नए आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे और प्राप्त आवेदनों की तकनीकी जांच तथा नक्शा स्वीकृति की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
रांची नगर निगम और रांची क्षेत्रीय विकास प्राधिकार (आरआरडीए) क्षेत्र में योजना लागू होने के करीब 56 दिन बाद भी अपेक्षाकृत कम आवेदन प्राप्त हुए हैं। अब तक कुल 837 आवेदन जमा किए गए हैं, जिनमें 702 आवेदन नगर निगम क्षेत्र और 135 आवेदन आरआरडीए क्षेत्र से हैं। जबकि अनुमान है कि शहर में बड़ी संख्या में ऐसे भवन मौजूद हैं, जिनका नक्शा स्वीकृत नहीं है।
नगर विकास विभाग के अनुसार फिलहाल केवल ऑनलाइन आवेदन लिए जा रहे हैं। अभी आवेदनकर्ताओं के लिए शुल्क जनरेट नहीं किया जा रहा है। अंतिम तिथि समाप्त होने के बाद सभी आवेदनों की जांच की जाएगी और पात्र भवनों के नक्शे स्वीकृत किए जाएंगे। इसके बाद भवन मालिकों को ऑनलाइन शुल्क जमा करना होगा।
योजना के तहत आवासीय भवनों के लिए 10 हजार रुपये और व्यावसायिक भवनों के लिए 20 हजार रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। इसके अलावा भवन के क्षेत्रफल और अन्य तकनीकी मानकों के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
अधिकारियों का मानना है कि योजना की कुछ शर्तों के कारण लोग आवेदन करने से हिचक रहे हैं। योजना में 300 वर्गमीटर तक के भूखंड पर बने जी प्लस टू भवनों को शामिल किया गया है। वहीं सड़क चौड़ीकरण, सेटबैक और मास्टर प्लान से जुड़ी शर्तों को लेकर भी लोगों में संशय बना हुआ है।
नगर विकास विभाग ने भवन मालिकों से अपील की है कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन कर योजना का लाभ उठाएं, ताकि भविष्य में किसी कानूनी या प्रशासनिक कार्रवाई का सामना न करना पड़े।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रांची। झारखंड में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग ने 9 और 10 अगस्त को राज्य के कई जिलों में भारी बारिश और वज्रपात की चेतावनी जारी की है। रांची, खूंटी, गुमला, सिमडेगा, लोहरदगा, पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, रामगढ़, बोकारो, धनबाद और हजारीबाग समेत कई जिलों में मौसम खराब रहने की संभावना जताई गई है। इस दौरान कुछ इलाकों में तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और आकाशीय बिजली गिरने का खतरा भी बना रहेगा। कई जिलों में तेज बारिश की संभावना मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक 9 और 10 अगस्त को झारखंड के अलग-अलग हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। खासकर दक्षिणी और मध्य झारखंड के जिलों में कई स्थानों पर तेज बारिश होने की संभावना है। रांची, खूंटी, गुमला, सिमडेगा और पश्चिमी सिंहभूम के साथ आसपास के इलाकों में भी बारिश का असर देखने को मिल सकता है। लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में जलजमाव की स्थिति पैदा हो सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों और कच्ची सड़कों पर भी इसका असर पड़ने की आशंका है। वज्रपात को लेकर विशेष सतर्कता बारिश के साथ वज्रपात का खतरा भी बना हुआ है। मौसम खराब होने के दौरान लोगों को खुले मैदान, खेत, तालाब और नदी के आसपास जाने से बचने की सलाह दी गई है। पेड़, बिजली के खंभे या अन्य खुले स्थानों के नीचे खड़े होने से भी बचना चाहिए। आकाश में गरज-चमक शुरू होने पर लोगों को सुरक्षित पक्के भवन के अंदर रहने की सलाह दी गई है। विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों और किसानों को मौसम विभाग के अलर्ट का पालन करने को कहा गया है। किसानों और आम लोगों को सावधानी बरतने की सलाह बारिश और वज्रपात की आशंका को देखते हुए किसानों को खराब मौसम के दौरान खेतों में काम करने से बचने की सलाह दी गई है। बिजली चमकने और गरजने की स्थिति में खेत में मौजूद लोग जल्द से जल्द सुरक्षित स्थान पर पहुंचें। लगातार बारिश वाले इलाकों में जलजमाव और फिसलन की समस्या को देखते हुए वाहन चालकों को भी सावधानी बरतने की जरूरत है। प्रशासन की ओर से जारी स्थानीय चेतावनियों और मौसम विभाग के ताजा अपडेट पर नजर रखने की अपील की गई है। मौसम तेजी से बदलने की संभावना मौसम विभाग के अनुसार मानसूनी गतिविधियों के कारण झारखंड में स्थानीय स्तर पर मौसम तेजी से बदल सकता है। किसी जिले में कम समय में तेज बारिश और वज्रपात की स्थिति बन सकती है। ऐसे में लोगों को मौसम संबंधी चेतावनी को नजरअंदाज नहीं करने और जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलने की सलाह दी गई है।
रांची। झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित धांधली और अनियमितताओं के विरोध में चल रहा छात्र आंदोलन 16वें दिन भी जारी है। आंदोलन को समाप्त कराने और छात्रों की मांगों पर सहमति बनाने के लिए राज्य सरकार और छात्र संगठनों के बीच आज दोपहर 12 बजे नए दौर की वार्ता बुलाई गई है। 16वें दिन भी जारी है छात्रों का आंदोलन छात्र संगठन JPSC और JSSC की विभिन्न परीक्षाओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। लगातार आंदोलन के कारण राज्य में भर्ती परीक्षाओं को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी दबाव बढ़ा है। दोपहर 12 बजे होगी वार्ता राज्य सरकार की ओर से छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत का नया दौर दोपहर 12 बजे आयोजित किया गया है। इससे पहले भी सरकार और छात्रों के बीच बातचीत हुई थी, लेकिन कई मांगों पर सहमति नहीं बन सकी थी। आज की बैठक में आंदोलन से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी। छात्र संगठनों की प्रमुख मांगें छात्र संगठन कथित परीक्षा धांधली और अनियमितताओं की जांच के साथ-साथ भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। छात्रों की ओर से परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता और अभ्यर्थियों के हितों को प्राथमिकता देने की मांग की जा रही है। वार्ता के नतीजे पर नजर 16 दिनों से जारी आंदोलन के बीच आज की वार्ता को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि सरकार और छात्र संगठनों के बीच प्रमुख मांगों पर सहमति बनती है, तो आंदोलन खत्म होने का रास्ता खुल सकता है। अब सभी की नजरें दोपहर 12 बजे होने वाली वार्ता और उसके बाद सरकार तथा छात्र संगठनों की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।
जमशेदपुर। जमशेदपुर पुलिस ने एक करोड़ रुपये से अधिक की ठगी के मामले में आरोपी मनीष सिंह को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर कारोबारी, पुलिसकर्मी और एक घरेलू सहायिका समेत कई लोगों से धोखाधड़ी करने के आरोप हैं। पुलिस गिरफ्तारी के बाद उससे पूछताछ कर मामले की पूरी कड़ियों की जांच कर रही है। जमीन और कारोबार के नाम पर ठगी का आरोप प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आरोपी ने लोगों को जमीन और अन्य कारोबारी मामलों में फायदा दिलाने का भरोसा देकर कथित तौर पर पैसे लिए। बाद में रकम वापस नहीं करने और वादे पूरे नहीं करने के आरोप सामने आए। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने कितने लोगों से पैसे लिए और ठगी की कुल रकम कितनी है। एक करोड़ से ज्यादा की रकम का मामला पुलिस के सामने आए मामलों को मिलाकर ठगी की रकम एक करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। पीड़ितों की शिकायतों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। पुलिस कर रही पूछताछ गिरफ्तारी के बाद पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ठगी में उसके साथ कोई अन्य व्यक्ति या गिरोह शामिल था या नहीं। पुलिस के अनुसार, पूछताछ और दस्तावेजों की जांच के बाद मामले में और लोगों की भूमिका सामने आ सकती है।